विस्तृत उत्तर
विष्णु जी के सामने धर्मसंकट अत्यंत गहरा था। एक ओर काव्या माता थीं, जो स्त्री, ब्राह्मणी, तपस्विनी और ऋषिपत्नी होने के कारण सामान्य धर्म में अवध्य मानी जाती थीं। दूसरी ओर इंद्र और देव-व्यवस्था पर तत्काल संकट था। यदि काव्या माता अपने तपोबल से इंद्र और विष्णु को भस्म कर देतीं, तो ब्रह्मांडीय संतुलन बिगड़ जाता। विष्णु को तय करना था कि व्यक्तिगत धर्म की मर्यादा को प्रधान रखें या लोक-व्यवस्था की रक्षा करें। उन्होंने लोककल्याण को चुना, पर उसके परिणामस्वरूप भृगु ऋषि का श्राप भी स्वीकार किया।
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