विस्तृत उत्तर
विष्णु ने शिव की स्तुति बार-बार नमस्कार करके की। उन्होंने रुद्र को अद्वितीय और नाशरहित प्रणवरूप कहा। अकार, उकार और मकार रूप परमात्मा को नमस्कार किया। शिव को अग्निरूप, रुद्रों के पति, शिवमंत्र, सद्योजात, वामदेव, अघोर, ईशान, ऊर्ध्वलिंग, लिंगी, पंचभूतों में व्यापक, गणों के अधिपति, महायोगी, मोक्षदाता, ओंकार, सर्वज्ञ, अर्धनारीश्वर, नीलकंठ, पार्वतीपति, उमापति, वेदशास्त्ररूप और विश्वगर्भ रूप में प्रणाम किया।
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