विस्तृत उत्तर
विष्णु स्तुति महेश्वर की वह स्तुति है जिसमें भगवान् विष्णु ने रुद्र को प्रणवरूप, नाशरहित, परमात्मा, शिव, सद्योजात, वामदेव, अघोर, ईशान, लिंग, लिंगी, पंचभूतों में व्यापक, ओंकार, सर्वज्ञ, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूप में नमस्कार किया। इस स्तोत्र में शिव को सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता, मोक्षरूप, आत्मास्वरूप, अर्धनारीश्वर, नीलकंठ, पार्वतीपति, उमापति, वेदगर्भ और विश्वगर्भ कहा गया है। अंत में ब्रह्मा ने इस स्तोत्र को पुण्यप्रद और पापों का नाश करने वाला बताया।
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