विस्तृत उत्तर
वृकासुर ने अपने शरीर का मांस इसलिए काटा क्योंकि वह अत्यंत कठोर और तामसी तपस्या द्वारा शिव जी को शीघ्र प्रसन्न करना चाहता था। उसने भक्ति, ध्यान या प्रेम का सरल मार्ग नहीं अपनाया। वह अपने शरीर के टुकड़े अग्नि में अर्पित करके शिव जी पर मानो दबाव बनाना चाहता था कि वे प्रकट होकर वरदान दें। यह तपस्या उसकी हठ, हिंसा और शक्ति-लालसा को दिखाती है। भगवान शिव ने बाद में स्वयं कहा कि वे तो केवल श्रद्धा से चढ़ाए गए जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए वृकासुर की तपस्या तप तो थी, पर उसमें सात्विकता और भक्ति का अभाव था।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक

