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विस्तृत उत्तर
वृक्षादि सृष्टि में वृक्ष, गुल्म, लता, वीरुध् और तृणरूप पाँच प्रकार का सर्ग आता है। ब्रह्माजी ने प्रथम अविद्याग्रस्त सर्ग को सृष्टि-विस्तार के लिये असाधक समझकर यह मुख्य सर्ग बनाया। इसलिए वृक्षादि सृष्टि केवल वृक्षों तक सीमित नहीं, बल्कि स्थावर वनस्पति-रूपों के पाँच भेदों के रूप में बताई गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 3-4
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