विस्तृत उत्तर
वृंदा जालंधर की पत्नी और भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थी। वह अत्यंत पतिव्रता, तपस्विनी और धर्मनिष्ठ स्त्री मानी जाती है। विभिन्न पुराणों में उसकी वंशावली अलग-अलग मिलती है; कहीं उसे कालनेमि की पुत्री, तो कहीं धर्मध्वज या कुशध्वज की पुत्री बताया गया है। पर कथा का मुख्य भाव यह है कि वृंदा का सतीत्व इतना प्रबल था कि उससे जालंधर को अजेय कवच प्राप्त था। बाद में विष्णु की माया से उसका पतिव्रत खंडित हुआ, उसने विष्णु को श्राप दिया और अंततः वही वृंदा तुलसी रूप में प्रकट हुई।
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