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विस्तृत उत्तर
व्यक्त और अव्यक्त रूपों को लिंग और अलिंग के रूप में समझाया गया है। लिंग अर्थात व्यक्त और अलिंग अर्थात अव्यक्त रूप में कही गई सभी मूर्तियाँ शिवात्मक बताई गई हैं। इसी कारण ब्रह्माण्ड को साक्षात् ब्रह्मरूप कहा गया है। अव्यक्त और बीजी भगवत्तत्त्व को परमेश्वर कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21, श्लोक 6-8
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