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विस्तृत उत्तर
योग साधना के विघ्न निरंतर अभ्यास और गुरु के सान्निध्य से दूर होते हैं। पाठ में कहा गया है कि योगसाधना की अवधि में बार-बार विघ्न उत्पन्न होते हैं, लेकिन वे विघ्न निरन्तर अभ्यास करने से और गुरु के पास रहने से नष्ट हो जाते हैं। इसलिए योगमार्ग में बाधाएँ आना असामान्य नहीं है, पर अभ्यास और गुरु-संग से साधक योगसिद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 114-116
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