विस्तृत उत्तर
योग साधना में उपसर्ग वे उपद्रव हैं जो विघ्नों के समाप्त हो जाने के बाद भी उत्पन्न होते हैं। पाठ में कहा गया है कि इन विघ्नों के समाप्त हो जाने के बाद योगी के योगसाधन में नाना प्रकार के उपसर्ग आते हैं और वे असिद्धिसूचक हैं। आगे प्रतिभा, श्रवणा, वार्ता, दर्शना, आस्वादा और वेदना जैसी छह सिद्धियों का वर्णन आता है, जिन्हें आकर्षक होने पर भी साधक के लिये सावधानी का विषय माना गया है।
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