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विस्तृत उत्तर
योगाचार्यों के शिष्य और प्रशिष्य शिवलोक के अधिकारी हुए। पाठ में कहा गया है कि इनके भी सैकड़ों-हजारों शिष्य तथा प्रशिष्य पाशुपत योग प्राप्त करके शिवलोक के अधिकारी हुए। यह कथन शिष्य-परम्परा की व्यापकता दिखाता है: मुख्य योगाचार्य, उनके चार-चार शिष्य, फिर सैकड़ों-हजारों शिष्य और प्रशिष्य, और अंत में पाशुपत योग द्वारा शिवलोक की अधिकारी स्थिति।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 40, श्लोक 53
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