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विस्तृत उत्तर
योगसिद्धि जल्दी या देर से साधक की पूर्वभूमि के अनुसार मिलती है। पाठ में कहा गया है कि यह सिद्धि ज्ञानियों के समागम से या प्रयत्न करने से प्राप्त होती है और दोनों साधन समान हैं। पूर्वजन्म का योगाभ्यासी साधक इसे शीघ्र प्राप्त करता है, जबकि नवीन अभ्यास करने वाले साधक को यह देर से मिलती है। इसलिए योगसिद्धि में पूर्व अभ्यास, ज्ञानी-संग और स्वयं का प्रयत्न तीनों महत्त्वपूर्ण हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 114-116
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