विस्तृत उत्तर
पद्म पुराण में योगिनी एकादशी के फलों को अनंत बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि जो अपार पुण्य 88,000 (अठासी हजार) सुपात्र ब्राह्मणों को भरपेट भोजन कराने से प्राप्त होता है, ठीक वही पुण्य मात्र एक 'योगिनी एकादशी' का व्रत करने से साधक को मिल जाता है। यह व्रत चर्म रोगों (कुष्ठ रोग) को शांत करता है और व्यक्ति को इस लोक में सुख और परलोक में वैकुंठ धाम दिलाता है।


