विस्तृत उत्तर
युधिष्ठिर युद्ध के बाद गहरे शोक में थे। कृष्ण के जाने के समय उन्होंने उन्हें प्रेम से रोक लिया। पाठ कहता है कि युधिष्ठिर को अपने भाई-बंधुओं के मारे जाने का बड़ा शोक था। व्यास आदि महर्षियों और स्वयं कृष्ण ने अनेक इतिहास सुनाकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, पर उनका शोक नहीं मिटा। युधिष्ठिर ने स्वयं कहा कि उनके हृदय में अज्ञान की जड़ जम गई है। वे सोच रहे थे कि उन्होंने सियार और कुत्तों के आहार बनने वाले इस अनात्म शरीर के लिए अनेक अक्षौहिणी सेनाओं का नाश कर डाला। वह बालकों, ब्राह्मणों, संबंधियों, मित्रों, चाचा-ताऊ, भाइयों और गुरुओं के प्रति अपने अपराध को याद कर रहे थे।
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