ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
सरल उत्तर

आध्यात्मिक साधना में कामना का त्याग क्यों आवश्यक है?

का सरल उत्तर

सरल उत्तर

कामना त्याग: गीता 3.37 — 'काम=सर्वभक्षी शत्रु।' कामना→आसक्ति→क्रोध→मोह→बुद्धि नाश (2.62-63)। कामना=बंधन+अशांति+अहंकार। गीता 2.47: 'फल की कामना न करो।' त्याग≠इच्छा-रहित, ✅अनासक्ति ('भगवान जो दें=श्रेष्ठ')। स्थितप्रज्ञ: सभी कामना त्याग→आत्मा में तृप्त। क्रमिक प्रक्रिया।

सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
आध्यात्मिक साधना

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।