गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ 21 बार करने से क्या होता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
मूल ग्रंथ: 1 बार = विघ्न नाश, पंच पाप मुक्ति। 1000 बार = सर्व कामना सिद्धि (श्लोक 13)। चतुर्थी उपवास + जप = विद्यावान (श्लोक 14)। 21 बार (संकष्टी/बुधवार) = दोगुना फल — परंपरागत मान्यता (मूल ग्रंथ में 21 संख्या स्पष्ट नहीं)। फल: ग्रह दोष शांति, आर्थिक सुधार, बुद्धि वृद्धि।
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