मंदिर के वास्तु में ब्रह्मस्थान का क्या अर्थ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
ब्रह्मस्थान = वास्तु का ऊर्जात्मक केन्द्र बिन्दु। वास्तु पुरुष का नाभि स्थान। मंदिर: गर्भगृह = ब्रह्मस्थान — ऊर्जा यहाँ से सम्पूर्ण मंदिर में। मूर्ति ठीक यहाँ। शिखर = ऊपर से ऊर्जा ग्रहण → गर्भगृह में। नियम: शुद्ध/खाली रखें — शौचालय/कूड़ा=पूर्णतः वर्जित। घर: केन्द्र खुला+तुलसी/दीपक।
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