पुरश्चरण क्या होता है?
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सरल उत्तर
मंत्रमहार्णव: पुरश्चरण = मंत्र का परम जीवन। परिभाषा: शास्त्र-निर्धारित संख्या में नियमबद्ध जप + पाँच सहायक क्रियाएं (हवन-तर्पण-मार्जन-ब्राह्मण भोजन)। कुलार्णव: बिना पुरश्चरण जप = करोड़ों कल्पों में भी फल नहीं। यह मंत्र को 'सिद्ध' करने की पूर्ण प्रक्रिया है।
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