शिव की पूजा में वामाचार और दक्षिणाचार में क्या भेद है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
दक्षिणाचार = सात्विक (शुद्ध विधि, दिन में साधना, सौम्य शिव, सभी के लिए)। वामाचार = तांत्रिक (पंचमकार, रात्रि साधना, उग्र शिव/भैरव, केवल दीक्षित)। दोनों का लक्ष्य: शिव-प्राप्ति। कौलाचार = सर्वोच्च, दोनों विलीन, अद्वैत। सामान्य साधक: दक्षिणाचार श्रेष्ठ और सुरक्षित।
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शिव साधना
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