शिव पूजा में ध्यान क्यों जरूरी है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
ध्यान जरूरी क्यों: गीता (9.26): 'प्रयतात्मनः' — शुद्ध/एकाग्र मन से ही अर्पण स्वीकार। शिव पुराण: 'द्रव्यपूजा सामान्या, ध्यानपूजा विशिष्यते।' पतञ्जलि: बिना एकाग्रता = यांत्रिक क्रिया। 'भावो हि विद्यते देवः' — देव भाव में हैं। ध्यान = भाव-जागृति = पूजा का प्राण।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
शिव पूजा
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।