वेदों में साधना का महत्व क्या है?
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सरल उत्तर
वेदों में साधना के रूप हैं — स्वाध्याय, उपासना, यज्ञ, ब्रह्मचर्य और मंत्र-जप। तैत्तिरीय उपनिषद (1/9) में स्वाध्याय-प्रवचन को अनिवार्य साधना बताया गया है। वैदिक साधना का लक्ष्य बाह्य अनुष्ठान नहीं — ब्रह्म-साक्षात्कार है।
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