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तालिका

शिव पूजा शुरू करके बीच में छोड़ देने से क्या होता है?

की तालिका

अनुष्ठान बीच में छोड़ना अशुभ — फल नहीं, पुनः आरंभ। किन्तु शिव = आशुतोष — वास्तविक कारण (बीमारी/आपातकाल) से क्षमा। क्षमापन स्तोत्र पढ़ें, गुरु से परामर्श, पुनः आरंभ। अनावश्यक भय न रखें।

क्या करेंक्या न करें
यदि दैनिक पूजा (नियमित जप/जलाभिषेक) छूट जाए — अगले दिन से पुनः आरंभ करें। शिव से क्षमा प्रार्थना करें।मंत्र शास्त्र और पूजा पद्धति के अनुसार एक बार आरंभ किया गया अनुष्ठान (सवा लाख जप, 16 सोमवार व्रत, 40 दिन अनुष्ठान) बीच में छोड़ना अशुभ माना गया है:
यदि अनुष्ठान (सवा लाख जप, 40 दिन) छूट जाए — गुरु/विद्वान से परामर्श लें। प्रायः पुनः आरंभ करने या शेष जप पूर्ण करने का विधान है।अनुष्ठान का फल नहीं मिलता।
'शिव अपराध क्षमापन स्तोत्र' (शंकराचार्य) का पाठ करें।मंत्र ऊर्जा अपूर्ण रहती है — कभी-कभी विपरीत प्रभाव भी संभव।
—पुनः आरंभ करना पड़ सकता है।
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शिव पूजा नियम

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