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Prayagraj · Uttar Pradesh

श्री अलोपी देवी

श्री अलोपी देवी (माधवेश्वरी / अलोप शंकरी) मंदिर — अलोपी बाग़, प्रयागराज

अलोपी देवी / माधवेश्वरी — लुप्त-मूर्ति देवी; प्रयाग की शक्ति-अधिष्ठात्री

अन्य नाम: अलोपी देवी · माधवेश्वरी देवी · अलोप शंकरी · ललिता देवी (अष्टादश परंपरा में) · लुप्त-मूर्ति देवी

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा
  • देवी भागवत पुराण के अनुसार अलोपी द…
  • 12 माधव क्षेत्रों में से एक का शाक…
श्री अलोपी देवी
दर्शन समय
05:30 – 21:00
स्वरूप
अद्वितीय अनिकोनिक
स्थान
Prayagraj · Uttar Pradesh
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
स्थल-माहात्म्य: स्कन्द पुराण प्रयाग-…

इस मन्दिर की विशेषता

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ — आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्रम् में 14वें पीठ रूप में 'प्रयागे माधवेश्वरी' (श्लोक: 'हरिक्षेत्रे कामरूपी, प्रयागे माधवेश्वरी। ज्वालायां वैष्णवी देवी, गया माङ्गल्यगौरिका')
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा — सती की दाहिनी हस्त-अंगुलियाँ (हस्तांगुलि) यहाँ गिरीं और तत्काल अलोप (लुप्त) हो गयीं; भैरव: भव; देवी-रूप: ललिता; मंदिर का अद्वितीय नाम 'अलोपी' (=अलोप = वेदना से ओझल हो गयी) इसी से व्युत्पन्न
  • देवी भागवत पुराण के अनुसार अलोपी देवी अन्तिम (लुप्त) महा-शक्ति-पीठ
  • 12 माधव क्षेत्रों में से एक का शाक्त-समकक्ष — वेणी-माधव (विष्णु) + माधवेश्वरी (शक्ति) युगल; प्रयाग संगम की युगल-अधिष्ठात्री शक्ति
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री माधवेश्वरी देवी — सती की दाहिनी हस्त-अंगुलियाँ यहाँ गिरने के तत्काल पश्चात् अलोप (लुप्त) हो गयीं; इसी अद्वितीय कारण से गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं; केवल लकड़ी की डोली (पालना/झूला) पूज्य

अद्वितीय अनिकोनिक (मूर्ति-रहित) उपासना — गर्भगृह में लकड़ी की डोली (पालना/झूला) एक छोटे कुण्ड के ऊपर लटकी हुई; डोली पर श्रद्धालु रक्षा-सूत्र बाँधते एवं फूल/सिन्दूर अर्पित करते हैं; नीचे के कुण्ड में श्री-यन्त्र-स्थापित मानी जाती है

सम्प्रदाय: शाक्त (हिन्दू-धर्म) — दशनामी सन्न्यासी अखाड़ा परंपरा

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

देवी भागवत पुराण

18 महा-शक्ति-पीठ सूची — अलोपी देवी को अन्तिम (लुप्त) पीठ के रूप में नामांकित

स्कन्द पुराण — प्रयाग माहात्म्य

प्रयाग (तीर्थराज) माहात्म्य; 12 माधव-क्षेत्रों एवं संगम की महिमा; माधवेश्वरी देवी = वेणी-माधव (विष्णु) की शक्ति-समकक्षा

अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य रचित — श्लोक: 'हरिक्षेत्रे कामरूपी, प्रयागे माधवेश्वरी। ज्वालायां वैष्णवी देवी, गया माङ्गल्यगौरिका' — 14वाँ पीठ

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) — अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 'प्रयागे माधवेश्वरी' (14वाँ पीठ) के रूप में स्तुति
  • मराठा सेनापति श्रीनाथ महादजी शिन्दे (सिंधिया) — 1772 ईस्वी प्रयागराज-प्रवास के समय वर्तमान मंदिर-संरचना के निर्माता
  • महारानी बैजाबाई सिंधिया — 19वीं शताब्दी प्रारम्भ में प्रमुख जीर्णोद्धार-कार्य
  • श्री पञ्चायती अखाड़ा महानिर्वाणी (दरगंज अखाड़ा) — 13 प्रमुख कुम्भ-अखाड़ों में से एक; मंदिर के परंपरागत प्रबन्धक
  • अन्तिम अंग-पतन कथा — सती के अंगों में दाहिनी हस्त-अंगुलियाँ अन्तिम-पतन की थीं; गिरने के तत्काल पश्चात् लुप्त हो गयीं — 'अलोपी' नाम का स्रोत

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 8008वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 'प्रयागे माधवेश्वरी' (14वाँ पीठ) के रूप में स्तुतिHindupedia + Templesinindiainfo + Vishwamatha + Bhaktinidhi बहु-स्रोत
  2. 17721772 ईस्वी — मराठा सेनापति श्रीनाथ महादजी शिन्दे (सिंधिया) द्वारा वर्तमान मंदिर-संरचना का निर्माणWikipedia + Tirthayatra + Dorituals + Mahakumbh.in बहु-स्रोत
  3. 182019वीं शताब्दी प्रारम्भ — महारानी बैजाबाई सिंधिया द्वारा प्रमुख जीर्णोद्धारWikipedia + Tirthayatra
  4. 202513 जनवरी - 26 फरवरी 2025 — महा कुम्भ मेला 2025 प्रयागराज में सम्पन्न (अगला अर्ध कुम्भ 2031; पूर्ण कुम्भ 2037)Wikipedia 2025 Prayag Maha Kumbh Mela
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:30 से 21:00 तक

मंगला आरती05:30-06:00
दैनिक

मंदिर खुलने के साथ प्रथम आरती

प्रातः दर्शन06:00-12:00
दैनिक
अपराह्न दर्शन16:00-19:00
दैनिक
सन्ध्या आरती19:00
दैनिक

सायं प्रमुख आरती

रात्रि दर्शन19:00-21:00
दैनिक
04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:30-21:00
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

लकड़ी की डोली का दर्शन निःशुल्क; पंक्ति-व्यवस्था; रक्षा-सूत्र बाँधने की परंपरा।

संकल्प पूजा / अर्चना
उपयुक्त
विशेष-संकल्प हेतु

अखाड़ा के पुजारी द्वारा संपन्न; डोली पर रक्षा-सूत्र-बन्धन प्रमुख अनुष्ठान; आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली अनुपलब्ध — मंदिर पर सीधे संपर्क करें।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

माघ मेला 2026 (त्रिवेणी संगम)पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा / महाशिवरात्रि (~44 दिन)

वार्षिक माघ मेला (मिनी-कुम्भ) — संगम-स्नान-यात्री अलोपी देवी-दर्शन के लिए आते हैं। 2026 तिथियाँ: 3 जनवरी (पौष पूर्णिमा), 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 18 जनवरी (मौनी अमावस्या — सर्वाधिक भीड़), 23 जनवरी (बसन्त पंचमी), 1 फरवरी (माघी पूर्णिमा), 15 फरवरी (महाशिवरात्रि)। माघ मेला कुल अवधि: 3 जनवरी - 15 फरवरी 2026।

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

मंदिर-परिसर के लालितेश्वर महादेव शिवलिंग का विशेष अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

चैत्र (वासन्तिक) नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

9-दिवसीय देवी-मेला; डोली-दर्शन हेतु विस्तृत समय। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी पर पूर्णता)।

शारदीय नवरात्रिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी

9-रात्रि महोत्सव; प्रतिदिन डोली-अलंकार। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर (मुहूर्त 06:19-10:12); विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।

साप्ताहिक डोली-दर्शन (मंगलवार/शुक्रवार)साप्ताहिक

मंगलवार एवं शुक्रवार को डोली-दर्शन का साप्ताहिक शिखर; रक्षा-सूत्र-बन्धन-अनुष्ठान

अगला अर्ध कुम्भ — 2031 (कुम्भ नहीं 2026)

महा कुम्भ 2025 (13 जनवरी - 26 फरवरी) सम्पन्न; अगला अर्ध कुम्भ 2031; अगला पूर्ण कुम्भ 2037। 2026 में कोई कुम्भ नहीं — केवल वार्षिक माघ मेला।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

मनोकामना-पूर्ति एवं रक्षा-सूत्र-संकल्प

डोली पर रक्षा-सूत्र बाँधने से मनोकामना-पूर्ति की पारंपरिक मान्यता; मनोकामना-पूर्ति के पश्चात् पुनः-आगमन कर सूत्र खोलने की परंपरा

स्रोत: अलोपी देवी स्थल-परंपरा

अष्टादश शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प

आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 14वाँ पीठ — 'प्रयागे माधवेश्वरी'

स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् (आदि शंकराचार्य)

त्रिवेणी संगम स्नान-संकल्प

गंगा + यमुना + सरस्वती संगम-स्नान के पश्चात् माधवेश्वरी देवी एवं वेणी-माधव विष्णु युगल-दर्शन से पुण्य-पूर्णता

स्रोत: स्कन्द पुराण प्रयाग-माहात्म्य

लुप्त-स्वरूपा देवी-दर्शन-संकल्प

सती के अन्तिम-अंग के अलोप होने के अद्वितीय कारण; मूर्ति-रहित डोली-दर्शन — निराकार-शक्ति-उपासना का प्रत्यक्ष-तीर्थ

स्रोत: देवी भागवत पुराण + स्थल-परंपरा

माघ मेला / कुम्भ कल्पवास-संकल्प

माघ-मास में संगम-तट पर कल्पवास के समय अलोपी देवी एवं अन्य प्रयाग-तीर्थों का संयुक्त-दर्शन

स्रोत: स्कन्द पुराण प्रयाग-माहात्म्य

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचितइस मन्दिर हेतुश्लोक — 'हरिक्षेत्रे कामरूपी, प्रयागे माधवेश्वरी। ज्वालायां वैष्णवी देवी, गया माङ्गल्यगौरिका' — अलोपी/माधवेश्वरी का शास्त्रीय प्रमाण (14वाँ अष्टादश पीठ)
  • ललिता सहस्रनामस्तोत्रब्रह्माण्ड पुराण ललितोपाख्यानइस मन्दिर हेतुअष्टादश परंपरा में अलोपी देवी = ललिता-स्वरूप के रूप में पूज्य; 1000 नाम-पारायण
  • देवी कवचम् (दुर्गा सप्तशती से)कवचमार्कण्डेय पुराण — देवी माहात्म्यम्सर्व-देवी-उपासना का सामान्य कवच-स्तोत्र
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री वेणी-माधव मंदिर (दरगंज)1 किमी

12 माधव-क्षेत्रों में अग्रणी; माधवेश्वरी (शक्ति) का विष्णु-समकक्ष — युगल-दर्शन की परंपरा

नागवासुकि मंदिर (दरगंज)1 किमी

नागराज वासुकि का मंदिर; प्रयाग के तीर्थ-संकुल में सम्मिलित

त्रिवेणी संगम (गंगा + यमुना + सरस्वती)5 किमी

तीर्थराज प्रयाग का केन्द्रीय स्नान-स्थल; गंगा-यमुना-अदृश्य सरस्वती का संगम; माघ मेला/कुम्भ का प्रमुख तीर्थ

बड़े/लेटे हनुमान मंदिर5 किमी

विश्व का एकमात्र लेटे-स्वरूप हनुमान मंदिर; अल्लाहाबाद किले के निकट

अक्षयवट एवं पाताल-पुरी मंदिर (अल्लाहाबाद किले में)5 किमी

अक्षय-वट (अमर वट-वृक्ष); स्कन्द पुराण-वर्णित प्राचीन-तीर्थ

भारद्वाज आश्रम6 किमी

रामायण-काल का स्थल; महर्षि भारद्वाज एवं भारद्वाजेश्वर शिवलिंग

शंकर विमान मण्डपम् (संगम-तट)6 किमी

130 फुट ऊँचा 4-तल का दक्षिण-भारतीय शैली मंदिर; 51 शक्ति-पीठ की मूर्तियाँ + 108 शिवलिंग आदि शंकराचार्य-समर्पित

श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर (यमुना-तट)6 किमी

मनोकामना-पूर्ति-स्वरूप शिव-मंदिर; यमुना-तट

अष्टादश महा-शक्ति-पीठ यात्रा (आदि शंकराचार्य)

14वाँ पीठ — 'प्रयागे माधवेश्वरी'; पूर्व: कामरूपा गुवाहाटी (13); पश्चात्: ज्वालामुखी (15)

18 मंदिर

प्रयागराज संगम-तीर्थ 1-दिवसीय सर्किट

केन्द्रीय शक्ति-तीर्थ — संगम-स्नान → अक्षयवट → पाताल-पुरी → बड़े हनुमान → अलोपी देवी → वेणी-माधव → नागवासुकि → मनकामेश्वर

8 मंदिर · 1 दिन

कुम्भ मेला 12-वर्षीय चक्र (प्रयागराज)

कुम्भ-मेला के समय अलोपी देवी संगम-स्नान-यात्रियों का प्रमुख देवी-दर्शन-तीर्थ। पिछला महा कुम्भ: 2025 (सम्पन्न); अगला अर्ध कुम्भ: 2031; अगला पूर्ण कुम्भ: 2037; प्रति-वर्ष माघ मेला।

1 मंदिर

वेणी-माधव + माधवेश्वरी युगल-दर्शन

केन्द्रीय शक्ति — वैष्णव-शाक्त युगल; दरगंज के 1 किमी क्षेत्र में संयुक्त

2 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री अलोपी देवी मंदिर, अलोपी बाग़, प्रयागराज (अल्लाहाबाद) — 211006, उत्तर प्रदेश
हवाई अड्डा
प्रयागराज हवाई अड्डा (IXD, बमरौली) — ~13.6 किमी
रेलवे
प्रयागराज जंक्शन (PRYJ / ALD) — ~5-6 किमी
बस-स्टैण्ड
सिविल लाइन्स / प्रयागराज मध्य बस स्टैंड — ~5-7 किमी; ऑटो/ई-रिक्शा अलोपी बाग़ तक उपलब्ध
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; माघ मेला (3 जनवरी - 15 फरवरी 2026) सर्वाधिक भीड़ — मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) पर करोड़ों; नवरात्रि (मार्च एवं अक्टूबर) पीक; गर्मी (मई-जून) में दिन का तापमान 45°C+ हो सकता है
6 किमीPrayagraj Junction Railway
14 किमीPrayagraj Airport
5 किमीTriveni Sangam
5 किमीBade/Lete Hanuman Mandir
5 किमीAkshayavat
6 किमीBharadwaj Ashram
6 किमीShankar Viman Mandapam
6 किमीMankameshwar Mandir
1 किमीVeni Madhav Mandir
1 किमीNagvasuki Mandir
125 किमीKashi Vishwanath, Varanasi
560 किमीMathura/Vrindavan
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