देवी भागवत पुराण
18 महा-शक्ति-पीठ सूची — अलोपी देवी को अन्तिम (लुप्त) पीठ के रूप में नामांकित
Prayagraj · Uttar Pradesh
श्री अलोपी देवी (माधवेश्वरी / अलोप शंकरी) मंदिर — अलोपी बाग़, प्रयागराज
अलोपी देवी / माधवेश्वरी — लुप्त-मूर्ति देवी; प्रयाग की शक्ति-अधिष्ठात्री
अन्य नाम: अलोपी देवी · माधवेश्वरी देवी · अलोप शंकरी · ललिता देवी (अष्टादश परंपरा में) · लुप्त-मूर्ति देवी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री माधवेश्वरी देवी — सती की दाहिनी हस्त-अंगुलियाँ यहाँ गिरने के तत्काल पश्चात् अलोप (लुप्त) हो गयीं; इसी अद्वितीय कारण से गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं; केवल लकड़ी की डोली (पालना/झूला) पूज्य
अद्वितीय अनिकोनिक (मूर्ति-रहित) उपासना — गर्भगृह में लकड़ी की डोली (पालना/झूला) एक छोटे कुण्ड के ऊपर लटकी हुई; डोली पर श्रद्धालु रक्षा-सूत्र बाँधते एवं फूल/सिन्दूर अर्पित करते हैं; नीचे के कुण्ड में श्री-यन्त्र-स्थापित मानी जाती है
सम्प्रदाय: शाक्त (हिन्दू-धर्म) — दशनामी सन्न्यासी अखाड़ा परंपरा
18 महा-शक्ति-पीठ सूची — अलोपी देवी को अन्तिम (लुप्त) पीठ के रूप में नामांकित
प्रयाग (तीर्थराज) माहात्म्य; 12 माधव-क्षेत्रों एवं संगम की महिमा; माधवेश्वरी देवी = वेणी-माधव (विष्णु) की शक्ति-समकक्षा
आदि शंकराचार्य रचित — श्लोक: 'हरिक्षेत्रे कामरूपी, प्रयागे माधवेश्वरी। ज्वालायां वैष्णवी देवी, गया माङ्गल्यगौरिका' — 14वाँ पीठ
05:30 से 21:00 तक
मंदिर खुलने के साथ प्रथम आरती
सायं प्रमुख आरती
लकड़ी की डोली का दर्शन निःशुल्क; पंक्ति-व्यवस्था; रक्षा-सूत्र बाँधने की परंपरा।
अखाड़ा के पुजारी द्वारा संपन्न; डोली पर रक्षा-सूत्र-बन्धन प्रमुख अनुष्ठान; आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली अनुपलब्ध — मंदिर पर सीधे संपर्क करें।
वार्षिक माघ मेला (मिनी-कुम्भ) — संगम-स्नान-यात्री अलोपी देवी-दर्शन के लिए आते हैं। 2026 तिथियाँ: 3 जनवरी (पौष पूर्णिमा), 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 18 जनवरी (मौनी अमावस्या — सर्वाधिक भीड़), 23 जनवरी (बसन्त पंचमी), 1 फरवरी (माघी पूर्णिमा), 15 फरवरी (महाशिवरात्रि)। माघ मेला कुल अवधि: 3 जनवरी - 15 फरवरी 2026।
मंदिर-परिसर के लालितेश्वर महादेव शिवलिंग का विशेष अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
9-दिवसीय देवी-मेला; डोली-दर्शन हेतु विस्तृत समय। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी पर पूर्णता)।
9-रात्रि महोत्सव; प्रतिदिन डोली-अलंकार। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर (मुहूर्त 06:19-10:12); विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।
मंगलवार एवं शुक्रवार को डोली-दर्शन का साप्ताहिक शिखर; रक्षा-सूत्र-बन्धन-अनुष्ठान
महा कुम्भ 2025 (13 जनवरी - 26 फरवरी) सम्पन्न; अगला अर्ध कुम्भ 2031; अगला पूर्ण कुम्भ 2037। 2026 में कोई कुम्भ नहीं — केवल वार्षिक माघ मेला।
डोली पर रक्षा-सूत्र बाँधने से मनोकामना-पूर्ति की पारंपरिक मान्यता; मनोकामना-पूर्ति के पश्चात् पुनः-आगमन कर सूत्र खोलने की परंपरा
स्रोत: अलोपी देवी स्थल-परंपरा
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 14वाँ पीठ — 'प्रयागे माधवेश्वरी'
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् (आदि शंकराचार्य)
गंगा + यमुना + सरस्वती संगम-स्नान के पश्चात् माधवेश्वरी देवी एवं वेणी-माधव विष्णु युगल-दर्शन से पुण्य-पूर्णता
स्रोत: स्कन्द पुराण प्रयाग-माहात्म्य
सती के अन्तिम-अंग के अलोप होने के अद्वितीय कारण; मूर्ति-रहित डोली-दर्शन — निराकार-शक्ति-उपासना का प्रत्यक्ष-तीर्थ
स्रोत: देवी भागवत पुराण + स्थल-परंपरा
माघ-मास में संगम-तट पर कल्पवास के समय अलोपी देवी एवं अन्य प्रयाग-तीर्थों का संयुक्त-दर्शन
स्रोत: स्कन्द पुराण प्रयाग-माहात्म्य
12 माधव-क्षेत्रों में अग्रणी; माधवेश्वरी (शक्ति) का विष्णु-समकक्ष — युगल-दर्शन की परंपरा
नागराज वासुकि का मंदिर; प्रयाग के तीर्थ-संकुल में सम्मिलित
तीर्थराज प्रयाग का केन्द्रीय स्नान-स्थल; गंगा-यमुना-अदृश्य सरस्वती का संगम; माघ मेला/कुम्भ का प्रमुख तीर्थ
विश्व का एकमात्र लेटे-स्वरूप हनुमान मंदिर; अल्लाहाबाद किले के निकट
अक्षय-वट (अमर वट-वृक्ष); स्कन्द पुराण-वर्णित प्राचीन-तीर्थ
रामायण-काल का स्थल; महर्षि भारद्वाज एवं भारद्वाजेश्वर शिवलिंग
130 फुट ऊँचा 4-तल का दक्षिण-भारतीय शैली मंदिर; 51 शक्ति-पीठ की मूर्तियाँ + 108 शिवलिंग आदि शंकराचार्य-समर्पित
मनोकामना-पूर्ति-स्वरूप शिव-मंदिर; यमुना-तट
14वाँ पीठ — 'प्रयागे माधवेश्वरी'; पूर्व: कामरूपा गुवाहाटी (13); पश्चात्: ज्वालामुखी (15)
18 मंदिर
केन्द्रीय शक्ति-तीर्थ — संगम-स्नान → अक्षयवट → पाताल-पुरी → बड़े हनुमान → अलोपी देवी → वेणी-माधव → नागवासुकि → मनकामेश्वर
8 मंदिर · 1 दिन
कुम्भ-मेला के समय अलोपी देवी संगम-स्नान-यात्रियों का प्रमुख देवी-दर्शन-तीर्थ। पिछला महा कुम्भ: 2025 (सम्पन्न); अगला अर्ध कुम्भ: 2031; अगला पूर्ण कुम्भ: 2037; प्रति-वर्ष माघ मेला।
1 मंदिर
केन्द्रीय शक्ति — वैष्णव-शाक्त युगल; दरगंज के 1 किमी क्षेत्र में संयुक्त
2 मंदिर