आण्डाल-जन्म-कथा (मूल-स्थल-पुराण)
विष्णुचित्तर (पेरियाल्वार) — श्रीविल्लिपुत्तूर के माली-ब्राह्मण ने मन्दिर-उद्यान में तुलसी-पौधे के नीचे शिशु-कन्या पायी; नाम 'कोडै/गोदा' (पृथ्वी-उपहार); भूदेवी का अवतार-मान्य; पाल्य-पुत्री बना-कर वैष्णव-संस्कारों से पाला। तरुणी होते-होते आण्डाल ने स्वयं को रङ्गनाथ-वधू-स्वरूप-कल्पना-कर श्रीरङ्गनाथ-संग विवाह-संकल्प किया।
