स्कन्द पुराण
द्वितीय स्कन्ध, प्रथम अध्याय, 57वाँ श्लोक — विभिन्न युगों में 'बद्रिकाश्रम' का वर्णन; सत्ययुग में 'मुक्ति-प्रद' नाम
Badrinath · Uttarakhand
बद्रीनारायण / बद्री विशाल / बद्रिकाश्रम
अन्य नाम: बद्री विशाल · बद्रीनारायण · बद्री नाथ

इस मन्दिर की विशेषता
श्री बद्रीनारायण (विष्णु)
1 फ़ुट (0.30 मीटर) काले शालिग्राम पाषाण विग्रह — पद्मासन मुद्रा में, शंख एवं चक्र धारण किये हुए। मान्यता: स्वयंभू मूर्ति।
सम्प्रदाय: वैष्णव
द्वितीय स्कन्ध, प्रथम अध्याय, 57वाँ श्लोक — विभिन्न युगों में 'बद्रिकाश्रम' का वर्णन; सत्ययुग में 'मुक्ति-प्रद' नाम
वैष्णव खण्ड — बद्रीनाथ क्षेत्र माहात्म्य; ब्रह्म कपाल पर पिण्डदान का माहात्म्य (अन्य स्थलों से 8 गुना अधिक फलदायी)
ब्रह्म कपाल पर पितृ-तर्पण एवं श्राद्ध-कर्म का माहात्म्य
नर-नारायण की तपस्या-कथा; लक्ष्मी के बद्री-वृक्ष रूप धारण की कथा
04:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-16:00
मंदिर खुलने के तुरन्त बाद पहली आरती
VIP बंद-द्वार पूजा; आधिकारिक badri-kedar.gov.in से पूर्व-बुकिंग आवश्यक
प्रात: अभिषेक के बाद सामान्य भक्तों हेतु दर्शन प्रारम्भ
जयदेव कृत गीत गोविन्द के पदों के संग संगीतमय आरती
दिन की अंतिम आरती — सभी भक्तों के दर्शन-समाप्ति के बाद आरम्भ होती है
अलकनंदा तट पर मंदिर के सम्मुख क्यू दर्शन। दर्शन से पूर्व तप्त कुण्ड में स्नान की पारंपरिक प्रथा (मंदिर के नीचे प्राकृतिक गर्म जल कुण्ड; तापमान ~55°C / 131°F वर्ष-भर)। Char Dham Yatra Registration अनिवार्य।
प्रात: 4:30-6:30 के समय गर्भगृह में अभिषेक एवं पूजा; आधिकारिक BKTC पोर्टल से पूर्व-बुकिंग
4 आधिकारिक चैनल: (1) ऑनलाइन registrationandtouristcare.uk.gov.in, (2) मोबाइल ऐप 'Tourist Care Uttarakhand' (Google Play + Apple App Store), (3) WhatsApp: 8394833833, (4) टोल-फ्री: 01351364। आधार + फोटो + सक्रिय मोबाइल + आपातकालीन सम्पर्क आवश्यक। QR पास यात्रिमित्र द्वारा स्कैन।
वसंत पंचमी पर BKTC द्वारा तिथि घोषित। योगध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर (उत्सव-विग्रह का शीतकालीन निवास) एवं नरसिंह मंदिर जोशीमठ (मुख्य पूजा-स्थल) से डोली यात्रा बद्रीनाथ पहुँचती है। 2026 — 23 अप्रैल गुरुवार प्रात: 6:15 बजे कपाट उद्घाटन (BKTC घोषित)।
विधिवत् कपाट बन्द; देव-विग्रहों का शीतकालीन प्रवास प्रारम्भ — उत्सव-विग्रह योगध्यान बद्री पांडुकेश्वर में, मुख्य पूजा नरसिंह मंदिर जोशीमठ में स्थानांतरित।
BKTC आयोजित 8-दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव — बद्रीनाथ एवं केदारनाथ की संयुक्त भक्ति-कला परंपरा
बद्रीनाथ से 3 किमी दूर माता मूर्ति मंदिर (माना ग्राम के निकट) — विष्णु-माता (नर-नारायण की माता) को समर्पित। नर-नारायण के माता से वार्षिक मिलन-स्मरण।
विशेष शृंगार एवं पूजा-अनुष्ठान
बद्रीनाथ की मान्यता 'भू-वैकुण्ठ' के रूप में — विष्णु का पृथ्वी पर साक्षात् निवास; दर्शन-मात्र से वैकुण्ठ-गमन के मार्ग का संकल्प
स्रोत: स्कन्द पुराण, द्वितीय स्कन्ध — 'मुक्ति-प्रद' (सत्य युग में); विष्णु पुराण नर-नारायण कथा
ब्रह्म कपाल पर पिण्डदान — अन्य तीर्थों (गया, हरिद्वार, प्रयाग, पुष्कर, काशी) से 8 गुना अधिक फलदायी; पुराण-वचनानुसार 'अंतिम श्राद्ध' — इसके बाद उन पितरों हेतु पुनः पिण्डदान आवश्यक नहीं
स्रोत: स्कन्द पुराण + गरुड़ पुराण
प्राकृतिक सल्फर युक्त गर्म जल कुण्ड; तापमान ~55°C (131°F) वर्ष-भर। दर्शन से पूर्व स्नान की पारंपरिक अनिवार्यता।
पुराण-वचनानुसार पितृ-तर्पण एवं पिण्डदान का सर्वोच्च-फलदायी क्षेत्र — गया के बाद सबसे शक्तिशाली। मान्यता: ब्रह्मा का शिर इसी स्थान पर गिरा था (शिव-ब्रह्महत्या-मुक्ति की कथा)।
विष्णु की माता को समर्पित; मान्यता: माता मूर्ति ने विष्णु से कोख से जन्म लेने का वर माँगा — परिणामस्वरूप नर-नारायण के रूप में जन्म। वाम्न द्वादशी पर वार्षिक मेला।
जनसंख्या ~10,000। 21 अक्टूबर 2022 को PM श्री नरेन्द्र मोदी ने 'अंतिम नहीं, प्रथम गाँव' घोषित किया एवं ₹3,400+ करोड़ की सड़क-रोपवे परियोजनाओं की आधारशिला रखी। निकटवर्ती तीर्थ: व्यास गुफा, गणेश गुफा (जहाँ वेदों-उपनिषदों का लेखन-कार्य हुआ माना जाता है), भीम पुल।
सरस्वती नदी पर प्राकृतिक पाषाण-पुल। मान्यता: स्वर्गारोहण मार्ग पर द्रौपदी की सहायता हेतु भीम ने विशाल शिला रखकर पुल बनाया। निकट द्रौपदी मंदिर।
122 मीटर ऊँचा प्राकृतिक जलप्रपात। मान्यता: स्वर्गारोहण मार्ग पर पांडवों का पड़ाव; सहदेव ने यहीं देहत्याग किया। 'वसुधारा' = ऐश्वर्य-धारा। मान्यता: केवल निष्पाप एवं शुद्ध भक्तों को ही जल की दिव्य धाराओं का अनुभव होता है।
पंच बद्री में एक; बद्रीनाथ के उत्सव-विग्रह का शीतकालीन निवास (नवम्बर-अप्रैल)। मूल मंदिर के समकालीन; उद्धव (विष्णु के भ्राता) की शीतकालीन उपासना।
बद्रीनाथ के मुख्य देव-विग्रह के शीतकालीन उपासना-स्थल के रूप में मान्य; आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित; भविष्य-बद्री किंवदंती से जुड़ा।
गुरु गोबिन्द सिंह (10वें सिख गुरु, 1666-1708) को समर्पित; ऊँचाई 4,632 मी। गोविन्दघाट → घांघरिया हेलीकॉप्टर सेवा (Pawan Hans) ~5 मिनट उड़ान। बद्रीनाथ-Hemkund दोनों गोविन्दघाट जंक्शन से जुड़े।
4 धामों में सर्वोच्च विष्णु-धाम; क्रम: यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ। 2026 कपाट: यमुनोत्री+गंगोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल 8 AM, बद्रीनाथ 23 अप्रैल 6:15 AM।
उत्तर का धाम — पूर्व पुरी (जगन्नाथ), पश्चिम द्वारका, दक्षिण रामेश्वरम, उत्तर बद्रीनाथ
4 मंदिर
108 वैष्णव दिव्य क्षेत्रों में सम्मिलित — आलवारों द्वारा नालायिर दिव्य प्रबन्धम् में स्तुत; पद्मासन मुद्रा वाले विष्णु-स्वरूपों में प्रमुख
108 मंदिर
बद्री विशाल — पंच बद्री समूह का प्रमुख; अन्य 4: योगध्यान बद्री (पांडुकेश्वर), भविष्य बद्री (सुबाईं), वृद्ध बद्री (अणिमठ), आदि बद्री (रानीखेत रोड)
5 मंदिर
बद्रिकाश्रम — परंपरा-संबद्ध मोक्ष-स्थल