शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता — वैद्यनाथ माहात्म्य; रावण की 9 शिर-अर्पण-कथा एवं शिव-वैद्य-स्वरूप-प्राकट्य
Deoghar · Jharkhand
श्री बाबा बैद्यनाथ धाम (वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) — देवघर
वैद्यनाथ / बैद्यनाथ — चिकित्सकों के स्वामी; हृदय-पीठ
अन्य नाम: बाबा बैद्यनाथ धाम · बाबाधाम · बैद्यनाथ · हृदय पीठ · रावणेश्वर

इस मन्दिर की विशेषता
श्री बैद्यनाथ (शिव — 'वैद्यनाथ' = चिकित्सकों के स्वामी; पञ्चम ज्योतिर्लिंग) + श्री जय दुर्गा (शक्ति-पीठ — हृदय-पीठ रूप में सती का हृदय)
स्वयंभू शिवलिंग — गर्भगृह में; सहचर्या जय दुर्गा शक्ति-पीठ
सम्प्रदाय: शैव + शाक्त — अद्वितीय संयुक्त ज्योतिर्लिंग एवं हृदय-पीठ-स्थल
कोटिरुद्र संहिता — वैद्यनाथ माहात्म्य; रावण की 9 शिर-अर्पण-कथा एवं शिव-वैद्य-स्वरूप-प्राकट्य
स्कन्ध 7 — हृदय-पीठ (देवघर) में देवी सती के हृदय-पतन की कथा; 51 शक्ति-पीठों में सम्मिलित
बैद्यनाथ-माहात्म्य
आदि शंकराचार्य — 'परल्यां वैद्यनाथं च' — पञ्चम श्लोक प्रथम-पद (स्थान-विवादित)
04:00 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 15:30-18:00 (मध्याह्न विश्राम)
दिन की प्रथम आरती
दिन की अन्तिम आरती; मंदिर बन्द
मुख्य बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग एवं जय दुर्गा शक्ति-पीठ दोनों के निःशुल्क दर्शन।
विशेष टिकट से शीघ्र-दर्शन; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें।
प्रातः 4:15-5:30 बजे विशेष षोडशोपचार पूजा; अग्रिम बुकिंग आवश्यक।
देवघर का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव। सुल्तानगंज (बिहार, गंगा-तट) से देवघर तक 109 किमी की पैदल कांवड़-यात्रा; केसरिया वस्त्र-धारी श्रद्धालु गंगा-जल लाकर बैद्यनाथ-अभिषेक करते हैं। 1 माह में 50-55 लाख श्रद्धालु। विश्व का सबसे लंबा धार्मिक मेला माना जाता है। 2026 — श्रावण मास: 21 जुलाई - 19 अगस्त (अनुमानित)।
4-प्रहर पूजा; देवघर-विवाह (बैद्यनाथ-पार्वती विवाह) उत्सव; देवघर 'विवाह-नगर' के रूप में सजाया जाता है। 2026 — 15 फरवरी रविवार।
बैद्यनाथ-पार्वती तिलक उत्सव (विवाह-पूर्व रस्म)
जय दुर्गा शक्ति-पीठ की 9-रात्रि विशेष शाक्त-उपासना
स्थानीय पूजा-अनुष्ठान
बैद्यनाथ = 'चिकित्सकों के स्वामी' — एकमात्र ज्योतिर्लिंग जहाँ शिव 'दिव्य-वैद्य' स्वरूप में उपासित; गंभीर रोग, असाध्य व्याधि, मानसिक रोगों के निवारण हेतु विशेष माहात्म्य; महामृत्युञ्जय जप का प्रमुख स्थल
स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता + रावण-कथा परंपरा
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग + जय दुर्गा हृदय-पीठ का एक-स्थानीय दर्शन; मान्यता: 'शिव ने सती के हृदय से दूर न रहने हेतु यहीं ज्योतिर्लिंग रूप में निवास किया'; दाम्पत्य-सुख एवं युगल-कृपा
स्रोत: देवी भागवत पुराण स्कन्ध 7 + शिव पुराण
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार पञ्चम ज्योतिर्लिंग; 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन से सात जन्मों के पाप-नाश
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
सुल्तानगंज-देवघर 109 किमी कांवड़ यात्रा — विश्व की सबसे लंबी धार्मिक यात्रा; गंगा-जल से बैद्यनाथ-अभिषेक से मनोकामना-पूर्ति का विशेष माहात्म्य
स्रोत: कांवड़ यात्रा परंपरा
51 शक्ति-पीठों में हृदय-पीठ — सती के हृदय का पतन-स्थल; जय दुर्गा देवी का मंदिर; बैद्यनाथ + जय दुर्गा का संयुक्त दर्शन अनिवार्य
बैद्यनाथ-यात्रा के साथ अनिवार्य; मान्यता: बैद्यनाथ-दर्शन बासुकीनाथ-दर्शन के बिना अधूरा; नाग-देवता एवं शिव का संयुक्त-स्थल
प्राचीन तप-स्थली; शिव-भक्त ऋषियों की तपोभूमि; पहाड़ी क्षेत्र
पवित्र सरोवर — दर्शन-पूर्व स्नान-स्थल; मान्यता अनुसार शिव के त्रिशूल से निर्मित
प्राचीन पहाड़ी; नंदन-वन के समान सौन्दर्य का स्थल
श्रावणी-मेला की कांवड़-यात्रा का प्रारम्भ-स्थल; गंगा-जल यहीं से उठाया जाता है; अजगैबीनाथ मंदिर (शिव); सुल्तानगंज से बैद्यनाथ तक 109 किमी पैदल यात्रा।
पञ्चम ज्योतिर्लिंग — 'परल्यां वैद्यनाथं च' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र; देवघर सर्वाधिक मान्य — परल्या एवं बैजनाथ हिमाचल भी दावेदार)
12 मंदिर
हृदय-पीठ — सती के हृदय का पतन-स्थल; 51 शक्ति-पीठों में अग्रणी
51 मंदिर
अंतिम तीर्थ — 109 किमी पैदल यात्रा का गंतव्य; गंगा-जल से बैद्यनाथ अभिषेक
केन्द्रीय; मान्यता अनुसार दोनों मंदिरों के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी
2 मंदिर
मुख्य तीर्थ; गया (विष्णुपद) के साथ पञ्च-तीर्थ यात्रा