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Deoghar · Jharkhand

श्री बाबा बैद्यनाथ धाम

श्री बाबा बैद्यनाथ धाम (वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) — देवघर

वैद्यनाथ / बैद्यनाथ — चिकित्सकों के स्वामी; हृदय-पीठ

अन्य नाम: बाबा बैद्यनाथ धाम · बाबाधाम · बैद्यनाथ · हृदय पीठ · रावणेश्वर

  • 12 ज्योतिर्लिंग
  • 51 शक्ति-पीठ
  • ज्योतिर्लिंग एवं शक्ति-पीठ का अद्व…
श्री बाबा बैद्यनाथ धाम
दर्शन समय
04:00 – 21:00
स्वरूप
स्वयंभू शिवलिंग
स्थान
Deoghar · Jharkhand
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
मूल पीठ: अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 12 ज्योतिर्लिंग (पञ्चम — 'परल्यां वैद्यनाथं च' पर स्थान-विवादित; देवघर सर्वाधिक मान्य एवं लोकप्रिय)
  • 51 शक्ति-पीठ (हृदय-पीठ — जय दुर्गा शक्ति)
  • ज्योतिर्लिंग एवं शक्ति-पीठ का अद्वितीय एक-स्थानीय संगम
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री बैद्यनाथ (शिव — 'वैद्यनाथ' = चिकित्सकों के स्वामी; पञ्चम ज्योतिर्लिंग) + श्री जय दुर्गा (शक्ति-पीठ — हृदय-पीठ रूप में सती का हृदय)

स्वयंभू शिवलिंग — गर्भगृह में; सहचर्या जय दुर्गा शक्ति-पीठ

सम्प्रदाय: शैव + शाक्त — अद्वितीय संयुक्त ज्योतिर्लिंग एवं हृदय-पीठ-स्थल

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

शिव पुराण

कोटिरुद्र संहिता — वैद्यनाथ माहात्म्य; रावण की 9 शिर-अर्पण-कथा एवं शिव-वैद्य-स्वरूप-प्राकट्य

देवी भागवत पुराण

स्कन्ध 7 — हृदय-पीठ (देवघर) में देवी सती के हृदय-पतन की कथा; 51 शक्ति-पीठों में सम्मिलित

स्कन्द पुराण

बैद्यनाथ-माहात्म्य

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

आदि शंकराचार्य — 'परल्यां वैद्यनाथं च' — पञ्चम श्लोक प्रथम-पद (स्थान-विवादित)

संत एवं परम्परा

  • रावण — लंकाधिपति; अप्रतिम शिव-भक्त; तपस्या में 9 शिर अर्पण कर 10वाँ शिर अर्पित करने वाले थे, तब शिव प्रकट होकर 'वैद्य-स्वरूप' में रावण के सभी शिरों एवं घावों की चिकित्सा; 'वैद्यनाथ' (= चिकित्सकों के स्वामी) नाम का मूल; शिव ने रावण को आत्म-लिंग वरदान दिया
  • देवी सती — दक्ष-यज्ञ के पश्चात् शिव द्वारा सती के शव-वहन के समय विष्णु-सुदर्शन-चक्र से शव के टुकड़े; देवघर में हृदय-पतन; जय दुर्गा शक्ति-पीठ का प्राकट्य; शिव ने 'अपने हृदय से दूर न रहे' इसलिए स्वयं बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग रूप में निवास
  • ह्वेन त्सांग (7वीं शताब्दी) — चीनी बौद्ध यात्री; देवघर-क्षेत्र के प्राचीन शिव-तीर्थ का संदर्भ अपने यात्रा-वृत्तान्त में

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 6007वीं शताब्दी — चीनी यात्री ह्वेन त्सांग का देवघर-क्षेत्र भ्रमण; प्राचीन शिव-तीर्थ का संदर्भWikipedia Baidyanath Temple + Inheritage Foundation
  2. 1000मध्ययुगीन-काल — बंगाल एवं स्थानीय राजवंशों द्वारा मंदिर का संरक्षण एवं विस्तारWikipedia + Inheritage Foundation
  3. 150016वीं-17वीं शताब्दी — वर्तमान मुख्य संरचना का पुनर्निर्माण; उत्तर भारतीय नागर शैली; 72-फीट मुख्य शिखर; स्वर्ण-कलशWikipedia Baidyanath Temple
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:00 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 15:30-18:00 (मध्याह्न विश्राम)

मंगल / काकड़ आरती04:00-04:15
दैनिक

दिन की प्रथम आरती

षोडशोपचार पूजा एवं अभिषेक04:15-05:30
दैनिक
सामान्य प्रातः दर्शन05:30-09:00
दैनिक
नित्य पूजा एवं भोग09:00-15:30
दैनिक
संध्या आरती18:00-18:10
दैनिक
शृंगार पूजा18:10-19:30
दैनिक
शयन आरती20:00-21:00
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती; मंदिर बन्द

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
04:00-15:30 एवं 18:00-21:00
उपयुक्त
सभी भक्त

मुख्य बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग एवं जय दुर्गा शक्ति-पीठ दोनों के निःशुल्क दर्शन।

VIP विशेष दर्शन
उपयुक्त
समय-सीमित भक्त एवं श्रावण-मेला-काल हेतु

विशेष टिकट से शीघ्र-दर्शन; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें।

षोडशोपचार पूजा एवं अभिषेकम् (Special Pass)
उपयुक्त
श्रद्धालु — विशेष पूजा-संकल्प

प्रातः 4:15-5:30 बजे विशेष षोडशोपचार पूजा; अग्रिम बुकिंग आवश्यक।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

श्रावणी मेला (Shravani Mela / Kanwar Yatra) — विश्व का सबसे लंबा धार्मिक मेलाश्रावण मास (जुलाई-अगस्त)

देवघर का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव। सुल्तानगंज (बिहार, गंगा-तट) से देवघर तक 109 किमी की पैदल कांवड़-यात्रा; केसरिया वस्त्र-धारी श्रद्धालु गंगा-जल लाकर बैद्यनाथ-अभिषेक करते हैं। 1 माह में 50-55 लाख श्रद्धालु। विश्व का सबसे लंबा धार्मिक मेला माना जाता है। 2026 — श्रावण मास: 21 जुलाई - 19 अगस्त (अनुमानित)।

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

4-प्रहर पूजा; देवघर-विवाह (बैद्यनाथ-पार्वती विवाह) उत्सव; देवघर 'विवाह-नगर' के रूप में सजाया जाता है। 2026 — 15 फरवरी रविवार।

बसन्त पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी)माघ शुक्ल पंचमी

बैद्यनाथ-पार्वती तिलक उत्सव (विवाह-पूर्व रस्म)

नवरात्रि (आश्विन)

जय दुर्गा शक्ति-पीठ की 9-रात्रि विशेष शाक्त-उपासना

भाद्र मास संक्रांति

स्थानीय पूजा-अनुष्ठान

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

रोग-निवारण एवं चिकित्सा-वरदान

बैद्यनाथ = 'चिकित्सकों के स्वामी' — एकमात्र ज्योतिर्लिंग जहाँ शिव 'दिव्य-वैद्य' स्वरूप में उपासित; गंभीर रोग, असाध्य व्याधि, मानसिक रोगों के निवारण हेतु विशेष माहात्म्य; महामृत्युञ्जय जप का प्रमुख स्थल

स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता + रावण-कथा परंपरा

एक ही स्थान पर शिव + शक्ति का संयुक्त-दर्शन

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग + जय दुर्गा हृदय-पीठ का एक-स्थानीय दर्शन; मान्यता: 'शिव ने सती के हृदय से दूर न रहने हेतु यहीं ज्योतिर्लिंग रूप में निवास किया'; दाम्पत्य-सुख एवं युगल-कृपा

स्रोत: देवी भागवत पुराण स्कन्ध 7 + शिव पुराण

12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का पञ्चम तीर्थ

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार पञ्चम ज्योतिर्लिंग; 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन से सात जन्मों के पाप-नाश

स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

कांवड़ यात्रा से मनोवांछित-फल

सुल्तानगंज-देवघर 109 किमी कांवड़ यात्रा — विश्व की सबसे लंबी धार्मिक यात्रा; गंगा-जल से बैद्यनाथ-अभिषेक से मनोकामना-पूर्ति का विशेष माहात्म्य

स्रोत: कांवड़ यात्रा परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — 'परल्यां वैद्यनाथं च'स्तोत्रआदि शंकराचार्य — द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पञ्चम श्लोक प्रथम-पदइस मन्दिर हेतु
  • वैद्यनाथ अष्टकम्स्तोत्रस्थल-परंपराइस मन्दिर हेतुबैद्यनाथ के 'वैद्य-स्वरूप' की स्तुति; रोग-निवारण हेतु विशेष
  • महामृत्युञ्जय मंत्रमंत्रऋग्वेद 7.59.12इस मन्दिर हेतुरोग-निवारण एवं चिकित्सा-वरदान हेतु बैद्यनाथ-उपासना का प्रमुख मंत्र
  • ॐ नमः शिवाय — पञ्चाक्षर मंत्रमंत्रयजुर्वेद रुद्राध्याय
  • दुर्गा सप्तशतीग्रन्थमार्कण्डेय पुराणइस मन्दिर हेतुजय दुर्गा शक्ति-पीठ की उपासना हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

जय दुर्गा शक्ति-पीठ (हृदय-पीठ)100 मी

51 शक्ति-पीठों में हृदय-पीठ — सती के हृदय का पतन-स्थल; जय दुर्गा देवी का मंदिर; बैद्यनाथ + जय दुर्गा का संयुक्त दर्शन अनिवार्य

बासुकीनाथ मंदिर (Basukinath)45 किमी

बैद्यनाथ-यात्रा के साथ अनिवार्य; मान्यता: बैद्यनाथ-दर्शन बासुकीनाथ-दर्शन के बिना अधूरा; नाग-देवता एवं शिव का संयुक्त-स्थल

तपोवन (Tapovan)10 किमी

प्राचीन तप-स्थली; शिव-भक्त ऋषियों की तपोभूमि; पहाड़ी क्षेत्र

शिवगंगा सरोवर1.5 किमी

पवित्र सरोवर — दर्शन-पूर्व स्नान-स्थल; मान्यता अनुसार शिव के त्रिशूल से निर्मित

नंदन पर्वत4 किमी

प्राचीन पहाड़ी; नंदन-वन के समान सौन्दर्य का स्थल

सुल्तानगंज (कांवड़-यात्रा प्रारम्भ-स्थल, बिहार)109 किमी

श्रावणी-मेला की कांवड़-यात्रा का प्रारम्भ-स्थल; गंगा-जल यहीं से उठाया जाता है; अजगैबीनाथ मंदिर (शिव); सुल्तानगंज से बैद्यनाथ तक 109 किमी पैदल यात्रा।

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

पञ्चम ज्योतिर्लिंग — 'परल्यां वैद्यनाथं च' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र; देवघर सर्वाधिक मान्य — परल्या एवं बैजनाथ हिमाचल भी दावेदार)

12 मंदिर

51 शक्ति-पीठ यात्रा

हृदय-पीठ — सती के हृदय का पतन-स्थल; 51 शक्ति-पीठों में अग्रणी

51 मंदिर

श्रावणी मेला कांवड़ यात्रा (सुल्तानगंज → बैद्यनाथ धाम)

अंतिम तीर्थ — 109 किमी पैदल यात्रा का गंतव्य; गंगा-जल से बैद्यनाथ अभिषेक

बैद्यनाथ + बासुकीनाथ संयुक्त यात्रा

केन्द्रीय; मान्यता अनुसार दोनों मंदिरों के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी

2 मंदिर

झारखंड-बिहार धार्मिक त्रिकोण (बैद्यनाथ + बासुकीनाथ + सुल्तानगंज + गया)

मुख्य तीर्थ; गया (विष्णुपद) के साथ पञ्च-तीर्थ यात्रा

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री बाबा बैद्यनाथ मंदिर, देवघर — 814112, देवघर जिला, झारखंड
हवाई अड्डा
देवघर हवाई अड्डा (बाबा बैद्यनाथ एयरपोर्ट, DGH) — मंदिर से ~12 किमी (निकटतम)। पटना (PAT) — 274 किमी; रांची (IXR) — 245 किमी।
रेलवे
जसिडीह जंक्शन (JSME) — मंदिर से ~7 किमी (हावड़ा-पटना-दिल्ली रेल-लाइन)
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; तापमान 15-28°C। श्रावण-मेला-काल (जुलाई-अगस्त) में सर्वाधिक भीड़ किन्तु अनुभव अद्वितीय। अप्रैल-जून गर्म (35-42°C)। महाशिवरात्रि, श्रावण मेला, नवरात्रि पर पीक भीड़।
वेबसाइट
https://babadham.org
7 किमीJasidih Junction Railway
12 किमीDeoghar Airport
45 किमीBasukinath
109 किमीSultanganj
245 किमीRanchi
274 किमीPatna
380 किमीKolkata
415 किमीVaranasi
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