गणेश-पुराण उपासना-खण्ड अध्याय 22
त्रेता-युग कथा: पल्लीपुर-वैश्य कल्याण-शेठ + पत्नी इन्दुमती; दीर्घ-निःसन्तानता-पश्चात् पुत्र बल्लाल का जन्म; बाल-बल्लाल ने मित्र-समूह के साथ वन में महाशिला को गणेश-स्वरूप पूज्य-कर गणेश-पुराण-पारायण; अन्न-जल-विस्मरण; मित्र-माता-पिताओं की कल्याण-शेठ से शिकायत; कल्याण ने पुत्र को क्रूर-दण्ड-डण्डा-प्रहार — रक्त-वस्त्र-सर्वव्याप्त; वृक्ष से बाँधा; पूजा-सामग्री-विध्वंस; पूज्य-शिला को भू-तल पर पटका (खण्डित); मृत्यु-आधीन छोड़ा। बंधन-स्थ बल्लाल ने निरन्तर गणेश-नाम-स्मरण किया; गणेश साधु-रूप प्रकट; बंधन-मुक्ति, घाव-निवारण, क्षुधा-तृषा-निवारण; वर-मांगने पर बल्लाल ने प्रार्थना की कि गणेश पाली में नित्य-निवास करें एवं उनका (बल्लाल का) नाम पूर्व-योजित हो; गणेश ने स्वीकार-कर आलिङ्गन-कर एक-समीपस्थ-महाशिला में लीन = बल्लालेश्वर। अस्वीकृत-शिला (कल्याण-पटकित) मुख्य-मन्दिर-पश्चात् ढुण्डि-विनायक (स्वयंभू)-रूप पूज्य।
