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Pali · Maharashtra

श्री बल्लालेश्वर गणपति मन्दिर

श्री बल्लालेश्वर गणपति मन्दिर — पाली (पल्लीपुर), सुधागड तालुका, ज़िला रायगढ़, महाराष्ट्र

बल्लालेश्वर / बल्लाल-विनायक — अष्टविनायक का तृतीय तीर्थ; अष्टविनायक में एकमात्र भक्त-नाम-धारी गणेश (बाल-भक्त बल्लाल का नाम-योग); ब्राह्मण-वेश-धारी

अन्य नाम: बल्लालेश्वर · बल्लाल-विनायक · पाली बल्लालेश्वर

  • अष्टविनायक यात्रा का तृतीय तीर्थ
  • अष्टविनायक में एकमात्र भक्त-नाम-धा…
  • अष्टविनायक में एकमात्र ब्राह्मण-वे…
  • अष्टविनायक में एकमात्र बेसन-लड्डू
श्री बल्लालेश्वर गणपति मन्दिर
दर्शन समय
05:00 – 22:30
स्वरूप
स्वयंभू वामामुखी पाषाण-मूर्ति
स्थान
Pali · Maharashtra
उत्तम ऋतु
जुलाई-नवंबर शिखर-काल
काल
11वीं शताब्दी मूल काष्ठ-मन्दिर

इस मन्दिर की विशेषता

  • अष्टविनायक यात्रा का तृतीय तीर्थ (मोरगाँव → सिद्धटेक के पश्चात्)
  • अष्टविनायक में एकमात्र भक्त-नाम-धारी गणेश (बल्लाल बाल-भक्त-नाम का स्थायी-योग — गणेश-वर अनुसार)
  • अष्टविनायक में एकमात्र ब्राह्मण-वेश-धारी गणेश
  • अष्टविनायक में एकमात्र बेसन-लड्डू (बेसन-भज्जा) प्रसाद — मोदक नहीं
  • अष्टविनायक में एकमात्र पूर्व-मुख-दक्षिणायन सूर्योदय-किरण-संरेखित गर्भगृह — खगोलीय-अनुकूलित
  • ढुण्डि-विनायक (अस्वीकृत-शिला) — मुख्य-दर्शन-पूर्व अनिवार्य-प्रथम-दर्शन (अष्टविनायक में अद्वितीय द्वि-दर्शन-क्रम)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री बल्लालेश्वर गणेश — स्वयंभू ~3-फुट उच्च पाषाण-मूर्ति, वामामुखी (बायाँ-शुण्ड), पद्मासन; नेत्र एवं नाभि में हीरे जड़े; रजत-पार्श्व-फलक पर ऋद्धि एवं सिद्धि चामर-दर्शन; मूषक-वाहन अग्रवर्ती मोदक-धारक; ब्राह्मण-वेश-धारी (अष्टविनायक में अद्वितीय)

स्वयंभू वामामुखी पाषाण-मूर्ति; पूर्व-मुख गर्भगृह — दक्षिणायन (जुलाई-दिसंबर, शीत-संक्रान्ति-समीप-काल) में सूर्योदय-किरणें द्वार से सीधी मूर्ति-पर — खगोलीय-अनुकूलित स्थापत्य; मुख्य-मूर्ति वही पाषाण है जिसमें बल्लाल को वर देने के पश्चात् गणेश लीन हुए

सम्प्रदाय: गाणपत्य-सम्प्रदाय — अष्टविनायक यात्रा-क्रम का तृतीय तीर्थ; गणेश-पुराण उपासना-खण्ड अध्याय 22 + मुद्गल-पुराण-वर्णित

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

गणेश-पुराण उपासना-खण्ड अध्याय 22

त्रेता-युग कथा: पल्लीपुर-वैश्य कल्याण-शेठ + पत्नी इन्दुमती; दीर्घ-निःसन्तानता-पश्चात् पुत्र बल्लाल का जन्म; बाल-बल्लाल ने मित्र-समूह के साथ वन में महाशिला को गणेश-स्वरूप पूज्य-कर गणेश-पुराण-पारायण; अन्न-जल-विस्मरण; मित्र-माता-पिताओं की कल्याण-शेठ से शिकायत; कल्याण ने पुत्र को क्रूर-दण्ड-डण्डा-प्रहार — रक्त-वस्त्र-सर्वव्याप्त; वृक्ष से बाँधा; पूजा-सामग्री-विध्वंस; पूज्य-शिला को भू-तल पर पटका (खण्डित); मृत्यु-आधीन छोड़ा। बंधन-स्थ बल्लाल ने निरन्तर गणेश-नाम-स्मरण किया; गणेश साधु-रूप प्रकट; बंधन-मुक्ति, घाव-निवारण, क्षुधा-तृषा-निवारण; वर-मांगने पर बल्लाल ने प्रार्थना की कि गणेश पाली में नित्य-निवास करें एवं उनका (बल्लाल का) नाम पूर्व-योजित हो; गणेश ने स्वीकार-कर आलिङ्गन-कर एक-समीपस्थ-महाशिला में लीन = बल्लालेश्वर। अस्वीकृत-शिला (कल्याण-पटकित) मुख्य-मन्दिर-पश्चात् ढुण्डि-विनायक (स्वयंभू)-रूप पूज्य।

मुद्गल-पुराण

बल्लाल-कथा का सन्दर्भ-उद्धरण; अष्ट-क्षेत्र-गणना में पाली सम्मिलित

संत एवं परम्परा

  • बाल-भक्त बल्लाल (त्रेता-युग) — पल्लीपुर-वैश्य कल्याण-शेठ का पुत्र; अष्टविनायक में एकमात्र भक्त-नाम-पीठ-स्थापना
  • ढुण्डि-विनायक — कल्याण-शेठ द्वारा अस्वीकृत-पूज्य-शिला; मुख्य-मन्दिर-पश्चात् अनिवार्य-प्रथम-दर्शन
  • मोरेश्वर विट्ठल सिन्दकर (1640 ईस्वी) — पाषाण-निर्माण-प्रारम्भ
  • मोरोबा दादा फडणीस (1760 ईस्वी; फडणवीस-वंश-वरिष्ठ-अधिकारी) — वर्तमान-पाषाण-पुनर्निर्माण 'श्री'-आकार ग्राउण्ड-प्लान
  • चिमाजी अप्पा (पेशवा बाजीराव I के भ्राता) — वसई-विजय (1739 ईस्वी पश्चात् पुर्तगालियों से) पश्चात् यूरोपीय-कांस्य-घण्टा अर्पण; महाराष्ट्र-अनेक-मन्दिरों को विजय-घण्टा-वितरण-परम्परा
  • श्री बल्लालेश्वर देवस्थान ट्रस्ट (स्वतन्त्र) — ISO 9001:2015 (2018) + 80G कर-छूट-प्रमाण

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 1640मोरेश्वर विट्ठल सिन्दकर द्वारा पाषाण-मन्दिर-निर्माण-प्रारम्भWikipedia + ashtavinayaktemples.com
  2. 1739चिमाजी अप्पा द्वारा वसई-विजय (पुर्तगाली-पराजय) पश्चात् यूरोपीय-कांस्य-विजय-घण्टा अर्पणWikipedia + Maharashtra Tourism
  3. 1760मोरोबा दादा फडणीस द्वारा वर्तमान-पाषाण-पुनर्निर्माण; सीसा-मिश्रित-सीमेण्ट; 'श्री'-आकार ग्राउण्ड-प्लान; द्वि-तल गर्भगृह (15 फुट + 12 फुट); 40×20 सभा-मण्डप 8 सरू-स्तम्भ; हेमाडपन्ती + कोङ्कणी-शैलीWikipedia + Maharashtra Tourism + Grokipedia बहु-स्रोत
  4. 2018ISO 9001:2015 प्रमाणन; 80G कर-छूटshreeballaleshwarpali.org आधिकारिक
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:00 से 22:30 तक

काकड आरती05:00
दैनिक (आश्विन कृष्ण 1 से कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा-काल विशेष)
प्रातः पूजा06:00
दैनिक
अन्तर-गृह पूजा (पुजारी-सह भक्त)05:30-12:00
दैनिक
सायं आरती19:00
दैनिक
शेज आरती (समापन)22:00
दैनिक

विशेष नियम: ढुण्डि-विनायक प्रथम-दर्शन अनिवार्य (मुख्य-मन्दिर-पश्चात्); गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; ई-पास दर्शन वरिष्ठ-नागरिक (80+) एवं दिव्याङ्ग-जन हेतु आधिकारिक-वेबसाइट पर

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:00-22:30 (दैनिक)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

कतार-आधारित निःशुल्क दर्शन; ढुण्डि-विनायक प्रथम-दर्शन-पश्चात् मुख्य-बल्लालेश्वर-दर्शन।

ढुण्डि-विनायक प्रथम-दर्शन (अनिवार्य)निःशुल्क

मुख्य-मन्दिर-पश्चात् अस्वीकृत-शिला-स्वयंभू ढुण्डि-विनायक — अष्टविनायक में अद्वितीय द्वि-दर्शन-क्रम; मुख्य-दर्शन-पूर्व अनिवार्य।

अन्तर-गृह पूजा (पुजारी-सह भक्त)

प्रातः-स्लॉट 05:30-12:00; गर्भगृह में पुजारी-सह भक्त-सम्पादित पूजा।

ई-पास दर्शन (वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्याङ्ग)निःशुल्क

वरिष्ठ-नागरिक (80+ वर्ष) एवं दिव्याङ्ग-जन; shreeballaleshwarpali.org पर बुकिंग।

अभिषेक (दैनिक एवं तिथि-विशेष)

ट्रस्ट-कार्यालय बुकिंग।

बेसन-लड्डू (बेसन-भज्जा) प्रसाद

अष्टविनायक में अद्वितीय — मोदक नहीं, अपितु पाली का विशिष्ट बेसन-लड्डू-प्रसाद।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

भाद्रपदी उत्सव (गणेश-चतुर्थी 2026)भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा-पञ्चमी

सोमवार 14 सितंबर 2026 (चतुर्थी-तिथि 14 सितंबर 07:06 IST - 15 सितंबर 07:44 IST); 10-दिवसीय गणेशोत्सव अनन्त चतुर्दशी / विसर्जन 25 सितंबर 2026 तक; भव्य पालकी-शोभायात्रा पाली-ग्राम-परिक्रमा, लेझीम, नर्तक-अश्व, नासिक ढोल-बैण्ड, भजन-जागरण।

माघी उत्सव (गणेश-जयन्ती)माघ शुक्ल प्रतिपदा-पञ्चमी

गणेश के पुनर्जन्म-समारोह; जनवरी-फरवरी; पालकी-शोभायात्रा एवं भजन-जागरण।

सङ्कष्टी चतुर्थी (मासिक)कृष्ण चतुर्थी (प्रत्येक मास)

पञ्चामृत-स्नान, राज-वस्त्र, नैवेद्य, पालकी, मन्त्र-पुष्पम् (सायं); चन्द्र-दर्शन-पारणा।

विनायकी चतुर्थी (मासिक)शुक्ल चतुर्थी (प्रत्येक मास)

मासिक शुक्ल-चतुर्थी पूजा।

दक्षिणायन सूर्योदय-किरण-दर्शनजुलाई-दिसंबर शीत-संक्रान्ति-समीप-काल

सूर्योदय-किरणें द्वार से सीधी मूर्ति-पर पड़ती हैं — खगोलीय-अनुकूलित स्थापत्य का प्रत्यक्ष-दर्शन।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

भक्ति-दृढ़ता संकल्प (बल्लाल-आदर्श)

बाल-बल्लाल की पीडन-काल अटूट-भक्ति का आदर्श — भक्ति-दृढ़ता एवं विषम-काल में गणेश-स्मरण-दृढ़ता का तीर्थ

स्रोत: गणेश-पुराण उपासना-खण्ड अध्याय 22

बाल-संरक्षण एवं संतान-कल्याण संकल्प

बाल-बल्लाल को गणेश-संरक्षण-कथा अनुसार बाल-संरक्षण एवं विषम-काल में संतान-कल्याण-संकल्प

स्रोत: गणेश-पुराण

विषम-काल-धैर्य एवं पीडन-सहन-बल संकल्प

बल्लाल का बंधन-काल अटूट-नाम-स्मरण-आदर्श; पीडन एवं विषम-काल में धैर्य एवं सहन-बल हेतु संकल्प

स्रोत: गणेश-पुराण

विघ्न-हरण एवं अध्ययन-एकाग्रता संकल्प

बल्लाल के पिता की प्रारम्भिक-शिकायत 'अध्ययन-विघ्न' सम्बन्धी थी; अध्ययन-एकाग्रता एवं विघ्न-हरण-संकल्प

स्रोत: गणेश-पुराण

दीर्घ-आयु एवं आध्यात्मिक-उन्नति संकल्प

गणेश ने बल्लाल को दीर्घ-आयु एवं परम-भक्त-स्थिति का विशेष-वर दिया

स्रोत: गणेश-पुराण

दक्षिणायन सूर्योदय-किरण-दर्शन संकल्प

जुलाई-दिसंबर शीत-संक्रान्ति-समीप-काल सूर्योदय-किरण-मूर्ति-संरेखण का प्रत्यक्ष-दर्शन — खगोलीय-तीर्थ-दर्शन-संकल्प

स्रोत: स्थापत्य-परम्परा + Wikipedia

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ गणेशाय नमःमूल मन्त्रगाणपत्य परम्परा
  • ॐ गं गणपतये नमःबीज मन्त्रगाणपत्य परम्परा
  • सङ्कष्टनाशन गणेश स्तोत्र (नारद-उवाच)स्तोत्रनारद-पुराणसङ्कष्टी चतुर्थी विशेष
  • वक्रतुण्ड महाकाय श्लोकश्लोकगाणपत्य परम्परा
  • गणेश अष्टोत्तर शतनामावलीनामावलीगाणपत्य परम्परा
  • गणेश-पुराण उपासना-खण्ड अध्याय 22 (बल्लाल-कथा) पारायणपुराण-पारायणगणेश-पुराणइस मन्दिर हेतुपाली-स्थानीय-परम्परा-प्रोत्साहित
  • बल्लालेश्वर पाहिमाम् भजनस्थानीय भजनगाणपत्य भक्त-परम्पराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

ढुण्डि-विनायक (अनिवार्य प्रथम-दर्शन)50 मी

कल्याण-शेठ द्वारा अस्वीकृत-पटकित पूज्य-शिला (स्वयंभू); अष्टविनायक में अद्वितीय द्वि-दर्शन-क्रम; पारम्परिक-नियम-अनुसार मुख्य-दर्शन-पूर्व अनिवार्य

सारसगड किला (Sarasgad Fort)1 किमी

मराठा निगरानी-दुर्ग; शिवाजी ने 2000 होन (मुद्रा) मरम्मत-हेतु दिए; सुधागड का जुड़वाँ; 2-3 घण्टे ट्रेक

अम्बा नदी (Amba River)200 मी

अनुष्ठान-स्नान-तीर्थ

उन्हेरे / उद्धार गर्म-कुण्ड (Unhere / Uddhar Hot Springs)1 किमी

गन्धक/क्लोरीन/लवण गर्म-कुण्ड; 3 कुण्ड (1 खुला + पृथक पुरुष/स्त्री); त्वचा-वातरोग-निवारण-परम्परा

सुधागड किला (Sudhagad Fort)10 किमी

ऐतिहासिक मराठा किला

महाड वरदविनायक मन्दिर (अष्टविनायक #4)42 किमी

अष्टविनायक यात्रा-क्रम का अग्रिम-तीर्थ; प्राकृतिक-संयोजन

भीमाशङ्कर ज्योतिर्लिङ्ग100 किमी

12 ज्योतिर्लिङ्ग में सम्मिलित; अष्टविनायक-ज्योतिर्लिङ्ग-संयुक्त-यात्रा

कार्ला + भाजा गुफा (Karla + Bhaja Caves)80 किमी

प्राचीन बौद्ध-गुफा-स्थापत्य

अष्टविनायक यात्रा शास्त्रोक्त क्रम — तृतीय तीर्थ

तृतीय तीर्थ; क्रम: 1. मोरगाँव → 2. सिद्धटेक → 3. **पाली (यह)** → 4. महाड → 5. थेऊर → 6. लेण्याद्री → 7. ओझर → 8. रांजणगाँव → मोरगाँव-समापन

8 मंदिर · 3 दिन

पाली-महाड रायगढ़ अष्टविनायक-युग्म-यात्रा

पाली (बल्लालेश्वर) + महाड (वरदविनायक) — रायगढ़-ज़िला अष्टविनायक-युग्म (~42 किमी)

2 मंदिर

मुम्बई/पुणे-केन्द्रित अष्टविनायक + भीमाशङ्कर ज्योतिर्लिङ्ग संयुक्त-यात्रा

अष्टविनायक + भीमाशङ्कर ज्योतिर्लिङ्ग + कार्ला/भाजा गुफा संयोजन

10 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री बल्लालेश्वर देवस्थान, पाली (पल्लीपुर), सुधागड तालुका, ज़िला रायगढ़, महाराष्ट्र — PIN 410205
हवाई अड्डा
मुम्बई CSMIA (मुम्बई) — ~110 किमी; पुणे अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (PNQ) — ~110 किमी
रेलवे
खोपोली रेलवे स्टेशन (मध्य रेलवे) — ~35-38 किमी; करजत रेलवे स्टेशन — ~30 किमी
बस-स्टैण्ड
पाली बस-स्टैण्ड (MSRTC); सुधागड तालुका; SH-92 खोपोली-नागोथने मार्ग पर — खोपोली-निकास से 10 किमी पूर्व नागोथने
उत्तम ऋतु
जुलाई-नवंबर शिखर-काल; अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम मौसम; गणेश-चतुर्थी 14 सितंबर 2026; अनन्त चतुर्दशी / विसर्जन 25 सितंबर 2026; गणेश-जयन्ती माघ शुक्ल चतुर्थी (जनवरी-फरवरी); दक्षिणायन सूर्योदय-किरण-दर्शन जुलाई-दिसंबर शीत-संक्रान्ति-समीप-काल
35 किमीKhopoli
30 किमीKarjat
110 किमीMumbai
115 किमीPune
110 किमीPune Airport
110 किमीMumbai Airport
42 किमीMahad
11 किमीNagothane
100 किमीBhimashankar Jyotirlinga
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