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Vrindavan (Mathura District) · Uttar Pradesh

श्री बांके बिहारी मंदिर, वृन्दावन

बांके बिहारी — 'त्रिभंगी' मुद्रा वाले श्रीकृष्ण

अन्य नाम: बांके बिहारी जी · बिहारी जी · ठाकुर जी

  • वृन्दावन के 7 ठाकुर मंदिर
  • ब्रज-यात्रा का अनिवार्य तीर्थ
  • हरिदासी-सम्प्रदाय का मुख्य पीठ
श्री बांके बिहारी मंदिर, वृन्दावन
स्वरूप
त्रिभंगी मुद्रा में काले संगमरमर का विग्…
स्थान
Vrindavan (Mathura District) · Uttar Pradesh
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम। होली एवं जन…
काल
मूल विग्रह: 16वीं शताब्दी

इस मन्दिर की विशेषता

  • वृन्दावन के 7 ठाकुर मंदिर (सप्त देवालय) में सर्वाधिक लोकप्रिय
  • ब्रज-यात्रा का अनिवार्य तीर्थ
  • हरिदासी-सम्प्रदाय का मुख्य पीठ
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री बांके बिहारी (श्रीकृष्ण-राधा संयुक्त-स्वरूप; निधि-वन में स्वामी हरिदास के समक्ष प्रकट)

त्रिभंगी मुद्रा में काले संगमरमर का विग्रह; राधा एवं कृष्ण के संयुक्त-रूप का प्राकट्य (मान्यता)

सम्प्रदाय: निम्बार्क / हरिदासी (हरिदासी सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

श्रीमद् भागवत पुराण

स्कन्ध 10 — श्रीकृष्ण-राधा वृन्दावन-लीला

ब्रह्म वैवर्त पुराण

राधा-कृष्ण-लीला

स्वामी हरिदास रचित पद-संग्रह

केलि-माल; वृन्दावन रसिकानन्द

संत एवं परम्परा

  • स्वामी हरिदास (1478-1573) — विख्यात संगीत-संत; तानसेन के गुरु; निम्बार्क / हरिदासी सम्प्रदाय के संस्थापक; निधि-वन में तप-संगीत द्वारा बांके बिहारी का प्राकट्य
  • तानसेन — अकबर के 9 रत्नों में संगीत-सम्राट; स्वामी हरिदास के शिष्य
  • गोस्वामी परिवार — हरिदास के वंशज; 1864 में बांके बिहारी मंदिर के संस्थापक एवं वर्तमान सेवायत

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 150016वीं शताब्दी — स्वामी हरिदास निधि-वन में तप-संगीत; राधा-कृष्ण के समक्ष प्रकट होकर 'एक रूप' में लीन होने का वरदान — काला बांके-विग्रह प्राकट्यWikipedia Banke Bihari Temple + bihariji.org
  2. 18641864 ईस्वी — स्वामी हरिदास के गोस्वामी-वंशजों द्वारा निधि-वन के निकट वर्तमान मंदिर का निर्माण; विग्रह निधि-वन से यहाँ स्थानान्तरितWikipedia Banke Bihari Temple
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

शृंगार आरती08:00 (ग्रीष्म) / 09:00 (शीत)
दैनिक

दिन की प्रथम आरती (कोई मंगला आरती नहीं)

राजभोग आरती11:00-11:30 (ग्रीष्म) / 12:00-12:30 (शीत)
दैनिक
शयन आरती21:30 (ग्रीष्म) / 20:30 (शीत)
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

मुख्य बांके बिहारी दर्शन निःशुल्क। प्रति-5-मिनट परदा खींचने की अद्वितीय परंपरा।

VIP / आरती-पास दर्शन
उपयुक्त
समय-सीमित श्रद्धालु; आरती-समय में निकट-दर्शन

आरती-पास से शीघ्र-दर्शन; मूल्य काउंटर पर सत्यापित करें।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

श्री कृष्ण जन्माष्टमीभाद्रपद कृष्ण अष्टमी

वर्ष में एकमात्र दिन जब मंगला आरती होती है (1:45 AM); झूलन-उत्सव; पूर्ण-रात्रि दर्शन। 2026 — वैष्णव/मंदिर 5 सितंबर शनिवार (DrikPanchang पुष्ट; स्मार्त 4 सितंबर)।

राधाष्टमीभाद्रपद शुक्ल अष्टमी

राधा-जन्म-उत्सव; विशेष शृंगार

शरद पूर्णिमाआश्विन शुक्ल पूर्णिमा

वर्ष में एकमात्र दिन जब बांके बिहारी हाथ में बाँसुरी धारण करते हैं; रास-लीला-स्मरण

होलीफाल्गुन शुक्ल

विश्व-प्रसिद्ध वृन्दावन होली; फूल-होली; अबीर-गुलाल; लाखों श्रद्धालु

स्वामी हरिदास जयन्ती (राधाष्टमी)

स्वामी हरिदास के जन्म-दिवस पर विशेष पूजा

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

राधा-कृष्ण संयुक्त-कृपा एवं प्रेम-भक्ति

बांके बिहारी = राधा-कृष्ण के एक-रूप का प्राकट्य; दाम्पत्य-प्रेम एवं रासेश्वरी कृपा हेतु

स्रोत: स्वामी हरिदास परंपरा

मनोवांछित-फल

मान्यता: बांके बिहारी के नेत्रों में अधिक-समय न देखें — मनोकामना तत्काल पूर्ण होती है किन्तु भक्त 'भौतिक' हो जाते हैं; इसी कारण 5-मिनट परदा परंपरा

स्रोत: स्थल-परंपरा

वृन्दावन सप्त-देवालय यात्रा

वृन्दावन के 7 ठाकुर मंदिरों में सबसे लोकप्रिय; ब्रज-यात्रा का अनिवार्य तीर्थ

स्रोत: वैष्णव परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्री बांके बिहारी अष्टकम्स्तोत्रहरिदासी सम्प्रदाय परंपराइस मन्दिर हेतु
  • स्वामी हरिदास केलि-माल पदपद-संग्रहस्वामी हरिदास रचितइस मन्दिर हेतु
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवायमंत्रश्रीमद् भागवत पुराण
  • हरे कृष्ण महामंत्रमंत्रकलिसंतरण उपनिषद्
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

निधि-वन (Nidhivan)500 मी

स्वामी हरिदास की मूल तप-स्थली; मान्यता: बांके बिहारी प्रति-रात्रि यहाँ राधा-गोपियों के साथ रास-लीला करते हैं; रात्रि के बाद किसी को रहने की अनुमति नहीं

श्री राधावल्लभ मंदिर200 मी

हित-हरिवंश-संप्रदाय; राधावल्लभी परंपरा का मुख्य मंदिर

गोविन्द देव जी मंदिर1 किमी

16वीं शताब्दी का 7-मंजिला अकबर-काल मंदिर (मूल); गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय

श्री कृष्ण जन्मस्थान (मथुरा)12 किमी

श्रीकृष्ण-जन्म-स्थल; अनिवार्य संयुक्त-यात्रा

प्रेम मंदिर (ISKCON पूर्व)2 किमी

जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा 2012 में निर्मित आधुनिक संगमरमर मंदिर; प्रति-रात्रि प्रकाश-शो

ISKCON वृन्दावन (श्री श्री कृष्ण बलराम)2.5 किमी

श्रील प्रभुपाद द्वारा 1975 में निर्मित; गौड़ीय वैष्णव

वृन्दावन सप्त-देवालय (7 ठाकुर मंदिर)

सबसे लोकप्रिय; अन्य 6: राधावल्लभ, गोविन्द देव, मदन मोहन, गोपीनाथ, जुगल किशोर, राधा रमण

7 मंदिर

ब्रज-यात्रा (मथुरा + वृन्दावन + गोकुल + गोवर्धन + बरसाना + नंदगाँव)

वृन्दावन का प्रमुख तीर्थ; ब्रज-84-कोस परिक्रमा का अंग

हरिदासी सम्प्रदाय तीर्थ यात्रा

मुख्य पीठ; स्वामी हरिदास निधि-वन एवं बांके बिहारी

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री बांके बिहारी मंदिर, बांके बिहारी मार्ग, वृन्दावन — 281121, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश
हवाई अड्डा
दिल्ली IGI (DEL) — ~160 किमी; आगरा (AGR) — ~75 किमी
रेलवे
मथुरा जंक्शन (MTJ) — वृन्दावन से ~12 किमी; वृन्दावन रेलवे स्टेशन (VRBD) — मंदिर से ~3 किमी
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम। होली एवं जन्माष्टमी पीक भीड़।
वेबसाइट
https://www.bihariji.org
12 किमीMathura
3 किमीVrindavan Station
25 किमीGovardhan
40 किमीBarsana
75 किमीAgra
160 किमीDelhi
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