अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
आदि शंकराचार्य रचित — 3रा श्लोक: 'उज्जैन्यां महाकाली, पीठिकायां पुरुहूतिका। ओड्याणे गिरिजादेवी, माणिक्या दक्षवाटिके' — माणिक्याम्बा का 12वाँ अष्टादश पीठ शास्त्रीय-प्रमाण
Draksharamam · Andhra Pradesh
श्री भीमेश्वर स्वामी एवं श्री माणिक्याम्बा देवी मंदिर — द्राक्षाराम (दक्ष-आराम), ज़िला कोनसीमा, आन्ध्र प्रदेश
माणिक्या दक्षवाटिके — अष्टादश शक्ति-पीठ का 12वाँ पीठ; भीमाराम — पञ्चाराम क्षेत्रों में सम्मिलित; दक्षिण काशी क्षेत्रम्
अन्य नाम: भीमेश्वर स्वामी · माणिक्याम्बा · भीमाराम (5 पञ्चाराम में) · दक्षाराम · दक्षिण काशी क्षेत्रम् · त्रिलिङ्ग क्षेत्रों में सम्मिलित

इस मन्दिर की विशेषता
श्री भीमेश्वर स्वामी (शिव) — 2.6 मीटर (~14-15 फुट) स्फटिक स्वायंभू-लिङ्ग (विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा स्वायंभू स्फटिक लिङ्ग दावा); श्री माणिक्याम्बा देवी — 2री-तल पर स्थापित; आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित श्री-चक्र पर अधिष्ठित; देवी का मुख वाम-ओर झुका हुआ (वाम-मार्ग उपासना-संकेत)
स्फटिक स्वायंभू-लिङ्ग (2.6 मीटर) मुख्य-गर्भगृह में; माणिक्याम्बा देवी 2री-तल पर श्री-चक्र पर अधिष्ठित; पञ्चाराम-कथा के अनुसार तारकासुर के शिव-आत्म-लिङ्ग के 5 खण्डों में से एक; सूर्य ने यहाँ पुनः-प्रतिष्ठा की
सम्प्रदाय: शाक्त-शैव युगल — श्री-विद्या तंत्र (वाम-मार्ग); पञ्चाराम-कथा परंपरा
आदि शंकराचार्य रचित — 3रा श्लोक: 'उज्जैन्यां महाकाली, पीठिकायां पुरुहूतिका। ओड्याणे गिरिजादेवी, माणिक्या दक्षवाटिके' — माणिक्याम्बा का 12वाँ अष्टादश पीठ शास्त्रीय-प्रमाण
व्यासदेव द्वारा विस्तार-वर्णन; द्राक्षाराम का दक्ष-यज्ञ-स्थल एवं भीमेश्वर-कथा
5-अध्याय का तेलुगु-काव्य; व्यास-अगस्त्य-मिलन, शिव-लीला, मन्दिर-प्रतिष्ठा एवं भीमेश्वर-पार्वती दिव्य-संगम का वर्णन; 1901 में प्रथम-मुद्रित
तारकासुर ने शिव-आत्म-लिङ्ग को अमृत्व-वर के रूप में पाया था; कार्तिकेय (कुमारस्वामी) ने आग्नेयास्त्र से 5 खण्डों में विभक्त किया; विष्णु के निर्देश पर सूर्य ने 5 स्थानों पर पुनः-प्रतिष्ठा एवं मन्दिर-निर्माण किया
05:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:30-13:30 (निरन्तर खुला; आधिकारिक tms.ap.gov.in के अनुसार 5:30 AM-1:30 PM एवं 1:30-9:00 PM दो-सत्र)
मुख्य भीमेश्वर लिङ्ग एवं माणिक्याम्बा देवी दर्शन निःशुल्क।
मन्दिर निरन्तर खुला; पूर्ण रात्रि-जागरण; विशेष अभिषेकम्। 2026 — रविवार 15 फरवरी (चतुर्दशी 5:04 PM 15 फरवरी से 5:34 PM 16 फरवरी)।
भीमेश्वर-पार्वती कल्याण-उत्सव। 2026 — 29 जनवरी।
कार्तिक सोमवार + ब्रह्मोत्सवम् सम्मिलित; अभिषेकम् 5:00-11:00 AM विस्तृत-समय; धनुर्मास उत्सव।
9-दिवसीय देवी ब्रह्मोत्सवम्। 2026 — रविवार 11 अक्टूबर से मंगलवार 20 अक्टूबर।
भीमेश्वर स्वामी जन्मदिवस-उत्सव
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश स्तोत्रम् का 12वाँ पीठ — 'माणिक्या दक्षवाटिके'; पूर्व: ओड्याणे गिरिजादेवी (11); पश्चात्: कामरूपा (13)
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
5 पञ्चाराम क्षेत्रों में भीमाराम; अन्य 4: अमराराम (अमरावती), सोमाराम (भीमावरम), क्षीराराम (पालकोल्लु), कुमाराराम (सामलकोटा); 2-3 दिवसीय संयुक्त-यात्रा
स्रोत: स्कन्द पुराण पञ्चाराम-कथा
द्राक्षाराम (माणिक्याम्बा, 12वाँ अष्टादश) + पीठापुरम (पुरुहूतिका, 10वाँ अष्टादश) — आन्ध्र प्रदेश के दो-निकटवर्ती अष्टादश शक्ति-पीठ (~45 किमी); स्वाभाविक युगल-यात्रा
स्रोत: क्षेत्रीय शाक्त-परंपरा
द्राक्षाराम = 'दक्ष का आराम' = दक्ष-यज्ञ का मूल-स्थल; सती-आत्म-दाह की कथा-भूमि
स्रोत: स्कन्द पुराण + व्युत्पत्ति
4थे गोपुरम् के पार 7-गोदावरी-नदियों के जल का अन्तर-वाहिनी कुण्ड; सप्तर्षियों द्वारा निर्मित; अभिषेकम् हेतु जल का उपयोग
स्रोत: स्थल-परंपरा
2.6 मीटर (~14-15 फुट) स्फटिक स्वायंभू-लिङ्ग — विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा स्वायंभू स्फटिक लिङ्ग दावा
स्रोत: स्थल-परंपरा + ASI
7-गोदावरी-नदियों का अन्तर-वाहिनी (भू-गर्भ) जल; सप्तर्षियों एवं व्यास-कथा-सम्बद्ध; अभिषेकम् हेतु पवित्र-जल
सप्तर्षि-स्थापित 7 शीतल-उप-लिङ्ग + सूर्य-स्थापित 1 = 8-दिशा-आवरण
श्री राम द्वारा रक्षक-देवता के रूप में स्थापित
इन्द्र द्वारा लिङ्ग-स्थापना
5 पञ्चाराम क्षेत्रों में सम्मिलित; कार्तिकेय-स्थापित; निकटतम पञ्चाराम-जोड़ी
AP शाक्त-युगल — द्राक्षाराम (12वाँ) एवं पीठापुरम (10वाँ) निकटवर्ती अष्टादश शक्ति-पीठ; पाद-गया पिण्ड-दान-स्थल भी
सत्यनारायण व्रत-कथा का प्रमुख-तीर्थ
अन्य 2 पञ्चाराम-स्थल; 5-पञ्चाराम-यात्रा का भाग
5 पञ्चारामों में अग्रणी; पूर्ण-यात्रा हेतु
12वाँ पीठ — 'माणिक्या दक्षवाटिके'; पूर्व: ओड्याणे गिरिजादेवी (11); पश्चात्: कामरूपा कामाख्या (13)
18 मंदिर
भीमाराम (द्राक्षाराम); क्रम: अमराराम (अमरावती) → द्राक्षाराम → सामलकोटा कुमाराराम → भीमावरम सोमाराम → पालकोल्लु क्षीराराम
5 मंदिर · 3 दिन
द्राक्षाराम (माणिक्याम्बा 12वाँ) + पीठापुरम (पुरुहूतिका 10वाँ) — 45 किमी निकटवर्ती युगल
2 मंदिर
तेलुगु-भूमि के त्रिलिङ्ग क्षेत्रों में सम्मिलित (अन्य 2: श्रीशैलम् मल्लिकार्जुन + काळेश्वरम्)
3 मंदिर
द्राक्षाराम (सप्त-गोदावरी कुण्ड) + अन्नवरम् + पीठापुरम + सामलकोटा — गोदावरी-डेल्टा तीर्थ-वलय
4 मंदिर