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Jajpur · Odisha

श्री माँ बिरजा देवी

श्री माँ बिरजा देवी (गिरिजा) मंदिर — देविद्वार, जाजपुर, ओडिशा

बिरजा / विरजा / गिरिजा देवी — ओड्याणे गिरिजादेवी; अष्टादश शक्ति-पीठ का 11वाँ पीठ; नाभि गया; यज्ञपुर की देवी

अन्य नाम: बिरजा · विरजा · गिरिजा देवी · माँ बिरजा · नाभि पीठ की देवी · यज्ञपुर निवासिनी

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा
  • त्रि-गया परंपरा
  • ओडिशा गद-क्षेत्र
श्री माँ बिरजा देवी
दर्शन समय
05:30 – 21:00
स्वरूप
द्वि-भुजा महिषमर्दिनी
स्थान
Jajpur · Odisha
उत्तम ऋतु
नवंबर-फरवरी सर्वोत्तम
काल
महाभारत वन-पर्व में 'विराज-तीर्थ' ना…

इस मन्दिर की विशेषता

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ — आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्रम् का 11वाँ पीठ; श्लोक 3: 'उज्जैन्यां महाकाली, पीठिकायां पुरुहूतिका। ओड्याणे गिरिजादेवी, माणिक्या दक्षवाटिके'
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा (तंत्र-चूड़ामणि) — स्थान 35; सती की नाभि (नाभि-खण्ड) यहाँ गिरी; भैरव: सम्वर्त (सम्वर्त्त / सम्बर्त)
  • त्रि-गया परंपरा — नाभि गया (एकमात्र शक्ति-पीठ जहाँ पिण्ड-दान सम्पन्न होता है); अन्य 2: शिरो गया (बिहार) + पाद गया (पीठापुरम)
  • ओडिशा गद-क्षेत्र — सङ्ख (पुरी) + चक्र (भुवनेश्वर) + पद्म (कोणार्क) + गद (जाजपुर) — ओडिशा का 'द्वितीय श्रीक्षेत्र'
  • ओडिशा शाक्त-यात्रा त्रि-केन्द्र — तारा तारिणी (बेरहामपुर) + बिमला (पुरी) + बिरजा (जाजपुर)
  • 7वीं शताब्दी ब्रह्मयामल-पिचुमत तंत्र-ग्रन्थ में उत्कल-राज्य की देवी के रूप में नामांकित (बिमला पुरी के साथ युगल)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री बिरजा देवी — भारत की एकमात्र द्वि-भुजा (दो-हाथों वाली) महिषमर्दिनी विग्रह; दक्षिण-हस्त में त्रिशूल/भाला से महिषासुर के वक्ष पर प्रहार; वाम-हस्त से असुर की पूँछ खींचती; एक पाद सिंह-वाहन पर, द्वितीय महिषासुर के वक्ष पर; मस्तक-मुकुट पर गणेश + योनि में शिवलिङ्ग + चन्द्र-कला + वासुकि नाग (गणपत्य + शाक्त-शैव + तांत्रिक चारों पथों का संगम)

द्वि-भुजा महिषमर्दिनी — भारत में अद्वितीय (अन्य महिषमर्दिनी 8/10/16-भुजा); गुप्त-काल (4थी-5वीं शताब्दी) पाषाण-मूर्ति; मस्तक-मुकुट पर 4-पथ-संगम का चिह्न

सम्प्रदाय: शाक्त — श्री-विद्या परंपरा; तांत्रिक-शाक्त-शैव युगल; नाभि गया (पितृ-तर्पण) तीर्थ

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य रचित — 3रा श्लोक का तृतीय-चरण: 'ओड्याणे गिरिजादेवी' — 11वाँ अष्टादश पीठ; ओड्याण/यज्ञपुर = आधुनिक जाजपुर

महाभारत — वन पर्व (आरण्यक पर्व)

'विराज-तीर्थ' का प्रारम्भिक-उल्लेख — धर्म ने यहाँ महा-यज्ञ सम्पन्न किया

स्कन्द पुराण — उत्कल खण्ड

बिरजा-क्षेत्र यात्रियों को रजो-गुण से शुद्ध करता है

ब्रह्माण्ड पुराण + वायु पुराण + ब्रह्म पुराण + चैतन्य चरितामृत + अष्टपीठ माहात्म्य

बिरजा एवं वैतरणी का बहु-स्रोतीय उल्लेख

ब्रह्मयामल / पिचुमत तंत्र (7वीं शताब्दी)

उत्कल-राज्य की देवी के रूप में बिरजा = गिरिजा का नामांकन (बिमला पुरी के साथ युगल)

तंत्र-चूड़ामणि

51 शक्ति-पीठ-सूची में स्थान 35; सती की नाभि का पतन; भैरव सम्वर्त

संत एवं परम्परा

  • ब्रह्मा — यज्ञपुर-नामकरण कथा का स्रोत; ब्रह्म-कुण्ड (मन्दिर से 2 मिनट दूर सोपान-कुण्ड) पर मूल यज्ञ; बिरजा देवी गार्हपत्य-अग्नि से द्वि-भुजा महिषमर्दिनी-स्वरूप में प्रकट
  • धर्म-राज (महाभारत वन-पर्व) — 'विराज-तीर्थ' पर महा-यज्ञ सम्पन्न
  • गयासुर — शरीर-विभाजन कथा से 3 गया-तीर्थों का निर्माण (शिरो + नाभि + पाद); जाजपुर = नाभि गया
  • ययाति केसरी II (सोमवंशी; 11वीं शताब्दी) — वर्तमान मन्दिर-संरचना के निर्माता; दशाश्वमेध-यज्ञ; 10,000 कन्नौज-ब्राह्मणों का जाजपुर-वसन; ओड़िआ-ब्राह्मण समुदाय की नींव
  • आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) — अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 11वें पीठ रूप में 'ओड्याणे गिरिजादेवी' की स्तुति
  • कालापहाड़ (16वीं शताब्दी मध्य) — आक्रमणकारी; मन्दिर-क्षति का कारण
  • सुदर्शन महापात्र (19वीं शताब्दी) — मन्दिर-पुनरुद्धार-कर्ता
  • बिरजा मन्दिर न्यास बोर्ड (MBTTB) — आधुनिक संचालक (ओडिशा हिन्दू धार्मिक एण्डाउमेंट्स अधिनियम 1951 के अधीन)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 450गुप्त-काल (4थी-5वीं शताब्दी ईस्वी) — पाषाण द्वि-भुजा महिषमर्दिनी विग्रह की स्थापनाWikipedia Biraja Temple + Tirthayatra बहु-स्रोत
  2. 7007वीं शताब्दी — ब्रह्मयामल / पिचुमत तंत्र-ग्रन्थ में बिरजा = गिरिजा का उत्कल-राज्य-देवी रूप में नामांकन (बिमला पुरी के साथ युगल)Wikipedia Biraja Temple + IM Voyager
  3. 8008वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा अष्टादश-स्तोत्रम् में 11वें पीठ-निरूपणStotra Nidhi + Hindupedia + Templesinindiainfo बहु-स्रोत
  4. 105011वीं शताब्दी — सोमवंशी ययाति केसरी II द्वारा वर्तमान मन्दिर-संरचना का निर्माण; अष्ट-चण्डी + अष्ट-भैरव + नवदुर्गा + सप्तमातृका + त्रयोदश रुद्र + द्वादश गणेश + 68 तीर्थ + चौंसठ योगिनी एकीकरण; दशाश्वमेध-यज्ञ; 10,000 कन्नौज-ब्राह्मणों का जाजपुर-वसनWikipedia + Hindupost + Peepultree + Hindupad बहु-स्रोत
  5. 155016वीं शताब्दी मध्य — कालापहाड़-आक्रमण से मन्दिर-क्षति; सप्तमातृका-मूर्तियाँ वैतरणी-तटीय-कीचड़ में छिपाई गयीं (पश्चात् ASI द्वारा पुनरुद्धारित)Wikipedia Saptamatruka Temple
  6. 185019वीं शताब्दी — सुदर्शन महापात्र द्वारा मन्दिर-पुनरुद्धारWikipedia + Tirthayatra
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-15:00 (मध्याह्न विश्राम)

प्रातः दर्शन05:30-13:00
दैनिक

सामान्य दर्शन-काल

सायं दर्शन15:00-21:00
दैनिक

आधिकारिक maabiraja.com के अनुसार 22:00 तक

वस्त्र-संहिता: पारंपरिक शालीन-वस्त्र

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:30-13:00 एवं 15:00-21:00
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

मुख्य बिरजा देवी गर्भगृह दर्शन निःशुल्क।

नाभि गया पिण्ड-दान / श्राद्ध
उपयुक्त
पितृ-तर्पण-संकल्प (एकमात्र शक्ति-पीठ जहाँ पिण्ड-दान सम्पन्न)

गर्भगृह के निकट पवित्र-कूप (~4-5 फुट गहरा; कभी नहीं सूखता; भू-गर्भ शिवलिङ्ग गङ्गा से जुड़ा; विशिष्ट तिथियों पर जल-उच्चता); 7 पीढ़ियों के पूर्वजों को मोक्ष-प्रदाता।

कोटि लिङ्ग दर्शन
उपयुक्त
शिव-संकल्प

दो कक्षों में ~1 करोड़ लघु-शिवलिङ्ग एवं सहस्र-लिङ्ग।

उप-शाल दर्शन

बाबा वैद्यनाथ (शिव), बगलामुखी देवी, श्वेत वराह, एक-पाद भैरवी, दोलावेदी मण्डप, अष्ट-भैरव, नवदुर्गा।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

त्रिवेणी अमावस्या / माघ अमावस्या (बिरजा देवी जन्म-दिवस / ब्रह्मोत्सव)माघ अमावस्या

देवी का जन्म-दिवस; सावित्री-स्वरूप अलंकरण (ब्रह्म-पत्नी रूप)। 2026 — 17-18 फरवरी (उत्तर-भारत vs ओड़िआ-काल के अनुसार)।

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

कोटि-लिङ्ग पर विशेष अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

दोल पूर्णिमा (फाल्गुन पूर्णिमा) — 6-दिवसीय दोल-जात्राफाल्गुन पूर्णिमा

दोलावेदी पर देवी; अबीर-छिड़काव; नवीन पञ्जिका-वाचन। 2026 — मंगलवार 3 मार्च।

महा वारुणी स्नान (चैत्र कृष्ण त्रयोदशी) — 'ओडिशा का कुम्भ'चैत्र कृष्ण त्रयोदशी

वैतरणी-दशाश्वमेध-घाट पर सामूहिक स्नान; देवी का अनुष्ठानिक-स्नान। 2026 — बुधवार 18 मार्च।

चैत्र (वासन्तिक) नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

9-दिवसीय देवी-उपासना। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी)।

महाविशुब संक्रांति (ओड़िआ नववर्ष)मेष संक्रांति

देवी 'बड़ा सिंहार वेस' में; प्रपानक-अर्पण। 2026 — मंगलवार 14 अप्रैल।

सावित्री अमावस्याज्येष्ठ अमावस्या

विवाहित स्त्रियों द्वारा दाम्पत्य-दीर्घायु हेतु विशेष-पूजा। 2026 — शनिवार 16 मई।

शारदीय दुर्गा पूजा 'षोडश-दिनात्मिका' (16-दिवसीय)भाद्रपद कृष्ण अष्टमी - आश्विन शुक्ल नवमी

जाजपुर का सर्वोच्च-उत्सव — 16-दिवसीय अद्वितीय परंपरा; शुक्ल अष्टमी-नवमी संधि पर 'बलि-दानम्'; महा-नवमी की रात्रि पर 'लक्ष-विद्ध' (बाण-संधान-समारोह); अपराजिता पूजा। 2026 शरद नवरात्रि घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; महाष्टमी — रविवार 18 अक्टूबर; महानवमी — सोमवार 19 अक्टूबर; विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।

सिंह-ध्वज रथ-यात्रा (9-दिवसीय)आश्विन-मास

जाजपुर का 'सर्वाधिक-महत्त्वपूर्ण उत्सव'; ध्वज पर सिंह-चिह्न

कुमार पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा)आश्विन पूर्णिमा

कन्या-देवी अलंकरण; कौड़ी-खेल

दीपावलीकार्तिक अमावस्या

भैरव + चामुण्डा हेतु तांत्रिक-अनुष्ठान। 2026 — रविवार 8 नवंबर।

प्रथमाष्टमी (कार्तिक)कार्तिक कृष्ण अष्टमी

एंदुरि (हल्दी-केक) अर्पण

धनु संक्रांतिधनु संक्रांति (दिसंबर-मध्य)

मीठा-धान-लाजा अर्पण

बकुल अमावस्या (पौष)पौष अमावस्या

गैन्था-केक अर्पण

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

अष्टादश शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प (11वाँ पीठ)

आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश स्तोत्रम् का 11वाँ पीठ — 'ओड्याणे गिरिजादेवी'; पूर्व: पुरुहूतिका पीठापुरम (10); पश्चात्: माणिक्य दक्षवाटिक (12)

स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

नाभि गया पिण्ड-दान-संकल्प — एकमात्र शक्ति-पीठ जहाँ पिण्ड-दान

त्रि-गया परंपरा का मध्य-केन्द्र; 51 शक्ति-पीठों में एकमात्र पीठ जहाँ पिण्ड-दान सम्पन्न होता है; 7 पीढ़ियों के पूर्वजों को मोक्ष

स्रोत: स्कन्द पुराण + गयासुर-कथा

वारुणी स्नान — 'ओडिशा का कुम्भ' संकल्प

महा वारुणी (चैत्र कृष्ण त्रयोदशी, 18 मार्च 2026) पर वैतरणी-स्नान गङ्गा-स्नान-समतुल्य; गरुड़ पुराण की एकमात्र भौगोलिक-वैतरणी

स्रोत: गरुड़ पुराण + दशाश्वमेध-घाट परंपरा

द्वि-भुजा महिषमर्दिनी-दर्शन-संकल्प (भारत में अद्वितीय)

भारत की एकमात्र दो-हाथों वाली महिषमर्दिनी विग्रह; गुप्त-काल प्रकट; अन्य-स्थलों में 8/10/16-भुजा महिषमर्दिनी

स्रोत: गुप्त-काल मूर्ति-शास्त्र + ब्रह्मयामल तंत्र

ओडिशा शाक्त-त्रि-केन्द्र यात्रा (तारा तारिणी + बिमला + बिरजा)

ओडिशा की 3 प्रमुख शक्ति-तीर्थ-यात्रा

स्रोत: ओडिशा शाक्त-परंपरा

ओडिशा 'अस्त्र-क्षेत्र' चतुष्क (सङ्ख-चक्र-पद्म-गद) — गद-क्षेत्र दर्शन

सङ्ख (पुरी जगन्नाथ) + चक्र (भुवनेश्वर लिङ्गराज) + पद्म (कोणार्क सूर्य) + गद (जाजपुर बिरजा) — ओडिशा-तीर्थ-चतुष्क का गद-केन्द्र; 'द्वितीय श्रीक्षेत्र'

स्रोत: ओडिशा स्थल-परंपरा

16-दिवसीय 'षोडश-दिनात्मिका' दुर्गा-पूजा-संकल्प

जाजपुर का अद्वितीय 16-दिवसीय शरद दुर्गा-पूजा परंपरा (अधिकांश-स्थानों में केवल 9 दिवस)

स्रोत: जाजपुर स्थल-परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् — 3रे श्लोक का तृतीय-चरणस्तोत्रआदि शंकराचार्य रचितइस मन्दिर हेतु'उज्जैन्यां महाकाली, पीठिकायां पुरुहूतिका। ओड्याणे गिरिजादेवी, माणिक्या दक्षवाटिके' — बिरजा/गिरिजा देवी का 11वाँ-पीठ शास्त्रीय-प्रमाण
  • दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्यम्)ग्रन्थमार्कण्डेय पुराण अध्याय 81-93 — 700 श्लोकइस मन्दिर हेतुमहिषमर्दिनी-कथा का मूल; नवरात्रि-काल में मन्दिर में पारायण
  • ॐ नमः शिवाय / हर हर महादेवमूल मन्त्रशैव परंपराकोटि लिङ्ग परिक्रमा-काल में पारायण
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

दशाश्वमेध घाट (वैतरणी नदी)1 किमी

11वीं शताब्दी ययाति केसरी II के अश्वमेध-यज्ञ का स्थल; महा वारुणी स्नान-वेन्यू; 'ओडिशा का कुम्भ'

सप्तमातृका मन्दिर (ASI-संरक्षित)1.2 किमी

7 मातृ-देवियाँ (ब्राह्मणी, वैष्णवी, इन्द्राणी, नरसिंही, चामुण्डा, कौमारी, वाराही) — बिरजा की सहायक-देवियाँ; कालापहाड़-आक्रमण के पश्चात् वैतरणी-कीचड़ में छिपाई गयीं; ASI द्वारा पुनरुद्धारित

त्रिलोचनेश्वर मन्दिर800 मी

जाजपुर का प्रमुख शिव-मन्दिर (वाराणसी त्रिलोचनेश्वर से भिन्न)

सिद्ध विनायक / बूढ़ा गणेश मन्दिर1 किमी

प्राचीन गणेश-मन्दिर

ब्रह्म-कुण्ड (स्टेपवेल)200 मी

ब्रह्मा के मूल यज्ञ का स्थल; बिरजा देवी का प्रकट-कुण्ड

श्वेत वराह मन्दिर (यज्ञ-वराह)1.5 किमी

वराह-अवतार पवित्र-तीर्थ

जगन्नाथ + सावित्री + लक्ष्मी + शिव + नवग्रह मन्दिर1 किमी

बहु-शाल परिसर-तीर्थ

रत्नागिरि / लालितगिरि / उदयगिरि (बौद्ध डायमण्ड त्रिकोण)50 किमी

ओडिशा बौद्ध डायमण्ड त्रिकोण; UNESCO-स्तरीय बौद्ध-तीर्थ

अष्टादश महा-शक्ति-पीठ यात्रा (आदि शंकराचार्य)

11वाँ पीठ — 'ओड्याणे गिरिजादेवी'; पूर्व: पुरुहूतिका पीठापुरम (10); पश्चात्: माणिक्य दक्षवाटिक (12)

18 मंदिर

त्रि-गया क्षेत्र यात्रा (पितृ-तर्पण)

नाभि गया — कोस्मिक-केन्द्र; अन्य 2: शिरो गया (गया, बिहार) + पाद गया (पीठापुरम, AP); एकमात्र शक्ति-पीठ जहाँ पिण्ड-दान

3 मंदिर

ओडिशा शाक्त-यात्रा त्रि-केन्द्र

बिरजा (जाजपुर) + बिमला (पुरी) + तारा तारिणी (बेरहामपुर) — ओडिशा 3 प्रमुख शक्ति-पीठ

3 मंदिर

ओडिशा 'अस्त्र-क्षेत्र' चतुष्क — गद-क्षेत्र (जाजपुर)

सङ्ख (पुरी जगन्नाथ) + चक्र (भुवनेश्वर लिङ्गराज) + पद्म (कोणार्क सूर्य) + गद (जाजपुर बिरजा); ओडिशा-तीर्थ-चतुष्क का गद-केन्द्र

4 मंदिर

ओडिशा बौद्ध डायमण्ड त्रिकोण + बिरजा संयुक्त-यात्रा

बिरजा + रत्नागिरि + लालितगिरि + उदयगिरि — हिन्दू-बौद्ध संयुक्त सर्किट

4 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री बिरजा देवी मन्दिर, देविद्वार, जाजपुर नगर, ज़िला जाजपुर — 755007, ओडिशा
हवाई अड्डा
बीजू पटनायक अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (BBI, भुवनेश्वर) — ~103-125 किमी
रेलवे
जाजपुर-केन्दुझर रोड रेलवे स्टेशन (JJKR) — ~32 किमी (29 मिनट-ड्राइव)
बस-स्टैण्ड
जाजपुर बस-स्टैंड — 2 किमी; ओडिशा राज्य-परिवहन; कटक से 2-2.5 घंटे
उत्तम ऋतु
नवंबर-फरवरी सर्वोत्तम (सुखद-मौसम); शरद नवरात्रि (11-20 अक्टूबर 2026) सर्वोच्च; महा वारुणी स्नान (18 मार्च 2026) 'ओडिशा का कुम्भ'; दोल पूर्णिमा (3 मार्च 2026); गर्मी (अप्रैल-जून) में आर्द्र एवं तप्त
हेल्पलाइन
06728-223900 (न्यास-बोर्ड), 078739 04563 (सामान्य)
वेबसाइट
https://maabiraja.com/
2 किमीJajpur Bus Stand
1 किमीVaitarani
32 किमीJajpur-Keonjhar Road Railway
90 किमीCuttack
125 किमीBhubaneswar
200 किमीJagannath Puri
600 किमीPithapuram
50 किमीRatnagiri
550 किमीGaya