अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
आदि शंकराचार्य रचित — 3रा श्लोक का तृतीय-चरण: 'ओड्याणे गिरिजादेवी' — 11वाँ अष्टादश पीठ; ओड्याण/यज्ञपुर = आधुनिक जाजपुर
Jajpur · Odisha
श्री माँ बिरजा देवी (गिरिजा) मंदिर — देविद्वार, जाजपुर, ओडिशा
बिरजा / विरजा / गिरिजा देवी — ओड्याणे गिरिजादेवी; अष्टादश शक्ति-पीठ का 11वाँ पीठ; नाभि गया; यज्ञपुर की देवी
अन्य नाम: बिरजा · विरजा · गिरिजा देवी · माँ बिरजा · नाभि पीठ की देवी · यज्ञपुर निवासिनी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री बिरजा देवी — भारत की एकमात्र द्वि-भुजा (दो-हाथों वाली) महिषमर्दिनी विग्रह; दक्षिण-हस्त में त्रिशूल/भाला से महिषासुर के वक्ष पर प्रहार; वाम-हस्त से असुर की पूँछ खींचती; एक पाद सिंह-वाहन पर, द्वितीय महिषासुर के वक्ष पर; मस्तक-मुकुट पर गणेश + योनि में शिवलिङ्ग + चन्द्र-कला + वासुकि नाग (गणपत्य + शाक्त-शैव + तांत्रिक चारों पथों का संगम)
द्वि-भुजा महिषमर्दिनी — भारत में अद्वितीय (अन्य महिषमर्दिनी 8/10/16-भुजा); गुप्त-काल (4थी-5वीं शताब्दी) पाषाण-मूर्ति; मस्तक-मुकुट पर 4-पथ-संगम का चिह्न
सम्प्रदाय: शाक्त — श्री-विद्या परंपरा; तांत्रिक-शाक्त-शैव युगल; नाभि गया (पितृ-तर्पण) तीर्थ
आदि शंकराचार्य रचित — 3रा श्लोक का तृतीय-चरण: 'ओड्याणे गिरिजादेवी' — 11वाँ अष्टादश पीठ; ओड्याण/यज्ञपुर = आधुनिक जाजपुर
'विराज-तीर्थ' का प्रारम्भिक-उल्लेख — धर्म ने यहाँ महा-यज्ञ सम्पन्न किया
बिरजा-क्षेत्र यात्रियों को रजो-गुण से शुद्ध करता है
बिरजा एवं वैतरणी का बहु-स्रोतीय उल्लेख
उत्कल-राज्य की देवी के रूप में बिरजा = गिरिजा का नामांकन (बिमला पुरी के साथ युगल)
51 शक्ति-पीठ-सूची में स्थान 35; सती की नाभि का पतन; भैरव सम्वर्त
05:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-15:00 (मध्याह्न विश्राम)
सामान्य दर्शन-काल
आधिकारिक maabiraja.com के अनुसार 22:00 तक
वस्त्र-संहिता: पारंपरिक शालीन-वस्त्र
मुख्य बिरजा देवी गर्भगृह दर्शन निःशुल्क।
गर्भगृह के निकट पवित्र-कूप (~4-5 फुट गहरा; कभी नहीं सूखता; भू-गर्भ शिवलिङ्ग गङ्गा से जुड़ा; विशिष्ट तिथियों पर जल-उच्चता); 7 पीढ़ियों के पूर्वजों को मोक्ष-प्रदाता।
दो कक्षों में ~1 करोड़ लघु-शिवलिङ्ग एवं सहस्र-लिङ्ग।
बाबा वैद्यनाथ (शिव), बगलामुखी देवी, श्वेत वराह, एक-पाद भैरवी, दोलावेदी मण्डप, अष्ट-भैरव, नवदुर्गा।
देवी का जन्म-दिवस; सावित्री-स्वरूप अलंकरण (ब्रह्म-पत्नी रूप)। 2026 — 17-18 फरवरी (उत्तर-भारत vs ओड़िआ-काल के अनुसार)।
कोटि-लिङ्ग पर विशेष अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
दोलावेदी पर देवी; अबीर-छिड़काव; नवीन पञ्जिका-वाचन। 2026 — मंगलवार 3 मार्च।
वैतरणी-दशाश्वमेध-घाट पर सामूहिक स्नान; देवी का अनुष्ठानिक-स्नान। 2026 — बुधवार 18 मार्च।
9-दिवसीय देवी-उपासना। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी)।
देवी 'बड़ा सिंहार वेस' में; प्रपानक-अर्पण। 2026 — मंगलवार 14 अप्रैल।
विवाहित स्त्रियों द्वारा दाम्पत्य-दीर्घायु हेतु विशेष-पूजा। 2026 — शनिवार 16 मई।
जाजपुर का सर्वोच्च-उत्सव — 16-दिवसीय अद्वितीय परंपरा; शुक्ल अष्टमी-नवमी संधि पर 'बलि-दानम्'; महा-नवमी की रात्रि पर 'लक्ष-विद्ध' (बाण-संधान-समारोह); अपराजिता पूजा। 2026 शरद नवरात्रि घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; महाष्टमी — रविवार 18 अक्टूबर; महानवमी — सोमवार 19 अक्टूबर; विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।
जाजपुर का 'सर्वाधिक-महत्त्वपूर्ण उत्सव'; ध्वज पर सिंह-चिह्न
कन्या-देवी अलंकरण; कौड़ी-खेल
भैरव + चामुण्डा हेतु तांत्रिक-अनुष्ठान। 2026 — रविवार 8 नवंबर।
एंदुरि (हल्दी-केक) अर्पण
मीठा-धान-लाजा अर्पण
गैन्था-केक अर्पण
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश स्तोत्रम् का 11वाँ पीठ — 'ओड्याणे गिरिजादेवी'; पूर्व: पुरुहूतिका पीठापुरम (10); पश्चात्: माणिक्य दक्षवाटिक (12)
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
त्रि-गया परंपरा का मध्य-केन्द्र; 51 शक्ति-पीठों में एकमात्र पीठ जहाँ पिण्ड-दान सम्पन्न होता है; 7 पीढ़ियों के पूर्वजों को मोक्ष
स्रोत: स्कन्द पुराण + गयासुर-कथा
महा वारुणी (चैत्र कृष्ण त्रयोदशी, 18 मार्च 2026) पर वैतरणी-स्नान गङ्गा-स्नान-समतुल्य; गरुड़ पुराण की एकमात्र भौगोलिक-वैतरणी
स्रोत: गरुड़ पुराण + दशाश्वमेध-घाट परंपरा
भारत की एकमात्र दो-हाथों वाली महिषमर्दिनी विग्रह; गुप्त-काल प्रकट; अन्य-स्थलों में 8/10/16-भुजा महिषमर्दिनी
स्रोत: गुप्त-काल मूर्ति-शास्त्र + ब्रह्मयामल तंत्र
ओडिशा की 3 प्रमुख शक्ति-तीर्थ-यात्रा
स्रोत: ओडिशा शाक्त-परंपरा
सङ्ख (पुरी जगन्नाथ) + चक्र (भुवनेश्वर लिङ्गराज) + पद्म (कोणार्क सूर्य) + गद (जाजपुर बिरजा) — ओडिशा-तीर्थ-चतुष्क का गद-केन्द्र; 'द्वितीय श्रीक्षेत्र'
स्रोत: ओडिशा स्थल-परंपरा
जाजपुर का अद्वितीय 16-दिवसीय शरद दुर्गा-पूजा परंपरा (अधिकांश-स्थानों में केवल 9 दिवस)
स्रोत: जाजपुर स्थल-परंपरा
11वीं शताब्दी ययाति केसरी II के अश्वमेध-यज्ञ का स्थल; महा वारुणी स्नान-वेन्यू; 'ओडिशा का कुम्भ'
7 मातृ-देवियाँ (ब्राह्मणी, वैष्णवी, इन्द्राणी, नरसिंही, चामुण्डा, कौमारी, वाराही) — बिरजा की सहायक-देवियाँ; कालापहाड़-आक्रमण के पश्चात् वैतरणी-कीचड़ में छिपाई गयीं; ASI द्वारा पुनरुद्धारित
जाजपुर का प्रमुख शिव-मन्दिर (वाराणसी त्रिलोचनेश्वर से भिन्न)
प्राचीन गणेश-मन्दिर
ब्रह्मा के मूल यज्ञ का स्थल; बिरजा देवी का प्रकट-कुण्ड
वराह-अवतार पवित्र-तीर्थ
बहु-शाल परिसर-तीर्थ
ओडिशा बौद्ध डायमण्ड त्रिकोण; UNESCO-स्तरीय बौद्ध-तीर्थ
11वाँ पीठ — 'ओड्याणे गिरिजादेवी'; पूर्व: पुरुहूतिका पीठापुरम (10); पश्चात्: माणिक्य दक्षवाटिक (12)
18 मंदिर
नाभि गया — कोस्मिक-केन्द्र; अन्य 2: शिरो गया (गया, बिहार) + पाद गया (पीठापुरम, AP); एकमात्र शक्ति-पीठ जहाँ पिण्ड-दान
3 मंदिर
बिरजा (जाजपुर) + बिमला (पुरी) + तारा तारिणी (बेरहामपुर) — ओडिशा 3 प्रमुख शक्ति-पीठ
3 मंदिर
सङ्ख (पुरी जगन्नाथ) + चक्र (भुवनेश्वर लिङ्गराज) + पद्म (कोणार्क सूर्य) + गद (जाजपुर बिरजा); ओडिशा-तीर्थ-चतुष्क का गद-केन्द्र
4 मंदिर
बिरजा + रत्नागिरि + लालितगिरि + उदयगिरि — हिन्दू-बौद्ध संयुक्त सर्किट
4 मंदिर