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Thanjavur · Tamil Nadu

श्री बृहदीश्वर मन्दिर

श्री बृहदीश्वर मन्दिर — तञ्जावूर (तञ्जै पेरिय कोविल; पेरुवुदैयार कोविल), तमिलनाडु

श्री बृहदीश्वर / पेरुवुदैयार (तमिल) — राजराज चोल प्रथम-निर्मित (1003-1010 ईस्वी); मूल-नाम 'राजराजेश्वरम्'; UNESCO विश्व-धरोहर 1987 (2004 'महान् जीवित चोल मन्दिर' विस्तार); 'दक्षिण मेरु' उपाधि-धारी; ASI केन्द्रीय-संरक्षित स्मारक

अन्य नाम: बृहदीश्वर मन्दिर · तञ्जै पेरिय कोविल (तमिल 'बड़ा मन्दिर') · पेरुवुदैयार कोविल · राजराजेश्वरम् · दक्षिण मेरु

  • UNESCO विश्व-धरोहर स्थल
  • विश्व का सर्वाधिक-वृहत् ग्रेनाइट-म…
  • विश्व के सर्वोच्च मन्दिर-विमानों म…
  • भारत का सर्वाधिक-वृहत् एकल-शिला-लि…
श्री बृहदीश्वर मन्दिर
दर्शन समय
06:00 – 20:30
स्वरूप
विशाल-लिङ्ग ~8.7 मी
स्थान
Thanjavur · Tamil Nadu
उत्तम ऋतु
महा शिवरात्रि 15 फरवरी 2026
काल
11वीं-शताब्दी ईस्वी

इस मन्दिर की विशेषता

  • UNESCO विश्व-धरोहर स्थल (1987-मूल; 2004-विस्तार 'महान् जीवित चोल मन्दिर'-समूह — बृहदीश्वर तञ्जावूर + बृहदीश्वर गङ्गैकोण्डचोलपुरम् + ऐरावतेश्वर दारासुरम्)
  • विश्व का सर्वाधिक-वृहत् ग्रेनाइट-मन्दिर (~130,000 टन ग्रेनाइट); ~60 किमी-त्रिज्या में ग्रेनाइट-खान-अनुपस्थिति-कारण विशिष्ट इंजीनियरिंग-चमत्कार
  • विश्व के सर्वोच्च मन्दिर-विमानों में सम्मिलित (63-66 मी / 208-216 फीट; 16-मञ्जिला; 13 शिखर-तपरिङ्ग वर्ग); कलश एकल 80-टन ग्रेनाइट-शिला
  • भारत का सर्वाधिक-वृहत् एकल-शिला-लिङ्ग (~8.7 मी / 29 फीट; दो-मञ्जिल-घेरण)
  • 'दक्षिण मेरु' उपाधि-धारी (विश्व-धरोहर पारम्परिक-नाम)
  • तञ्जावूर 'तञ्जै पेरिय कोविल' (तमिल 'बड़ा मन्दिर'); राजराज चोल प्रथम-निर्मित (1003-1010 ईस्वी); 1010 ईस्वी राजराज के 25वें-राज्य-वर्ष-275वें-दिन प्रतिष्ठा
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री बृहदीश्वर (पेरुवुदैयार) — विशाल-लिङ्ग ~8.7 मी (~29 फीट) ऊँचा; गर्भगृह की दो-मञ्जिलें घेरने वाला; भारत के सर्वाधिक-वृहत् एकल-शिला-लिङ्गों में सम्मिलित; उप-देवता: पेरिय-नायकि अम्मन (13वीं-शताब्दी पाण्ड्य-निर्मित), सुब्रह्मण्य + विनायक (16-17वीं-शताब्दी नायक-काल-निर्मित), चण्डेश्वर, करुवूर देवर

विशाल-लिङ्ग ~8.7 मी (~29 फीट) — एकल-शिला (मोनोलिथिक) ग्रेनाइट-लिङ्ग; गर्भगृह में दो-मञ्जिलें घेरने वाला; उत्तर-मुख

सम्प्रदाय: शैव-सिद्धान्त; द्रविड़-चोल वास्तुकला-शैली; प्रशासन: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) केन्द्रीय-संरक्षित स्मारक (निःशुल्क प्रवेश); धार्मिक-गतिविधि: तमिलनाडु HR&CE-शासित

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

राजराज चोल प्रथम-निर्माण ऐतिहासिक-वृत्तान्त

राजराज चोल प्रथम (शासन 985-1012 ईस्वी; चोल साम्राज्य-उत्कर्ष-काल का सर्वाधिक-शक्तिशाली राजा) ने 1003-1010 ईस्वी में स्वयं की राजधानी तञ्जावूर में राजराजेश्वरम् (आज का बृहदीश्वर) मन्दिर-निर्माण कराया। 1010 ईस्वी = राजराज के 25वें-राज्य-वर्ष-275वें-दिन ASI-शिलालेख-अनुसार प्रतिष्ठा हुई। मन्दिर-कलश-स्वर्ण-निर्मित-अर्पण-शिलालेख-अनुसार राजराज ने स्वयं अर्पण किया। मन्दिर-निर्माण-काल ~130,000 टन ग्रेनाइट का प्रयोग किया गया जो ~60 किमी-त्रिज्या में ग्रेनाइट-खान-अनुपस्थिति-कारण पुदुक्कोट्टै-क्षेत्र-से (~50-100 किमी) परिवहन किया गया मान्य।

विमान-कलश 80-टन एकल-शिला-कथा (6-किमी ढाल-कथा)

विमान-शीर्ष पर अष्ट-कोणीय कलश-शिला (~7.77 मी प्रति-भुजा; ~80 टन वजन; एकल-ग्रेनाइट-शिला; उसके ऊपर ~25 टन शिखर) कैसे चढ़ाई गई — पारम्परिक-कथन (Britannica-स्रोत-अनुसार): 6 किमी लम्बी मन्द-ढाल का निर्माण कर हाथियों एवं श्रमिकों द्वारा ऊँचाई तक खींची गई। पारम्परिक-कथा-केवल; प्रामाणिक-ऐतिहासिक-सत्यापन नहीं।

करुवूर देवर (राजराज-गुरु एवं तिरुविसैप्पा-रचयिता)

करुवूर देवर — राजराज चोल प्रथम के गुरु; 9वें तिरुमुरै में सम्मिलित तिरुविसैप्पा-स्तोत्र-रचयिता; 18 सिद्धरों में सम्मिलित (दक्षिण-भारतीय शैव-सिद्ध-परम्परा); 63 नायन्मारों में सम्मिलित NHI (नायन्मार-काल 6-9वीं शताब्दी-समाप्त था)। मन्दिर-प्राङ्गण में करुवूर देवर-शाला।

शिलालेख-समृद्ध-वृत्तान्त (दक्षिण-भारत के सर्वाधिक-व्यापक मन्दिर-शिलालेख-संग्रहों में)

मन्दिर-दीवारों पर 99 नाम-धारी-राजा-शिलालेख: राजराज चोल प्रथम के 64 + राजेन्द्र चोल प्रथम के 29 + विक्रम चोल + कुलोत्तुङ्ग प्रथम + राजमहेन्द्र (राजेन्द्र द्वितीय) + 3 पाण्ड्य + 2 नायक (अच्युतप्पा, मल्लप्पा)। एक शिलालेख 107-पैरा-लम्बा — दक्षिण-भारत के सर्वाधिक-वृहत् मन्दिर-शिलालेखों में। 1011 ईस्वी-शिलालेख-अनुसार मन्दिर 600+ कर्मचारी (पुजारी, गायक, नर्तक) नियुक्त किए गए।

सडैय विऴा (राजराज-जन्म-वर्षगाँठ-वार्षिक उत्सव)

ऐप्पसि-मास (अक्टूबर-नवंबर) सडयम्-नक्षत्र-दिन राजराज चोल प्रथम का जन्म-वर्षगाँठ — 985 ईस्वी से वार्षिक मनाया जा रहा है। मुख्य-दिन कार्यक्रम: पेरुवुदैयार-अभिषेक + पेरुनदीप वऴिपाडु (विशाल-दीप-पूजा) + स्वामी पुरप्पाडु (उत्सव-मूर्ति-शोभायात्रा); utsav.gov.in (आधिकारिक) पर सूचीबद्ध।

संत एवं परम्परा

  • राजराज चोल प्रथम (शासन 985-1012 ईस्वी) — मन्दिर-निर्माता; चोल साम्राज्य-उत्कर्ष-काल का सर्वाधिक-शक्तिशाली राजा; तञ्जावूर-राजधानी-स्थापक
  • कुञ्जर-मल्लन राज-राम पेरुन्थचन — स्थपति (Britannica-स्रोत-अनुसार मुख्य वास्तुकार)
  • करुवूर देवर — राजराज चोल प्रथम के गुरु; 9वें तिरुमुरै-तिरुविसैप्पा-स्तोत्र-रचयिता; 18 सिद्धरों में सम्मिलित
  • राजेन्द्र चोल प्रथम (शासन 1014-1044) — राजराज-पुत्र; मन्दिर-29 शिलालेखों के दाता; गङ्गैकोण्डचोलपुरम् बृहदीश्वर मन्दिर-निर्माता (UNESCO सङ्ग)
  • विक्रम चोल + कुलोत्तुङ्ग प्रथम + राजमहेन्द्र (राजेन्द्र द्वितीय) — परवर्ती-शिलालेख-दाता-राजा
  • अच्युतप्पा नायक + मल्लप्पा नायक (16-17वीं शताब्दी) — सुब्रह्मण्य + विनायक + नन्दी-मण्डप-शाला-योग्य-कर्ता
  • पाण्ड्य-राजा (1279 ईस्वी-पाण्ड्य-विजय-पश्चात्) — पेरिय-नायकि अम्मन-शाला-निर्माता (13वीं-शताब्दी)
  • मराठा शासक (18वीं-शताब्दी) — पेरिय-नायकि अम्मन-शाला-छत-चित्रांकन
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) — आधुनिक केन्द्रीय-संरक्षण; निःशुल्क प्रवेश
  • तमिलनाडु HR&CE — धार्मिक-गतिविधि-शासन

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 985राजराज चोल प्रथम-राज्यारोहण; तञ्जावूर-राजधानी-स्थापना; सडयम्-नक्षत्र वार्षिक-उत्सव-प्रारम्भWikipedia + ASI + utsav.gov.in बहु-स्रोत
  2. 1010बृहदीश्वर मन्दिर-प्रतिष्ठा — राजराज के 25वें-राज्य-वर्ष-275वें-दिन; मन्दिर-कलश-स्वर्ण-निर्मित-अर्पण राजराज-स्वयंASI + Wikipedia + Britannica 3+ बहु-स्रोत
  3. 10111011 ईस्वी-शिलालेख — मन्दिर 600+ कर्मचारी (पुजारी, गायक, नर्तक) नियुक्ति-शिलालेखWikipedia + Sahapedia बहु-स्रोत
  4. 1035राजेन्द्र चोल प्रथम-निर्मित गङ्गैकोण्डचोलपुरम् बृहदीश्वर मन्दिर (UNESCO सङ्ग)Wikipedia Gangaikondacholapuram + ASI
  5. 1279पाण्ड्य-विजय; तत्पश्चात् 13वीं-शताब्दी पेरिय-नायकि अम्मन-शाला-निर्माणWikipedia + IGNCA बहु-स्रोत
  6. 165016-17वीं-शताब्दी नायक-काल — सुब्रह्मण्य + विनायक + नन्दी-मण्डप-शाला-योग्य-निर्माण; अच्युतप्पा एवं मल्लप्पा-शिलालेखWikipedia + ASI बहु-स्रोत
  7. 175018वीं-शताब्दी मराठा-काल — पेरिय-नायकि अम्मन-शाला-छत-चित्रांकनWikipedia + IGNCA बहु-स्रोत
  8. 1987UNESCO विश्व-धरोहर स्थल-घोषणा (एकल बृहदीश्वर तञ्जावूर)UNESCO + ASI बहु-स्रोत
  9. 2004UNESCO विश्व-धरोहर-विस्तार 'महान् जीवित चोल मन्दिर'-समूह (बृहदीश्वर तञ्जावूर + बृहदीश्वर गङ्गैकोण्डचोलपुरम् + ऐरावतेश्वर दारासुरम्)UNESCO + ASI बहु-स्रोत
  10. 2010मन्दिर-1000-वर्ष-पूर्ण समारोह (1010-2010); भारत-सरकार-स्मारक-डाक-टिकट जारीWikipedia बहु-स्रोत
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 से 20:30 तक · मध्याह्न विश्राम 12:30-16:00

मन्दिर-उद्घाटन + प्रात:-दर्शन06:00
दैनिक
उषाकाल-पूजा08:30
दैनिक
उच्च-पूजा (मध्याह्न)12:00
दैनिक
(मन्दिर-मध्याह्न-विश्राम)12:30-16:00
दैनिक
सायं-दर्शन-पुनरारम्भ16:00
दैनिक
सायं-पूजा18:00
दैनिक
अर्द्ध-जाम-पूजा (मन्दिर-समापन)20:30
दैनिक
प्रदोष-पूजात्रयोदशी-तिथि सायं
द्वि-मासिक

वस्त्र-संहिता: पारम्परिक भारतीय-वस्त्र अनुशंसित: पुरुष धोती/पैण्ट; स्त्री साड़ी/सलवार-सूट/लम्बी-स्कर्ट; शॉर्ट्स/स्लीवलेस-निषिद्ध (गर्भगृह-प्रवेश-काल विशेष-कठोर)

फोटोग्राफी: बाह्य-प्राङ्गण फोटोग्राफी अनुमत; गर्भगृह + भित्ति-चित्र-गैलरी-फोटोग्राफी निषिद्ध (ASI-नियम)

विशेष नियम: ASI केन्द्रीय-संरक्षित स्मारक — निःशुल्क प्रवेश; धार्मिक-गतिविधि HR&CE-शासित; गर्भगृह + भित्ति-चित्र-गैलरी-फोटोग्राफी निषिद्ध; मध्याह्न-विश्राम 12:30-16:00 कोई-पूजा-नहीं (बाह्य-प्राङ्गण-दर्शन अनुमत); विमान-कलश-शिखर-दूर-स्थल से दर्शन-केवल

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-12:30 + 16:00-20:30

विशाल-लिङ्ग (~8.7 मी / 29 फीट) पेरुवुदैयार-दर्शन; एकल-शिला नन्दी (~3.65 मी ऊँचा; 16-17वीं-शताब्दी-नायक-निर्मित) + विमान-शीर्ष कलश-दर्शन।

विशेष अभिषेक + अर्चना सेवा

व्यक्तिगत/परिवार-नाम-गोत्र-सङ्ग; तमिलनाडु HR&CE-कार्यालय-बुकिंग।

ASI-संरक्षित स्मारक-यात्रा (बाह्य-प्राङ्गण)निःशुल्क

विमान (63-66 मी / 208-216 फीट); 16 मञ्जिल; 13 शिखर-तपरिङ्ग वर्ग; 80-टन कलश-शिला-शीर्ष; मन्दिर-प्राङ्गण-शिलालेख-दीवार (राजराज + राजेन्द्र + विक्रम + कुलोत्तुङ्ग + पाण्ड्य + नायक); पेरिय-नायकि अम्मन-शाला; करुवूर देवर-शाला; मराठा-काल भित्ति-चित्र; ASI-मार्गदर्शक उपलब्ध।

प्रदोष-पूजा-दर्शननिःशुल्क

त्रयोदशी-तिथि सूर्यास्त-पूर्व विशेष-अभिषेक एवं नन्दी-समीप दर्शन।

सडैय विऴा-वार्षिक उत्सव-दर्शन (राजराज-जन्म-वर्षगाँठ)निःशुल्क

ऐप्पसि-सडयम् (अक्टूबर-नवंबर) — मुख्य-कार्यक्रम: पेरुवुदैयार-अभिषेक + पेरुनदीप वऴिपाडु + स्वामी पुरप्पाडु।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महा शिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी; 2026: 15 फरवरी 2026

रात्रि-पर्यन्त चार-प्रहर-अभिषेक एवं जागरण; मन्दिर-प्रमुख-वार्षिक उत्सव

सडैय विऴा (राजराज-जन्म-वर्षगाँठ-वार्षिक उत्सव)ऐप्पसि (अक्टूबर-नवंबर) सडयम्-नक्षत्र-दिन

985 ईस्वी से वार्षिक; पेरुवुदैयार-अभिषेक + पेरुनदीप वऴिपाडु (विशाल-दीप-पूजा) + स्वामी पुरप्पाडु (उत्सव-मूर्ति-शोभायात्रा); utsav.gov.in (आधिकारिक) पर सूचीबद्ध

ब्रह्मोत्सवम् (18-दिवसीय)चित्तिरै (अप्रैल-मई) vs ऐप्पसि (अक्टूबर-नवंबर) — स्रोत-असम्मति

18-दिवसीय वार्षिक उत्सव; उत्सव-मूर्ति-शोभायात्रा

आनी तिरुमञ्जनम्आनी (जून-जुलाई)

विशेष-अभिषेक-दिन

पङ्गुनि उत्तिरम्पङ्गुनि (मार्च-अप्रैल)

उत्तर-फाल्गुन-नक्षत्र-दिन उत्सव

आरुद्र दर्शनम्मार्गऴि (दिसंबर-जनवरी)

तिरुवादिरै-नक्षत्र-दिन शिव-नटराज-दर्शन-उत्सव; तमिल-शैव-केन्द्रीय

प्रदोष-पूजा (द्वि-मासिक)त्रयोदशी-तिथि

सूर्यास्त-पूर्व विशेष-अभिषेक

वार्षिक नृत्य-उत्सवजनवरी-फरवरी

तमिलनाडु पर्यटन-आयोजित मन्दिर-नृत्य-उत्सव

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

विश्व-धरोहर दक्षिण-मेरु-दर्शन-संकल्प

UNESCO विश्व-धरोहर स्थल (1987/2004 'महान् जीवित चोल मन्दिर'-समूह); 'दक्षिण मेरु' उपाधि-धारी; 63-66 मी / 208-216 फीट विमान + 80-टन कलश-शीर्ष = विश्व-इंजीनियरिंग-चमत्कार-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: UNESCO + ASI + Wikipedia + Britannica बहु-स्रोत

विशाल-लिङ्ग-अभिषेक-संकल्प (भारत के सर्वाधिक-वृहत् एकल-शिला-लिङ्गों में)

~8.7 मी (29 फीट) ऊँचा एकल-शिला-लिङ्ग; गर्भगृह की दो-मञ्जिलें घेरने वाला; विशाल-शिव-अभिषेक-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: ASI + Wikipedia बहु-स्रोत

महा शिवरात्रि-व्रत-संकल्प (वार्षिक 15 फरवरी 2026)

रात्रि-पर्यन्त चार-प्रहर-अभिषेक एवं जागरण; मन्दिर-प्रमुख-वार्षिक उत्सव

स्रोत: Tamil Nadu Tourism + परम्परा

सडैय विऴा-दर्शन-संकल्प (राजराज चोल-जन्म-वर्षगाँठ)

ऐप्पसि-सडयम् (अक्टूबर-नवंबर) — 985 ईस्वी से वार्षिक मनाया जा रहा है; पेरुवुदैयार-अभिषेक + पेरुनदीप वऴिपाडु + स्वामी पुरप्पाडु; राजराज-चोल-स्मरण-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: utsav.gov.in (आधिकारिक) + Wikipedia बहु-स्रोत

तिरुविसैप्पा (9वाँ तिरुमुरै) पाठ-संकल्प

करुवूर देवर-कृत बृहदीश्वर मन्दिर-समर्पित तिरुविसैप्पा-स्तोत्र-संग्रह; तमिल शैव-सिद्धान्त-केन्द्रीय; पाठ-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Wikipedia + Tamil Shaiva परम्परा

महान् जीवित चोल मन्दिर त्रि-तीर्थयात्रा-संकल्प (UNESCO)

बृहदीश्वर तञ्जावूर + बृहदीश्वर गङ्गैकोण्डचोलपुरम् + ऐरावतेश्वर दारासुरम् = UNESCO-समूह; चोल-वास्तुकला-शिखर-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: UNESCO + ASI बहु-स्रोत

प्रदोष-पूजा-संकल्प (द्वि-मासिक)

त्रयोदशी-तिथि सूर्यास्त-पूर्व विशेष-अभिषेक; शिव-कृपा-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: शिव-पुराण + परम्परा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • तिरुविसैप्पा (9वाँ तिरुमुरै)शैव-स्तोत्र-संग्रहकरुवूर देवर (राजराज चोल प्रथम-गुरु); शैव-तिरुमुरै-12-संग्रहों में 9वाँइस मन्दिर हेतुबृहदीश्वर मन्दिर-समर्पित स्तोत्र-संग्रह; तमिल शैव-सिद्धान्त-केन्द्रीय
  • शिव पञ्चाक्षरी मन्त्र (नम: शिवाय)पञ्चाक्षरी मन्त्रशैव-परम्परा
  • शिव-तण्डव-स्तोत्रस्तोत्ररावण-कृत पारम्परिक-कथन
  • महान्यास-रुद्र (श्री-रुद्रम् + चमकम्)वेद-स्तोत्रतैत्तिरीय-संहिता (कृष्ण-यजुर्वेद)विशाल-लिङ्ग-अभिषेक-काल पाठ-परम्परा
  • बृहदीश्वर अष्टकम्अष्टक-स्तोत्रतञ्जावूर-शैव-परम्पराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

पेरिय-नायकि अम्मन-शाला (13वीं-शताब्दी पाण्ड्य-निर्मित)50 मी

मूल-राजराज-मन्दिर-पश्चात् पाण्ड्य-विजय-काल (1279-पश्चात्) निर्मित अम्मन-शाला; नायक-काल बाह्य-मण्डप-योग; मराठा-काल छत-चित्रांकन

सुब्रह्मण्य-शाला (16-17वीं-शताब्दी नायक-काल-निर्मित)30 मी

नायक-काल-निर्मित मुरुगन-शाला

विनायक-शाला + चण्डेश्वर-शाला + करुवूर देवर-शाला50 मी

उप-शालाएँ; करुवूर देवर = राजराज-गुरु एवं तिरुविसैप्पा-रचयिता

नन्दी-मण्डप (16-17वीं-शताब्दी नायक-निर्मित)100 मी

एकल-शिला नन्दी (~3.65 मी ऊँचा × 5.94 मी लम्बा × 2.59 मी चौड़ा; ~25 टन); नायक-काल-योग

ऐरावतेश्वर मन्दिर — दारासुरम् (UNESCO 'महान् जीवित चोल मन्दिर')35 किमी

राजराज द्वितीय-निर्मित (1143-1173 ईस्वी); UNESCO-त्रि-समूह-तीर्थ

बृहदीश्वर मन्दिर — गङ्गैकोण्डचोलपुरम् (UNESCO 'महान् जीवित चोल मन्दिर')75 किमी

राजेन्द्र चोल प्रथम-निर्मित (~1035 ईस्वी); UNESCO-त्रि-समूह-तीर्थ

कुम्भकोणम् (नवग्रह-मन्दिर-त्रिकोण-केन्द्र)40 किमी

तमिलनाडु के 9 नवग्रह-मन्दिर-त्रिकोण-केन्द्र; आदि-कुम्भेश्वर मन्दिर

तञ्जावूर शाही महल (राजमहल; बृहदीश्वर मन्दिर-समीप)2 किमी

नायक एवं मराठा-काल राजमहल; तञ्जावूर कला-संग्रहालय + सरस्वती महल पुस्तकालय

UNESCO 'महान् जीवित चोल मन्दिर' त्रि-तीर्थयात्रा

मूल-तीर्थ (1010 ईस्वी राजराज-निर्मित) — बृहदीश्वर तञ्जावूर + बृहदीश्वर गङ्गैकोण्डचोलपुरम् (1035 राजेन्द्र) + ऐरावतेश्वर दारासुरम् (1143-1173 राजराज द्वितीय)

3 मंदिर

तमिलनाडु शैव-वास्तुकला-दर्शन-तीर्थयात्रा (बृहदीश्वर + पाडल पेट्र स्थलम्-त्रिकोण-केन्द्र)

11वीं-शताब्दी-निर्मित (नायन्मार-काल-पश्चात्); पाडल पेट्र स्थलम्-में-NHI परन्तु तमिल शैव-वास्तुकला-शिखर-तीर्थ

4 मंदिर

कावेरी-डेल्टा शैव-वैष्णव-तीर्थयात्रा (तञ्जावूर + कुम्भकोणम् + तिरुवारूर + सिर्कऴि)

कावेरी-डेल्टा-केन्द्र-शैव-वास्तुकला-तीर्थ

6 मंदिर

चोल साम्राज्य ऐतिहासिक-वास्तुकला-यात्रा

राजराज चोल प्रथम-राजधानी (985-1012); चोल साम्राज्य-शिखर-काल-स्मारक

5 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री बृहदीश्वर मन्दिर, तञ्जावूर, तमिलनाडु — PIN 613001 (कावेरी-नदी दक्षिण-तट)
हवाई अड्डा
तिरुचिरापल्ली (तिरुची) अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (TRZ)
रेलवे
तञ्जावूर जङ्क्शन (TJ) रेलवे स्टेशन — मन्दिर-से 1.5 किमी
बस-स्टैण्ड
तञ्जावूर पुराना बस-स्टैण्ड (मन्दिर-से 1 किमी); तमिलनाडु RTC नियमित-बस-सेवा
उत्तम ऋतु
महा शिवरात्रि 15 फरवरी 2026; ब्रह्मोत्सवम् (~मार्च-अप्रैल-मई); आनी तिरुमञ्जनम् (जून-जुलाई); सडैय विऴा (अक्टूबर-नवंबर सडयम्); आरुद्र दर्शनम् (दिसंबर-जनवरी); शीत-मासों (नवंबर-फरवरी) में यात्रा-आरामदायक; पावस-ऋतु (जून-सितंबर) में मध्यम-वर्षा
प्रबन्धन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) केन्द्रीय-संरक्षित स्मारक (निःशुल्क प्रवेश; स्मारक-संरक्षण); धार्मिक-गतिविधि तमिलनाडु हिन्दू धार्मिक एवं चैरिटेबल एण्डाउमेण्ट्स विभाग (HR&CE)-शासित; UNESCO विश्व-धरोहर स्थल 1987 (2004 'महान् जीवित चोल मन्दिर'-विस्तार)
1.5 किमीThanjavur Junction Railway
60 किमीTiruchirappalli
190 किमीMadurai
170 किमीPondicherry
40 किमीKumbakonam
75 किमीGangaikondacholapuram
35 किमीAiravateshwara Darasuram
270 किमीRameshwaram
340 किमीChennai