मुद्गल-पुराण + गणेश-पुराण (अष्ट-क्षेत्र-गणनना)
थेऊर अष्ट-क्षेत्रों में सम्मिलित; चिन्तामणि-कथा-वर्णन
Theur · Maharashtra
श्री चिन्तामणि विनायक मन्दिर — थेऊर, हवेली तालुका, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र (भीमा + मुला-मुथा सङ्गम)
चिन्तामणि-विनायक — अष्टविनायक का पञ्चम तीर्थ; 'चिन्ता' (व्यथा) + 'मणि' (रत्न) = व्यथा-हरण-रत्न; पेशवा माधवराव I का इष्ट-देव एवं समाधि-स्थल
अन्य नाम: चिन्तामणि-विनायक · चिन्तामणि गणपति · थेऊर गणपति

इस मन्दिर की विशेषता
श्री चिन्तामणि-विनायक गणेश — स्वयंभू पाषाण-मूर्ति, पूर्व-मुख, वामामुखी (बायाँ-शुण्ड), पद्मासन; नेत्रों में हीरे एवं कार्बङ्कल; सिन्दूर-लेप; ऋद्धि एवं सिद्धि पार्श्व-स्थित
स्वयंभू पाषाण-मूर्ति — व्यथा-हरण-स्वरूप; मानसिक-शान्ति-दाता; अन्य अष्टविनायक की तुलना में कुछ छोटी एवं सरल-तक्षित-स्वरूप
सम्प्रदाय: गाणपत्य-सम्प्रदाय — अष्टविनायक यात्रा-क्रम का पञ्चम तीर्थ; मोरया गोसावी 42-दिवसीय निर्जल-तपस्या-स्थल
थेऊर अष्ट-क्षेत्रों में सम्मिलित; चिन्तामणि-कथा-वर्णन
ऋषि कपिल के पास इच्छा-पूर्ति-रत्न चिन्तामणि था; राजा अभिजित + गुणवती-पुत्र राजा गण (गुण/गणासुर) — शिव-भक्त बलवान्-लोभी-योद्धा। कपिल ने चिन्तामणि-शक्ति से गण-सेना को दिव्य-भोज दिया; गण ने रत्न-माँग की; कपिल के अस्वीकार पर बल-पूर्वक छीना। कपिल ने इष्ट-देव गणेश की तपस्या की; गणेश ने सेना-सहित प्रकट-होकर गणासुर को पराजित-कर रत्न-पुनः-प्राप्ति की एवं कपिल को सौंपा। कपिल ने रत्न गणेश के कण्ठ में बाँध दिया (या रखने से इन्कार-कर गणेश से थेऊर-नित्य-निवास की प्रार्थना की) → चिन्तामणि-विनायक नामकरण।
ब्रह्मा का मन अशान्त-चञ्चल; यहाँ गणेश-ध्यान-तपस्या; मन 'स्थवर' (स्थिर) हुआ → स्थवर-अपभ्रंश थेऊर नामकरण। मानसिक-शान्ति-तीर्थ-प्रतिष्ठा।
गौतम-शाप-प्राप्त इन्द्र (अहल्या-संग) को सहस्र-छिद्र-कुरूपता; गणेश-उपदेश पर कदम्ब-वृक्ष के नीचे गणेश-पूजा-कर शुद्धि; प्राचीन-नाम कदम्ब-नगर; इन्द्र-स्नान-स्थल चिन्तामणि सरोवर।
05:00 से 22:00 तक
विशेष नियम: गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; सङ्कष्टी/विनायकी/चतुर्थी-काल छबीना-शोभायात्रा; भक्त-ध्यान-कक्ष परिसर में उपलब्ध (मानसिक-शान्ति-तीर्थ-परम्परा-अनुरूप)
अष्टविनायक में सर्वाधिक-वृहत् परिसरों में सम्मिलित।
चिञ्चवड देवस्थान ट्रस्ट-कार्यालय बुकिंग।
परिसर में समर्पित ध्यान-कक्ष; चिन्तामणि-व्यथा-हरण-तीर्थ-परम्परा-अनुरूप।
रमाबाई पेशवा-सती-स्मारक; मन्दिर से लगभग 0.8 किमी।
माधवराव I का अन्तिम-निवास-स्थल; ऐतिहासिक-दर्शन।
परिसर के समीप मोरया-तपस्या-स्थल; गाणपत्य-सम्प्रदाय-केन्द्र।
सोमवार 14 सितंबर 2026 गणेश-चतुर्थी; 7-दिवसीय वार्षिक-प्रमुख-समारोह; सहस्र मोदक होमम् थेऊर का विशिष्ट-अनुष्ठान; अनन्त चतुर्दशी 25 सितंबर 2026।
गुरुवार 22 जनवरी 2026 माघी चतुर्थी; महाभिषेकम्; माघ शुक्ल चतुर्थी पर पिरंगुटकर देव-कुल की 10-भुज-मूर्ति चिन्तामणि से भेंट; माघ शुक्ल अष्टमी पर मङ्गलमूर्ति-रथ-शोभायात्रा-समापन।
4-द्वार तीर्थयात्रा: असराई देवी (कोरेगाँव E), ओजराई देवी (आलंदी S), मांजराई (मांजरी W), महातारी आई (थेऊर N) — दिक्-संरक्षक-देवियाँ।
पेशवा माधवराव I (18 नवंबर 1772) एवं रमाबाई-सती (उसी-दिन) की स्मृति-दिवस; वार्षिक-स्मरण।
छबीना अनुष्ठान-शोभायात्रा।
पेशवा-कालीन रत्नाभूषण-अलङ्करण।
'चिन्तामणि' (चिन्ता-हरण-रत्न) — व्यथा-निवारण; ब्रह्मा-शान्ति-तपस्या-स्थापना अनुसार मानसिक-शान्ति-तीर्थ; परिसर-ध्यान-कक्ष-उपलब्ध
स्रोत: स्थल-पुराण + TemplePurohit बहु-स्रोत
कपिल-चिन्तामणि-रत्न इच्छा-पूर्ति-शक्ति-प्रतीक; इच्छा-पूर्ति-संकल्प-तीर्थ
स्रोत: कपिल-कथा + ashtavinayak.net
माधवराव I क्षय-रोग-काल निरन्तर दूधाभिषेक-अनुष्ठान-परम्परा; रोग-निवारण-संकल्प; अनेक-स्वास्थ्य-प्राप्तियों के पश्चात् सभा-मण्डप-निर्माण-कृतज्ञता
स्रोत: Wikipedia Madhavrao I + Chinchwad Devasthan
मोरया गोसावी की 42-दिवसीय निर्जल-तपस्या-स्थल — गाणपत्य-सम्प्रदाय-केन्द्र; भक्ति-दृढ़ता-संकल्प
स्रोत: Chinchwad Devasthan + Wikipedia Morya Gosavi
विघ्न-हर्ता गणेश-स्वरूप; पेशवा माधवराव की युद्ध-पूर्व-दर्शन-परम्परा अनुसार कार्य-सिद्धि-संकल्प
स्रोत: Wikipedia + Maharashtra Tourism
रमाबाई पेशवा-सती-स्मारक एवं उद्यान; पेशवा माधवराव-चिता-स्थल
माधवराव I का अन्तिम-निवास-स्थल; अब चिञ्चवड देवस्थान ट्रस्ट-कार्यालय
गाणपत्य-सम्प्रदाय-केन्द्र; मोरया-तपस्या-स्थल
इन्द्र-कथा-स्नान-तीर्थ; पवित्र-सरोवर
परिसर-गौण-मन्दिर
बहु-शाला-गौण-दर्शन; अष्टविनायक में सर्वाधिक-गौण-शाला-समूह
त्रिवेणी-सङ्गम-समान पवित्र-सङ्गम; स्नान-तीर्थ
अष्टविनायक यात्रा-क्रम का अग्रिम-अष्टम-तीर्थ
पञ्चम तीर्थ; क्रम: 1. मोरगाँव → 2. सिद्धटेक → 3. पाली → 4. महाड → 5. **थेऊर (यह)** → 6. लेण्याद्री → 7. ओझर → 8. रांजणगाँव → मोरगाँव-समापन
8 मंदिर · 3 दिन
पुणे से सर्वाधिक-सुलभ युग्म — थेऊर (25 किमी) + रांजणगाँव (75 किमी)
2 मंदिर
मोरया गोसावी की मासिक चिञ्चवड-मोरगाँव-यात्रा के मध्य प्रत्येक-चन्द्र-चतुर्थी पर थेऊर-तप; गाणपत्य-सम्प्रदाय-केन्द्र-त्रिकोण
3 मंदिर
थेऊर N (महातारी आई) + असराई देवी (कोरेगाँव E) + ओजराई देवी (आलंदी S) + मांजराई (मांजरी W) — दिक्-संरक्षक-देवी-यात्रा
4 मंदिर