ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

Dwarka · Gujarat

श्री द्वारकाधीश मंदिर

श्री द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर)

द्वारकाधीश / जगत् मंदिर / त्रिलोकसुन्दरम्

अन्य नाम: जगत् मंदिर · द्वारकाधीश · द्वारका-नाथ · रणछोड़राय

  • Char Dham
  • 7 Saptapuri
  • 108 Divya Desam
श्री द्वारकाधीश मंदिर
दर्शन समय
06:30 – 21:30
स्वरूप
चतुर्भुज विष्णु-स्वरूप
स्थान
Dwarka · Gujarat
उत्तम ऋतु
नवम्बर-फरवरी सर्वोत्तम
काल
मूल मंदिर: 200 ईसा-पूर्व

इस मन्दिर की विशेषता

  • Char Dham (4 मूल — आदि शंकराचार्य निर्धारित पश्चिम-धाम)
  • 7 Saptapuri (मोक्षदायिनी सप्त-पुरियाँ)
  • 108 Divya Desam (98वाँ)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री द्वारकाधीश (श्रीकृष्ण — द्वारका के अधिपति 'रणछोड़राय' स्वरूप में)

चतुर्भुज विष्णु-स्वरूप; काले रंग का विग्रह

सम्प्रदाय: वैष्णव

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

श्रीमद् भागवत पुराण

स्कन्ध 10 + 11 — श्रीकृष्ण की द्वारका-स्थापना; मथुरा से प्रस्थान कर समुद्र-तट पर 'द्वारवती' का निर्माण; अन्तिम महाप्रस्थान

महाभारत

मौसल पर्व — यदु वंश का अन्त एवं द्वारका का समुद्र-में-निमज्जन

हरिवंश पुराण

द्वारका-वर्णन एवं श्रीकृष्ण की राज-लीला

मत्स्य पुराण एवं वायु पुराण

द्वारका के समुद्र-निमज्जन का संदर्भ

स्कन्द पुराण

द्वारका माहात्म्य

संत एवं परम्परा

  • वज्रनाभ — श्रीकृष्ण के प्रपौत्र; पारंपरिक मान्यता अनुसार 200 ईसा-पूर्व मूल जगत् मंदिर के संस्थापक
  • आदि शंकराचार्य (8वीं-9वीं शताब्दी) — द्वारका को चार धामों के पश्चिम-धाम के रूप में प्रतिष्ठित; 'पश्चिमाम्नाय शारदा पीठम्' (द्वारका मठ) की स्थापना — 4 चातुराम्नाय पीठों में पश्चिमी मठ; साम वेद का अधिकार-क्षेत्र; मूल महावाक्य 'तत्त्वमसि'
  • मीराबाई — 16वीं शताब्दी की राजस्थानी कृष्ण-भक्त सन्त; अन्तिम जीवन-काल द्वारका में; मान्यता: यहीं श्रीकृष्ण-विग्रह में लीन हुईं

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. -200लगभग 200 ईसा-पूर्व — पुरातत्वीय साक्ष्य के अनुसार मूल जगत् मंदिर का निर्माण-काल; परंपरानुसार श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने मूल मंदिर बनवायाविकिपीडिया
  2. 8008वीं-9वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा द्वारका को चार धामों के पश्चिम-धाम के रूप में प्रतिष्ठित; पश्चिमाम्नाय शारदा पीठम् की स्थापनाविकिपीडिया Dwarka Sharada Peetham
  3. 150015वीं-16वीं शताब्दी — वर्तमान 5-मंजिला पाषाण-संरचना (चूना-पत्थर + बलुआ-पत्थर) का निर्माण: ~78 मीटर ऊँचा, 72 स्तम्भों पर आधारित, 29×23 मीटर आधार-क्षेत्र; मारु-गुर्जर (चालुक्य) शिल्प-शैली; शिखर पर त्रिकोणीय ध्वजा जो दिन में अनेक बार बदली जाती हैविकिपीडिया
  4. 19901983-1990 — भारतीय राष्ट्रीय समुद्र-विज्ञान संस्थान (NIO) की समुद्री पुरातत्व इकाई द्वारा 12 अभियानों में द्वारका एवं बेट द्वारका के समुद्र-तल का उत्खनन; डॉ॰ एस॰आर॰ राव के नेतृत्व में अर्ध-वृत्ताकार, आयताकार एवं वर्गाकार पाषाण-संरचनाएँ खोजी गयीं; थर्मो-लुमिनेसेंस तिथि-निर्धारण से 1500 ईसा-पूर्व का प्राचीन बन्दर-नगर पुष्ट — महाभारत/हरिवंश/मत्स्य-वायु पुराण के द्वारका-निमज्जन संदर्भ की प्रामाणिक पुष्टिNIO + Wiki Dvaraka + ResearchGate
  5. 202425 फरवरी 2024 — प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 'सुदर्शन सेतु' का उद्घाटन — भारत का सबसे लंबा केबल-स्टेड पुल; ओखा मुख्य-भूमि से बेट द्वारका द्वीप तक अरब सागर पर 2,320 मीटर (2.32 किमी); निर्माण-लागत ₹979 करोड़; चौड़ाई 27.2 मी (दोनों दिशाओं में 2-2 लेन + 2.5 मी फुटपाथ प्रत्येक ओर); फुटपाथ पर भगवद्गीता के श्लोक एवं श्रीकृष्ण के चित्र। पहले 30 किमी की नाव-यात्रा अब 24×7 सड़क-संपर्क।विकिपीडिया Sudarshan Setu + Business Today + CMO Gujarat
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:30 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-17:00 (मध्याह्न विश्राम)

मंगला आरती06:30-07:00
दैनिक

दिन की प्रथम आरती

अभिषेक पूजा (स्नान विधि)07:00 के बाद
दैनिक
शृंगार आरती10:30-10:45
दैनिक

बहु-स्रोत सहमत

राजभोग12:00-12:20
दैनिक
उत्थापन प्रथम दर्शन (सायं)17:00
दैनिक
संध्या आरती19:30-19:45
दैनिक
शयन आरती20:30-20:35
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती; मंदिर 21:30 बजे बन्द

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य (निःशुल्क) दर्शननिःशुल्क
समय
06:30-13:00 एवं 17:00-21:30
उपयुक्त
सभी भक्त

मंदिर के बाहर से ही प्रवेश; गोमती-घाट के निकट से चढ़ाई। दर्शन निःशुल्क।

VIP विशेष दर्शन
उपयुक्त
समय-सीमित भक्त

उपलब्धता अनुसार। मूल्य आधिकारिक काउंटर पर पुष्टि करें।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

श्री कृष्ण जन्माष्टमीभाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अगस्त-सितंबर)

मंदिर का सर्वोच्च वार्षिक पर्व — श्रीकृष्ण-जन्मोत्सव। आधी-रात ठीक 12:00 बजे श्रीकृष्ण के जन्म का स्वागत; मंगला आरती; पूर्ण नगर-सजावट; देश-भर से लाखों भक्त। मंदिर महाभोग के बाद रात्रि 2:00 बजे बन्द होता है। 2026 — स्मार्त परंपरा: 3 सितंबर गुरुवार; वैष्णव परंपरा एवं ISKCON: 4 सितंबर शुक्रवार। द्वारकाधीश (वैष्णव) में 4 सितंबर शुक्रवार।

अन्नकूट उत्सवकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के अगले दिन)

गोवर्धन-पर्वत-कथा का स्मरण; श्रीकृष्ण को 56 भोग एवं अन्न-पर्वत का अर्पण

तुलसी विवाहकार्तिक शुक्ल द्वादशी (देवोत्थानी एकादशी के अगले दिन)

तुलसी-शालिग्राम विवाह; द्वारकाधीश-मंदिर में विशेष आयोजन

अक्षय तृतीयावैशाख शुक्ल तृतीया

मंदिर में चन्दन-लेप का आरम्भ — ग्रीष्म-काल हेतु शीतल-लेप परंपरा

होली / डोल पूर्णिमा

वैष्णव परंपरा में श्रीकृष्ण की रंग-लीला का स्मरण

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

मोक्ष एवं वैकुण्ठ-प्राप्ति

द्वारका 7 सप्तपुरियों में मोक्षदायिनी नगरी — श्रीकृष्ण-दर्शन से मोक्ष-मार्ग का संकल्प; द्वारकाधीश-दर्शन-मात्र से जन्म-मरण-चक्र की मुक्ति

स्रोत: श्रीमद् भागवत पुराण + स्कन्द पुराण द्वारका माहात्म्य

चार-धाम यात्रा के पूर्ण-फल हेतु पश्चिम-धाम

आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मूल चार-धामों में पश्चिम-धाम के रूप में द्वारका; चारों धामों की पूर्ण यात्रा से मुक्ति

स्रोत: आदि शंकराचार्य परंपरा

विष्णु-भक्ति एवं रणछोड़राय-शरण

द्वारका-कृष्ण का 'रणछोड़राय' स्वरूप — जरासंध से रण-त्याग कर भक्तों की रक्षा; भक्तों के लिए 'शरणागत-वत्सल' का आदर्श

स्रोत: श्रीमद् भागवत पुराण + हरिवंश पुराण

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — द्वादशाक्षर मंत्रमंत्रश्रीमद् भागवत पुराण; विष्णु-उपासना का सर्वोच्च मंत्रइस मन्दिर हेतुद्वारका-कृष्ण उपासना का मूल मंत्र
  • विष्णु सहस्रनामस्तोत्रमहाभारत, अनुशासन पर्व — 1,000 नाम
  • श्रीमद् भगवद्गीताग्रन्थमहाभारत, भीष्म पर्व — श्रीकृष्ण के 700 श्लोकद्वारकाधीश के उपदेश; सुदर्शन सेतु के फुटपाथ पर भी अंकित
  • श्री द्वारकाधीश अष्टकम् / स्तोत्रस्तोत्रस्थल-परंपराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

गोमती घाट (Gomati Ghat)100 मी

द्वारकाधीश दर्शन से पूर्व पवित्र स्नान की पारंपरिक अनिवार्यता; गोमती-पश्चिमी से 56 सीढ़ी (बावन-पाहाच) से मंदिर का स्वर्ग-द्वार

स्वर्ग-द्वार (Swarga Dwara) — दक्षिण-द्वार50 मी

मंदिर के दक्षिण-मुख्य प्रवेश-द्वार के 56 सीढ़ी का मार्ग; मान्यता: स्वर्ग के मार्ग का प्रवेश। (विकिपीडिया एवं बहु-स्रोत पुष्टि)

बेट द्वारका (Beyt Dwarka / Shankhodhar)30 किमी

श्रीकृष्ण का निवास-स्थल; 'बेट' = उपहार (मित्र सुदामा द्वारा प्रदत्त मान्यता); प्रमुख कृष्ण-मंदिर। 25 फरवरी 2024 से सुदर्शन सेतु (₹979 करोड़, 2.32 किमी केबल-स्टेड) के माध्यम से 24×7 सड़क-संपर्क। तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है बेट द्वारका के बिना।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग18 किमी

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित। शिव पुराण की दारुक-असुर एवं भक्त सुप्रिय की कथा से सम्बद्ध 'दारुकावन' स्थल। द्वारका-नागेश्वर यात्रा संयुक्त रूप से की जाती है।

पश्चिमाम्नाय शारदा पीठम् (द्वारका शारदा मठ)1.5 किमी

आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित 4 चातुराम्नाय पीठों में पश्चिमी मठ; साम वेद का अधिकार-क्षेत्र; मूल महावाक्य 'तत्त्वमसि'

रुक्मिणी देवी मंदिर2 किमी

श्रीकृष्ण की पट्टरानी रुक्मिणी का प्राचीन मंदिर; द्वारका-यात्रा के साथ अनिवार्य

सुदर्शन सेतु (25 फरवरी 2024)30 किमी

PM श्री मोदी द्वारा 25 फरवरी 2024 को उद्घाटित — भारत का सबसे लंबा केबल-स्टेड पुल; 2,320 मीटर लम्बा, 27.2 मी चौड़ा; ₹979 करोड़ निर्माण-लागत; फुटपाथ पर भगवद्गीता के श्लोक एवं श्रीकृष्ण-चित्रों से सज्जित

ISKCON द्वारका मंदिर1 किमी

गौड़ीय वैष्णव-परंपरा का आधुनिक कृष्ण-मंदिर

मूल चार धाम (आदि शंकराचार्य निर्धारित)

पश्चिम-धाम — द्वारका। अन्य 3: पुरी जगन्नाथ (पूर्व), रामेश्वरम् (दक्षिण), बद्रीनाथ (उत्तर)। आदि शंकराचार्य द्वारा सम्पूर्ण भारत-राष्ट्र की भू-सांस्कृतिक एकता हेतु प्रतिष्ठित।

4 मंदिर

सप्तपुरी मोक्षदायिनी यात्रा

7 मोक्षदायिनी नगरियों में द्वारका; अन्य 6: अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, काँची, उज्जैन

7 मंदिर

108 दिव्य देशम् यात्रा

98वाँ दिव्य देशम् — आलवारों के नालायिर दिव्य प्रबन्धम् में स्तुत

108 मंदिर

द्वारका तीर्थ-समूह (द्वारकाधीश + बेट द्वारका + नागेश्वर + शारदा पीठ + रुक्मिणी मंदिर)

केन्द्रीय; 5-तीर्थ-समूह की पूर्ण यात्रा 2-3 दिनों में

गुजरात ज्योतिर्लिंग-धाम यात्रा (नागेश्वर + सोमनाथ + द्वारका + अम्बाजी)

द्वारका मुख्य कृष्ण-धाम; 2 ज्योतिर्लिंग (नागेश्वर + सोमनाथ) के साथ संयुक्त यात्रा

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर), द्वारका — 361335, देवभूमि द्वारका जिला, गुजरात
हवाई अड्डा
जामनगर हवाई अड्डा (JGA) — द्वारका से ~140 किमी सड़क मार्ग। राजकोट हवाई अड्डा (RAJ) ~230 किमी। आगामी: द्वारका-निकट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माणाधीन।
रेलवे
द्वारका रेलवे स्टेशन (DWK) — मंदिर से ~2 किमी; पश्चिम रेलवे का प्रमुख टर्मिनस
उत्तम ऋतु
नवम्बर-फरवरी सर्वोत्तम; तापमान 18-30°C। मार्च-जून अत्यन्त गर्म (35-42°C); जुलाई-सितंबर मानसून। जन्माष्टमी (अगस्त-सितंबर) में पीक भीड़।
वेबसाइट
https://dwarkadhishji.org
30 किमीBet Dwarka
18 किमीNageshwar Jyotirlinga
35 किमीOkha
140 किमीJamnagar
230 किमीRajkot
440 किमीAhmedabad
235 किमीSomnath
985 किमीMumbai
1145 किमीDelhi
श्री द्वारकाधीश मंदिर — दर्शन, आरती, इतिहास एवं यात्रा | Pauranik | Pauranik