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Gangotri (Uttarkashi District) · Uttarakhand

श्री गंगोत्री धाम मंदिर

गंगोत्री / गंगा देवी / भागीरथी — स्वर्ग से अवतरित त्रिपथगा

अन्य नाम: गंगोत्री · गंगा धाम · भागीरथी मंदिर

  • छोटा चार धाम
  • गंगा नदी का तीर्थ-उद्गम स्थल
  • देवी-नदी तीर्थ
श्री गंगोत्री धाम मंदिर
दर्शन समय
06:15 – 21:30
स्वरूप
रजत-निर्मित गंगा देवी विग्रह
स्थान
Gangotri (Uttarkashi District) · Uttarakhand
उत्तम ऋतु
मई-जून एवं सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम।…
काल
मूल पीठ: अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • छोटा चार धाम (उत्तराखंड) — द्वितीय धाम (यमुनोत्री के पश्चात्)
  • गंगा नदी का तीर्थ-उद्गम स्थल (वास्तविक हिमनद उद्गम: गोमुख, 19 किमी ऊपर)
  • देवी-नदी तीर्थ
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री माँ गंगा देवी (भागीरथी रूप; भगीरथ-तपस्या से पृथ्वी पर अवतरित)

रजत-निर्मित गंगा देवी विग्रह; मुख्य मूर्ति शीतकाल में मुखबा (मुखीमठ) ले जाई जाती है

सम्प्रदाय: वैष्णव / सनातन देवी-तीर्थ

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

रामायण

बाल काण्ड — सगर पुत्र, भगीरथ-तपस्या एवं गंगा-अवतरण कथा

महाभारत

वन पर्व, अनुशासन पर्व — गंगा-माहात्म्य; गंगा-शान्तनु कथा

स्कन्द पुराण

केदार खण्ड + गंगा-माहात्म्य

श्रीमद् भागवत पुराण

नवम स्कन्ध — गंगा-अवतरण; भगीरथ-कथा

विष्णु पुराण

गंगा-त्रिपथगा (आकाश-गंगा, मन्दाकिनी, भागीरथी) का वर्णन

संत एवं परम्परा

  • राजा भगीरथ (इक्ष्वाकु वंश) — सगर के 60,000 पुत्रों की भस्म-मुक्ति हेतु 1,000 वर्ष तपस्या; उनकी तपस्या से गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी-अवतरण; इसीलिए नदी का नाम 'भागीरथी'
  • भगवान शिव — गंगा के तीव्र वेग से पृथ्वी न डूबे, इसलिए अपनी जटाओं में गंगा को थामकर शान्त रूप में मुक्त किया
  • गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा (18वीं शताब्दी) — वर्तमान मंदिर के निर्माता
  • जयपुर के राजा माधो सिंह द्वितीय (20वीं शताब्दी प्रारम्भ) — मंदिर के पुनरुद्धार के प्रवर्तक
  • आदि शंकराचार्य — छोटा चार धाम-परिकल्पना में गंगोत्री को द्वितीय धाम के रूप में प्रतिष्ठित

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 178018वीं शताब्दी (1780 के निकट) — गोरखा साम्राज्य के सेनापति अमर सिंह थापा द्वारा वर्तमान गंगोत्री मंदिर का निर्माणWikipedia Gangotri + Uttarakhand Tourism
  2. 192020वीं शताब्दी प्रारम्भ — जयपुर के राजघराने (राजा माधो सिंह द्वितीय) द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धारUttarakhand Tourism
  3. 202619 अप्रैल 2026 — अक्षय तृतीया पर गंगोत्री धाम के द्वार ग्रीष्मकालीन यात्रा हेतु खुलेंगे; गोवर्धन पूजा / दीवाली (नवम्बर मध्य) पर शीतकाल हेतु बन्दUttarakhand Char Dham Devasthanam Board
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:15 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 14:00-15:00 (मध्याह्न विश्राम)

मंगला आरती (प्रातः)06:00-06:15
दैनिक (यात्रा-काल)

दिन की प्रथम आरती; मंदिर-द्वार-खुलने का अनुष्ठान

प्रातः दर्शन एवं अभिषेक06:15-14:00
दैनिक
मध्याह्न भोग एवं विश्राम14:00-15:00
दैनिक
सायं दर्शन15:00-19:30
दैनिक
गंगा आरती (नदी-तट सायं)19:45-20:30
दैनिक

भागीरथी-तट पर भव्य दीप-आरती — काशी-गंगा आरती के समान

शयन आरती20:30-21:30
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:15-14:00 एवं 15:00-21:30
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

मुख्य गंगा देवी दर्शन निःशुल्क; भागीरथी-स्नान परंपरा।

चार धाम यात्रा पंजीकरण (Mandatory)
उपयुक्त
उत्तराखंड चार धाम के सभी श्रद्धालु

उत्तराखंड सरकार द्वारा अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण; निःशुल्क।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

अक्षय तृतीया (कपाट-उद्घाटन)वैशाख शुक्ल तृतीया

गंगोत्री धाम के द्वार वर्ष में पहली बार खुलते हैं; मुखबा गाँव से डोली-यात्रा द्वारा गंगा देवी की मूर्ति लाई जाती है; भागीरथी-स्नान, अभिषेक (दूध-मधु-दही), भव्य गंगा-आरती। 2026 — 19 अप्रैल।

गंगा दशहराज्येष्ठ शुक्ल दशमी

गंगा-अवतरण-दिवस — पृथ्वी पर गंगा-प्राकट्य का वार्षिक पर्व; गंगोत्री में सर्वोच्च उत्सव

गंगा सप्तमीवैशाख शुक्ल सप्तमी

गंगा-प्राकट्य का प्रथम-स्मरण-दिवस (शिव-जटाओं से अवतरण)

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट (कपाट-बन्द)कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा

गंगोत्री के द्वार शीतकाल हेतु बन्द होते हैं; मूर्ति मुखबा ले जाई जाती है। 2026 — नवम्बर मध्य।

मकर संक्रांतिपौष-माघ संक्रांति

गंगा-स्नान महोत्सव (मुखबा में); सूर्य-उत्तरायण प्रारम्भ

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

पाप-निवारण एवं पितृ-मुक्ति

गंगा-स्नान को सर्वोच्च पुण्यदायी माना जाता है; भगीरथ-कथा अनुसार सगर के 60,000 पुत्रों की भस्म-मुक्ति इसी से हुई; पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान हेतु सर्वोच्च तीर्थ

स्रोत: रामायण बाल काण्ड + भागवत स्कन्ध 9

छोटा चार धाम यात्रा का द्वितीय तीर्थ

उत्तराखंड के छोटा चार धाम (यमुनोत्री-गंगोत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ) का द्वितीय धाम

स्रोत: आदि शंकराचार्य परंपरा

मोक्ष-प्राप्ति एवं तीन-लोकों का तारण

गंगा = त्रिपथगा (आकाश, पृथ्वी, पाताल) — तीनों लोकों को तारने वाली; गंगोत्री-दर्शन से सम्पूर्ण पाप-निवारण एवं मोक्ष

स्रोत: विष्णु पुराण + भागवत

गंगा-जल का काशी-अभिषेक हेतु संग्रहण

गंगोत्री से गंगा-जल लेकर रामेश्वरम्-शिव-अभिषेक की पारंपरिक परंपरा; 12 ज्योतिर्लिंगों का सेतु-यात्रा

स्रोत: स्थल-परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • गंगा स्तोत्रम् — 'देवि सुरेश्वरि भगवती गंगे...'स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचित — गंगा-स्तुति का सर्वोच्च स्तोत्रइस मन्दिर हेतु
  • गंगा सहस्रनाम स्तोत्रम्स्तोत्रस्कन्द पुराण काशी खण्ड — 1,000 नामइस मन्दिर हेतु
  • गंगा लहरीस्तोत्रपंडित जगन्नाथ रचित — 52 श्लोकइस मन्दिर हेतु
  • ॐ श्री गंगायै नमः / ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिणि नारायणी नमोऽस्तु तेमंत्रतंत्र-वैदिक परंपराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

गंगोत्री ग्लेशियर / गोमुख19 किमी

भागीरथी (गंगा) का वास्तविक हिमनद-उद्गम; 'गाय के मुख' के आकार की बर्फीली संरचना से नदी निकलती है। वन-विभाग की अनुमति आवश्यक; तपोवन (4,463m) ट्रैक का प्रवेश-द्वार।

सूर्य कुंड (गंगोत्री)100 मी

प्राकृतिक गहरी खाई जहाँ भागीरथी अद्भुत वेग से बहती है; मान्यता-स्थल

भगीरथ शिला50 मी

वह शिला जहाँ राजा भगीरथ ने 1,000 वर्ष तप किया (मान्यता); गंगा-अवतरण-कथा का स्थल

गौरी कुंड200 मी

गौरी (पार्वती) से सम्बद्ध पवित्र कुंड; स्नान-स्थल

मुखबा / मुखीमठ गाँव (शीतकालीन गद्दी)25 किमी

गंगा देवी का शीतकालीन निवास-स्थल; जब मंदिर बन्द होता है तब यहीं पूजा होती है

हरसिल25 किमी

ब्रिटिश-काल का सुरम्य गाँव; भागीरथी के सुन्दर दृश्य; सेब-बाग प्रसिद्ध

छोटा चार धाम यात्रा (उत्तराखंड)

द्वितीय धाम — यमुनोत्री के पश्चात्; क्रम: यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ

4 मंदिर

देवी-नदी तीर्थ यात्रा (यमुनोत्री + गंगोत्री + हरिद्वार + प्रयाग + काशी)

गंगा-उद्गम; नदी-देवी यात्रा का मूल-तीर्थ

गोमुख-तपोवन ट्रेक

बेस केम्प; 4-दिवसीय ट्रैक (गंगोत्री → भोजबासा → गोमुख → तपोवन)

12 ज्योतिर्लिंग सेतु-यात्रा (गंगा-जल काशी-रामेश्वरम्)

गंगा-जल संग्रहण-स्थल; रामेश्वरम्-शिव-अभिषेक हेतु प्रारम्भिक तीर्थ

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री गंगोत्री मंदिर, गंगोत्री, उत्तरकाशी जिला, उत्तराखंड — 249135
हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (DED) — ~250 किमी सड़क
रेलवे
देहरादून रेलवे स्टेशन (DDN) — ~239 किमी; ऋषिकेश (RKSH) — ~250 किमी
उत्तम ऋतु
मई-जून एवं सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम। जुलाई-अगस्त मानसून में भूस्खलन। तापमान 5-22°C। शीतकाल (नवम्बर-अप्रैल) में मंदिर बन्द।
19 किमीGaumukh
14 किमीBhojbasa
9 किमीBhairon Ghati
25 किमीHarsil
100 किमीUttarkashi
220 किमीYamunotri
239 किमीDehradun
250 किमीRishikesh
270 किमीKedarnath
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