रामायण
बाल काण्ड — सगर पुत्र, भगीरथ-तपस्या एवं गंगा-अवतरण कथा
Gangotri (Uttarkashi District) · Uttarakhand
गंगोत्री / गंगा देवी / भागीरथी — स्वर्ग से अवतरित त्रिपथगा
अन्य नाम: गंगोत्री · गंगा धाम · भागीरथी मंदिर

इस मन्दिर की विशेषता
श्री माँ गंगा देवी (भागीरथी रूप; भगीरथ-तपस्या से पृथ्वी पर अवतरित)
रजत-निर्मित गंगा देवी विग्रह; मुख्य मूर्ति शीतकाल में मुखबा (मुखीमठ) ले जाई जाती है
सम्प्रदाय: वैष्णव / सनातन देवी-तीर्थ
बाल काण्ड — सगर पुत्र, भगीरथ-तपस्या एवं गंगा-अवतरण कथा
वन पर्व, अनुशासन पर्व — गंगा-माहात्म्य; गंगा-शान्तनु कथा
केदार खण्ड + गंगा-माहात्म्य
नवम स्कन्ध — गंगा-अवतरण; भगीरथ-कथा
गंगा-त्रिपथगा (आकाश-गंगा, मन्दाकिनी, भागीरथी) का वर्णन
06:15 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 14:00-15:00 (मध्याह्न विश्राम)
दिन की प्रथम आरती; मंदिर-द्वार-खुलने का अनुष्ठान
भागीरथी-तट पर भव्य दीप-आरती — काशी-गंगा आरती के समान
दिन की अन्तिम आरती
मुख्य गंगा देवी दर्शन निःशुल्क; भागीरथी-स्नान परंपरा।
उत्तराखंड सरकार द्वारा अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण; निःशुल्क।
गंगोत्री धाम के द्वार वर्ष में पहली बार खुलते हैं; मुखबा गाँव से डोली-यात्रा द्वारा गंगा देवी की मूर्ति लाई जाती है; भागीरथी-स्नान, अभिषेक (दूध-मधु-दही), भव्य गंगा-आरती। 2026 — 19 अप्रैल।
गंगा-अवतरण-दिवस — पृथ्वी पर गंगा-प्राकट्य का वार्षिक पर्व; गंगोत्री में सर्वोच्च उत्सव
गंगा-प्राकट्य का प्रथम-स्मरण-दिवस (शिव-जटाओं से अवतरण)
गंगोत्री के द्वार शीतकाल हेतु बन्द होते हैं; मूर्ति मुखबा ले जाई जाती है। 2026 — नवम्बर मध्य।
गंगा-स्नान महोत्सव (मुखबा में); सूर्य-उत्तरायण प्रारम्भ
गंगा-स्नान को सर्वोच्च पुण्यदायी माना जाता है; भगीरथ-कथा अनुसार सगर के 60,000 पुत्रों की भस्म-मुक्ति इसी से हुई; पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान हेतु सर्वोच्च तीर्थ
स्रोत: रामायण बाल काण्ड + भागवत स्कन्ध 9
उत्तराखंड के छोटा चार धाम (यमुनोत्री-गंगोत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ) का द्वितीय धाम
स्रोत: आदि शंकराचार्य परंपरा
गंगा = त्रिपथगा (आकाश, पृथ्वी, पाताल) — तीनों लोकों को तारने वाली; गंगोत्री-दर्शन से सम्पूर्ण पाप-निवारण एवं मोक्ष
स्रोत: विष्णु पुराण + भागवत
गंगोत्री से गंगा-जल लेकर रामेश्वरम्-शिव-अभिषेक की पारंपरिक परंपरा; 12 ज्योतिर्लिंगों का सेतु-यात्रा
स्रोत: स्थल-परंपरा
भागीरथी (गंगा) का वास्तविक हिमनद-उद्गम; 'गाय के मुख' के आकार की बर्फीली संरचना से नदी निकलती है। वन-विभाग की अनुमति आवश्यक; तपोवन (4,463m) ट्रैक का प्रवेश-द्वार।
प्राकृतिक गहरी खाई जहाँ भागीरथी अद्भुत वेग से बहती है; मान्यता-स्थल
वह शिला जहाँ राजा भगीरथ ने 1,000 वर्ष तप किया (मान्यता); गंगा-अवतरण-कथा का स्थल
गौरी (पार्वती) से सम्बद्ध पवित्र कुंड; स्नान-स्थल
गंगा देवी का शीतकालीन निवास-स्थल; जब मंदिर बन्द होता है तब यहीं पूजा होती है
ब्रिटिश-काल का सुरम्य गाँव; भागीरथी के सुन्दर दृश्य; सेब-बाग प्रसिद्ध
द्वितीय धाम — यमुनोत्री के पश्चात्; क्रम: यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ
4 मंदिर
गंगा-उद्गम; नदी-देवी यात्रा का मूल-तीर्थ
बेस केम्प; 4-दिवसीय ट्रैक (गंगोत्री → भोजबासा → गोमुख → तपोवन)
गंगा-जल संग्रहण-स्थल; रामेश्वरम्-शिव-अभिषेक हेतु प्रारम्भिक तीर्थ