गुरुवायुर-स्थापना कथा (पारम्परिक-कथन)
द्वापर-युग-अन्त भगवान कृष्ण ने अपनी द्वारका-निर्गमन-पूर्व अपने पूज्य पाताल-अञ्जन कृष्ण-शिला-निर्मित विग्रह को बृहस्पति (देव-गुरु) को सौंपा; बृहस्पति ने वायु-देव-सङ्ग दक्षिण-दिशा-यात्रा-काल केरल के रुद्र-तीर्थ-कमल-सरोवर-तट पर शिव-निर्देशन-पर विग्रह-स्थापना की। शिव स्वयं अपने मम्मियूर-स्थान को त्याग कर निकटवर्ती मम्मियूर महादेव-मन्दिर (200 मीटर उत्तर-पश्चिम) में स्थानान्तरित हो गए ताकि कृष्ण को मूल-स्थान मिल सके। नगर 'गुरु + वायु + ऊर' (= बृहस्पति-वायु-नगर) = गुरुवायुर नाम-धारी हुआ।
