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Guruvayur · Kerala

श्री गुरुवायुर श्री कृष्ण मन्दिर

श्री गुरुवायुर श्री कृष्ण मन्दिर — गुरुवायुर, ज़िला त्रिश्शूर, केरल

श्री गुरुवायुरप्पन्न = गुरु (बृहस्पति) + वायु + ऊर (नगर) = बृहस्पति-वायु-स्थापित श्रीकृष्ण-नगर; चतुर्भुज महाविष्णु-रूप (शंख-चक्र-गदा-पद्म-धारी) कृष्ण-मूर्ति; पाताल-अञ्जन कृष्ण-शिला-निर्मित मूर्ति; भू-लोक वैकुण्ठ (पृथ्वी पर वैकुण्ठ) उपाधि-धारी; नारायणीयम् रचना-स्थल; कृष्णनाट्टम् मन्दिर-विशिष्ट कला; आना-कोट्टा हाथी-संरक्षण-केन्द्र

अन्य नाम: गुरुवायुरप्पन्न · गुरुवायूरप्पन · भू-लोक वैकुण्ठ · दक्षिण द्वारका

  • केरल का सर्वाधिक-प्रमुख कृष्ण-तीर्…
  • दक्षिण-भारत के प्रमुख कृष्ण-तीर्थो…
  • 108 दिव्य-देशम् में नहीं
  • उडुपी श्री कृष्ण के सङ्ग 'सौर अष्ट…
श्री गुरुवायुर श्री कृष्ण मन्दिर
दर्शन समय
03:00 (निर्माल्य-दर्शन) – 21:15
स्वरूप
चतुर्भुज महाविष्णु-रूप कृष्ण
स्थान
Guruvayur · Kerala
उत्तम ऋतु
उत्सवम् 28 फरवरी-9 मार्च 2026
काल
अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • केरल का सर्वाधिक-प्रमुख कृष्ण-तीर्थ; 'भू-लोक वैकुण्ठ' (पृथ्वी पर वैकुण्ठ) उपाधि-धारी
  • दक्षिण-भारत के प्रमुख कृष्ण-तीर्थों में सम्मिलित; कथन-अनुसार 'दक्षिण द्वारका'
  • 108 दिव्य-देशम् में नहीं (असामान्य चतुर्भुज महाविष्णु-रूप कृष्ण-मूर्ति-कारण; आऴ्वार-गायन-अनुपस्थिति-कारण) — परम्परा-स्तर बहु-स्रोत सत्यापित
  • उडुपी श्री कृष्ण के सङ्ग 'सौर अष्टमी-रोहिणी कृष्ण-जन्माष्टमी' मनाने वाले प्रमुख-तीर्थ-युग्म
  • कृष्णनाट्टम् (कलामण्डलम-पूर्व 17वीं-शताब्दी मन्दिर-विशिष्ट कला) के एकमात्र-प्रस्तुति-स्थल — मानवेद ज़मोरिन-रचित (1585-1658) कृष्ण-गीति-आधारित 8-नाटक
  • नारायणीयम् (1036-श्लोक; मेलपथूर नारायण भट्टतिरि द्वारा 27 नवंबर 1586 को रचित) रचना-स्थल — दक्षिण-भारत के सर्वाधिक-प्रसिद्ध स्तोत्र-ग्रन्थों में सम्मिलित
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री कृष्ण (चतुर्भुज महाविष्णु-रूप) — पाताल-अञ्जन कृष्ण-शिला-निर्मित मूर्ति; ~4 फीट / ~1.2 मीटर ऊँचा; पूर्व-मुख; उच्च-हस्तों में पाञ्चजन्य-शंख + सुदर्शन-चक्र; अधो-हस्तों में कौमोदकी-गदा + पद्म; उप-देवता: श्री गणपति + भगवती + अयप्पा + एडथरकटनाथ (अघ्र्य-मण्डप-समीप)

चतुर्भुज महाविष्णु-रूप कृष्ण (असामान्य द्वि-भुज वंशी-धारी रूप नहीं; इस-कारण यह 108 दिव्य-देशम् में नहीं); पाताल-अञ्जन (काली अंजन-समान खनिज) कृष्ण-शिला-निर्मित मूर्ति; मूर्ति-स्थापना पारम्परिक-कथन अनुसार बृहस्पति एवं वायु द्वारा

सम्प्रदाय: केरल वैष्णव-परम्परा; तंत्रिक-वैदिक-समन्वय; पारम्परिक तन्त्री: पुझक्करा चेन्नस् नम्बूतिरीप्पाद् वंश; प्रशासन: गुरुवायुर देवस्वम् बोर्ड (1978-अधिनियम-अधीन; केरल राज्य-सरकार-संरक्षण); 9-सदस्यीय प्रबन्ध-समिति (3 पदेन: ज़मोरिन राजा + मल्लिश्शेरि इल्लम्-कारणवर + तन्त्री; 6 नामित केरल हिन्दू-मन्त्री द्वारा)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

गुरुवायुर-स्थापना कथा (पारम्परिक-कथन)

द्वापर-युग-अन्त भगवान कृष्ण ने अपनी द्वारका-निर्गमन-पूर्व अपने पूज्य पाताल-अञ्जन कृष्ण-शिला-निर्मित विग्रह को बृहस्पति (देव-गुरु) को सौंपा; बृहस्पति ने वायु-देव-सङ्ग दक्षिण-दिशा-यात्रा-काल केरल के रुद्र-तीर्थ-कमल-सरोवर-तट पर शिव-निर्देशन-पर विग्रह-स्थापना की। शिव स्वयं अपने मम्मियूर-स्थान को त्याग कर निकटवर्ती मम्मियूर महादेव-मन्दिर (200 मीटर उत्तर-पश्चिम) में स्थानान्तरित हो गए ताकि कृष्ण को मूल-स्थान मिल सके। नगर 'गुरु + वायु + ऊर' (= बृहस्पति-वायु-नगर) = गुरुवायुर नाम-धारी हुआ।

नारायणीयम्-रचना कथा (मेलपथूर नारायण भट्टतिरि)

नम्बूदिरि-ब्राह्मण मेलपथूर नारायण भट्टतिरि (~1559-1645 ईस्वी) ने अपने गुरु अच्युत पिशारति का पक्षाघात-रोग गुरु-दक्षिणा-स्वरूप अपने पर ले लिया; गुरुवायुर-शरण-गत होकर 100 दशक × ~10 श्लोक = 1036 श्लोक नारायणीयम् (श्रीमद्भागवत के 18,000 श्लोकों का सङ्क्षिप्त-स्तोत्र-रूप) की रचना की; 28 वृश्चिकम् 762 मलयालम-वर्ष (= 27 नवंबर 1586 ईस्वी) को 27-वर्ष-आयु में पूर्ण होने पर रोग-मुक्ति प्राप्त हुई।

पून्तानम् नम्बूदिरि-ज्ञानप्पाण कथा (भक्ति vs विभक्ति)

मलयालम-कवि पून्तानम् नम्बूदिरि (1547-1640 ईस्वी; की़़ष़ाट्टूर, मलप्पुरम्) ने मलयालम-भाषा में 'ज्ञानप्पाण' (= ज्ञान-गीत) की रचना की। पारम्परिक-स्वप्न-कथन: कृष्ण ने भट्टतिरि से कहा कि पून्तानम् की भक्ति उन्हें भट्टतिरि की विभक्ति (व्याकरण-कौशल) से अधिक प्रिय है — भक्ति-शास्त्र की प्रमुख-कथा।

कृष्णनाट्टम् मन्दिर-विशिष्ट कला (मानवेद ज़मोरिन)

कोझिकोड के ज़मोरिन राजा मानवेद (शासन-काल 1585-1658 ईस्वी) ने अपनी कृष्ण-गीति-काव्य-आधारित 8 कृष्ण-नाटकों (अवतारम्, कालिय-मर्दनम्, रास-क्रीड़ा, कंस-वधम्, स्वयंवरम्, बाण-युद्धम्, विविद-वधम्, स्वर्गारोहणम्) की रचना की — केवल गुरुवायुर मन्दिर में + हिन्दू दर्शकों-हेतु प्रस्तुति की परम्परा; कथकलि-पूर्व 17वीं-शताब्दी मन्दिर-विशिष्ट कला।

एकादशी-उत्सव कथा (गुरुवायुर एकादशी)

वृश्चिकम्-मास शुक्ल एकादशी = गुरुवायुर एकादशी; पारम्परिक-कथन-अनुसार आदि शङ्कराचार्य द्वारा उदय-अस्त-मन-पूजा-विधि-प्रवर्तन (पारम्परिक-कथा; प्रामाणिक-ऐतिहासिक-सत्यापन नहीं) — एकादशी-व्रती श्रद्धालुओं-हेतु वार्षिक-शिखर-दिन।

संत एवं परम्परा

  • बृहस्पति (देव-गुरु) + वायु — स्थापना-पारम्परिक-कथा-अनुसार स्थापक
  • मेलपथूर नारायण भट्टतिरि (~1559-1645) — नारायणीयम् रचयिता; अच्युत पिशारति-शिष्य; 27 नवंबर 1586 को नारायणीयम् पूर्ण
  • पून्तानम् नम्बूदिरि (1547-1640) — ज्ञानप्पाण रचयिता; भक्ति-vs-विभक्ति कथा-केन्द्र
  • मानवेद ज़मोरिन (शासन 1585-1658) — कृष्ण-गीति + कृष्णनाट्टम् 8-नाटक-रचयिता
  • पुझक्करा चेन्नस् नम्बूतिरीप्पाद् वंश — पारम्परिक-वंशानुगत तन्त्री-परिवार; पूजा-विधि-संहिता-निर्माता
  • गुरुवायुर देवस्वम् बोर्ड (1978-अधिनियम-अधीन) — 9-सदस्यीय प्रबन्ध-समिति (3 पदेन + 6 नामित); केरल राज्य-सरकार-संरक्षण
  • ज़मोरिन राजा (कोझिकोड) + मल्लिश्शेरि इल्लम् कारणवर — पदेन-सदस्य परम्परा
  • गुरुवायुर केशवन (1900~ - 1976) — महान-हाथी; 2 दिसंबर 1976 निधन; आना-कोट्टा-पञ्चजन्यम् रेस्ट हाउस में 12-फीट कंक्रीट-प्रतिमा

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 158627 नवंबर 1586 (28 वृश्चिकम् 762 मलयालम-वर्ष) — मेलपथूर नारायण भट्टतिरि-कृत नारायणीयम् (1036-श्लोक) पूर्ण; भट्टतिरि गुरु-पक्षाघात-रोग-मुक्ति प्राप्तिWikipedia + NSStemple + en-academic बहु-स्रोत
  2. 165017वीं-शताब्दी — मानवेद ज़मोरिन (शासन 1585-1658) द्वारा कृष्णनाट्टम् 8-नाटक रचना एवं गुरुवायुर मन्दिर में एकल-प्रस्तुति-परम्परा-स्थापनाWikipedia + Kerala Tourism + JETIR शोध-पत्र बहु-स्रोत
  3. 1922जनवरी 1922 — गुरुवायुर केशवन (~10.5 फीट महान-हाथी) नीलाम्बूर वलिया राजा द्वारा गुरुवायुर समर्पितWikipedia Punnathurkotta + En-route India History
  4. 19762 दिसंबर 1976 — गुरुवायुर केशवन निधन; आना-कोट्टा-पञ्चजन्यम् रेस्ट हाउस में 12-फीट कंक्रीट-प्रतिमाWikipedia + Enroute India History
  5. 1978गुरुवायुर देवस्वम् अधिनियम 1978 (केरल अधिनियम 14/1978) — 9-सदस्यीय प्रबन्ध-समिति-स्थापना; ज़मोरिन + मल्लिश्शेरि + तन्त्री पदेन + 6 हिन्दू-मन्त्री-नामितIndia Code + PRS India
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

03:00 (निर्माल्य-दर्शन) से 21:15 तक · मध्याह्न विश्राम 13:30-16:30 (मध्याह्न-विश्राम)

निर्माल्य-दर्शन03:00
दैनिक
अभिषेकम् / अलङ्कारम्03:20-05:00
दैनिक
उषा-पूजा05:00-07:30
दैनिक
सीवेलि (शोभायात्रा)07:30-09:00
दैनिक
सामान्य-दर्शन09:00-11:30
दैनिक
उच्च-पूजा11:30-12:30
दैनिक
(मन्दिर-बन्द)13:30-16:30
दैनिक
दीपाराधना (सायं)17:00-18:30
दैनिक
अथाझ-पूजा18:30-20:00
दैनिक
मन्दिर-समापन21:15
दैनिक

वस्त्र-संहिता: पुरुष: सफेद मुण्डु (वस्त्र), छाती-वस्त्र-निषिद्ध (छोटे अङ्गवस्त्रम्-अनुमत); शर्ट/पैण्ट/जीन्स/जूते-निषिद्ध। स्त्री: साड़ी/चूड़ीदार/सलवार-कमीज (हाल-शिथिलीकरण); शर्ट/पैण्ट-निषिद्ध; मन्दिर-प्राङ्गण-प्रवेश-पूर्व जूते-त्याग अनिवार्य

फोटोग्राफी: गर्भगृह-फोटोग्राफी पूर्ण-निषिद्ध; प्राङ्गण-फोटोग्राफी अनुमति-सहित

विशेष नियम: गैर-हिन्दू श्रद्धालुओं का गर्भगृह/अन्तर्-मन्दिर-प्रवेश निषिद्ध (केरल-परम्परा); प्राङ्गण-दर्शन-अनुमत; मध्याह्न-विश्राम 13:30-16:30 कोई दर्शन-नहीं; एकादशी-दिन चोरूणु एवं विवाहम्-निषिद्ध; पुरुष-छाती-वस्त्र-निषिद्ध-नियम कड़ाई से लागू

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
03:00-13:30 + 16:30-21:15

चतुर्भुज महाविष्णु-रूप कृष्ण-मूर्ति-दर्शन।

विवाहम् (वैदिक-विवाह-संस्कार)
समय
05:00-13:00 दैनिक
उपयुक्त
व्यवस्थित हिन्दू-विवाह (दोनों माता-पिता-उपस्थिति अनिवार्य)

~10-15 मिनट प्रति-दम्पति; गुरुवायुर देवस्वम् बोर्ड-पूर्व-बुकिंग अनिवार्य; एकादशी एवं वावु-रात्रि-निषिद्ध। दक्षिण-भारत के प्रमुख-विवाह-तीर्थ।

चोरूणु / अन्नप्राशनम् (बच्चे-प्रथम-अन्न-संस्कार)₹100
समय
05:00-13:00 + सायं
उपयुक्त
5-6 माह-आयु बच्चे

मन्दिर-काउण्टर ₹100 टिकट; ऑनलाइन-बुकिंग नहीं; एकादशी एवं वावु-रात्रि-निषिद्ध; गुरुवायुर एकादशी-दिन पूर्ण-निषिद्ध।

तुलाभारम्

श्रद्धालु अपने वजन-समान अर्पण (केला/चीनी/स्वर्ण आदि) मन्दिर-बाह्य-स्थल पर तौलते हैं; गैर-हिन्दू भी बाह्य-तुलाभारम्-अनुमत।

उदय-अस्त-मन-पूजा (गुरुवायुर एकादशी-विशेष)

पारम्परिक-कथन-अनुसार आदि शङ्कराचार्य-प्रवर्तित विधि; सूर्योदय-से-सूर्यास्त निरन्तर-पूजा।

कृष्णनाट्टम्-प्रस्तुति

मन्दिर-कूत्तम्बलम् में 8-नाटक-चक्र (अवतारम्, कालिय-मर्दनम्, रास-क्रीड़ा, कंस-वधम्, स्वयंवरम्, बाण-युद्धम्, विविद-वधम्, स्वर्गारोहणम्); केवल-हिन्दू-दर्शक; मन्दिर-विशिष्ट कला।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

उत्सवम् (10-दिवसीय वार्षिक उत्सव)कुम्भम् (फरवरी-मार्च); 2026: 28 फरवरी-9 मार्च 2026

कोडियेट्टम् (ध्वजारोहण) 28 फरवरी 2026; पल्लिवेट्ट + अरट्टु 9 मार्च 2026 समापन; आरट्टु-कुलम-पवित्र-स्नान अनिवार्य

अष्टमी-रोहिणी / कृष्ण-जन्माष्टमी (केरल सौर-पञ्चाङ्ग अनुसार)चिङ्गम् (सितंबर); 2026: 4-5 सितंबर 2026 (स्मार्त 4 सितंबर / वैष्णव-रोहिणी-संयोग 5 सितंबर)

गुरुवायुर एवं उडुपी श्री कृष्ण द्वारा सौर-अष्टमी-रोहिणी अनुसार-कारण उत्तर-भारत-कृष्ण-जन्माष्टमी से 1-2 दिन-भिन्न

मण्डल-विलक्कु (41-दिवसीय)वृश्चिकम्-धनुर (नवंबर-दिसंबर); 2026: 17 नवंबर 2026 प्रारम्भ

41-दिवसीय व्रत-काल; विशेष-दीप-अर्पण; मण्डल-पूजा-समापन-दिन विशेष

गुरुवायुर एकादशीवृश्चिकम् शुक्ल एकादशी; 2026: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार; तिथि-प्रारम्भ 07:15 20 नवंबर, समाप्ति 06:31 21 नवंबर)

वार्षिक-शिखर-दिन; उदय-अस्त-मन-पूजा (पारम्परिक-कथन-अनुसार आदि शङ्कराचार्य-प्रवर्तित); 41-दिवसीय मण्डल-व्रती-शिखर-दिन; पारम्परिक-कथा-अनुसार वसुदेव-मुक्ति-तिथि

विशुमेदम् (अप्रैल); 2026: 14-15 अप्रैल 2026

केरल-मलयालम नववर्ष-प्रथम-दर्शन; विशु-कणि (दिव्य-दर्शन-दृश्य)

ओणम (3-दिवसीय)चिङ्गम्-कन्नि (अगस्त-सितंबर)

केरल का राष्ट्रीय-उत्सव

नारायणीयम्-दिन (वार्षिक रचना-समारोह)वृश्चिकम्-28 (27-28 नवंबर); 2026: 27-28 नवंबर 2026

मेलपथूर नारायण भट्टतिरि-कृत नारायणीयम् 1036-श्लोक 1586-रचना-स्मरण-दिन

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

वैदिक-विवाह-संकल्प (विवाहम्)

दक्षिण-भारत के प्रमुख-विवाह-तीर्थों में सम्मिलित; ~10-15 मिनट प्रति-दम्पति वैदिक-विवाह-संस्कार; व्यवस्थित हिन्दू-विवाह + दोनों माता-पिता-उपस्थिति अनिवार्य; एकादशी एवं वावु-निषिद्ध

स्रोत: Guruvayur Wedding Halls + Guruvayur Devaswom + Wikipedia बहु-स्रोत

बच्चे-प्रथम-अन्न-संस्कार (चोरूणु/अन्नप्राशनम्)

5-6 माह-आयु बच्चे-प्रथम-अन्न-संस्कार; ₹100 मन्दिर-काउण्टर-टिकट; एकादशी-दिन निषिद्ध; दक्षिण-भारत के प्रमुख चोरूणु-तीर्थों में सम्मिलित

स्रोत: Guruvayoor.in + Guruvayur Devaswom बहु-स्रोत

नारायणीयम्-पाठ-संकल्प (रोग-निवारण-संकल्प)

1036-श्लोक नारायणीयम् पाठ-व्रत; मेलपथूर भट्टतिरि-कथा (1586-रचना-काल पक्षाघात-रोग-मुक्ति) के अनुसार रोग-निवारण-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Wikipedia Narayaniyam + NSStemple + en-academic + Sanskrit Documents बहु-स्रोत

गुरुवायुर एकादशी-व्रत-संकल्प (41-दिवसीय मण्डल-व्रत)

वृश्चिकम्-शुक्ल एकादशी (नवंबर) — 41-दिवसीय मण्डल-व्रत-शिखर; उदय-अस्त-मन-पूजा-दर्शन-संकल्प; दक्षिण-भारत के प्रमुख-एकादशी-तीर्थों में सम्मिलित

स्रोत: Wikipedia Guruvayur Ekadasi + Drikpanchang + Kerala Tourism बहु-स्रोत

तुलाभारम्-संकल्प (वजन-समान-अर्पण)

श्रद्धालु अपने वजन-समान अर्पण (केला/चीनी/स्वर्ण आदि) मन्दिर-बाह्य-स्थल पर तौलते हैं; मनोकामना-पूर्ति-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Guruvayur Devaswom + Wikipedia बहु-स्रोत

कृष्णनाट्टम्-दर्शन-संकल्प (मन्दिर-विशिष्ट कला)

8-नाटक-चक्र (अवतारम्-कालिय-मर्दनम्-रास-क्रीड़ा-कंस-वधम्-स्वयंवरम्-बाण-युद्धम्-विविद-वधम्-स्वर्गारोहणम्); मानवेद ज़मोरिन-रचित (17वीं-शताब्दी); केवल गुरुवायुर मन्दिर-विशिष्ट; केवल हिन्दू-दर्शक

स्रोत: Wikipedia Krishnanattam + Kerala Tourism + JETIR शोध-पत्र बहु-स्रोत

भू-लोक-वैकुण्ठ-दर्शन-संकल्प

केरल का सर्वाधिक-प्रमुख कृष्ण-तीर्थ; पाताल-अञ्जन कृष्ण-शिला-निर्मित मूर्ति-दर्शन; चतुर्भुज महाविष्णु-रूप कृष्ण; पृथ्वी-वैकुण्ठ-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Wikipedia + Kerala Tourism + Guruvayur Devaswom बहु-स्रोत

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्रीमन्नारायणीयम् (1036-श्लोक)स्तोत्र-ग्रन्थमेलपथूर नारायण भट्टतिरि (27 नवंबर 1586 गुरुवायुर में रचित); श्रीमद्भागवत के 18,000-श्लोकों का सङ्क्षिप्त-स्तोत्र-रूपइस मन्दिर हेतुदक्षिण-भारत के सर्वाधिक-प्रसिद्ध स्तोत्र-ग्रन्थों में सम्मिलित; गुरुवायुर-शरण-गत भट्टतिरि की रोग-मुक्ति-कथा-केन्द्र
  • ज्ञानप्पाण (मलयालम)भक्ति-गीतपून्तानम् नम्बूदिरि (1547-1640)इस मन्दिर हेतुमलयालम-भाषा में रचित; भक्ति-vs-विभक्ति कथा-केन्द्र
  • विष्णु सहस्रनामसहस्रनाम-स्तोत्रमहाभारत अनुशासन-पर्व
  • गुरुवायुर अष्टकम्अष्टक-स्तोत्रगुरुवायुरप्पन्न-परम्पराइस मन्दिर हेतु
  • कृष्ण-गीति (कृष्णनाट्टम्-काव्य)नाट्य-काव्यमानवेद ज़मोरिन (शासन 1585-1658)इस मन्दिर हेतु8-कृष्ण-नाटकों का मूल-काव्य-आधार
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

मम्मियूर महादेव मन्दिर (शिव)200 मी

पारम्परिक-कथा-अनुसार शिव ने अपने मूल-स्थान को त्याग कर कृष्ण-हेतु यह स्थान प्रदान किया; गुरुवायुर-दर्शन-पश्चात् मम्मियूर-दर्शन-परम्परा-अनिवार्य

पार्थसारथि मन्दिर (कृष्ण)300 मी

कृष्ण-पार्थसारथि-रूप; गुरुवायुर-यात्रा-काल-दर्शन-योग्य

एडथरकटनाथ शास्ता मन्दिर100 मी

अघ्र्य-मण्डप-समीप उप-शाला; गुरुवायुर-दर्शन-पूर्व पूज्य

पुन्नथूर कोट्टा (आना-कोट्टा हाथी-संरक्षण-केन्द्र)3 किमी

~50-60 हाथी; गुरुवायुर केशवन (~10.5 फीट महान-हाथी; 1922 दत्त, 1976 निधन) 12-फीट कंक्रीट-प्रतिमा; पञ्चजन्यम् रेस्ट हाउस

रुद्र-तीर्थ-कमल-सरोवर500 मी

मन्दिर-स्थापना-काल-सरोवर; पारम्परिक-कथा-अनुसार बृहस्पति + वायु-मूर्ति-स्थापना-स्थल

त्रिप्रयार श्री राम मन्दिर25 किमी

नालम्बलम-4-राम-कथा-तीर्थ-क्लस्टर का प्रमुख-तीर्थ

कुडलमाणिक्यम् मन्दिर (इर्न्निंजालकुडा भरत)40 किमी

नालम्बलम-4-राम-कथा-तीर्थ-क्लस्टर भरत-तीर्थ

वडक्कुन्नाथन शिव मन्दिर (त्रिश्शूर)28 किमी

त्रिश्शूर पूरम्-केन्द्र; केरल का प्राचीन-शिव-तीर्थ

गुरुवायुर + मम्मियूर युग्म-तीर्थयात्रा

मुख्य-कृष्ण-तीर्थ; मम्मियूर-दर्शन-पूर्व प्रथम-दर्शन; गुरुवायुर-दर्शन-पश्चात् मम्मियूर-दर्शन-परम्परा-अनिवार्य

2 मंदिर

गुरुवायुर + उडुपी सौर-अष्टमी-रोहिणी कृष्ण-तीर्थ-युग्म

केरल-कर्नाटक के 2 प्रमुख कृष्ण-तीर्थ जो सौर-पञ्चाङ्ग-अनुसार अष्टमी-रोहिणी कृष्ण-जन्माष्टमी मनाते हैं

2 मंदिर

नालम्बलम (4-राम-कथा-तीर्थ-क्लस्टर) + गुरुवायुर तीर्थयात्रा

नालम्बलम (त्रिप्रयार राम + कुडलमाणिक्यम् भरत + पायम्मेल लक्ष्मण + तिरुमूऴिकलम् शत्रुघ्न) + गुरुवायुर-कृष्ण-दर्शन का प्रमुख-केन्द्र-तीर्थ

5 मंदिर

केरल-वैष्णव-तीर्थयात्रा (गुरुवायुर + अम्बलप्पुजहा + तिरुवल्ला + तृक्काक्करा)

केरल का सर्वाधिक-प्रमुख वैष्णव-तीर्थ; भू-लोक-वैकुण्ठ-दर्शन-संकल्प

4 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री गुरुवायुर श्री कृष्ण मन्दिर, गुरुवायुर नगरपालिका, ज़िला त्रिश्शूर, केरल — PIN 680101
हवाई अड्डा
कोच्चि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (COK) — ~86 किमी; कोझिकोड (CCJ) — ~95 किमी वैकल्पिक
रेलवे
गुरुवायुर रेलवे स्टेशन (GUV) — मन्दिर-समीप; त्रिश्शूर रेलवे ~26-29 किमी वैकल्पिक
बस-स्टैण्ड
गुरुवायुर KSRTC बस-स्टैण्ड (मन्दिर-समीप); केरल RTC नियमित-बस-सेवा
उत्तम ऋतु
उत्सवम् 28 फरवरी-9 मार्च 2026; गुरुवायुर एकादशी 20 नवंबर 2026; मण्डल-विलक्कु 17 नवंबर 2026 प्रारम्भ; अष्टमी-रोहिणी 4-5 सितंबर 2026; नारायणीयम्-दिन 27-28 नवंबर 2026; विशु 14-15 अप्रैल 2026; शीत-मासों (नवंबर-फरवरी) में यात्रा-आरामदायक; पावस ऋतु (जून-सितंबर) में भारी-वर्षा
प्रबन्धन
गुरुवायुर देवस्वम् बोर्ड (1978-अधिनियम-अधीन — केरल अधिनियम 14/1978); 9-सदस्यीय प्रबन्ध-समिति: 3 पदेन-सदस्य (कोझिकोड के ज़मोरिन राजा + मल्लिश्शेरि इल्लम् के कारणवर + वंशानुगत तन्त्री पुझक्करा चेन्नस् नम्बूतिरीप्पाद्) + 6 नामित-सदस्य (केरल-सरकार-हिन्दू-मन्त्री द्वारा; 1 अनुसूचित-जाति-प्रतिनिधि + 1 कर्मचारी-प्रतिनिधि अनिवार्य; सभी हिन्दू एवं अस्पृश्यता-रहित-घोषणा अनिवार्य); पारम्परिक-तन्त्री पुझक्करा चेन्नस् नम्बूतिरीप्पाद् वंश
1 किमीGuruvayur Railway
0.2 किमीMammiyoor Mahadev Temple
3 किमीPunnathur Kotta
28 किमीThrissur
86 किमीKochi
95 किमीKozhikode
90 किमीPalakkad
540 किमीBangalore
690 किमीChennai
श्री गुरुवायुर श्री कृष्ण मन्दिर — दर्शन, आरती, इतिहास एवं यात्रा | Pauranik | Pauranik