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Puri · Odisha

श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी

श्री जगन्नाथ धाम / श्री क्षेत्र / पुरुषोत्तम क्षेत्र

अन्य नाम: जगन्नाथ धाम · श्री क्षेत्र · पुरुषोत्तम क्षेत्र · पुरी धाम · नीलाद्रि

  • Char Dham
  • 108 Abhimana Kshethram
श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी
दर्शन समय
04:30 (कपाट खुलने का समय) – 23:30 (Pahud — शयन-अनुष्ठान)
स्वरूप
अद्वितीय परंपरा: चारों विग्रह नीम-काष्ठ
स्थान
Puri · Odisha
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम
काल
अति प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • Char Dham (4 मूल — आदि शंकराचार्य निर्धारित पूर्व-धाम)
  • 108 Abhimana Kshethram (श्री वैष्णव परंपरा)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री जगन्नाथ (कृष्ण-स्वरूप विष्णु), भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा, श्री सुदर्शन — रत्न-वेदी पर चार विग्रहों की संयुक्त उपासना

अद्वितीय परंपरा: चारों विग्रह नीम-काष्ठ (दारु ब्रह्म) से निर्मित — हिन्दू मंदिरों में सर्वथा विशिष्ट। 'नवकलेवर' परंपरा अनुसार प्रत्येक 12-19 वर्ष में नये दारु-वृक्ष से प्रतिमाओं का पुनर्निर्माण; अन्तिम नवकलेवर 2015 ई.।

सम्प्रदाय: वैष्णव

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

स्कन्द पुराण

उत्कल खण्ड / पुरुषोत्तम क्षेत्र माहात्म्य — पुरी की पवित्रता एवं जगन्नाथ का विस्तृत वर्णन

ब्रह्म पुराण

पुरुषोत्तम क्षेत्र माहात्म्य

नारद पुराण

जगन्नाथ-कथा

ऋग्वेद

'दारु ब्रह्म' सूक्त (10.155) में काष्ठ-स्वरूप विष्णु का प्रारम्भिक संकेत

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य (8वीं-9वीं शताब्दी) — पुरी को चार धामों में पूर्व-धाम के रूप में स्थापित किया; गोवर्धन मठ की स्थापना
  • रामानन्दाचार्य, रामानुजाचार्य, माध्वाचार्य — सभी वैष्णव-आचार्यों ने पुरी की यात्रा की
  • चैतन्य महाप्रभु (1486-1534) — गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के संस्थापक; जीवन के अन्तिम 24 वर्ष पुरी में व्यतीत किये; जगन्नाथ-भक्ति का प्रचार
  • जयदेव — 12वीं शताब्दी के संस्कृत कवि; गीत-गोविन्द के रचयिता; पुरी में जगन्नाथ-समक्ष पाठ-परंपरा
  • गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव चतुर्थ (Dibyasingha Deba IV) — पुरी के वर्तमान राजा (जन्म 6 फरवरी 1953; 1970 में 17 वर्ष की आयु में राज्याभिषेक)। श्री जगन्नाथ के 'आद्य-सेवक' (प्रथम सेवायत); रथ यात्रा पर सोने की झाड़ू से रथ बुहारने एवं चन्दन-जल छिड़कने वाला 'छेरा पहनरा' अनुष्ठान निष्पादक। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष भी। महारानी लीलावती। 2024 की राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में सम्मिलित।

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. -1पौराणिक कथा: मालवा के राजा इन्द्रद्युम्न को जगन्नाथ का दिव्य स्वप्न प्राप्त; पुरी तट पर 'दारु ब्रह्म' (पवित्र काष्ठ) पाये गये; विश्वकर्मा ने जगन्नाथ-बलभद्र-सुभद्रा की मूर्तियाँ रची — दिव्य आदेशानुसार अपूर्ण रखी गयींस्कन्द पुराण उत्कल खण्ड + ब्रह्म पुराण
  2. 11121112 ई. — पूर्वी गंग वंश के सम्राट अनन्तवर्मन चोडगंग देव द्वारा वर्तमान मंदिर का प्रमुख निर्माण-कार्य प्रारम्भविकिपीडिया
  3. 1952'पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर (प्रशासन) अधिनियम 1952' — श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) का गठन; मंदिर शासन का कानूनी ढाँचाविकिपीडिया
  4. 20152015 ई. — अन्तिम 'नवकलेवर' अनुष्ठान — चारों दारु-विग्रहों का नवीनीकरण; 30 लाख से अधिक तीर्थयात्रीविकिपीडिया
  5. 202417 जनवरी 2024 — मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक एवं गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव द्वारा संयुक्त रूप से ₹800 करोड़ का 'श्री मन्दिर परिक्रमा प्रकल्प' (जगन्नाथ हेरिटेज कॉरिडोर) उद्घाटन। मंदिर के बाहरी दीवारों के चारों ओर 75 मीटर निर्बाध परिक्रमा-पथ; 7 मीटर ग्रीन बफर ज़ोन; 10 मीटर पैदल आन्तरिक परिक्रमा-पथ। उप-परियोजनाएँ: SJTA भवन पुनर्विकास, श्रीमंदिर रिसेप्शन सेन्टर, जगन्नाथ कल्चरल सेन्टर, बड़दण्ड हेरिटेज स्ट्रीटस्केप, बीचफ्रंट विकास, पुरी झील एवं मूसा नदी पुनर्जीवन।Free Press Journal + OpIndia + Republic World + Business Standard
  6. 202414 जुलाई 2024, दोपहर 1:28 बजे — रत्न भण्डार (मंदिर का खज़ाना) 40+ वर्षों के बाद पुनः खोला गया। ओडिशा सरकार द्वारा जारी SOP अनुसार 3-चरणीय प्रक्रिया: (1) रत्न भण्डार खोलना, (2) आभूषणों की अभिरक्षा, (3) सूचीकरण। न्यायाधीश श्री बिश्वनाथ रथ की अध्यक्षता में निरीक्षण समिति। भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रतिनिधि की उपस्थिति में फ़ोटो, वज़न, गुणवत्ता-विवरण सहित डिजिटल कैटलॉग तैयार।ANI + PragatiVadi
  7. 2024अप्रैल 2024 — डॉ॰ अरबिन्द पाधी (Arabinda Kumar Padhee) SJTA के मुख्य प्रशासक नियुक्त (पूर्व अधिकारी वीर विक्रम यादव के स्थान पर)। 2025 तक पदस्थ।PragatiVadi + Organiser + Free Press Journal
  8. 2025जनवरी-अगस्त 2025 के बीच पुरी साइबर पुलिस को 408 शिकायतें प्राप्त — फर्ज़ी वेबसाइटों पर ₹100-₹7,500 के बीच नकली दर्शन/पूजा/प्रसाद बेचा जा रहा था। SJTA ने औपचारिक साइबर शिकायत दर्ज की; 390 बैंक खाते जब्त, 125 फर्ज़ी साइट बन्द, 66 सोशल मीडिया खाते अवरुद्ध।OdishaTV + VSK Telangana + OmmcomNews
  9. 2025नवंबर 2025 — भुवनेश्वर के बिल्डर श्री दिस्पोज़ा पट्टनायक की गिरफ्तारी — shreeprasad.org नामक फर्ज़ी साइट के माध्यम से जगन्नाथ रसोई का महाप्रसाद घर पहुँचाने का झूठा दावा कर रहे थेOrganiser
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:30 (कपाट खुलने का समय) से 23:30 (Pahud — शयन-अनुष्ठान) तक

द्वार-फिटा / कपाट खुलना04:30
दैनिक

मंदिर का पहला अनुष्ठान — द्वार खोलना

मंगला आरती05:30
दैनिक

भीतरछा महापात्र एवं 2 अन्य सेवायतों द्वारा सम्पन्न

मैलम (वस्त्र-परिवर्तन)06:00-06:30
दैनिक
अबकाश (शुद्धि-अनुष्ठान)06:30-07:00
दैनिक

मंदिर ज्योतिषी द्वारा तिथि एवं ज्योतिष विवरण पढ़ना

सकाल धूप (राज भोग)09:00-10:00
दैनिक

उड़द-दाल के विविध व्यंजन निवेदन

मध्याह्न धूप (दोपहर भोग)11:00-13:00
दैनिक
चन्दन लागि15:30-16:00
दैनिक

विग्रहों पर चन्दन-लेप

बड़ा शृंगार17:00-19:00
दैनिक

अन्तिम वस्त्र-शृंगार एवं अलंकरण

संध्या धूप एवं संध्या आरती18:30-20:00
दैनिक
पहुड़ (शयन)23:00-23:30
दैनिक

रात्रि के अन्तिम अनुष्ठान — खाटा सेजा लागि, पुष्पाञ्जलि, पहुड़, मुदा, सोढ़ा

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य (निःशुल्क) दर्शननिःशुल्क
उपयुक्त
सभी हिन्दू भक्त (देखें Hindu-only नियम)

सिंहद्वार (मुख्य पूर्वी प्रवेश) के 22 सीढ़ी चढ़कर रत्न-वेदी पर चारों विग्रहों के दर्शन। दर्शन पूर्णतः निःशुल्क — मंदिर प्रशासन कोई शुल्क नहीं लेता।

महाप्रसाद (आनन्द बाजार)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

मंदिर परिसर के दक्षिण-पूर्व में आनन्द बाजार में निःशुल्क/सशुल्क महाप्रसाद वितरण। मिट्टी के बर्तनों में तैयार 56 भोग (छप्पन भोग) दैनिक 6 बार निवेदन। आधिकारिक रसोई से ही — बाहरी 'घर-पहुँचाई गयी महाप्रसाद' सेवाएँ केवल फर्ज़ी।

विशेष पूजा-अनुष्ठान (BKTC आधिकारिक)
उपयुक्त
अनुष्ठान-इच्छुक भक्त

विशेष नीति/पूजा हेतु SJTA की आधिकारिक वेबसाइट से बुकिंग।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

रथ यात्रा (श्री गुण्डिचा यात्रा)आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (जून-जुलाई)

विश्व-प्रसिद्ध 9-दिवसीय रथोत्सव। तीन भव्य काष्ठ-रथों पर तीनों विग्रह जगन्नाथ मंदिर से 3 किमी दूर श्री गुण्डिचा मंदिर (मौसी-माँ का गृह) तक भक्तों द्वारा खींचे जाते हैं। रथों के नाम एवं विशेषताएँ: (1) नन्दिघोष — जगन्नाथ का रथ, 16 पहिये, 45 फुट ऊँचा, लाल-पीला वस्त्र-आवरण; (2) तलध्वज — बलभद्र का रथ, 14 पहिये, लाल-हरा वस्त्र; (3) देवदलन (दर्पदलन/पद्मध्वज) — सुभद्रा का रथ, 12 पहिये, लाल-काला वस्त्र। प्रत्येक वर्ष नये काष्ठ से रथों का निर्माण। 2026 — 16 जुलाई 2026 (शुक्रवार) — दृक् पंचांग पुष्ट।

स्नान यात्राज्येष्ठ पूर्णिमा

रथ यात्रा से 15 दिन पूर्व — चारों विग्रहों का सार्वजनिक स्नानोत्सव। 108 कलश पवित्र जल से अभिषेक के पश्चात् विग्रह 'अनसर' काल (15 दिनों के लिये) में रहते हैं।

अनसर कालज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा से आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा

स्नान यात्रा के पश्चात् 15 दिनों के लिये विग्रह बीमार माने जाते हैं — सार्वजनिक दर्शन बन्द; मात्र 'अलारनाथ' (ब्रह्मगिरि) के दर्शन से बद्ली।

नवकलेवर (12-19 वर्ष में एक बार)

चारों दारु-विग्रहों का सम्पूर्ण नवीनीकरण — नये दारु-वृक्ष से (दैत्यपति सेवायत-समूह द्वारा गुप्त-अनुष्ठान सहित)। अन्तिम 2015 ई. में सम्पन्न; अगला अनुमान 2027-2034 के बीच (पंचांग-निर्भर)।

चन्दन यात्रा (42-दिवसीय)अक्षय तृतीया से ज्येष्ठ पूर्णिमा

ग्रीष्म-काल में 42 दिनों तक — विग्रहों पर चन्दन-लेप एवं नौका-विहार (नरेन्द्र सरोवर में)

देव-स्नान पूर्णिमा / स्नान यात्रा

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 108 कलश पवित्र जल से सार्वजनिक स्नानोत्सव

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

मोक्ष एवं पुरुषोत्तम-पद की प्राप्ति

पुरी की मान्यता 'पुरुषोत्तम क्षेत्र' के रूप में — स्वयं विष्णु के पुरुषोत्तम-स्वरूप का प्रत्यक्ष निवास; दर्शन से मोक्ष-मार्ग का संकल्प

स्रोत: स्कन्द पुराण उत्कल खण्ड + ब्रह्म पुराण पुरुषोत्तम क्षेत्र माहात्म्य

रथ यात्रा-दर्शन से जन्म-मरण-चक्र से मुक्ति

मान्यता: रथ पर विराजमान जगन्नाथ का दर्शन — मोक्ष-दायक; यही 'दीनबन्धु' स्वरूप जब रथ पर सार्वजनिक होते हैं, सभी जातियों एवं वर्गों के दर्शन का अवसर

स्रोत: ब्रह्म पुराण + स्कन्द पुराण

महाप्रसाद-ग्रहण से सर्व-पाप-निवारण

मान्यता: जगन्नाथ का महाप्रसाद 'सर्वोच्च प्रसाद' — किसी भी पात्र (जाति, वर्ण, धर्म) से ग्रहण किया जा सकता है; भगवान विश्वास नहीं तोड़ते

स्रोत: स्थल-परंपरा एवं चैतन्य-वैष्णव परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्री जगन्नाथाष्टकम् (Jagannathashtakam)स्तोत्र (8 श्लोक)श्री आदि शंकराचार्य प्रणीत; जगन्नाथ-दर्शन की अभीप्सा का सर्वोच्च स्तुति-स्तोत्रइस मन्दिर हेतुनित्य पाठ-परंपरा; 'जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे' — प्रसिद्ध समापन-पंक्ति
  • गीत गोविन्दस्तोत्र / पद-संग्रह (12 सर्ग)जयदेव कृत (12वीं शताब्दी); राधा-कृष्ण-लीला; पुरी से अभिन्न परंपराइस मन्दिर हेतुजगन्नाथ-समक्ष नित्य गायन-पाठ की प्राचीन परंपरा
  • विष्णु सहस्रनामस्तोत्रमहाभारत, अनुशासन पर्व
  • ॐ जगन्नाथाय नमःमूल मंत्रजगन्नाथ-उपासना का मूल मंत्रइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री गुण्डिचा मंदिर (Gundicha Temple)3 किमी

जगन्नाथ की 'मौसी-माँ का घर' — रथ यात्रा के दौरान चारों विग्रह 9 दिनों के लिये यहाँ निवास करते हैं। बहुदा यात्रा (वापसी) पर लौटते हैं।

सिंहद्वार (सिंह-द्वार)0 मी

मंदिर के 4 द्वारों में मुख्य — पूर्व में दो विशाल पाषाण सिंह-प्रतिमाएँ; 22-सीढ़ी (बाईसी पाहाच) प्रवेश। अन्य 3 द्वार: हाथीद्वार (उत्तर), व्याघ्रद्वार (दक्षिण), अश्वद्वार (पश्चिम)।

अरुण स्तम्भ (Aruna Stambha)5 मी

16-कोणीय पाषाण स्तम्भ; मूल रूप से कोणार्क सूर्य मंदिर का — मराठा-काल में पुरी स्थानांतरित। शीर्ष पर सूर्य के सारथी अरुण की प्रतिमा।

नीला चक्र (Nila Chakra)0 मी

मंदिर शिखर पर अष्टधातु से निर्मित 8-तारी चक्र — विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक। प्रत्येक दिन सायं नया पताका (ध्वज) चढ़ाने की 800-वर्ष पुरानी परंपरा।

श्री लोकनाथ मंदिर1.5 किमी

रामायण-काल के लक्ष्मण द्वारा स्थापित शिव-लिंग की मान्यता; पंच-मुखी शिव। पुरी के पुरातन मंदिरों में।

श्री बेड़ी हनुमान मंदिर2.5 किमी

जगन्नाथ की रक्षा हेतु हनुमान को बंदी (बेड़ी) बनाये जाने की कथा से सम्बद्ध — पुरी को बाढ़/समुद्र से सुरक्षा का प्रतीक

स्वर्गद्वार बीच (Swargadwar Beach)800 मी

बंगाल की खाड़ी पर पवित्र समुद्र-तट; 'स्वर्ग-द्वार' (स्वर्ग का प्रवेश) के रूप में मान्य; पुरी आगमन पर समुद्र-स्नान की पारंपरिक अनिवार्यता

नरेन्द्र सरोवर / नरेन्द्र पुष्करिणी1 किमी

चन्दन यात्रा (42-दिवसीय) के नौका-विहार का सरोवर

कोणार्क सूर्य मंदिर (UNESCO विश्व धरोहर)35 किमी

13वीं शताब्दी का सूर्य-रथ-मंदिर; नरसिंहदेव I (पूर्वी गंग वंश) द्वारा निर्मित; UNESCO विश्व धरोहर। पुरी यात्रा के साथ अनिवार्य।

मूल चार धाम (आदि शंकराचार्य निर्धारित)

पूर्व-धाम — पुरी जगन्नाथ। अन्य 3: द्वारका (पश्चिम), रामेश्वरम (दक्षिण), बद्रीनाथ (उत्तर)। पूर्व का चार-धाम जिसे प्रत्येक हिन्दू को जीवन में एक बार करने का संकल्प।

4 मंदिर

108 अभिमान क्षेत्रम् (श्री वैष्णव परंपरा)

108 अभिमान क्षेत्रों में सम्मिलित; पद्मासन-स्वरूप विष्णु-पूजा के साथ-साथ काष्ठ-स्वरूप का अनूठा क्षेत्र

108 मंदिर

ओडिशा गोल्डन ट्रायेंगल (पुरी + भुवनेश्वर + कोणार्क)

त्रिकोण का मुख्य आध्यात्मिक केन्द्र — पुरी जगन्नाथ + भुवनेश्वर लिंगराज + कोणार्क सूर्य मंदिर

नीला माधव / दारु ब्रह्म परंपरा

दारु ब्रह्म (काष्ठ-स्वरूप विष्णु) उपासना की एकमात्र जीवित परंपरा

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA), श्री मन्दिर, पुरी, ओडिशा — PIN 752002
हवाई अड्डा
बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (BBI) — पुरी से ~60 किमी सड़क मार्ग
रेलवे
पुरी रेलवे स्टेशन (PURI) — जगन्नाथ मंदिर से ~3 किमी; भारतीय रेलवे के पूर्व तट रेलवे का प्रमुख टर्मिनस
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम; तापमान 20-30°C। मार्च-मई गर्म एवं आर्द्र। रथ यात्रा (जून-जुलाई) पीक भीड़।
हेल्पलाइन
+91-6752-222002
60 किमीBhubaneswar
35 किमीKonark
500 किमीKolkata
460 किमीVisakhapatnam
1715 किमीDelhi
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