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Jawalamukhi · Himachal Pradesh

श्री ज्वालामुखी देवी

श्री ज्वालामुखी देवी (ज्वाला जी) मंदिर — कोहला, ज्वालामुखी, ज़िला काँगड़ा

ज्वालामुखी / ज्वाला देवी — अग्नि-स्वरूपा शक्ति; जिह्वा-पीठ की देवी

अन्य नाम: ज्वाला जी · ज्वाला देवी · ज्वालाजी · अग्नि-देवी · जिह्वा-पीठ की देवी

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा
  • हिमाचल प्रदेश के 5-देवी दर्शन यात्…
श्री ज्वालामुखी देवी
दर्शन समय
05:00 – 22:00
स्वरूप
9 अखण्ड ज्वालाएँ
स्थान
Jawalamukhi · Himachal Pradesh
उत्तम ऋतु
मार्च-जून एवं सितंबर-नवंबर सर्वोत्तम
काल
मूल पीठ: प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ — आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्रम् में 'ज्वालामुख्यां तथा जिह्वा देव उन्मत्तभैरवः'
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा — जिह्वा-पीठ; सती की जिह्वा यहाँ गिरी; भैरव: उन्मत्त-भैरव; देवी-रूप: सिद्धिदा (अम्बिका)
  • हिमाचल प्रदेश के 5-देवी दर्शन यात्रा का केन्द्र (नैना देवी + चिन्तपूर्णी + ज्वालामुखी + वज्रेश्वरी + चामुण्डा देवी)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री ज्वालामुखी देवी — कोई मूर्ति नहीं; देवी 9 स्वयं-प्रज्ज्वलित अग्नि-शिखाओं (ज्वालाओं) के रूप में पूज्य; अनादि-स्वतंत्र अग्नि बिना किसी ईंधन के सहस्राब्दियों से अखण्ड

9 अखण्ड ज्वालाएँ — 1. महाकाली, 2. अन्नपूर्णा, 3. चण्डी, 4. हिंगलाज, 5. विन्ध्यवासिनी, 6. महालक्ष्मी, 7. सरस्वती, 8. अम्बिका, 9. अंजना (अंजि देवी)। मुख्य ज्वाला महाकाली रूप

सम्प्रदाय: शाक्त — शक्ति-पीठ परंपरा

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

देवी भागवत पुराण

अष्टोत्तर-शत-पीठ अध्याय — 51 शक्ति-पीठ सूची; ज्वालामुखी जिह्वा-पीठ

तंत्रचूड़ामणि

51 शक्ति-पीठ सूची — ज्वालामुखी / जिह्वा / उन्मत्त-भैरव

अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य रचित — 'ज्वालामुख्यां तथा जिह्वा देव उन्मत्तभैरवः। अम्बिका सिद्धिदा नाम्नी स्तनं जालन्धरे मम'

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) — अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में ज्वालामुखी की स्तुति
  • पाण्डव-परंपरा — लोक-गीत 'पञ्जन पञ्जन पाण्डवन तेरा भवन बनाया' में संरक्षित
  • राजा भूमि चन्द कटोच (काँगड़ा) — स्वप्न-दर्शन के पश्चात् पीठ की पहचान एवं मंदिर-निर्माण
  • ध्यानु भगत — मुगल बादशाह अकबर के समक्ष कटे-घोड़े को देवी-कृपा से पुनर्जीवित करने का प्रसंग; अपना सिर अर्पण की कथा
  • गुरु गोरखनाथ — मंदिर-परिसर के निकट 'गोरख दिब्बी' में तपस्या; आज भी जल उबलता दिखता है किन्तु शीतल
  • महाराजा रणजीत सिंह (सिख-साम्राज्य) — 1815 ईस्वी स्वर्ण-मुलम्मा गुंबद
  • कुँवर खड़क सिंह — रजत-मुलम्मा-द्वार-दान
  • मुगल बादशाह अकबर — स्वर्ण-छत्र अर्पण; देवी द्वारा अस्वीकार्य — छत्र अज्ञात-धातु में परिवर्तित

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 18151815 ईस्वी — महाराजा रणजीत सिंह द्वारा मंदिर के शिखर पर स्वर्ण-मुलम्मा गुंबद-निर्माणCultural Heritage of India + MyOksha
  2. 185019वीं शताब्दी मध्य — कुँवर खड़क सिंह द्वारा रजत-मुलम्मा द्वार-दानTemple Guru + multiple
  3. 1980हिमाचल प्रदेश सरकार के मंदिर-आयुक्त एवं उप-आयुक्त काँगड़ा के अधीन प्रबंधनHP Govt Kangra Temples portal
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नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:00 से 22:00 तक · मध्याह्न विश्राम ग्रीष्म: 5:00 AM - 10:00 PM; शीत: 6:00 AM - 9:30 PM

मंगल आरतीग्रीष्म 5:00-6:00 AM / शीत 6:00-7:00 AM
दैनिक

दिन की प्रथम आरती

पञ्चोपचार पूजनसूर्योदय पर
दैनिक

द्वितीय पूजा-काल

भोग आरतीग्रीष्म 11:30 AM-12:30 PM / शीत 11:40 AM-12:30 PM
दैनिक

मध्याह्न भोग

सन्ध्या आरतीग्रीष्म 7:00-8:00 PM / शीत 6:00-7:00 PM
दैनिक
शयन आरतीग्रीष्म 9:30-10:00 PM / शीत 8:30-9:00 PM
दैनिक

अद्वितीय — सौन्दर्य लहरी पारायण; देवी की शय्या-सज्जा; ज्वालामुखी का विशिष्ट अनुष्ठान

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
ग्रीष्म 5:00 AM-10:00 PM / शीत 6:00 AM-9:30 PM
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

9 ज्वालाओं का सीधा दर्शन; निःशुल्क।

ई-पूजा (ऑनलाइन सेवा)

हिमाचल प्रदेश सरकार की आधिकारिक ई-पूजा प्रणाली से ऑनलाइन संकल्प।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

विशेष अभिषेक एवं रात्रि-जागरण। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

चैत्र (वासन्तिक) नवरात्रि — ज्वालामुखी मेलाचैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

वर्ष का प्रमुख मेला; 9-दिवसीय; उत्तर-भारत से लाखों श्रद्धालु। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी)।

शारदीय नवरात्रि — ज्वालामुखी मेलाआश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी

द्वि-वार्षिक प्रमुख मेला; 9-रात्रि महोत्सव। 2026 — रविवार 11 अक्टूबर से मंगलवार 20 अक्टूबर (विजयदशमी)।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

वाक्-सिद्धि एवं वाणी-शक्ति

ज्वालामुखी = जिह्वा-पीठ; देवी के जिह्वा-स्वरूप की उपासना से वाक्-सिद्धि एवं वाणी-शक्ति की प्राप्ति

स्रोत: देवी भागवत + तंत्रचूड़ामणि (51 शक्ति-पीठ परंपरा)

ऋण-विमोचन एवं विघ्न-निवारण

अग्नि-स्वरूपा देवी की आराधना से ऋण, विघ्न एवं नकारात्मक-शक्तियों का दहन

स्रोत: ज्वालामुखी स्थल-परंपरा

हिमाचल 5-देवी यात्रा-संकल्प

नैना देवी + चिन्तपूर्णी + ज्वालामुखी + वज्रेश्वरी + चामुण्डा देवी — 5-देवी संयुक्त-यात्रा का केन्द्रीय पीठ

स्रोत: हिमाचल शाक्त-परंपरा

अष्टादश शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प

आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में नामांकित

स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचितइस मन्दिर हेतुश्लोक: 'ज्वालामुख्यां तथा जिह्वा देव उन्मत्तभैरवः। अम्बिका सिद्धिदा नाम्नी स्तनं जालन्धरे मम' — ज्वालामुखी का शास्त्रीय प्रमाण
  • दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्यम्)ग्रन्थमार्कण्डेय पुराण अध्याय 81-93इस मन्दिर हेतुमंदिर में दैनिक हवन के समय पारायण
  • सौन्दर्य लहरीस्तोत्रआदि शंकराचार्य रचितइस मन्दिर हेतुशयन आरती के समय पारायण — ज्वालामुखी की विशिष्ट परंपरा
  • श्री ज्वाला देवी चालीसाचालीसालोक-परंपराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

गोरख दिब्बी100 मी

गुरु गोरखनाथ-कालीन कुण्ड; जल उबलता दिखाई देता है किन्तु शीतल; पौराणिक 'खिचड़ी-कथा' से सम्बद्ध

अकबर का परिवर्तित-छत्र (मंदिर-परिसर में)50 मी

अकबर द्वारा अर्पित स्वर्ण-छत्र जो अज्ञात-धातु में परिवर्तित हुआ — आज भी संरक्षित (या प्रतिकृति)

चिन्तपूर्णी देवी मंदिर (ज़िला ऊना)31 किमी

51 शक्ति-पीठ — सती के चरण; 5-देवी यात्रा का अगला तीर्थ

वज्रेश्वरी / ब्रजेश्वरी देवी मंदिर (काँगड़ा)40 किमी

51 शक्ति-पीठ — सती का वाम-वक्ष; काँगड़ा-नगर का प्रमुख शक्ति-तीर्थ

चामुण्डा देवी मंदिर (पालमपुर)65 किमी

हिमाचल-शक्ति-पीठ; 5-देवी यात्रा का अन्तिम तीर्थ

नैना देवी मंदिर (बिलासपुर)150 किमी

51 शक्ति-पीठ — सती के नेत्र; 5-देवी यात्रा का प्रारम्भिक तीर्थ

हिमाचल 5-देवी दर्शन यात्रा

केन्द्रीय (3 क्रम पर) — नैना देवी (बिलासपुर) → चिन्तपूर्णी → ज्वालामुखी → वज्रेश्वरी (काँगड़ा) → चामुण्डा देवी (पालमपुर); संयुक्त ~7-दिवसीय यात्रा

5 मंदिर · 7 दिन

अष्टादश महा-शक्ति-पीठ यात्रा (आदि शंकराचार्य)

'ज्वालामुख्यां तथा जिह्वा' — स्तोत्रम् में नामांकित

18 मंदिर

वैष्णो देवी विस्तृत शक्ति-यात्रा

वैष्णो देवी (कत्रा) → चिन्तपूर्णी → ज्वालामुखी → वज्रेश्वरी → चामुण्डा — संयुक्त ~10-दिवसीय यात्रा

5 मंदिर · 10 दिन

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री ज्वाला जी मंदिर, ज्वाला जी टेम्पल रोड, कोहला, ज्वालामुखी, ज़िला काँगड़ा — 176031, हिमाचल प्रदेश
हवाई अड्डा
काँगड़ा हवाई अड्डा (गगल, DHM) — ~46-49 किमी
रेलवे
ज्वालामुखी रोड रेलवे स्टेशन — ~20 किमी; पठानकोट — ~120 किमी (निकटतम प्रमुख स्टेशन)
बस-स्टैण्ड
ज्वालामुखी बस-स्टैंड (HRTC) — पठानकोट, ऊना, हमीरपुर, काँगड़ा, धर्मशाला एवं चण्डीगढ़ से सीधी बसें
उत्तम ऋतु
मार्च-जून एवं सितंबर-नवंबर सर्वोत्तम; चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि मेला पीक; शीतकाल (दिसंबर-फरवरी) में 6:00 AM - 9:30 PM संक्षिप्त समय।
हेल्पलाइन
01970-222223
वेबसाइट
https://jawalaji.in
20 किमीJwalamukhi Road Railway Statio…
48 किमीKangra Airport
32 किमीKangra town
31 किमीChintpurni Devi Temple
40 किमीVajreshwari/Brajeshwari Devi
53 किमीDharamshala
65 किमीChamunda Devi
121 किमीPathankot Railway
150 किमीNaina Devi
460 किमीDelhi
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