देवी भागवत पुराण
अष्टोत्तर-शत-पीठ अध्याय — 51 शक्ति-पीठ सूची; ज्वालामुखी जिह्वा-पीठ
Jawalamukhi · Himachal Pradesh
श्री ज्वालामुखी देवी (ज्वाला जी) मंदिर — कोहला, ज्वालामुखी, ज़िला काँगड़ा
ज्वालामुखी / ज्वाला देवी — अग्नि-स्वरूपा शक्ति; जिह्वा-पीठ की देवी
अन्य नाम: ज्वाला जी · ज्वाला देवी · ज्वालाजी · अग्नि-देवी · जिह्वा-पीठ की देवी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री ज्वालामुखी देवी — कोई मूर्ति नहीं; देवी 9 स्वयं-प्रज्ज्वलित अग्नि-शिखाओं (ज्वालाओं) के रूप में पूज्य; अनादि-स्वतंत्र अग्नि बिना किसी ईंधन के सहस्राब्दियों से अखण्ड
9 अखण्ड ज्वालाएँ — 1. महाकाली, 2. अन्नपूर्णा, 3. चण्डी, 4. हिंगलाज, 5. विन्ध्यवासिनी, 6. महालक्ष्मी, 7. सरस्वती, 8. अम्बिका, 9. अंजना (अंजि देवी)। मुख्य ज्वाला महाकाली रूप
सम्प्रदाय: शाक्त — शक्ति-पीठ परंपरा
अष्टोत्तर-शत-पीठ अध्याय — 51 शक्ति-पीठ सूची; ज्वालामुखी जिह्वा-पीठ
51 शक्ति-पीठ सूची — ज्वालामुखी / जिह्वा / उन्मत्त-भैरव
आदि शंकराचार्य रचित — 'ज्वालामुख्यां तथा जिह्वा देव उन्मत्तभैरवः। अम्बिका सिद्धिदा नाम्नी स्तनं जालन्धरे मम'
05:00 से 22:00 तक · मध्याह्न विश्राम ग्रीष्म: 5:00 AM - 10:00 PM; शीत: 6:00 AM - 9:30 PM
दिन की प्रथम आरती
द्वितीय पूजा-काल
मध्याह्न भोग
अद्वितीय — सौन्दर्य लहरी पारायण; देवी की शय्या-सज्जा; ज्वालामुखी का विशिष्ट अनुष्ठान
9 ज्वालाओं का सीधा दर्शन; निःशुल्क।
हिमाचल प्रदेश सरकार की आधिकारिक ई-पूजा प्रणाली से ऑनलाइन संकल्प।
विशेष अभिषेक एवं रात्रि-जागरण। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
वर्ष का प्रमुख मेला; 9-दिवसीय; उत्तर-भारत से लाखों श्रद्धालु। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी)।
द्वि-वार्षिक प्रमुख मेला; 9-रात्रि महोत्सव। 2026 — रविवार 11 अक्टूबर से मंगलवार 20 अक्टूबर (विजयदशमी)।
ज्वालामुखी = जिह्वा-पीठ; देवी के जिह्वा-स्वरूप की उपासना से वाक्-सिद्धि एवं वाणी-शक्ति की प्राप्ति
स्रोत: देवी भागवत + तंत्रचूड़ामणि (51 शक्ति-पीठ परंपरा)
अग्नि-स्वरूपा देवी की आराधना से ऋण, विघ्न एवं नकारात्मक-शक्तियों का दहन
स्रोत: ज्वालामुखी स्थल-परंपरा
नैना देवी + चिन्तपूर्णी + ज्वालामुखी + वज्रेश्वरी + चामुण्डा देवी — 5-देवी संयुक्त-यात्रा का केन्द्रीय पीठ
स्रोत: हिमाचल शाक्त-परंपरा
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में नामांकित
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
गुरु गोरखनाथ-कालीन कुण्ड; जल उबलता दिखाई देता है किन्तु शीतल; पौराणिक 'खिचड़ी-कथा' से सम्बद्ध
अकबर द्वारा अर्पित स्वर्ण-छत्र जो अज्ञात-धातु में परिवर्तित हुआ — आज भी संरक्षित (या प्रतिकृति)
51 शक्ति-पीठ — सती के चरण; 5-देवी यात्रा का अगला तीर्थ
51 शक्ति-पीठ — सती का वाम-वक्ष; काँगड़ा-नगर का प्रमुख शक्ति-तीर्थ
हिमाचल-शक्ति-पीठ; 5-देवी यात्रा का अन्तिम तीर्थ
51 शक्ति-पीठ — सती के नेत्र; 5-देवी यात्रा का प्रारम्भिक तीर्थ
केन्द्रीय (3 क्रम पर) — नैना देवी (बिलासपुर) → चिन्तपूर्णी → ज्वालामुखी → वज्रेश्वरी (काँगड़ा) → चामुण्डा देवी (पालमपुर); संयुक्त ~7-दिवसीय यात्रा
5 मंदिर · 7 दिन
'ज्वालामुख्यां तथा जिह्वा' — स्तोत्रम् में नामांकित
18 मंदिर
वैष्णो देवी (कत्रा) → चिन्तपूर्णी → ज्वालामुखी → वज्रेश्वरी → चामुण्डा — संयुक्त ~10-दिवसीय यात्रा
5 मंदिर · 10 दिन