देवी भागवत पुराण
दक्ष-यज्ञ कथा एवं सती-अंग-पतन; 51 शक्ति-पीठ परंपरा का आधार
Kolkata · West Bengal
श्री कालीघाट काली मन्दिर — कोलकाता (आदि-पीठ कालिक्षेत्र)
कालीघाट / कालिक्षेत्र — सती के दक्षिण पाद-अङ्गुष्ठ का शक्ति-पीठ
अन्य नाम: कालीघाट · आदि-पीठ · आदि शक्ति-पीठ · कालिक्षेत्र · कालिकता काली

इस मन्दिर की विशेषता
श्री दक्षिण-काली — कोई नियमित मूर्ति नहीं; गर्भगृह में सती के दक्षिण पाद-अङ्गुष्ठ (दायाँ पैर का अंगूठा) रूपी कसौटी-शिला स्वयं देवी; इसके ऊपर साधु-संतों द्वारा तीन-नेत्र, स्वर्ण-जिह्वा एवं चार-भुजा-स्वरूप अध्यारोपित (खड्ग, असुर-कटा-शीर्ष, वर-अभय-मुद्रा)
त्रिनेत्रा (रजत-कमल-नेत्र); स्वर्ण-निर्मित प्रसारित-जिह्वा; 4 भुजाएँ (दो में खड्ग एवं असुर-कटा-शीर्ष, दो वर/अभय-मुद्रा में); काली-काला कसौटी-शिला मुख-स्वरूप
सम्प्रदाय: शाक्त — कालिकुल तांत्रिक परंपरा; 10 महाविद्याओं में काली
दक्ष-यज्ञ कथा एवं सती-अंग-पतन; 51 शक्ति-पीठ परंपरा का आधार
कालिक्षेत्र को 4 आदि शक्ति-पीठों में अग्रणी घोषित
51 शक्ति-पीठ सूची — कालीघाट / दक्षिण-पाद-अङ्गुष्ठ / नकुलेश्वर भैरव
आद्या-स्तोत्र — आद्या-माँ की उपासना का तांत्रिक मूल
05:00 से 22:30 तक · मध्याह्न विश्राम 14:00-17:00 (भोग एवं स्वच्छता हेतु बन्द)
दिन की प्रथम आरती; दर्शन-काल से पूर्व
मध्याह्न-भोग के पश्चात् मंदिर 14:00-17:00 बन्द
दिन की अन्तिम आरती
वस्त्र-संहिता: पारंपरिक वस्त्र अनुशंसित — महिलाएँ साड़ी/सलवार; पुरुष कुर्ता-धोती/पतलून; स्लीवलेस एवं पश्चिमी शॉर्ट्स अनुपयुक्त; सिर-ढकाव वाञ्छित
फोटोग्राफी: गर्भगृह एवं सम्पूर्ण मंदिर-परिसर में फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी कठोरतापूर्वक निषिद्ध
मुख्य काली दर्शन निःशुल्क; आधिकारिक सरकारी एवं मंदिर-समिति की स्थिति।
बंगाल का नववर्ष-पर्व; मंदिर में विशेष पूजा एवं हाल-खाता-अनुष्ठान। 2026 — बुधवार 15 अप्रैल।
मंदिर-परिसर के कुण्डुपुकुर तालाब में पवित्र-स्नान; जल को गंगा-समान-पुण्यदायी माना जाता है
देवी-पक्ष-प्रारम्भ; दुर्गा-पूजा का शास्त्रीय आगमन। 2026 — शनिवार 10 अक्टूबर।
बंगाल का सर्वोच्च वार्षिक पर्व; षष्ठी 16 अक्टूबर (शुक्र), सप्तमी 17-18 अक्टूबर, महाअष्टमी (सन्धि-पूजा + कुमारी-पूजा) 19 अक्टूबर (सोम), महानवमी 20 अक्टूबर (मंगल), विजयदशमी (सिन्दूर-खेला + विसर्जन) 21 अक्टूबर (बुध) — 2026।
कालीघाट का सर्वोच्च एक-रात्रि पर्व; निशीथ-काल (~11:39 PM-12:28 AM) तांत्रिक-पूजा; सम्पूर्ण रात्रि विस्तृत समय। 2026 — रविवार 8 नवंबर।
दक्षिण-काली — असुर-संहारिणी; तंत्र-पथ में सर्वोच्च देवी-स्वरूप
स्रोत: कालिका पुराण + ब्रह्म-यामल तंत्र
कालीघाट (दक्षिण पाद-अङ्गुष्ठ) + बिमला पुरी + तारा-तारिणी + कामाख्या — 4 आदि शक्ति-पीठों में सम्मिलित
स्रोत: कालिका पुराण
कालीघाट + दक्षिणेश्वर (भवतारिणी) + तारापीठ + बक्रेश्वर — बंगाल की शास्त्रीय शक्ति-तीर्थ-यात्रा
स्रोत: बंगाल शाक्त-परंपरा
श्री रामकृष्ण परमहंस ने यहाँ मातृ-दर्शन एवं समाधि अनुभव की; रानी रासमणि-मार्ग द्वारा दक्षिणेश्वर-कालीघाट तीर्थ-अक्ष
स्रोत: रामकृष्ण-परंपरा
हुगली नदी की प्राचीन-मूल धारा; मध्ययुगीन-काल की प्रमुख गंगा-वाहिनी; पुण्य-स्नान-स्थल
जल को गंगा-समान पुण्यदायी माना जाता है; स्नान-यात्रा का स्थल
स्वयंभू शिवलिंग; कालीघाट का संरक्षक भैरव; 1854 में पंजाब-नरेश तारा सिंह द्वारा प्रस्तर-स्वरूप निर्मित
1952 में मदर टेरेसा द्वारा स्थापित; पूर्व काली मंदिर-अनुबन्ध-भवन में
रानी रासमणि द्वारा 1855 में स्थापित; श्री रामकृष्ण परमहंस का पुजारी-काल (1856-1886); कोलकाता मेट्रो नीली रेखा द्वारा सीधी पहुँच
स्वामी विवेकानन्द द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय
51 शक्ति-पीठ — सती की तृतीय-नेत्र; बामा खेपा-परंपरा
कालीघाट (पाद-अङ्गुष्ठ — पूर्व-बंगाल) + बिमला (पाद — पुरी) + तारा-तारिणी (वक्ष — बेरहामपुर) + कामाख्या (योनि — गुवाहाटी) — 4 आदि-पीठों में सम्मिलित
4 मंदिर
दक्षिण पाद-अङ्गुष्ठ-पीठ; भैरव: नकुलेश्वर
51 मंदिर
कालीघाट + दक्षिणेश्वर (भवतारिणी) + तारापीठ + बक्रेश्वर — बंगाल की शास्त्रीय देवी-तीर्थ-यात्रा
4 मंदिर
कालीघाट मंदिर → नकुलेश्वर भैरव → निर्मल हृदय → आदि-गंगा घाट → 19वीं शताब्दी कालीघाट पट-चित्र-कला केन्द्र
5 मंदिर