चित्रा-पौर्णिमी मीनाक्षी-कल्याण-कथा (मूल-स्थल-पुराण)
देवी मीनाक्षी (मदुरै) ने अपने ज्येष्ठ-भ्राता कल्लळगर को सुन्दरेश्वर (शिव)-संग विवाह-निमन्त्रण भेजा। कल्लळगर 21 किमी पैदल-यात्रा-कर मदुरै-पहुँचे, परन्तु विवाह तब-तक सम्पन्न हो चुका था। अप्रसन्न-कल्लळगर ने मदुरै-नगर में प्रवेश-अस्वीकार किया एवं वैगै-नदी से लौट गए — स्वर्ण-अश्व-वाहन-आरूढ़ नदी में प्रवेश-कर बहन-दामाद को नदी से ही आशीर्वाद दिया; तत्पश्चात् अळगर-कोइल वापसी।
