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Urgam · Uttarakhand

श्री कल्पेश्वर महादेव मंदिर

श्री कल्पेश्वर महादेव मंदिर — ऊर्गम घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखण्ड

कल्पेश्वर / कल्पेश्वरा / कल्पनाथ / जटाधर / जटेश्वर — पञ्चम केदार; शिव के जटा (मतोबद्ध केश) का प्रकटन-स्थल

अन्य नाम: कल्पेश्वर · कल्पनाथ · जटाधर · जटेश्वर · कल्पेश्वरा

  • पञ्च केदार
  • ऊँचाई: 2,200 मीटर
  • पञ्च केदार में एकमात्र वर्षपर्यन्त…
  • पञ्च केदार में एकमात्र गुफा-स्वरूप
श्री कल्पेश्वर महादेव मंदिर
दर्शन समय
06:00 (वर्षपर्यन्त; पञ्च केदार में एकमात्र बिना-कपाट मन्दिर) – 20:00 (वर्षपर्यन्त)
स्वरूप
गुफा-स्वरूप अद्वितीय गर्भगृह
स्थान
Urgam · Uttarakhand
उत्तम ऋतु
वर्षपर्यन्त-खुला
काल
अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • पञ्च केदार — जटा (केश) प्रकटन-स्थल; अन्य 4: केदारनाथ (कूबड़), तुङ्गनाथ (बाहु), रुद्रनाथ (मुख), मध्यमहेश्वर (नाभि)
  • ऊँचाई: 2,200 मीटर (7,217.8 फुट) — Wikipedia + Incredible India पुष्ट (कतिपय-पुरातन-स्रोत 2,134 मीटर)
  • पञ्च केदार में एकमात्र वर्षपर्यन्त-खुला मन्दिर — कोई कपाट-बन्द नहीं
  • पञ्च केदार में एकमात्र गुफा-स्वरूप; कोई तक्षित शिवलिङ्ग नहीं
  • ऊर्गम घाटी क्लस्टर: ध्यान बद्री (सप्त बद्री) + बँशी-नारायण + बूढ़ा-केदार सह-स्थित
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री कल्पेश्वर महादेव — पाण्डव-पञ्च केदार कथा अनुसार शिव के जटा (मतोबद्ध केश) यहाँ प्रकट; गुफा-गर्भगृह में प्राकृतिक शिला-जटा पूज्य (कोई तक्षित शिवलिङ्ग नहीं — जीवित शिला/मृत्तिका पर अभिषेक); जटाधर/जटेश्वर-स्वरूप

गुफा-स्वरूप अद्वितीय गर्भगृह; प्राकृतिक शिला-जटा पूज्य; पञ्च केदार में एकमात्र गुफा-रूप एवं एकमात्र जीवित-शिला-अभिषेक

सम्प्रदाय: शैव — पाण्डव-पञ्च केदार परम्परा; पुजारी दस-नामी गोसाईं (आदि शंकराचार्य-नियुक्त मूल-दक्षिण-भारतीय शिष्य-वंश)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

पाण्डव-पञ्च केदार कथा (महाभारत-उत्तर परम्परा)

कुरुक्षेत्र-युद्ध-पश्चात् पाण्डव शिव-शरण; शिव नन्दि-रूप; गुप्तकाशी में भीम ने पहचाना; नन्दि पृथ्वी में लीन एवं 5-स्थानों पर पुनः प्रकट; कल्पेश्वर पर जटा (मतोबद्ध केश) का प्रकटन

दुर्वासा-कल्पवृक्ष परम्परा

अत्रि-अनुसूया-पुत्र दुर्वासा मुनि (शिव-अंश) ने कल्पवृक्ष (इच्छा-पूर्ति-वृक्ष) के नीचे दीर्घ-तपस्या की; 'कल्प' (इच्छा) + 'ईश्वर' (प्रभु) — कल्पेश्वर नामकरण

कृष्ण-सत्यभामा कल्पवृक्ष लोक-परम्परा

स्थानीय परम्परा अनुसार सत्यभामा की इच्छा पर श्रीकृष्ण ने स्वर्ग से कल्पवृक्ष ऊर्गम-क्षेत्र लाए; प्राचीन-काल में ऊर्गम घाटी कल्पवृक्षों से पूर्ण

संत एवं परम्परा

  • पाण्डव — मन्दिर-निर्माण की परम्परागत-मान्यता
  • दुर्वासा मुनि (अत्रि-अनुसूया-पुत्र, शिव-अंश) — कल्पवृक्ष-तपस्या
  • आदि शंकराचार्य — दस-नामी गोसाईं वंश-नियुक्ति (पञ्च केदार के लिए)
  • श्रीकृष्ण-सत्यभामा — कल्पवृक्ष-स्थानान्तरण लोक-परम्परा

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. आदि शंकराचार्य के काल में दस-नामी गोसाईं पुजारी-वंश की पञ्च केदार-नियुक्तिUttarakhand Tourism + TemplePurohit
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 (वर्षपर्यन्त; पञ्च केदार में एकमात्र बिना-कपाट मन्दिर) से 20:00 (वर्षपर्यन्त) तक

प्रातः आरती06:30
दैनिक (वर्षपर्यन्त)
सायं आरती19:00
दैनिक (वर्षपर्यन्त)

विशेष नियम: वर्षपर्यन्त खुला (कोई शीतकालीन-बन्दी नहीं); मानसून-काल (जुलाई-अगस्त) में हेलङ्ग-ऊर्गम सड़क पर भू-स्खलन-जोखिम; देवग्राम तक मोटर-योग्य, अन्तिम 300-500 मीटर पैदल

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-20:00 (वर्षपर्यन्त)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु; वृद्ध-वर्ग एवं परिवार

कोई प्रवेश-शुल्क नहीं; देवग्राम तक मोटर-योग्य; अन्तिम 300-500 मीटर सरल पैदल; पञ्च केदार में सर्वाधिक-सुलभ दर्शन।

रुद्राभिषेक (गुफा-शिला-जटा)निःशुल्क

गुफा-गर्भगृह में जीवित-शिला-जटा पर पारम्परिक अभिषेक; पञ्च केदार में एकमात्र जीवित-शिला-अभिषेक।

कल्वर कुण्ड स्नाननिःशुल्क

मन्दिर-समीप कल्वर कुण्ड (पवित्र जल-कुण्ड) पर दर्शन-पूर्व स्नान।

शीतकालीन-पञ्च-केदार-दर्शन (नवंबर-अप्रैल)
समय
नवंबर-अप्रैल (6 मास)

अन्य 4 पञ्च केदार बन्द-काल में कल्पेश्वर ही एकमात्र खुला पञ्च केदार-तीर्थ; शीत-काल पञ्च केदार-भक्तों हेतु एकमात्र-विकल्प।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

प्रमुख-वार्षिक-उत्सव; रात्रि-जागरण; गुफा-शिला-जटा पर रुद्राभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी। अन्य 4 पञ्च केदार बन्द होने से कल्पेश्वर का पञ्च-केदार-शीतकालीन-महत्व अद्वितीय।

श्रावण सोमवार 2026श्रावण (जुलाई-अगस्त)

30 जुलाई-28 अगस्त 2026 के सोमवार — रुद्राभिषेक एवं 'ॐ नमः शिवाय' पारायण।

श्रावण-शिवरात्रिश्रावण कृष्ण चतुर्दशी

श्रावण-मास शिवरात्रि-अनुष्ठान।

वर्षपर्यन्त दर्शन-कालसभी मास

पञ्च केदार में एकमात्र वर्षपर्यन्त-खुला मन्दिर; मानसून (जुलाई-अगस्त) हेलङ्ग-ऊर्गम सड़क पर भू-स्खलन-जोखिम; अक्टूबर-नवंबर एवं मार्च-मई सर्वोत्तम।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

पञ्च केदार यात्रा-समापन-संकल्प (जटा-दर्शन)

पाण्डव-कथा अनुसार शिव-जटा का प्रकटन-स्थल; पञ्च केदार-यात्रा का अन्तिम (पञ्चम) तीर्थ

स्रोत: पाण्डव-पञ्च केदार परम्परा

कल्पवृक्ष-इच्छा-पूर्ति-संकल्प

दुर्वासा-तपस्या-स्थल; 'कल्प' (इच्छा) + 'ईश्वर' (प्रभु) — इच्छा-पूर्ति-वृक्ष कल्पवृक्ष-सम्बद्ध; मनोकामना-पूर्ति-तीर्थ

स्रोत: Uttarakhand Tourism + ApniSanskriti + Glorious Uttarakhand

शीतकालीन पञ्च-केदार-दर्शन-संकल्प

नवंबर-अप्रैल काल में कल्पेश्वर ही एकमात्र खुला पञ्च केदार-तीर्थ; अन्य 4 बन्द-काल में पञ्च-केदार-दर्शन का एकमात्र-विकल्प

स्रोत: TheDivineTrails + KedarnathBlog + ExploringWings बहु-स्रोत

जीवित-शिला-अभिषेक-संकल्प (अद्वितीय)

पञ्च केदार में एकमात्र गुफा-गर्भगृह; प्राकृतिक शिला-जटा पर जीवित-शिला-अभिषेक — अन्य 4 केदारों से भिन्न तक्षित-लिङ्ग-रहित स्पर्श-संवाद

स्रोत: Wikipedia + NativeSteps + Grokipedia

ऊर्गम घाटी सर्व-सम्प्रदाय क्लस्टर-दर्शन

एक-घाटी में कल्पेश्वर (शैव पञ्च केदार) + ध्यान बद्री (वैष्णव सप्त बद्री) + बँशी-नारायण + बूढ़ा-केदार — दुर्लभ शैव-वैष्णव संगम

स्रोत: Wikipedia Sapta Badri + Uttarakhand Tourism

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमः शिवाय (पञ्चाक्षरी)मूल मंत्रशैव परम्पराइस मन्दिर हेतु
  • महामृत्युञ्जय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12)मंत्रऋग्वेदअभिषेकम्-काल में पारायण
  • श्री रुद्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय संहिता 4.5/4.7)रुद्राभिषेक स्तोत्रकृष्ण यजुर्वेदरुद्राभिषेक-काल में
  • जटाधर/जटेश्वर गढ़वाली शैव भजनस्थानीय भजनगढ़वाली शैव परम्पराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

ध्यान बद्री मन्दिर, ऊर्गम (Dhyan Badri)2 किमी

सप्त बद्री (गढ़वाल के 7 विष्णु-मन्दिर) में सम्मिलित; 4-भुज कृष्ण-शिला विष्णु-ध्यान-मुद्रा में; पाण्डव-वंश के उर्वरीशि द्वारा स्थापित; ऊँचाई ~2,135 मीटर; एक-घाटी में शैव-पञ्च केदार + वैष्णव-सप्त बद्री दुर्लभ-संगम

बूढ़ा-केदार मन्दिर (Boodha Kedar)1.5 किमी

ऊर्गम घाटी का प्राचीन शिव-मन्दिर

बँशी-नारायण मन्दिर (Bansi Narayan)12 किमी

8वीं-शताब्दी कृष्ण-मन्दिर ~3,600 मीटर पर; वर्ष में केवल 1 दिन (रक्षाबन्धन) खुलता है

कल्पगङ्गा (Kalpganga) नदी100 मी

अलकनन्दा-सहायक; मन्दिर-समीप बहती है; हेलङ्ग-ऊर्गम पगडण्डी अलकनन्दा-कल्पगङ्गा सङ्गम पार करती है

कल्वर कुण्ड (Kalvar Kund)100 मी

पवित्र जल-कुण्ड

जोशीमठ (Joshimath)26 किमी

आदि शंकराचार्य के 4 मठों में उत्तरामनाय ज्योतिर्मठ; बद्रीनाथ-गेटवे; ऑली-आधार

ऊर्गम घाटी ग्राम-क्लस्टर3 किमी

ऊर्गम, देवग्राम, ल्यारी-थैना, भेटा, भर्की, देमनी — सेब-वाटिका एवं आलू-खेत के पारम्परिक गढ़वाली ग्राम-क्लस्टर

पञ्च केदार यात्रा (5-तीर्थ)

पञ्चम एवं अन्तिम केदार — जटा; पञ्च केदार-यात्रा का समापन-तीर्थ

5 मंदिर · 12 दिन

कल्पेश्वर-रुद्रनाथ 2-केदार ट्रेक

ऊर्गम → देवग्राम → दुमक → बँशी-नारायण → पनार → रुद्रनाथ — 2-केदार-संयुक्त परिक्रमा

2 मंदिर

ऊर्गम घाटी शैव-वैष्णव क्लस्टर-यात्रा

कल्पेश्वर (शैव पञ्च केदार) + ध्यान बद्री (वैष्णव सप्त बद्री) + बूढ़ा-केदार + बँशी-नारायण — एक-घाटी सर्व-सम्प्रदाय-संगम

4 मंदिर

शीतकालीन पञ्च केदार-दर्शन-यात्रा

नवंबर-अप्रैल काल में पञ्च केदार-दर्शन का एकमात्र खुला-विकल्प; अन्य 4 बन्द-काल में पञ्च केदार-शीतकालीन-तीर्थ

1 मंदिर

बद्रीनाथ-चोटा चार धाम संयुक्त-यात्रा

NH-7 ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग पर हेलङ्ग-डायवर्जन — बद्रीनाथ-तीर्थयात्रियों के लिए कल्पेश्वर सुगम-समावेश

2 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री कल्पेश्वर मन्दिर, देवग्राम/ऊर्गम घाटी, हेलङ्ग-समीप, ज़िला चमोली, उत्तराखण्ड
हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (DED, देहरादून) — ~268-272 किमी
रेलवे
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन — ~250-253 किमी
बस-स्टैण्ड
हेलङ्ग (NH-7 ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग) — मुख्य-सड़क-बिन्दु; देवग्राम तक ~12-14 किमी मोटर-योग्य ऊर्गम घाटी सड़क; अन्तिम 300-500 मीटर सरल पैदल
उत्तम ऋतु
वर्षपर्यन्त-खुला (पञ्च केदार में एकमात्र); महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026; श्रावण सोमवार 30 जुलाई-28 अगस्त 2026; अक्टूबर-नवंबर एवं मार्च-मई सर्वोत्तम; मानसून (जुलाई-अगस्त) हेलङ्ग-ऊर्गम सड़क-त्याज्य; शीतकालीन (नवंबर-अप्रैल) पञ्च-केदार-शीतकालीन-दर्शन हेतु एकमात्र-विकल्प
0.5 किमीDevgram
13 किमीHelang
26 किमीJoshimath
65 किमीBadrinath
56 किमीGopeshwar
30 किमीChamoli
100 किमीRudraprayag
252 किमीRishikesh
270 किमीJolly Grant Airport
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