पाण्डव-पञ्च केदार कथा (महाभारत-उत्तर परम्परा)
कुरुक्षेत्र-युद्ध-पश्चात् पाण्डव शिव-शरण; शिव नन्दि-रूप; गुप्तकाशी में भीम ने पहचाना; नन्दि पृथ्वी में लीन एवं 5-स्थानों पर पुनः प्रकट; कल्पेश्वर पर जटा (मतोबद्ध केश) का प्रकटन
Urgam · Uttarakhand
श्री कल्पेश्वर महादेव मंदिर — ऊर्गम घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखण्ड
कल्पेश्वर / कल्पेश्वरा / कल्पनाथ / जटाधर / जटेश्वर — पञ्चम केदार; शिव के जटा (मतोबद्ध केश) का प्रकटन-स्थल
अन्य नाम: कल्पेश्वर · कल्पनाथ · जटाधर · जटेश्वर · कल्पेश्वरा

इस मन्दिर की विशेषता
श्री कल्पेश्वर महादेव — पाण्डव-पञ्च केदार कथा अनुसार शिव के जटा (मतोबद्ध केश) यहाँ प्रकट; गुफा-गर्भगृह में प्राकृतिक शिला-जटा पूज्य (कोई तक्षित शिवलिङ्ग नहीं — जीवित शिला/मृत्तिका पर अभिषेक); जटाधर/जटेश्वर-स्वरूप
गुफा-स्वरूप अद्वितीय गर्भगृह; प्राकृतिक शिला-जटा पूज्य; पञ्च केदार में एकमात्र गुफा-रूप एवं एकमात्र जीवित-शिला-अभिषेक
सम्प्रदाय: शैव — पाण्डव-पञ्च केदार परम्परा; पुजारी दस-नामी गोसाईं (आदि शंकराचार्य-नियुक्त मूल-दक्षिण-भारतीय शिष्य-वंश)
कुरुक्षेत्र-युद्ध-पश्चात् पाण्डव शिव-शरण; शिव नन्दि-रूप; गुप्तकाशी में भीम ने पहचाना; नन्दि पृथ्वी में लीन एवं 5-स्थानों पर पुनः प्रकट; कल्पेश्वर पर जटा (मतोबद्ध केश) का प्रकटन
अत्रि-अनुसूया-पुत्र दुर्वासा मुनि (शिव-अंश) ने कल्पवृक्ष (इच्छा-पूर्ति-वृक्ष) के नीचे दीर्घ-तपस्या की; 'कल्प' (इच्छा) + 'ईश्वर' (प्रभु) — कल्पेश्वर नामकरण
स्थानीय परम्परा अनुसार सत्यभामा की इच्छा पर श्रीकृष्ण ने स्वर्ग से कल्पवृक्ष ऊर्गम-क्षेत्र लाए; प्राचीन-काल में ऊर्गम घाटी कल्पवृक्षों से पूर्ण
06:00 (वर्षपर्यन्त; पञ्च केदार में एकमात्र बिना-कपाट मन्दिर) से 20:00 (वर्षपर्यन्त) तक
विशेष नियम: वर्षपर्यन्त खुला (कोई शीतकालीन-बन्दी नहीं); मानसून-काल (जुलाई-अगस्त) में हेलङ्ग-ऊर्गम सड़क पर भू-स्खलन-जोखिम; देवग्राम तक मोटर-योग्य, अन्तिम 300-500 मीटर पैदल
कोई प्रवेश-शुल्क नहीं; देवग्राम तक मोटर-योग्य; अन्तिम 300-500 मीटर सरल पैदल; पञ्च केदार में सर्वाधिक-सुलभ दर्शन।
गुफा-गर्भगृह में जीवित-शिला-जटा पर पारम्परिक अभिषेक; पञ्च केदार में एकमात्र जीवित-शिला-अभिषेक।
मन्दिर-समीप कल्वर कुण्ड (पवित्र जल-कुण्ड) पर दर्शन-पूर्व स्नान।
अन्य 4 पञ्च केदार बन्द-काल में कल्पेश्वर ही एकमात्र खुला पञ्च केदार-तीर्थ; शीत-काल पञ्च केदार-भक्तों हेतु एकमात्र-विकल्प।
प्रमुख-वार्षिक-उत्सव; रात्रि-जागरण; गुफा-शिला-जटा पर रुद्राभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी। अन्य 4 पञ्च केदार बन्द होने से कल्पेश्वर का पञ्च-केदार-शीतकालीन-महत्व अद्वितीय।
30 जुलाई-28 अगस्त 2026 के सोमवार — रुद्राभिषेक एवं 'ॐ नमः शिवाय' पारायण।
श्रावण-मास शिवरात्रि-अनुष्ठान।
पञ्च केदार में एकमात्र वर्षपर्यन्त-खुला मन्दिर; मानसून (जुलाई-अगस्त) हेलङ्ग-ऊर्गम सड़क पर भू-स्खलन-जोखिम; अक्टूबर-नवंबर एवं मार्च-मई सर्वोत्तम।
पाण्डव-कथा अनुसार शिव-जटा का प्रकटन-स्थल; पञ्च केदार-यात्रा का अन्तिम (पञ्चम) तीर्थ
स्रोत: पाण्डव-पञ्च केदार परम्परा
दुर्वासा-तपस्या-स्थल; 'कल्प' (इच्छा) + 'ईश्वर' (प्रभु) — इच्छा-पूर्ति-वृक्ष कल्पवृक्ष-सम्बद्ध; मनोकामना-पूर्ति-तीर्थ
स्रोत: Uttarakhand Tourism + ApniSanskriti + Glorious Uttarakhand
नवंबर-अप्रैल काल में कल्पेश्वर ही एकमात्र खुला पञ्च केदार-तीर्थ; अन्य 4 बन्द-काल में पञ्च-केदार-दर्शन का एकमात्र-विकल्प
स्रोत: TheDivineTrails + KedarnathBlog + ExploringWings बहु-स्रोत
पञ्च केदार में एकमात्र गुफा-गर्भगृह; प्राकृतिक शिला-जटा पर जीवित-शिला-अभिषेक — अन्य 4 केदारों से भिन्न तक्षित-लिङ्ग-रहित स्पर्श-संवाद
स्रोत: Wikipedia + NativeSteps + Grokipedia
एक-घाटी में कल्पेश्वर (शैव पञ्च केदार) + ध्यान बद्री (वैष्णव सप्त बद्री) + बँशी-नारायण + बूढ़ा-केदार — दुर्लभ शैव-वैष्णव संगम
स्रोत: Wikipedia Sapta Badri + Uttarakhand Tourism
सप्त बद्री (गढ़वाल के 7 विष्णु-मन्दिर) में सम्मिलित; 4-भुज कृष्ण-शिला विष्णु-ध्यान-मुद्रा में; पाण्डव-वंश के उर्वरीशि द्वारा स्थापित; ऊँचाई ~2,135 मीटर; एक-घाटी में शैव-पञ्च केदार + वैष्णव-सप्त बद्री दुर्लभ-संगम
ऊर्गम घाटी का प्राचीन शिव-मन्दिर
8वीं-शताब्दी कृष्ण-मन्दिर ~3,600 मीटर पर; वर्ष में केवल 1 दिन (रक्षाबन्धन) खुलता है
अलकनन्दा-सहायक; मन्दिर-समीप बहती है; हेलङ्ग-ऊर्गम पगडण्डी अलकनन्दा-कल्पगङ्गा सङ्गम पार करती है
पवित्र जल-कुण्ड
आदि शंकराचार्य के 4 मठों में उत्तरामनाय ज्योतिर्मठ; बद्रीनाथ-गेटवे; ऑली-आधार
ऊर्गम, देवग्राम, ल्यारी-थैना, भेटा, भर्की, देमनी — सेब-वाटिका एवं आलू-खेत के पारम्परिक गढ़वाली ग्राम-क्लस्टर
पञ्चम एवं अन्तिम केदार — जटा; पञ्च केदार-यात्रा का समापन-तीर्थ
5 मंदिर · 12 दिन
ऊर्गम → देवग्राम → दुमक → बँशी-नारायण → पनार → रुद्रनाथ — 2-केदार-संयुक्त परिक्रमा
2 मंदिर
कल्पेश्वर (शैव पञ्च केदार) + ध्यान बद्री (वैष्णव सप्त बद्री) + बूढ़ा-केदार + बँशी-नारायण — एक-घाटी सर्व-सम्प्रदाय-संगम
4 मंदिर
नवंबर-अप्रैल काल में पञ्च केदार-दर्शन का एकमात्र खुला-विकल्प; अन्य 4 बन्द-काल में पञ्च केदार-शीतकालीन-तीर्थ
1 मंदिर
NH-7 ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग पर हेलङ्ग-डायवर्जन — बद्रीनाथ-तीर्थयात्रियों के लिए कल्पेश्वर सुगम-समावेश
2 मंदिर