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Guwahati · Assam

श्री माँ कामाख्या मंदिर

कामाख्या / कुब्जिका पीठ / नीलाचल देवी

अन्य नाम: कामाख्या देवी · कुब्जिका पीठ · नीलाचल कामाख्या · योनि पीठ

  • 51 शक्ति पीठ
  • शाक्त परंपरा के 4 आदि-पीठों में अग…
  • दश-महाविद्या पीठ
श्री माँ कामाख्या मंदिर
दर्शन समय
05:30 – 17:30
स्वरूप
बिना मूर्ति
स्थान
Guwahati · Assam
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
मूल पीठ: अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 51 शक्ति पीठ (योनि-पीठ — सर्व-शक्ति-पीठ-शिरोमणि)
  • शाक्त परंपरा के 4 आदि-पीठों में अग्रणी
  • दश-महाविद्या पीठ (10 महाविद्याओं का सम्पूर्ण परिसर)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री माँ कामाख्या देवी (देवी सती की 'योनि' स्वरूपिणी; शक्ति का योनि-पीठ)

बिना मूर्ति — गर्भगृह में योनि-आकार की प्राकृतिक शिला-दरार; निरंतर भूमिगत झरने से अभिषिक्त

सम्प्रदाय: शाक्त (तंत्र-शाक्त परंपरा का प्रमुख पीठ)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

कलिका पुराण

कामाख्या-माहात्म्य — कामाख्या को 'महामाया' एवं 'सर्व-तंत्र-पीठ-शिरोमणि' के रूप में प्रतिष्ठित; सती की योनि-पतन कथा

देवी भागवत पुराण

स्कन्ध 7 — सती-दक्ष यज्ञ कथा एवं 51 शक्ति-पीठों की उत्पत्ति

योगिनी तंत्र

कामरूप-कामाख्या के तांत्रिक स्वरूप का विशद वर्णन

महाभारत

सभा पर्व — कामरूप राज्य का संदर्भ

संत एवं परम्परा

  • महर्षि वशिष्ठ — परंपरानुसार कामाख्या-उपासना के आदि-ऋषि
  • कोच राजा विश्व-सिंह (1515-1540) — कोच राजवंश के संस्थापक; नीलाचल पहाड़ी पर मंदिर-अवशेषों की पुनर्खोज एवं उपासना-पुनर्जागरण के प्रवर्तक
  • कोच राजा नर-नारायण (1540-1587) — विश्व-सिंह के पुत्र; 1565 ईस्वी में वर्तमान मंदिर के पुनर्निर्माण के समय शासक; निर्माण-पर्यवेक्षण भाई चिलाराय द्वारा; नीलाचल शैली के जनक
  • चिलाराय — नर-नारायण के भाई एवं सेनापति; 1565 के मंदिर-निर्माण के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षक
  • अहोम-राजवंश — कोच पुनर्निर्माण के पश्चात् अहोम राजाओं द्वारा परिसर का विस्तार एवं प्राचीन कोच अवशेषों का संरक्षण

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 8008वीं-9वीं शताब्दी — कामाख्या-स्थल पर प्रारंभिक संरचनात्मक मंदिर-निर्माण का पुरातत्वीय साक्ष्यWikipedia Kamakhya Temple
  2. 110011वीं-12वीं शताब्दी — पाषाण-मंदिर का प्रमुख निर्माण-काल; इसी काल के अवशेषों पर 1565 का पुनर्निर्माण आधारितWikipedia Kamakhya Temple
  3. 15651565 ईस्वी — कोच राजा नर-नारायण (1540-1587) के काल में वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण पूर्ण; निर्माण-पर्यवेक्षण उनके भाई चिलाराय द्वारा; पिता राजा विश्व-सिंह (1515-1540) द्वारा पहले मंदिर-अवशेषों की पुनर्खोज एवं उपासना-पुनर्जागरण किया जा चुका था; अद्वितीय 'नीलाचल शैली' (नागर भारतीय + सारसेनिक मुग़ल) का जन्म; मधु-मक्खी के छत्ते के समान बीहड़ शिखरWikipedia Kamakhya Temple + Government of Assam Kamrup Metropolitan
  4. 170017वीं-18वीं शताब्दी — कोच मंदिर पर अहोम राजवंश द्वारा अतिरिक्त निर्माण; प्राचीन कोच अवशेषों का संरक्षणInheritage Foundation + Namakoti
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:30 से 17:30 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-14:30 (मध्याह्न विश्राम)

प्रातः स्नान एवं पूजा05:30-06:30
दैनिक

देवी का प्रातः स्नान एवं प्रथम पूजा

नित्य पूजा एवं भोग-निवेदन10:00-12:30
दैनिक
सायंकालीन पूजा (दीप-प्रज्ज्वलन एवं स्तोत्र-पाठ)15:00-16:30
दैनिक
04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य दर्शननिःशुल्क
समय
05:30-13:00 एवं 14:30-17:30
उपयुक्त
सभी भक्त

मुख्य गर्भगृह में देवी कामाख्या के योनि-पीठ का दर्शन। प्रायः लम्बी पंक्तियाँ।

विशेष/शीघ्र दर्शन (Special Pass)₹500
उपयुक्त
समय-सीमित भक्त एवं उत्सव-काल हेतु

₹500 प्रति-व्यक्ति विशेष पास से शीघ्र-दर्शन — विशेषतया उत्सव-काल एवं भारी-भीड़ के दिनों हेतु। बहु-स्रोत पुष्ट; आधिकारिक नीति काउंटर पर सत्यापित करें।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

अम्बुबाची मेला (Ambubachi Mela)आषाढ़ शुक्ल अष्टमी-दशमी (जून)

कामाख्या का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव — 'पूर्व का महाकुंभ'। देवी के वार्षिक रजोदर्शन का प्रतीक; मंदिर 3 दिन (22 जून दोपहर से 25 जून तक) पूर्णतः बन्द — सनातन शाक्त परंपरा में मातृत्व एवं सृजन-शक्ति का सम्मान। 26 जून प्रातः शुद्धि-विधि के पश्चात् मंदिर पुनः खुलता है; भक्तों को विशेष 'रजः-वस्त्र' प्रसाद प्राप्त होता है। 2026 — 22-25 जून (बन्द), 26 जून प्रातः पुनः-खुलना। लाखों भक्त, तांत्रिक एवं साधु आते हैं।

दुर्गा पूजा / नवरात्रिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी

शाक्त-परंपरा का प्रमुख उत्सव; देवी कामाख्या एवं दशों महाविद्या-शक्तियों की विशेष अर्चना। 2026 शारदीय दुर्गा पूजा — 17-21 अक्टूबर।

मणि-कर्णेश्वर पूजा एवं देवधनी नृत्यश्रावण-भाद्रपद

देवधनी नृत्य — कामाख्या का तांत्रिक नृत्य-अनुष्ठान; देवी कामाख्या एवं मणि-कर्णेश्वर का संयुक्त-पूजन

मनश्चा पूजाश्रावण-भाद्रपद

नाग-देवी मनसा की पूजा; पूर्वोत्तर शाक्त-परंपरा का विशिष्ट उत्सव

वसन्त पंचमी एवं विशेष शाक्त-पर्व

देवी-पूजन के अन्य प्रमुख दिन

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

सन्तान-प्राप्ति एवं स्त्री-शक्ति आशीर्वाद

कामाख्या योनि-पीठ — सृष्टि-शक्ति, स्त्री-तत्व एवं सन्तान-प्राप्ति की देवी; निःसन्तान दम्पतियों हेतु विशेष रूप से उपासित

स्रोत: कलिका पुराण + योगिनी तंत्र

तांत्रिक सिद्धि एवं दश-महाविद्या साधना

कामाख्या तंत्र-शास्त्र का सर्वोच्च पीठ; दशों महाविद्याओं की एक-स्थानीय उपासना — काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला

स्रोत: तंत्र शास्त्र + कलिका पुराण

इच्छा-पूर्ति एवं मोक्ष

कलिका पुराण कामाख्या को 'समस्त-कामनाओं की पूर्ति-करिणी' एवं 'मोक्ष-दायिनी' घोषित करता है

स्रोत: कलिका पुराण

51 शक्ति-पीठ यात्रा का अग्रणी पीठ

योनि-पीठ कामाख्या को 51 शक्ति-पीठों में सर्वोच्च माना जाता है; शक्ति-पीठ यात्रा का प्रथम-तीर्थ

स्रोत: देवी भागवत पुराण + तंत्र शास्त्र

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • कामाख्या बीज मंत्र — 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं कामाख्ये कामाख्ये कामेश्वरि स्वाहा'बीज-मंत्रयोगिनी तंत्र; कलिका पुराणइस मन्दिर हेतु
  • कामाख्या स्तोत्रस्तोत्रकलिका पुराण; तंत्र-शाक्त परंपराइस मन्दिर हेतु
  • दश-महाविद्या स्तोत्रस्तोत्रतंत्र शास्त्र; देवी पुराणइस मन्दिर हेतुकामाख्या परिसर में दशों महाविद्याओं — काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला — के पृथक् मंदिर
  • देवी महात्म्यम् / दुर्गा-सप्तशतीग्रन्थमार्कण्डेय पुराणशाक्त उपासना का आधार-ग्रंथ
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

दश-महाविद्या मंदिर परिसर (मुख्य कामाख्या मंदिर के चारों ओर)200 मी

दशों महाविद्याओं — काली, तारा, षोडशी (त्रिपुर सुन्दरी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला — के पृथक् मंदिर। 3 महाविद्याएँ मुख्य मंदिर के भीतर, शेष 7 परिसर के पृथक् मंदिरों में। तंत्र-शाक्त साधना का सम्पूर्ण परिसर।

भुवनेश्वरी मंदिर (नीलाचल पहाड़ी शीर्ष पर)500 मी

दश-महाविद्या में चौथी महाविद्या भुवनेश्वरी का स्वतंत्र मंदिर; पहाड़ी से ब्रह्मपुत्र-गुवाहाटी का अद्भुत दृश्य

उमानन्द मंदिर (पीकोक द्वीप)10 किमी

ब्रह्मपुत्र के बीच विश्व के सबसे छोटे नदी-द्वीप (Peacock Island) पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर; अहोम राजा गदाधर सिंह द्वारा 1694 ईस्वी में निर्मित। कामाख्या यात्रा के साथ अनिवार्य।

नवग्रह मंदिर (चित्राचल पहाड़ी)7 किमी

9 ग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु — का प्राचीन मंदिर; 18वीं शताब्दी में अहोम राजा द्वारा पुनर्निर्मित

बशिष्ठ मंदिर एवं आश्रम15 किमी

महर्षि वशिष्ठ का प्राचीन आश्रम-स्थल; शिव मंदिर एवं प्राकृतिक झरने

51 शक्ति पीठ यात्रा

योनि-पीठ कामाख्या — 51 शक्ति-पीठों में सर्वोच्च; शाक्त-परंपरा के 4 आदि-पीठों में अग्रणी

51 मंदिर

दश-महाविद्या पीठ यात्रा (एक-स्थानीय)

कामाख्या परिसर में दशों महाविद्याओं की सम्पूर्ण एक-स्थानीय उपासना सम्भव

10 मंदिर

असम-गुवाहाटी मंदिर समूह (कामाख्या + भुवनेश्वरी + उमानन्द + नवग्रह + बशिष्ठ)

केन्द्रीय; 5-मंदिर समूह की पूर्ण यात्रा 2 दिनों में

पूर्वोत्तर शक्ति-पीठ यात्रा (कामाख्या + तारापीठ बंगाल + त्रिपुर सुन्दरी त्रिपुरा)

पूर्वोत्तर शाक्त-परंपरा के 3 प्रमुख पीठों में अग्रणी

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री माँ कामाख्या मंदिर, नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी — 781010, कामरूप मेट्रोपोलिटन जिला, असम
हवाई अड्डा
लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, गुवाहाटी (LGBI/GAU) — मंदिर से ~20 किमी
रेलवे
कामाख्या रेलवे स्टेशन (KYQ) — मंदिर से ~6.8 किमी; गुवाहाटी जंक्शन (GHY) — ~8.3 किमी
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; तापमान 15-25°C। मानसून (जून-सितंबर) में अम्बुबाची मेला विशेष। ब्रह्मपुत्र का दृश्य अद्भुत। अप्रैल-मई गर्म एवं आर्द्र।
वेबसाइट
https://maakamakhya.org
8 किमीGuwahati city centre
20 किमीGuwahati Airport
100 किमीShillong
180 किमीTezpur
200 किमीKaziranga
440 किमीDibrugarh
1030 किमीKolkata
1860 किमीDelhi
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