कलिका पुराण
कामाख्या-माहात्म्य — कामाख्या को 'महामाया' एवं 'सर्व-तंत्र-पीठ-शिरोमणि' के रूप में प्रतिष्ठित; सती की योनि-पतन कथा
Guwahati · Assam
कामाख्या / कुब्जिका पीठ / नीलाचल देवी
अन्य नाम: कामाख्या देवी · कुब्जिका पीठ · नीलाचल कामाख्या · योनि पीठ

इस मन्दिर की विशेषता
श्री माँ कामाख्या देवी (देवी सती की 'योनि' स्वरूपिणी; शक्ति का योनि-पीठ)
बिना मूर्ति — गर्भगृह में योनि-आकार की प्राकृतिक शिला-दरार; निरंतर भूमिगत झरने से अभिषिक्त
सम्प्रदाय: शाक्त (तंत्र-शाक्त परंपरा का प्रमुख पीठ)
कामाख्या-माहात्म्य — कामाख्या को 'महामाया' एवं 'सर्व-तंत्र-पीठ-शिरोमणि' के रूप में प्रतिष्ठित; सती की योनि-पतन कथा
स्कन्ध 7 — सती-दक्ष यज्ञ कथा एवं 51 शक्ति-पीठों की उत्पत्ति
कामरूप-कामाख्या के तांत्रिक स्वरूप का विशद वर्णन
सभा पर्व — कामरूप राज्य का संदर्भ
05:30 से 17:30 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-14:30 (मध्याह्न विश्राम)
देवी का प्रातः स्नान एवं प्रथम पूजा
मुख्य गर्भगृह में देवी कामाख्या के योनि-पीठ का दर्शन। प्रायः लम्बी पंक्तियाँ।
₹500 प्रति-व्यक्ति विशेष पास से शीघ्र-दर्शन — विशेषतया उत्सव-काल एवं भारी-भीड़ के दिनों हेतु। बहु-स्रोत पुष्ट; आधिकारिक नीति काउंटर पर सत्यापित करें।
कामाख्या का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव — 'पूर्व का महाकुंभ'। देवी के वार्षिक रजोदर्शन का प्रतीक; मंदिर 3 दिन (22 जून दोपहर से 25 जून तक) पूर्णतः बन्द — सनातन शाक्त परंपरा में मातृत्व एवं सृजन-शक्ति का सम्मान। 26 जून प्रातः शुद्धि-विधि के पश्चात् मंदिर पुनः खुलता है; भक्तों को विशेष 'रजः-वस्त्र' प्रसाद प्राप्त होता है। 2026 — 22-25 जून (बन्द), 26 जून प्रातः पुनः-खुलना। लाखों भक्त, तांत्रिक एवं साधु आते हैं।
शाक्त-परंपरा का प्रमुख उत्सव; देवी कामाख्या एवं दशों महाविद्या-शक्तियों की विशेष अर्चना। 2026 शारदीय दुर्गा पूजा — 17-21 अक्टूबर।
देवधनी नृत्य — कामाख्या का तांत्रिक नृत्य-अनुष्ठान; देवी कामाख्या एवं मणि-कर्णेश्वर का संयुक्त-पूजन
नाग-देवी मनसा की पूजा; पूर्वोत्तर शाक्त-परंपरा का विशिष्ट उत्सव
देवी-पूजन के अन्य प्रमुख दिन
कामाख्या योनि-पीठ — सृष्टि-शक्ति, स्त्री-तत्व एवं सन्तान-प्राप्ति की देवी; निःसन्तान दम्पतियों हेतु विशेष रूप से उपासित
स्रोत: कलिका पुराण + योगिनी तंत्र
कामाख्या तंत्र-शास्त्र का सर्वोच्च पीठ; दशों महाविद्याओं की एक-स्थानीय उपासना — काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला
स्रोत: तंत्र शास्त्र + कलिका पुराण
कलिका पुराण कामाख्या को 'समस्त-कामनाओं की पूर्ति-करिणी' एवं 'मोक्ष-दायिनी' घोषित करता है
स्रोत: कलिका पुराण
योनि-पीठ कामाख्या को 51 शक्ति-पीठों में सर्वोच्च माना जाता है; शक्ति-पीठ यात्रा का प्रथम-तीर्थ
स्रोत: देवी भागवत पुराण + तंत्र शास्त्र
दशों महाविद्याओं — काली, तारा, षोडशी (त्रिपुर सुन्दरी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला — के पृथक् मंदिर। 3 महाविद्याएँ मुख्य मंदिर के भीतर, शेष 7 परिसर के पृथक् मंदिरों में। तंत्र-शाक्त साधना का सम्पूर्ण परिसर।
दश-महाविद्या में चौथी महाविद्या भुवनेश्वरी का स्वतंत्र मंदिर; पहाड़ी से ब्रह्मपुत्र-गुवाहाटी का अद्भुत दृश्य
ब्रह्मपुत्र के बीच विश्व के सबसे छोटे नदी-द्वीप (Peacock Island) पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर; अहोम राजा गदाधर सिंह द्वारा 1694 ईस्वी में निर्मित। कामाख्या यात्रा के साथ अनिवार्य।
9 ग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु — का प्राचीन मंदिर; 18वीं शताब्दी में अहोम राजा द्वारा पुनर्निर्मित
महर्षि वशिष्ठ का प्राचीन आश्रम-स्थल; शिव मंदिर एवं प्राकृतिक झरने
योनि-पीठ कामाख्या — 51 शक्ति-पीठों में सर्वोच्च; शाक्त-परंपरा के 4 आदि-पीठों में अग्रणी
51 मंदिर
कामाख्या परिसर में दशों महाविद्याओं की सम्पूर्ण एक-स्थानीय उपासना सम्भव
10 मंदिर
केन्द्रीय; 5-मंदिर समूह की पूर्ण यात्रा 2 दिनों में
पूर्वोत्तर शाक्त-परंपरा के 3 प्रमुख पीठों में अग्रणी