स्कन्द पुराण
काशी खण्ड (Book 4, Motilal Banarsidass Tagare संस्करण Vol 10-11; कुल 100 अध्याय, पूर्वार्ध + उत्तरार्ध)
अध्याय 99 — श्री विश्वेश्वर माहात्म्य
Varanasi · Uttar Pradesh
विश्वनाथ / विश्वेश्वर / अविमुक्तेश्वर
अन्य नाम: विश्वनाथ · विश्वेश्वर · बाबा विश्वनाथ · श्री विश्वनाथ · विश्वनाथ-ज्योतिर्लिङ्ग · अविमुक्तेश्वर लिंग

इस मन्दिर की विशेषता
विश्वनाथ (शिव)
ज्योतिर्लिंग — परंपरा के अनुसार बारह स्वयंभू ज्योतिर्लिंगों में से एक; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सातवें स्थान पर वर्णित। मूल लिंग 'अविमुक्तेश्वर लिंग' के रूप में जाना जाता है (अग्नि पुराण एवं स्कन्द पुराण आधार)।
सम्प्रदाय: शैव
काशी खण्ड (Book 4, Motilal Banarsidass Tagare संस्करण Vol 10-11; कुल 100 अध्याय, पूर्वार्ध + उत्तरार्ध)
अध्याय 99 — श्री विश्वेश्वर माहात्म्य
काशी खण्ड
अध्याय 98 — मोक्ष-मण्डप प्रयाण (काशी में मोक्ष)
काशी खण्ड
अध्याय 39 — अविमुक्तेश्वर का प्राकट्य
काशी खण्ड
अध्याय 26 — मणिकर्णिका का वर्णन
काशी रहस्य
काशी 'अविमुक्त' — शिव के द्वारा कभी न त्यागे जाने का स्थान
02:30 से 23:00 तक
ऑनलाइन पूर्व-बुकिंग आवश्यक; आमतौर पर 15 दिन पूर्व बुकिंग खुलती है, 90 दिन तक एडवांस बुकिंग संभव
भक्तों को आरती से 30 मिनट पूर्व (10:45) मंदिर में प्रवेश हेतु कहा जाता है
सात पंडितों द्वारा एक साथ संपन्न
गर्भगृह के सम्मुख से दर्शन; क्यू में प्रतीक्षा अनिवार्य। मंदिर ट्रस्ट इसे 'झाँकी दर्शन' कहता है — सभी भक्तों हेतु एक समान
शास्त्री सहायता के साथ क्यू-रहित दर्शन, निःशुल्क लॉकर एवं मेवा लड्डू प्रसाद
गर्भगृह में प्रवेश कर शिवलिंग का स्पर्श एवं प्रत्यक्ष पूजा
विदेश से / NRI / दूरस्थ भक्तों हेतु
मंदिर का प्रमुख वार्षिक पर्व; शिव-विवाह उत्सव; मध्यरात्रि में प्रमुख मंदिरों से ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य शोभायात्रा बाबा विश्वनाथ तक जाती है
भीड़: अत्यंत भारी भीड़; क्षमतावान न हों तो दर्शन कठिन; आवास 3-4 माह पूर्व बुक करना उचित
होली से 5 दिन पूर्व का पारंपरिक रंगोत्सव। मान्यता: इस दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरी का गौना (विवाह के बाद ससुराल से वापसी) करवाकर पहली बार काशी लाए। गौना यात्रा एक दिन पूर्व मंदिर के महंत के निवास 'टेढ़ी नीम' से प्रारंभ होकर मंदिर तक जाती है — पालकी पर शिव-पार्वती की रजत प्रतिमाएँ; विश्वनाथ गली रंग एवं भीड़ से भरी रहती है। एकमात्र शिव-संबंधित एकादशी।
भीड़: 200+ वर्षों से अविरत परंपरा (विकिपीडिया); विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभव
सावन 2025 के 4 सोमवार पर विशेष श्रृंगार: (1) 14 जुलाई — बाबा का चल विग्रह श्रृंगार, (2) 21 जुलाई — गौरी-शंकर श्रृंगार, (3) 28 जुलाई — अर्धनारीश्वर श्रृंगार, (4) 4 अगस्त — रुद्राक्ष श्रृंगार। श्रावण पूर्णिमा 9 अगस्त 2025 पर झूला श्रृंगार।
भीड़: सावन में 11 जुलाई से 9 अगस्त तक प्रोटोकॉल/स्पेशल रिक्वेस्ट दर्शन पूर्ण प्रतिबंधित। मोबाइल, बैग, पेन, धातु की वस्तुएँ निषिद्ध — घर पर ही छोड़ें (Free baggage काउंटर भी इस अवधि में बंद)। 5 कॉरिडोर प्रवेश द्वार: गेट #4 नंदुफेरिया, सिल्को रूट, धुंधिराज रूट, सरस्वती गेट, भैरव द्वार/ललिता घाट (गंगा जल-स्तर के अनुसार उपलब्ध)। आरोग्य मेडिकल केंद्र पर डॉक्टर तैनात।
वार्षिक उच्च-यात्री काल; मंदिर ट्रस्ट प्रतिवर्ष 24 दिसम्बर से VIP/स्पर्श/प्रोटोकॉल दर्शन निलंबित कर देता है (CEO श्री विश्व भूषण मिश्र की 26 दिसम्बर 2025 की घोषणा अनुसार)। केवल 'झाँकी दर्शन' (सामान्य) उपलब्ध — सबके लिए एक समान
भीड़: नववर्ष पर VIP दर्शन की बुकिंग बंद; केवल सामान्य क्यू दर्शन। भीड़ कम होने पर VIP सुविधा बहाल
इस दिन बाबा का तिलक संस्कार किया जाता है
काशी में देहत्याग करने पर मुक्ति की प्राप्ति — विश्वनाथ का तारक मंत्र कान में फूँकने की परंपरा
स्रोत: स्कन्द पुराण, काशी खण्ड, अध्याय 98 — 'मोक्ष-मण्डप प्रयाण'; अग्नि पुराण में काशी को 'अविमुक्त' कहा गया अर्थात् शिव कभी नहीं त्यागते
महामृत्युंजय जप एवं अभिषेक का विशेष फल
स्रोत: महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12)
विश्वनाथाष्टकम् के नियमित पाठ से 'विद्या, श्री, सुख, अनन्त कीर्ति' एवं अंत में मोक्ष
स्रोत: श्री काशी विश्वनाथाष्टकम् फलश्रुति
अन्नपूर्णा देवी — काशी की पोषण देवी; काशी विश्वनाथ के साथ अनिवार्य दर्शन परंपरा (विश्वेश्वर + अन्नपूर्णा युगल)
51 शक्ति-पीठों में 23वाँ; भगवती सती के कान-कुण्डल का स्थान; काल-भैरव सहित पीठ-देवता
हिन्दू सबसे महत्वपूर्ण श्मशान घाट; काशी में मृत्यु ⇒ मोक्ष की मान्यता का केन्द्र; काशी कॉरिडोर इस घाट तक विस्तृत
नेपाली मंदिर निकट; काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का गंगा-द्वार यहीं खुलता है; मंदिर के स्वर्ण-शिखर के दर्शन हेतु उत्तम स्थान
काशी के 'कोतवाल'; परंपरानुसार काशी यात्रा भैरव दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है
केन्द्रीय आरम्भ एवं समापन बिन्दु — मणिकर्णिका पर संकल्प से आरम्भ, काशी विश्वनाथ में दर्शन से समापन। 'पंचक्रोशी' नाम का अर्थ: काशी 5 कोस (~16 किमी) तक विस्तृत — DrikPanchang पुष्ट
150 मंदिर · 5 दिन
7वाँ ज्योतिर्लिंग — आदि शंकराचार्य रचित द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के अनुसार क्रम (DrikPanchang पुष्ट)
12 मंदिर
7 मोक्षदायिनी नगरियों (अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, काँची, उज्जैन, द्वारका) में काशी
7 मंदिर