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Varanasi · Uttar Pradesh

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

विश्वनाथ / विश्वेश्वर / अविमुक्तेश्वर

अन्य नाम: विश्वनाथ · विश्वेश्वर · बाबा विश्वनाथ · श्री विश्वनाथ · विश्वनाथ-ज्योतिर्लिङ्ग · अविमुक्तेश्वर लिंग

  • 12 Jyotirlinga
  • 7 Saptapuri
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
दर्शन समय
02:30 – 23:00
स्वरूप
ज्योतिर्लिंग
स्थान
Varanasi · Uttar Pradesh
उत्तम ऋतु
अक्टूबर से मार्च
काल
अति प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 12 Jyotirlinga
  • 7 Saptapuri
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

विश्वनाथ (शिव)

ज्योतिर्लिंग — परंपरा के अनुसार बारह स्वयंभू ज्योतिर्लिंगों में से एक; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सातवें स्थान पर वर्णित। मूल लिंग 'अविमुक्तेश्वर लिंग' के रूप में जाना जाता है (अग्नि पुराण एवं स्कन्द पुराण आधार)।

सम्प्रदाय: शैव

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

स्कन्द पुराण

काशी खण्ड (Book 4, Motilal Banarsidass Tagare संस्करण Vol 10-11; कुल 100 अध्याय, पूर्वार्ध + उत्तरार्ध)

अध्याय 99 — श्री विश्वेश्वर माहात्म्य

स्कन्द पुराण

काशी खण्ड

अध्याय 98 — मोक्ष-मण्डप प्रयाण (काशी में मोक्ष)

स्कन्द पुराण

काशी खण्ड

अध्याय 39 — अविमुक्तेश्वर का प्राकट्य

स्कन्द पुराण

काशी खण्ड

अध्याय 26 — मणिकर्णिका का वर्णन

ब्रह्मवैवर्त पुराण

काशी रहस्य

अग्नि पुराण

काशी 'अविमुक्त' — शिव के द्वारा कभी न त्यागे जाने का स्थान

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य — काशी आये एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की रचना की जिसमें काशी विश्वनाथ सातवें ज्योतिर्लिंग के रूप में वर्णित हैं
  • महर्षि व्यास — काशी विश्वनाथाष्टकम् के रचयिता (दो स्वतंत्र स्रोतों Bhakti Bharat एवं Stotram.co.in से पुष्ट; 'इति श्रीमहर्षिव्यासप्रणीतम्' कोलोफोन)
  • सन्त एकनाथ — वारकरी सम्प्रदाय के महाग्रन्थ 'श्रीएकनाथी भागवत' (कुल 31 अध्याय; भागवत महापुराण के एकादश स्कन्ध पर भाष्य) के पहले 5 अध्याय पैठण में लिखे, शेष 26 अध्याय वाराणसी में पूर्ण (1571-1573 ई., कार्तिक पूर्णिमा); ग्रन्थ की हाथी पर शोभायात्रा निकाली गयी

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 1194मूल आदि विश्वेश्वर मंदिर मुहम्मद ग़ोरी के आक्रमण में ध्वस्तहिन्दी एवं अंग्रेज़ी विकिपीडिया
  2. 1230सुल्तान इल्तुतमिश के शासनकाल में अविमुक्तेश्वर मंदिर के समीप पुनर्निर्माणअंग्रेज़ी विकिपीडिया
  3. 1447जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह द्वारा पुनः ध्वस्तहिन्दी विकिपीडिया (अंग्रेज़ी संस्करण में अनुपस्थित)
  4. 1669औरंगज़ेब के आदेश पर ध्वस्त; ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माणविकिपीडिया, क्रॉस-वेरिफाइड
  5. 1740महाराजा बलवंत सिंह ने काशी को मुग़ल एवं अवध नवाब के नियंत्रण से मुक्त कर शुद्ध हिन्दू राज्य स्थापित किया — 'उत्तर भारत के शिवाजी' कहलाएहिन्दी विकिपीडिया
  6. 1780इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा वर्तमान मंदिर का निर्माणविकिपीडिया + आधिकारिक मंदिर About पृष्ठ
  7. 1835महाराजा रणजीत सिंह (सिख साम्राज्य) ने मंदिर के शिखर पर स्वर्ण आवरण हेतु 1 टन (1000 किग्रा) शुद्ध स्वर्ण दान कियाअंग्रेज़ी विकिपीडिया + हिन्दी विकिपीडिया
  8. 1983उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर को तत्कालीन काशी नरेश महाराजा विभूति नारायण सिंह के प्रबंधन से अपने अधीन लिया (काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983)हिन्दी विकिपीडिया
  9. 2019मार्च 2019 — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 'श्री काशी विश्वनाथ धाम' कॉरिडोर की आधारशिलाIndia.com + GroundReport
  10. 202113 दिसम्बर 2021 — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 'श्री काशी विश्वनाथ धाम' कॉरिडोर (फेज़ 1) का उद्घाटन; क्षेत्र पूर्व ~3,000 वर्ग फुट से बढ़कर ~5 लाख वर्ग फुट / 50,000 वर्ग मीटर; 23 भवन — यात्री सुविधा केन्द्र, पर्यटक सुविधा केन्द्र, वैदिक केन्द्र, मुमुक्षु भवन, भोगशाला, सिटी म्यूज़ियम, व्यूइंग गैलरी, फूड कोर्ट; मणिकर्णिका-ललिता घाटों से सीधा संपर्क।DD News (newsonair.gov.in) + India.com + GroundReport + YatraDham
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

02:30 से 23:00 तक

मंगला आरती03:00-04:00
दैनिकशुल्क ₹500बुकिंग आवश्यक

ऑनलाइन पूर्व-बुकिंग आवश्यक; आमतौर पर 15 दिन पूर्व बुकिंग खुलती है, 90 दिन तक एडवांस बुकिंग संभव

मध्याह्न भोग आरती11:15-12:20
दैनिकशुल्क ₹300बुकिंग आवश्यक

भक्तों को आरती से 30 मिनट पूर्व (10:45) मंदिर में प्रवेश हेतु कहा जाता है

सप्तर्षि आरती19:00-20:15
दैनिकशुल्क ₹300बुकिंग आवश्यक

सात पंडितों द्वारा एक साथ संपन्न

रात्रि श्रृंगार / भोग आरती21:00-22:15
दैनिकशुल्क ₹300बुकिंग आवश्यक
शयन आरती22:30-23:00
दैनिक
04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य (निःशुल्क) दर्शन — 'झाँकी दर्शन'निःशुल्क
समय
04:00-11:00 एवं 12:00-19:00 तथा 19:00-21:00
प्रतीक्षा
1-2 घंटे
उपयुक्त
स्थानीय भक्त, समय-सक्षम तीर्थयात्री, कम बजट

गर्भगृह के सम्मुख से दर्शन; क्यू में प्रतीक्षा अनिवार्य। मंदिर ट्रस्ट इसे 'झाँकी दर्शन' कहता है — सभी भक्तों हेतु एक समान

सुगम दर्शन₹250
समय
06:00-18:00
प्रतीक्षा
30 मिनट से कम
उपयुक्त
समय की कमी वाले भक्त, दिव्यांग, वृद्धजन

शास्त्री सहायता के साथ क्यू-रहित दर्शन, निःशुल्क लॉकर एवं मेवा लड्डू प्रसाद

स्पर्श दर्शन₹300
उपयुक्त
जो भक्त स्वयं शिवलिंग का स्पर्श कर पूजा करना चाहते हैं

गर्भगृह में प्रवेश कर शिवलिंग का स्पर्श एवं प्रत्यक्ष पूजा

05
अनुष्ठान

विशेष पूजा एवं सेवा

  • रुद्राभिषेक (1 शास्त्री)45004:00-18:00
  • रुद्राभिषेक (5 शास्त्री)138004:00-18:00
  • रुद्राभिषेक (1 शास्त्री) — वीडियो कॉन्फ्रेंस700

    विदेश से / NRI / दूरस्थ भक्तों हेतु

  • रुद्राभिषेक (5 शास्त्री) — वीडियो कॉन्फ्रेंस2100
  • दुग्ध अभिषेक (5-21 लीटर)230
  • अखण्ड दीप700
  • सत्यनारायण कथा500
  • महामृत्युंजय जप पूजा (5 दिवस, 7 पंडित)51000
  • 20-वर्षीय रुद्राभिषेक योजना (दीर्घकालिक)25000
  • संन्यासी भोजन दैनिक3000
  • प्रत्येक पूर्णिमा श्रृंगार3700
06
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

मंदिर का प्रमुख वार्षिक पर्व; शिव-विवाह उत्सव; मध्यरात्रि में प्रमुख मंदिरों से ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य शोभायात्रा बाबा विश्वनाथ तक जाती है

भीड़: अत्यंत भारी भीड़; क्षमतावान न हों तो दर्शन कठिन; आवास 3-4 माह पूर्व बुक करना उचित

रंगभरी एकादशीफाल्गुन शुक्ल एकादशी

होली से 5 दिन पूर्व का पारंपरिक रंगोत्सव। मान्यता: इस दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरी का गौना (विवाह के बाद ससुराल से वापसी) करवाकर पहली बार काशी लाए। गौना यात्रा एक दिन पूर्व मंदिर के महंत के निवास 'टेढ़ी नीम' से प्रारंभ होकर मंदिर तक जाती है — पालकी पर शिव-पार्वती की रजत प्रतिमाएँ; विश्वनाथ गली रंग एवं भीड़ से भरी रहती है। एकमात्र शिव-संबंधित एकादशी।

भीड़: 200+ वर्षों से अविरत परंपरा (विकिपीडिया); विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभव

सावन मास (4 सोमवार)श्रावण मास

सावन 2025 के 4 सोमवार पर विशेष श्रृंगार: (1) 14 जुलाई — बाबा का चल विग्रह श्रृंगार, (2) 21 जुलाई — गौरी-शंकर श्रृंगार, (3) 28 जुलाई — अर्धनारीश्वर श्रृंगार, (4) 4 अगस्त — रुद्राक्ष श्रृंगार। श्रावण पूर्णिमा 9 अगस्त 2025 पर झूला श्रृंगार।

भीड़: सावन में 11 जुलाई से 9 अगस्त तक प्रोटोकॉल/स्पेशल रिक्वेस्ट दर्शन पूर्ण प्रतिबंधित। मोबाइल, बैग, पेन, धातु की वस्तुएँ निषिद्ध — घर पर ही छोड़ें (Free baggage काउंटर भी इस अवधि में बंद)। 5 कॉरिडोर प्रवेश द्वार: गेट #4 नंदुफेरिया, सिल्को रूट, धुंधिराज रूट, सरस्वती गेट, भैरव द्वार/ललिता घाट (गंगा जल-स्तर के अनुसार उपलब्ध)। आरोग्य मेडिकल केंद्र पर डॉक्टर तैनात।

नववर्ष काल (दिसम्बर अंत — जनवरी प्रारम्भ)

वार्षिक उच्च-यात्री काल; मंदिर ट्रस्ट प्रतिवर्ष 24 दिसम्बर से VIP/स्पर्श/प्रोटोकॉल दर्शन निलंबित कर देता है (CEO श्री विश्व भूषण मिश्र की 26 दिसम्बर 2025 की घोषणा अनुसार)। केवल 'झाँकी दर्शन' (सामान्य) उपलब्ध — सबके लिए एक समान

भीड़: नववर्ष पर VIP दर्शन की बुकिंग बंद; केवल सामान्य क्यू दर्शन। भीड़ कम होने पर VIP सुविधा बहाल

वसन्त पंचमीमाघ शुक्ल पंचमी

इस दिन बाबा का तिलक संस्कार किया जाता है

07
आस्था

मनोकामना एवं फल

मोक्ष / जीवनोपरांत मुक्ति

काशी में देहत्याग करने पर मुक्ति की प्राप्ति — विश्वनाथ का तारक मंत्र कान में फूँकने की परंपरा

स्रोत: स्कन्द पुराण, काशी खण्ड, अध्याय 98 — 'मोक्ष-मण्डप प्रयाण'; अग्नि पुराण में काशी को 'अविमुक्त' कहा गया अर्थात् शिव कभी नहीं त्यागते

अकाल मृत्यु निवारण

महामृत्युंजय जप एवं अभिषेक का विशेष फल

स्रोत: महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12)

रोग-निवारण एवं सुख-समृद्धि

विश्वनाथाष्टकम् के नियमित पाठ से 'विद्या, श्री, सुख, अनन्त कीर्ति' एवं अंत में मोक्ष

स्रोत: श्री काशी विश्वनाथाष्टकम् फलश्रुति

08
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्री काशी विश्वनाथाष्टकम् (Vishwanath Ashtakam)स्तोत्रमहर्षि व्यास प्रणीत (BhaktiBharat + Stotram.co.in दोनों स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट; कोलोफोन 'इति श्रीमहर्षिव्यासप्रणीतं श्रीविश्वनाथाष्टकं सम्पूर्णम्')। प्रथम श्लोक: 'गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम्। नारायणप्रियमनङ्गमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥' फलश्रुति: विद्या, श्री, सुख, अनन्त कीर्ति एवं देहान्त के पश्चात् मोक्ष की प्राप्तिइस मन्दिर हेतुमंदिर परिसर में दर्शन के समय पाठ की परंपरा
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रस्तोत्रआदि शंकराचार्य प्रणीत — बारह ज्योतिर्लिंगों का स्तवन; काशी विश्वनाथ सातवें ज्योतिर्लिंग के रूप में वर्णितशास्त्र-वचनानुसार किसी भी शिव मंदिर में 40 दिन तक नित्य पाठ करने से बारहों ज्योतिर्लिंगों के भौतिक दर्शन का फल मिलता है
  • महामृत्युंजय मंत्रमंत्रऋग्वेद 7.59.12रुद्राभिषेक एवं महामृत्युंजय जप पूजा के दौरान विशेष रूप से जपा जाता है
09
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री अन्नपूर्णा देवी मंदिर15 मी

अन्नपूर्णा देवी — काशी की पोषण देवी; काशी विश्वनाथ के साथ अनिवार्य दर्शन परंपरा (विश्वेश्वर + अन्नपूर्णा युगल)

श्री विशालाक्षी मंदिर200 मी

51 शक्ति-पीठों में 23वाँ; भगवती सती के कान-कुण्डल का स्थान; काल-भैरव सहित पीठ-देवता

मणिकर्णिका घाट350 मी

हिन्दू सबसे महत्वपूर्ण श्मशान घाट; काशी में मृत्यु ⇒ मोक्ष की मान्यता का केन्द्र; काशी कॉरिडोर इस घाट तक विस्तृत

ललिता घाट250 मी

नेपाली मंदिर निकट; काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का गंगा-द्वार यहीं खुलता है; मंदिर के स्वर्ण-शिखर के दर्शन हेतु उत्तम स्थान

काल भैरव मंदिर1 किमी

काशी के 'कोतवाल'; परंपरानुसार काशी यात्रा भैरव दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है

पंचक्रोशी यात्रा (काशी की 5-दिवसीय परिक्रमा)

केन्द्रीय आरम्भ एवं समापन बिन्दु — मणिकर्णिका पर संकल्प से आरम्भ, काशी विश्वनाथ में दर्शन से समापन। 'पंचक्रोशी' नाम का अर्थ: काशी 5 कोस (~16 किमी) तक विस्तृत — DrikPanchang पुष्ट

150 मंदिर · 5 दिन

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

7वाँ ज्योतिर्लिंग — आदि शंकराचार्य रचित द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के अनुसार क्रम (DrikPanchang पुष्ट)

12 मंदिर

सप्तपुरी मोक्षदायिनी यात्रा

7 मोक्षदायिनी नगरियों (अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, काँची, उज्जैन, द्वारका) में काशी

7 मंदिर

10
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री काशी विश्वनाथ, सी॰के॰ 37/40,41,42, बांसफाटक, वाराणसी – 221 001
हवाई अड्डा
लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी (VNS)
रेलवे
वाराणसी जंक्शन (BSB) / वाराणसी कैंट
उत्तम ऋतु
अक्टूबर से मार्च — मौसम अनुकूल, प्रकाश फोटोग्राफी हेतु उत्तम (विशेष रूप से फरवरी-मार्च भीड़ अपेक्षाकृत कम)
हेल्पलाइन
+91 6393 131 608 (सहायता / WhatsApp — सोम-शनि), +91 7080 292 930 (सामान्य पूछताछ — प्रातः 9:00 – सायं 6:00)
10 किमीSarnath
128 किमीAllahabad
286 किमीLucknow
565 किमीAgra
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