स्कन्द पुराण
केदार खण्ड — 35 अध्याय; उत्तर भारत के केदार तीर्थ-क्षेत्र का वर्णन; शिव-पांडव-कथा का विस्तार
Kedarnath · Uttarakhand
केदारनाथ / केदारेश्वर महादेव
अन्य नाम: केदारेश्वर · केदार बाबा · केदारनाथ ज्योतिर्लिंग · श्री केदारनाथ धाम

इस मन्दिर की विशेषता
श्री केदारनाथ (शिव) — पंच केदार में प्रथम; ज्योतिर्लिंग
त्रिकोणीय शिव-लिंग — लगभग 3.6 मीटर परिधि एवं ऊँचाई; प्राकृतिक 'बैल के कूबड़' का स्वरूप मानी जाती है। मान्यता: पांडवों ने महादेव को बैल रूप में खोजा; जब भीम ने पकड़ा तो शरीर पाँच भागों में विभक्त — कूबड़ केदारनाथ में, भुजाएँ तुंगनाथ, नाभि मध्यमहेश्वर, मुख रुद्रनाथ, जटा/मस्तक कल्पेश्वर — पंच केदार।
सम्प्रदाय: शैव
केदार खण्ड — 35 अध्याय; उत्तर भारत के केदार तीर्थ-क्षेत्र का वर्णन; शिव-पांडव-कथा का विस्तार
पांडव-भीम के बैल-शिव से संघर्ष की मूल कथा का स्रोत
12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ का माहात्म्य
केदारनाथ सम्मिलित
04:00 (कपाट खुलने के मास में) से 20:30 तक · मध्याह्न विश्राम 15:00-17:00 (दोपहर विश्राम)
ब्रह्म-मुहूर्त में मंदिर खुलता है; घी-अभिषेक एवं विशेष पूजा
15:00 बजे तक शिवलिंग का स्पर्श एवं घृत अभिषेक की अनुमति
15:00 के बाद दर्शन सम्भव, परन्तु स्पर्श वर्जित
अन्तिम आरती; मंदिर 20:30 बजे बन्द
गौरीकुंड से 16 किमी कठिन पैदल यात्रा — सोनप्रयाग से गौरीकुंड साझा टैक्सी (₹50/व्यक्ति, 5 किमी), तत्पश्चात् पैदल। 6-8 घंटे का ट्रेक। Char Dham Yatra Registration अनिवार्य (पर्यटन उत्तराखंड Tourist Care पोर्टल या ऐप या WhatsApp से)।
तीन हेलीपैड से Round-trip 2026 (+ Convenience Fee + 18% GST): गुप्तकाशी ₹12,762 | फाटा ₹10,164 | सिरसी/सरसी ₹6,390। 2026 बुकिंग: 15 अप्रैल 2026 सायं 6:00 बजे खुली; प्रथम चरण 22 अप्रैल - 15 जून 2026।
Char Dham Yatra पंजीकरण के 4 आधिकारिक चैनल: (1) ऑनलाइन पोर्टल registrationandtouristcare.uk.gov.in, (2) मोबाइल ऐप 'Tourist Care Uttarakhand' (Google Play + Apple App Store), (3) WhatsApp: 8394833833, (4) टोल-फ्री: 01351364। 2026 ऑनलाइन 6 मार्च 2026 प्रातः 7 बजे प्रारम्भ; ऑफ़लाइन काउंटर 15 अप्रैल 2026 से ऋषिकेश-हरिद्वार-देहरादून।
ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ (शीतकालीन निवास) से पंचमुखी डोली का बहु-दिवसीय वाहन-यात्रा: फाटा (प्रथम विश्राम) → गौरीकुण्ड (द्वितीय विश्राम) → कपाट खुलने से एक दिन पूर्व केदारनाथ पहुँचना। 2026 — 22 अप्रैल प्रातः 8:00 बजे पूर्ण वैदिक विधि से कपाट उद्घाटन।
विधिवत् कपाट-बन्द के बाद डोली पुनः ओंकारेश्वर ऊखीमठ लौटती है; शीतकाल में देव-विग्रह वहीं रहता है। 2026 कपाट बन्द तिथि: 11 नवम्बर 2026 (भैया दूज)।
भीड़: कपाट-बन्द दिवस पर भीड़ अधिक
मंदिर खुले होने पर सावन के सोमवार विशेष; रुद्राभिषेक का चरम काल
मंदिर शीतकाल में बन्द होने के कारण ऊखीमठ ओंकारेश्वर में मनाई जाती है; केदारनाथ कपाट खुलने की तिथि की घोषणा भी ऊखीमठ में महाशिवरात्रि-पूजा के पश्चात्
भीड़: ऊखीमठ में भीड़
केदारनाथ (3,583 m) → तुंगनाथ (3,680 m, भुजाएँ) → रुद्रनाथ (3,559 m, मुख) → मध्यमहेश्वर (3,490 m, नाभि) → कल्पेश्वर (2,200 m, जटा — एकमात्र वर्ष-भर खुला)। पारंपरिक क्रम अनुसार।
केदारनाथ दर्शन से युद्ध-पाप एवं समस्त पापों का निवारण — पांडव-परंपरा अनुसार
स्रोत: महाभारत + स्कन्द पुराण केदार खण्ड
द्वादश ज्योतिर्लिंग में सर्वोच्च हिमालयी ज्योतिर्लिंग — एक यात्रा से बारहों के दर्शन का फल
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
रुद्राभिषेक + महामृत्युंजय जप का विशेष फल
स्रोत: रुद्राष्टाध्यायी + महामृत्युंजय मंत्र
केदार घाटी एवं मंदिर के क्षेत्रपाल (रक्षक) — विशेष रूप से शीतकाल में जब केदारनाथ बन्द रहता है। परंपरा: कपाट खुलने से पहले सर्वप्रथम 'भुकुण्ड भैरव' की पूजा होती है; उसके बाद ही केदारनाथ दर्शन प्रारम्भ होते हैं। दर्शन समय: प्रातः 6:00 - सायं 8:00।
8वीं शताब्दी के आदि शंकराचार्य की समाधि; 2013 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त; 5 नवम्बर 2021 को PM मोदी द्वारा पुनर्निर्मित समाधि + 12 फ़ुट 35 टन की प्रतिमा अनावरित (मूर्तिकार श्री अरुण योगिराज)
2013 की प्रलयंकारी बाढ़ में मंदिर को बचाने वाली विशाल चट्टान (~20 फ़ुट चौड़ी x 20-25 फ़ुट ऊँची); मलबे के प्रवाह को विभाजित कर मंदिर के दोनों ओर मोड़ा। आज भक्त इसे 'भगवान का चमत्कार' मानते हैं।
मान्यता: माता पार्वती ने यहाँ तप किया एवं स्नान किया; गर्म जल कुण्ड; 16 किमी पैदल यात्रा का आरम्भ-बिंदु
मन्दाकिनी + वासुकी संगम; अन्तिम वाहन-योग्य स्थान; गौरीकुंड तक साझा टैक्सी (₹50/व्यक्ति, 5 किमी)
केदारनाथ देव-विग्रह का शीतकालीन निवास (नवम्बर-अप्रैल); महाशिवरात्रि पर पुजारी कपाट खुलने की तिथि घोषित करते हैं; डोली यात्रा यहीं से प्रारम्भ
चोराबारी ताल वही ग्लेशियर-झील है जिसके अतिप्रवाह से 2013 की बाढ़ आयी थी; गांधी सरोवर भी कहा जाता है
4 धामों में से एक — सर्वोच्च जयोतिर्लिंग; क्रम: यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ। 2026 कपाट: यमुनोत्री+गंगोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल 8 AM, बद्रीनाथ 23 अप्रैल।
12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च हिमालयी; आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार
12 मंदिर
केदारनाथ — कूबड़-स्थल; प्रथम एवं सर्वोच्च। क्रम: केदारनाथ → तुंगनाथ → रुद्रनाथ → मध्यमहेश्वर → कल्पेश्वर। पांडव-कथा से जुड़ी 5-मंदिर श्रृंखला।
5 मंदिर