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Kedarnath · Uttarakhand

श्री केदारनाथ मंदिर

केदारनाथ / केदारेश्वर महादेव

अन्य नाम: केदारेश्वर · केदार बाबा · केदारनाथ ज्योतिर्लिंग · श्री केदारनाथ धाम

  • 12 Jyotirlinga
  • Chota Char Dham
  • Panch Kedar
श्री केदारनाथ मंदिर
दर्शन समय
04:00 (कपाट खुलने के मास में) – 20:30
स्वरूप
त्रिकोणीय शिव-लिंग
स्थान
Kedarnath · Uttarakhand
उत्तम ऋतु
मई-जून
काल
पांडव-कथा

इस मन्दिर की विशेषता

  • 12 Jyotirlinga
  • Chota Char Dham (Uttarakhand)
  • Panch Kedar
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री केदारनाथ (शिव) — पंच केदार में प्रथम; ज्योतिर्लिंग

त्रिकोणीय शिव-लिंग — लगभग 3.6 मीटर परिधि एवं ऊँचाई; प्राकृतिक 'बैल के कूबड़' का स्वरूप मानी जाती है। मान्यता: पांडवों ने महादेव को बैल रूप में खोजा; जब भीम ने पकड़ा तो शरीर पाँच भागों में विभक्त — कूबड़ केदारनाथ में, भुजाएँ तुंगनाथ, नाभि मध्यमहेश्वर, मुख रुद्रनाथ, जटा/मस्तक कल्पेश्वर — पंच केदार।

सम्प्रदाय: शैव

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

स्कन्द पुराण

केदार खण्ड — 35 अध्याय; उत्तर भारत के केदार तीर्थ-क्षेत्र का वर्णन; शिव-पांडव-कथा का विस्तार

महाभारत

पांडव-भीम के बैल-शिव से संघर्ष की मूल कथा का स्रोत

शिव पुराण

12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ का माहात्म्य

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

केदारनाथ सम्मिलित

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) — मंदिर का जीर्णोद्धार; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के रचयिता; मंदिर के पृष्ठभाग में उनकी समाधि — 2013 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त; 5 नवम्बर 2021 को PM श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पुनर्निर्मित समाधि एवं 12 फ़ुट / 35 टन की आदि शंकर प्रतिमा का अनावरण (मूर्तिकार श्री अरुण योगिराज — मैसूरु; ₹130 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारम्भ)
  • पांडव — परंपरानुसार युद्ध-पाप-निवारण हेतु पंच केदार की स्थापना एवं केदारनाथ पर तपस्या; तत्पश्चात् महापन्थ/स्वर्गारोहिणी द्वारा स्वर्ग-गमन
  • व्यास ऋषि — स्कन्द पुराण केदार खण्ड के मूल रचयिता-परंपरा

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. -1पांडव-कथा (महाभारत-काल) — कुरुक्षेत्र युद्ध-पाप के प्रायश्चित हेतु महादेव का अन्वेषण; पांडवों ने पंच केदार में मंदिर स्थापित कियेमहाभारत + स्कन्द पुराण
  2. 8008वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की रचना; मंदिर के पीछे समाधिविकिपीडिया + हिन्दी विकिपीडिया
  3. 10801076-1099 ई. — ग्वालियर शिलालेख अनुसार राजा भोज का योगदानहिन्दी विकिपीडिया
  4. 19391939 अधिनियम — श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) का गठनBKTC आधिकारिक
  5. 201316-17 जून 2013 — विनाशकारी बादल फटना + चोराबारी ग्लेशियर का चोराबारी ताल अतिप्रवाह; मन्दाकिनी नदी में अकल्पनीय बाढ़। उत्तराखंड में 6,054 मृत्यु (89%+ केवल उत्तराखंड में); 4,550 गाँव प्रभावित। केदारनाथ मंदिर के सम्मुख विशाल 'भीम शिला' (≈20 फ़ुट चौड़ी, 20-25 फ़ुट ऊँची, मंदिर से 30 फ़ुट पीछे) ने मलबे का प्रवाह रोककर मंदिर को बचाया। समीप-वर्ती होटल/धर्मशालाएँ नष्ट। भारतीय सेना/वायुसेना/अर्धसैनिक बलों का 'Operation Rahat' — 1,10,000+ लोगों को सुरक्षित निकाला। मंदिर पुनः 4 मई 2014 को खुला।विकिपीडिया + ManchalaMushafir + Multiple
  6. 20215 नवम्बर 2021 — PM श्री नरेन्द्र मोदी ने पुनर्निर्मित आदि शंकराचार्य समाधि एवं 12-फ़ुट 35-टन प्रतिमा का अनावरण; मूर्तिकार श्री अरुण योगिराज (मैसूरु); ₹130 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारम्भThe Quint + Adda247 + Organiser + ANI + PIB
  7. 202431 जुलाई 2024 — भीम बली नाले पर बादल फटना + भू-स्खलन; केदारनाथ पैदल मार्ग के 30 मीटर हिस्से को क्षति; 150-200 तीर्थयात्री फँसे — हेलीकॉप्टर से बचाव; पूरे उत्तराखंड में 12 मृत्यु; मार्ग अस्थायी रूप से बन्दBusiness Today + Outlook + Organiser
  8. 202515 जून 2025 — प्रातः लगभग 5:20 बजे केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहे Aryan Aviation के Bell 407 हेलीकॉप्टर का गौरीकुंड के निकट घने जंगल में क्रैश; पायलट कैप्टन रजबीर सिंह चौहान (39, जयपुर) सहित सभी 7 सवार (6 यात्री + 1 शिशु + पायलट) मृत। DGCA + AAIB ने संयुक्त जाँच प्रारम्भ; Aryan Aviation का संचालन तत्काल निलंबित; 15-16 जून 2025 को सम्पूर्ण चार धाम हेलीकॉप्टर सेवाएँ निलंबित। TransBharat Aviation के पायलटों के लाइसेंस (समान अनुपयुक्त मौसम में संचालन हेतु) 6 माह के लिए निलंबित। CM श्री पुष्कर सिंह धामी ने जाँच के आदेश दिये।PIB + Aviation A2Z + The Tribune + AirlineRatings
  9. 20258 अक्टूबर 2025 — रिकॉर्ड वार्षिक फुटफॉल: 16.56 लाख तीर्थयात्री (2024 के 16.52 लाख का रिकॉर्ड टूटा); मंदिर 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज) को बन्द हुआ। कुल चार धाम 2025: 47.29 लाख।News9live + Organiser
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:00 (कपाट खुलने के मास में) से 20:30 तक · मध्याह्न विश्राम 15:00-17:00 (दोपहर विश्राम)

महाभिषेक / प्रथम पूजा04:00
दैनिक (कपाट खुलने के मास में)

ब्रह्म-मुहूर्त में मंदिर खुलता है; घी-अभिषेक एवं विशेष पूजा

प्रातः-काल दर्शन06:00-15:00
दैनिक

15:00 बजे तक शिवलिंग का स्पर्श एवं घृत अभिषेक की अनुमति

सायं-काल दर्शन17:00-19:00
दैनिक

15:00 के बाद दर्शन सम्भव, परन्तु स्पर्श वर्जित

शयन आरती18:00-19:30
दैनिक

अन्तिम आरती; मंदिर 20:30 बजे बन्द

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य पैदल दर्शन (निःशुल्क)निःशुल्क
उपयुक्त
सभी भक्त

गौरीकुंड से 16 किमी कठिन पैदल यात्रा — सोनप्रयाग से गौरीकुंड साझा टैक्सी (₹50/व्यक्ति, 5 किमी), तत्पश्चात् पैदल। 6-8 घंटे का ट्रेक। Char Dham Yatra Registration अनिवार्य (पर्यटन उत्तराखंड Tourist Care पोर्टल या ऐप या WhatsApp से)।

हेलीकॉप्टर सेवा (IRCTC HeliYatra — एकमात्र आधिकारिक)
उपयुक्त
समय/स्वास्थ्य-सीमित भक्त

तीन हेलीपैड से Round-trip 2026 (+ Convenience Fee + 18% GST): गुप्तकाशी ₹12,762 | फाटा ₹10,164 | सिरसी/सरसी ₹6,390। 2026 बुकिंग: 15 अप्रैल 2026 सायं 6:00 बजे खुली; प्रथम चरण 22 अप्रैल - 15 जून 2026।

पंजीकरण (Yatra Parchi) — अनिवार्य एवं पूर्णतः निःशुल्कनिःशुल्क

Char Dham Yatra पंजीकरण के 4 आधिकारिक चैनल: (1) ऑनलाइन पोर्टल registrationandtouristcare.uk.gov.in, (2) मोबाइल ऐप 'Tourist Care Uttarakhand' (Google Play + Apple App Store), (3) WhatsApp: 8394833833, (4) टोल-फ्री: 01351364। 2026 ऑनलाइन 6 मार्च 2026 प्रातः 7 बजे प्रारम्भ; ऑफ़लाइन काउंटर 15 अप्रैल 2026 से ऋषिकेश-हरिद्वार-देहरादून।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

कपाट खुलना (वार्षिक आरम्भ)वैशाख — अक्षय तृतीया के निकट

ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ (शीतकालीन निवास) से पंचमुखी डोली का बहु-दिवसीय वाहन-यात्रा: फाटा (प्रथम विश्राम) → गौरीकुण्ड (द्वितीय विश्राम) → कपाट खुलने से एक दिन पूर्व केदारनाथ पहुँचना। 2026 — 22 अप्रैल प्रातः 8:00 बजे पूर्ण वैदिक विधि से कपाट उद्घाटन।

कपाट बन्द होना (भैया दूज)कार्तिक शुक्ल द्वितीया (दिवाली के 2 दिन बाद)

विधिवत् कपाट-बन्द के बाद डोली पुनः ओंकारेश्वर ऊखीमठ लौटती है; शीतकाल में देव-विग्रह वहीं रहता है। 2026 कपाट बन्द तिथि: 11 नवम्बर 2026 (भैया दूज)।

भीड़: कपाट-बन्द दिवस पर भीड़ अधिक

श्रावण मास (सावन सोमवार)

मंदिर खुले होने पर सावन के सोमवार विशेष; रुद्राभिषेक का चरम काल

महाशिवरात्रि

मंदिर शीतकाल में बन्द होने के कारण ऊखीमठ ओंकारेश्वर में मनाई जाती है; केदारनाथ कपाट खुलने की तिथि की घोषणा भी ऊखीमठ में महाशिवरात्रि-पूजा के पश्चात्

भीड़: ऊखीमठ में भीड़

पंच केदार यात्रा

केदारनाथ (3,583 m) → तुंगनाथ (3,680 m, भुजाएँ) → रुद्रनाथ (3,559 m, मुख) → मध्यमहेश्वर (3,490 m, नाभि) → कल्पेश्वर (2,200 m, जटा — एकमात्र वर्ष-भर खुला)। पारंपरिक क्रम अनुसार।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

मोक्ष एवं पाप-निवारण

केदारनाथ दर्शन से युद्ध-पाप एवं समस्त पापों का निवारण — पांडव-परंपरा अनुसार

स्रोत: महाभारत + स्कन्द पुराण केदार खण्ड

बारह ज्योतिर्लिंग दर्शन का फल

द्वादश ज्योतिर्लिंग में सर्वोच्च हिमालयी ज्योतिर्लिंग — एक यात्रा से बारहों के दर्शन का फल

स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

रोग-निवारण एवं दीर्घायु

रुद्राभिषेक + महामृत्युंजय जप का विशेष फल

स्रोत: रुद्राष्टाध्यायी + महामृत्युंजय मंत्र

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — केदार-श्लोकस्तोत्र-अंशआदि शंकराचार्य प्रणीत; केदारनाथ का स्मरण-अंशइस मन्दिर हेतुद्वादश ज्योतिर्लिंग का सतत स्मरण-मन्त्र
  • महामृत्युंजय मंत्रमंत्रऋग्वेद 7.59.12केदारनाथ अभिषेक एवं विशेष पूजा में जप्य
  • केदार-गौरी व्रत मंत्र / केदारेश्वर अष्टोत्तर शतनामावलिस्तोत्र / नामावलिस्कन्द पुराण केदार खण्ड परंपराइस मन्दिर हेतु
  • रुद्राष्टाध्यायी / रुद्राभिषेक मंत्रवेद-मंत्रयजुर्वेद, कृष्ण यजुर्वेदीय रुद्र-सूक्तकेदारनाथ अभिषेक का प्रमुख वैदिक पाठ
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री भुकुण्ड भैरव मंदिर, केदारनाथ (क्षेत्रपाल)500 मी

केदार घाटी एवं मंदिर के क्षेत्रपाल (रक्षक) — विशेष रूप से शीतकाल में जब केदारनाथ बन्द रहता है। परंपरा: कपाट खुलने से पहले सर्वप्रथम 'भुकुण्ड भैरव' की पूजा होती है; उसके बाद ही केदारनाथ दर्शन प्रारम्भ होते हैं। दर्शन समय: प्रातः 6:00 - सायं 8:00।

आदि शंकराचार्य समाधि (मंदिर के पीछे)50 मी

8वीं शताब्दी के आदि शंकराचार्य की समाधि; 2013 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त; 5 नवम्बर 2021 को PM मोदी द्वारा पुनर्निर्मित समाधि + 12 फ़ुट 35 टन की प्रतिमा अनावरित (मूर्तिकार श्री अरुण योगिराज)

भीम शिला (मंदिर-रक्षक चट्टान)30 मी

2013 की प्रलयंकारी बाढ़ में मंदिर को बचाने वाली विशाल चट्टान (~20 फ़ुट चौड़ी x 20-25 फ़ुट ऊँची); मलबे के प्रवाह को विभाजित कर मंदिर के दोनों ओर मोड़ा। आज भक्त इसे 'भगवान का चमत्कार' मानते हैं।

गौरीकुण्ड (ट्रेक का बेस कैम्प)16 किमी

मान्यता: माता पार्वती ने यहाँ तप किया एवं स्नान किया; गर्म जल कुण्ड; 16 किमी पैदल यात्रा का आरम्भ-बिंदु

सोनप्रयाग21 किमी

मन्दाकिनी + वासुकी संगम; अन्तिम वाहन-योग्य स्थान; गौरीकुंड तक साझा टैक्सी (₹50/व्यक्ति, 5 किमी)

ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ (शीतकालीन निवास)35 किमी

केदारनाथ देव-विग्रह का शीतकालीन निवास (नवम्बर-अप्रैल); महाशिवरात्रि पर पुजारी कपाट खुलने की तिथि घोषित करते हैं; डोली यात्रा यहीं से प्रारम्भ

वासुकी ताल, चोराबारी ताल (गांधी सरोवर)5 किमी

चोराबारी ताल वही ग्लेशियर-झील है जिसके अतिप्रवाह से 2013 की बाढ़ आयी थी; गांधी सरोवर भी कहा जाता है

चोटा चार धाम (उत्तराखंड)

4 धामों में से एक — सर्वोच्च जयोतिर्लिंग; क्रम: यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ। 2026 कपाट: यमुनोत्री+गंगोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल 8 AM, बद्रीनाथ 23 अप्रैल।

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च हिमालयी; आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार

12 मंदिर

पंच केदार यात्रा

केदारनाथ — कूबड़-स्थल; प्रथम एवं सर्वोच्च। क्रम: केदारनाथ → तुंगनाथ → रुद्रनाथ → मध्यमहेश्वर → कल्पेश्वर। पांडव-कथा से जुड़ी 5-मंदिर श्रृंखला।

5 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (DED) — केदारनाथ बेस-कैम्प गौरीकुंड से ~245 किमी सड़क मार्ग
रेलवे
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन — गौरीकुंड से ~217 किमी
उत्तम ऋतु
मई-जून + सितम्बर-अक्टूबर सर्वोत्तम; जुलाई-अगस्त (मानसून) में बादल फटने/भू-स्खलन का जोखिम; नवम्बर-अप्रैल मंदिर पूर्णतः बन्द; तापमान ग्रीष्म में 5-15°C, सर्दियों में -5°C तक
हेल्पलाइन
साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन: 1930, हेलीकॉप्टर शिकायत: ccps.deh@uttarakhandpolice.uk.gov.in
16 किमीGaurikund
21 किमीSonprayag
47 किमीGuptkashi
35 किमीPhata
217 किमीRishikesh
245 किमीDehradun
230 किमीHaridwar
465 किमीDelhi
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