श्री मध्यमहेश्वर महादेव — पाण्डव-पञ्च केदार-कथा अनुसार शिव की नाभि एवं उदर (नाभि-मध्य) यहाँ प्रकट; गर्भगृह में काले-पत्थर का चपटा-गोल नाभि-स्वरूप शिवलिङ्ग; पार्श्व में पार्वती + अर्धनारीश्वर + संगमरमर-शाल में सरस्वती; शीतकाल में उत्सव-मूर्ति का ओङ्कारेश्वर मंदिर (उखीमठ) में स्थानान्तरण
काले-पत्थर का नाभि-स्वरूप चपटा-गोल शिवलिङ्ग (अद्वितीय आकार); पार्वती + अर्धनारीश्वर + पृथक सरस्वती-शाल
सम्प्रदाय: शैव — पाण्डव-पञ्च केदार परंपरा; पुजारी मैसूर-कर्नाटक-वंशी जङ्गम लिङ्गायत-समुदाय (पञ्च केदार में अद्वितीय दक्षिण-कनाटक-वंश)