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Mansuna · Uttarakhand

श्री मध्यमहेश्वर

श्री मध्यमहेश्वर (मदमहेश्वर) महादेव मंदिर — मन्सूना/गौण्डर, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड

मध्यमहेश्वर / मदमहेश्वर — द्वितीय केदार; शिव की नाभि एवं उदर (नाभि/मध्य) का प्रकटन-स्थल

अन्य नाम: मदमहेश्वर · मध्यमहेश्वर · द्वितीय केदार · नाभि-केदार

  • पञ्च केदार
  • ऊँचाई: 3,497 मीटर
  • चौखम्बा शिखर
  • ओङ्कारेश्वर मंदिर उखीमठ
श्री मध्यमहेश्वर
दर्शन समय
06:00 (खुले-सत्र के दौरान — मई-नवंबर) – 22:00 (खुले-सत्र के दौरान)
स्वरूप
काले-पत्थर का नाभि-स्वरूप चपटा-गोल शिवलि…
स्थान
Mansuna · Uttarakhand
उत्तम ऋतु
मई-जून
काल
अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • पञ्च केदार — द्वितीय केदार; नाभि-प्रकटन-स्थल; अन्य 4: केदारनाथ (कूबड़), तुङ्गनाथ (बाहु), रुद्रनाथ (मुख), कल्पेश्वर (केश)
  • ऊँचाई: 3,497 मीटर (11,473 फुट)
  • चौखम्बा शिखर (7,138 मी) से दृश्य; बुध-मदमहेश्वर 1-2 किमी ऊर्ध्व
  • ओङ्कारेश्वर मंदिर उखीमठ — शीतकालीन-गद्दी (केदारनाथ की भी)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री मध्यमहेश्वर महादेव — पाण्डव-पञ्च केदार-कथा अनुसार शिव की नाभि एवं उदर (नाभि-मध्य) यहाँ प्रकट; गर्भगृह में काले-पत्थर का चपटा-गोल नाभि-स्वरूप शिवलिङ्ग; पार्श्व में पार्वती + अर्धनारीश्वर + संगमरमर-शाल में सरस्वती; शीतकाल में उत्सव-मूर्ति का ओङ्कारेश्वर मंदिर (उखीमठ) में स्थानान्तरण

काले-पत्थर का नाभि-स्वरूप चपटा-गोल शिवलिङ्ग (अद्वितीय आकार); पार्वती + अर्धनारीश्वर + पृथक सरस्वती-शाल

सम्प्रदाय: शैव — पाण्डव-पञ्च केदार परंपरा; पुजारी मैसूर-कर्नाटक-वंशी जङ्गम लिङ्गायत-समुदाय (पञ्च केदार में अद्वितीय दक्षिण-कनाटक-वंश)

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स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

पाण्डव-पञ्च केदार कथा (महाभारत-उत्तर परंपरा)

कुरुक्षेत्र-युद्ध के पश्चात् पाण्डव कृष्ण की सलाह पर पाप-निवारण-यात्रा; शिव गढ़वाल में नन्दि-रूप; गुप्तकाशी में भीम ने पहचाना; शिव पृथ्वी में लीन एवं 5-स्थानों पर पुनः-प्रकट; मध्यमहेश्वर पर नाभि एवं उदर का प्रकटन

संत एवं परम्परा

  • पाण्डव — मंदिर-निर्माण की परंपरागत-मान्यता
  • जङ्गम लिङ्गायत-समुदाय (मैसूर, कर्नाटक-वंश) — पुजारी-वंश; पञ्च केदार में अद्वितीय कर्नाटक-वंश
  • श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) — आधुनिक प्रशासन (1939 अधिनियम)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 19391939 अधिनियम के अधीन श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) का गठन — मध्यमहेश्वर सहित 45 अधीनस्थ मंदिर एवं ~20 धर्मशालाओं का प्रबंधनbadrinath-kedarnath.gov.in (BKTC आधिकारिक)
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 (खुले-सत्र के दौरान — मई-नवंबर) से 22:00 (खुले-सत्र के दौरान) तक

प्रातः आरती06:00
दैनिक (मई-नवंबर)
अभिषेकम् (दूध, जल, मधु)प्रातः-सत्र
दैनिक
सायं आरती18:30
दैनिक

विशेष नियम: केवल पैदल-पहुँच (रांसी से 16-18 किमी ट्रेक); गौण्डर/बन्तोली पर रात्रि-विश्राम-स्थल; अनुशंसित 3-5 दिवसीय राउण्ड-ट्रिप; ऑक्सीजन-कमी; मानसून-त्याज्य

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-22:00 (खुले-सत्र के दौरान)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

BKTC-मंदिर — कोई प्रवेश-शुल्क नहीं; केवल पैदल-पहुँच।

अभिषेकम् (दूध + जल + मधु)निःशुल्क

गर्भगृह में काले-पत्थर शिवलिङ्ग पर पारंपरिक अभिषेकम्।

शीतकाल ओङ्कारेश्वर उखीमठ दर्शन
समय
नवंबर-मई

मध्यमहेश्वर बन्द होने पर उत्सव-मूर्ति ओङ्कारेश्वर मन्दिर (उखीमठ) पर ~6 मास तक पूज्य।

उद्घाटन-डोली शोभायात्रा (3-दिवसीय)
उपयुक्त
कपाट-उद्घाटन-यात्रा

दिन 1: उखीमठ → रांसी (~25 किमी; रात्रि रकेश्वर मन्दिर, रांसी); दिन 2: रांसी → गौण्डर (~7 किमी); दिन 3: गौण्डर → मध्यमहेश्वर (उद्घाटन-अनुष्ठान)

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रि (उखीमठ-शीतकालीन-दर्शन)फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

मध्यमहेश्वर बन्द; पूजा शीतकालीन-गद्दी ओङ्कारेश्वर मन्दिर (उखीमठ) पर। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

मध्यमहेश्वर कपाट उद्घाटन 2026वैशाख-ज्येष्ठ (मई)

गुरुवार 21 मई 2026, 7:00 AM — BKTC-आधिकारिक घोषणा; 3-दिवसीय डोली शोभायात्रा उखीमठ ओङ्कारेश्वर → रांसी → गौण्डर → मध्यमहेश्वर।

ग्रीष्म-दर्शन शिखर-कालवैशाख-कार्तिक

मई-जून एवं सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम; जुलाई-अगस्त मानसून-त्याज्य।

मध्यमहेश्वर कपाट बन्द 2026कार्तिक (नवंबर — विजयदशमी-समीप)

20 नवंबर 2026 (BKTC-आधिकारिक); अन्तिम-तिथि ओङ्कारेश्वर उखीमठ पर विजय-दशमी पर पुष्ट; उत्सव-मूर्ति का मध्यमहेश्वर → गौण्डर → उखीमठ डोली-स्थानान्तरण।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

पञ्च केदार यात्रा-संकल्प (द्वितीय केदार — नाभि-दर्शन)

पाण्डव-कथा के अनुसार शिव की नाभि एवं उदर (मध्य) का प्रकटन-स्थल; पञ्च केदार-यात्रा का 2रा-तीर्थ

स्रोत: पाण्डव-पञ्च केदार परंपरा

नाभि-स्वरूप शिवलिङ्ग-दर्शन-संकल्प (अद्वितीय)

काले-पत्थर का चपटा-गोल नाभि-स्वरूप शिवलिङ्ग — पञ्च केदार में अद्वितीय iconography

स्रोत: स्थल-परंपरा

बुध-मदमहेश्वर सूर्योदय-दर्शन-संकल्प

मन्दिर से 1-2 किमी ऊर्ध्व बुध-मदमहेश्वर पर चौखम्बा (7,138 मी) का 360° सूर्योदय-दृश्य; देवी-छाया-कुण्ड में शिखर-प्रतिबिम्ब

स्रोत: स्थल-परंपरा + Boloji

जङ्गम लिङ्गायत पुजारी-परंपरा-दर्शन

पञ्च केदार में अद्वितीय — मैसूर-कर्नाटक-वंशी जङ्गम लिङ्गायत-समुदाय द्वारा पूजा; आदि शंकराचार्य की दक्षिण-भारतीय-परंपरा-संरक्षण

स्रोत: Wikipedia Madhyamaheshwar + YatraDham

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमः शिवाय (पञ्चाक्षरी)मूल मंत्रशैव परंपराइस मन्दिर हेतु
  • महामृत्युञ्जय मंत्रमंत्रऋग्वेद / यजुर्वेदअभिषेकम्-काल में पारायण
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

बुध-मदमहेश्वर (Buda Madmaheshwar)1.5 किमी

ऊँचाई ~3,500-3,600 मी; चौखम्बा (7,138 मी) का 360° सूर्योदय-दृश्य; देवी-छाया-कुण्ड में शिखर-प्रतिबिम्ब; अनौपचारिक प्रसाद (बिस्किट एवं चॉकलेट)

कन्चनी ताल / कांच्ची ताल10 किमी

उच्च-ऊँचाई झील ~4,100-4,200 मी; कठिन-ट्रेक

नन्दिकुण्ड (Nandikund)15 किमी

शिव-वाहन नन्दि-सम्बद्ध उच्च-ऊँचाई झील

ओङ्कारेश्वर मन्दिर, उखीमठ (शीतकालीन-गद्दी)43 किमी

मध्यमहेश्वर एवं केदारनाथ दोनों की शीतकालीन-गद्दी; ओङ्कारेश्वर शिव-शाल

केदारनाथ (पञ्च केदार #1 — कूबड़)50 किमी

12 ज्योतिर्लिङ्ग में सम्मिलित; पञ्च केदार का अग्रणी

तुङ्गनाथ-चन्द्रशिला (पञ्च केदार #3 — बाहु)30 किमी

विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा शिव-मन्दिर; पञ्च केदार-यात्रा का अगला-तीर्थ

पञ्च केदार यात्रा (5-तीर्थ)

द्वितीय केदार — नाभि; क्रम: केदारनाथ (कूबड़) → मध्यमहेश्वर (नाभि) → तुङ्गनाथ (बाहु) → रुद्रनाथ (मुख) → कल्पेश्वर (केश)

5 मंदिर · 14 दिन

केदार-घाटी समूह यात्रा

मध्यमहेश्वर + केदारनाथ (~30 किमी) + तुङ्गनाथ-चन्द्रशिला (~40 किमी) + देवरिया ताल (~20 किमी)

4 मंदिर

ओङ्कारेश्वर उखीमठ शीतकालीन-दर्शन-यात्रा

मध्यमहेश्वर एवं केदारनाथ दोनों की शीतकालीन-गद्दी; 6-मास तक नवंबर-मई के मध्य

2 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री मध्यमहेश्वर मन्दिर, मन्सूना/गौण्डर ट्रेक, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड (PIN-कोड क्षेत्रीय)
हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (DED, देहरादून) — ~220-235 किमी
रेलवे
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन — ~170-190 किमी; हरिद्वार — ~202 किमी (उखीमठ से)
बस-स्टैण्ड
रांसी (अन्तिम मोटर-योग्य बिन्दु) — 16-18 किमी ट्रेक; उखीमठ ~25 किमी रांसी से (डोली Day 1 दूरी); रुद्रप्रयाग → रांसी ~36 किमी
उत्तम ऋतु
मई-जून + सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम; महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 (ओङ्कारेश्वर उखीमठ); कपाट उद्घाटन 21 मई 2026 गुरुवार; कपाट बन्द 20 नवंबर 2026; मानसून (जुलाई-अगस्त) त्याज्य; नवंबर-मई हिमपात-बन्द (उखीमठ-शिफ्ट)
18 किमीRansi
8 किमीGaundar
8 किमीBantoli
43 किमीUkhimath
54 किमीRudraprayag
50 किमीKedarnath
180 किमीRishikesh
230 किमीJolly Grant Airport
30 किमीChopta
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