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Ranjangaon · Maharashtra

श्री महागणपति मन्दिर

श्री महागणपति मन्दिर — रांजणगाँव, शिरूर तालुका, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र (पुणे-अहमदनगर राजमार्ग SH-27 / NH-753F पर)

महागणपति — अष्टविनायक का अष्टम (अन्तिम) तीर्थ; 'महा' + 'गणपति' = महान गणेश; त्रिपुरारिवदे महागणपति — अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित गणेश; अष्टविनायक में सर्वाधिक-शक्तिशाली रूप

अन्य नाम: महागणपति · महागणपति रांजणगाँव · त्रिपुरारिवदे महागणपति

  • अष्टविनायक यात्रा का अष्टम
  • अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित…
  • अष्टविनायक में एकमात्र हिडन-तान्त्…
  • अष्टविनायक में एकमात्र शिव-कथा-नाम…
श्री महागणपति मन्दिर
दर्शन समय
05:00 – 22:00
स्वरूप
स्वयंभू पूर्व-मुख वामामुखी पद्मासन गणेश
स्थान
Ranjangaon · Maharashtra
उत्तम ऋतु
वर्ष-पर्यन्त खुला
काल
मूल-मन्दिर 9वीं-10वीं शताब्दी ईस्वी

इस मन्दिर की विशेषता

  • अष्टविनायक यात्रा का अष्टम (अन्तिम) तीर्थ — पारम्परिक-नियम अनुसार दर्शन-पश्चात् मोरगाँव-समापन
  • अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित गणेश — त्रिपुरासुर-वध-पूर्व शिव ने यहाँ गणेश-आराधना की; अष्टविनायक में सर्वाधिक-शक्तिशाली रूप
  • अष्टविनायक में एकमात्र हिडन-तान्त्रिक-मूर्ति (महोत्कट 10-शुण्ड 20-भुजा) तहखाने में संरक्षित
  • अष्टविनायक में एकमात्र शिव-कथा-नामकरण — पुरातन-नाम मणिपुर → शिव-प्रसन्नता-पश्चात् 'रांजण' (प्रसन्न) + 'गाँव' = रांजणगाँव
  • पूर्व-मुख सूर्योदय-किरण-संरेखण — भाद्रपद एवं माघ शुक्ल चतुर्थी प्रातः-काल सूर्य-किरणें मुख्य-मूर्ति पर सीधी
  • गणेश-चतुर्थी 2026: सोमवार 14 सितंबर 2026
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री महागणपति गणेश — स्वयंभू पाषाण-मूर्ति (~1 मी / 3 फुट उच्च), पूर्व-मुख, वामामुखी (बायाँ-शुण्ड); असाधारण-विस्तृत ललाट; पद्मासन (कमल-आसन); नेत्रों में हीरे/रत्न; ललाट एवं नाभि में हीरा; ऋद्धि एवं सिद्धि उत्सङ्ग-स्थित (गोद में); सिन्दूर-लेप; भिन्न-परम्पराओं में 8/10/12-भुजी iconographic वर्णन

स्वयंभू पूर्व-मुख वामामुखी पद्मासन गणेश; गुप्त-तहखाना में मूल-तान्त्रिक 'महोत्कट' मूर्ति (10-शुण्ड दशसुण्ड + 20-भुजा विंशति-भुजा) — माधवराव I पेशवा द्वारा मुगल-काल में संरक्षण-हेतु निर्मित बेसमेण्ट-कक्ष में स्थापित; देवस्थान ट्रस्ट आधिकारिक-रूप से इसका खण्डन करता है; परम्परागत-कथा-प्रबल

सम्प्रदाय: गाणपत्य-सम्प्रदाय — अष्टविनायक यात्रा-क्रम का अष्टम (अन्तिम) तीर्थ; अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित गणेश (त्रिपुरासुर-वध-कथा); पारम्परिक-नियम अनुसार अष्टम-दर्शन-पश्चात् मोरगाँव-समापन-यात्रा-नियम

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

त्रिपुरासुर-कथा (अष्टविनायक-स्थल-पुराण)

ऋषि गृत्समद के छीन्क से जन्मे त्रिपुरासुर ने पिता से गणेश-मन्त्र-शिक्षा-प्राप्त-कर गणेश-आराधना की; गणेश ने उसे शिव-अतिरिक्त सर्व-विजय-वर दिया। असुर ने तीन उड़न्त-नगर (त्रिपुर) निर्मित-कर देव एवं पृथ्वी-त्रास प्रारम्भ किया। देव-प्रार्थना पर शिव-अभियान; नारद ने सूचित किया कि गजानन-शक्ति-प्रदत्त असुर का वध केवल गजानन-कृपा से सम्भव — शिव ने अभियान-पूर्व सङ्कटनाशन-स्तोत्र-पारायण/गणेश-आराधना का अभाव-स्मरण किया। शिव ने यहाँ गणेश-आराधना-कर बीज-मन्त्र प्राप्त किया; एक-बाण से त्रिपुरासुर का वध किया। कृतज्ञ शिव ने इस-स्थान पर मूर्ति-प्रतिष्ठा/अभिषेक की; पुरातन-नाम मणिपुर → शिव-प्रसन्नता-पश्चात् 'रांजण' (प्रसन्न) + 'गाँव' = रांजणगाँव नामकरण।

'त्रिपुरारिवदे महागणपति' उपाधि

'त्रिपुरारि-वदे' = त्रिपुरारि-वध-दाता; इस-कथा के पश्चात् मन्दिर-देवता को यह विशिष्ट-उपाधि प्राप्त हुई।

संत एवं परम्परा

  • देवाधिदेव शिव — त्रिपुरासुर-वध-पूर्व-आराधक एवं मूर्ति-प्रतिष्ठापक; अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित गणेश
  • ऋषि गृत्समद — त्रिपुरासुर के पिता; (वही गृत्समद-ऋषि जिनकी तपस्या वरदविनायक महाड में हुई)
  • नारद मुनि — शिव को गणेश-आराधना-उपदेशक
  • त्रिपुरासुर — पराजित-असुर; देवता-नाम-कारक
  • माधवराव I थोरले पेशवा (1745-1772; 9वें पेशवा) — वर्तमान-गर्भगृह + पाषाण-गभारा + बेसमेण्ट-कक्ष (तहखाना) निर्माण
  • सरदार किबे (इन्दौर) — काष्ठ-सभा-मण्डप-वर्धन
  • मल्हारराव होलकर + महादजी शिन्दे — परिसर-विस्तार-संरक्षण
  • श्री क्षेत्र रांजणगाँव गणपति देवस्थान ट्रस्ट (पृथक-स्वतन्त्र; NOT चिञ्चवड देवस्थान) — आधुनिक-प्रशासन

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 9009वीं-10वीं शताब्दी ईस्वी — मूल-मन्दिर-स्थापना (परम्परागत)Ashtavinayak.in + Maharashtra Tourism + ExploreOurIndia बहु-स्रोत
  2. माधवराव I थोरले पेशवा-काल (1761-1772) — वर्तमान-गर्भगृह + पाषाण-गभारा + बेसमेण्ट-कक्ष निर्माण; महोत्कट-मूर्ति-संरक्षण-हेतु तहखानाWikipedia + Heritage Temples + Sanatan Yatra बहु-स्रोत
  3. सरदार किबे (इन्दौर) द्वारा काष्ठ-सभा-मण्डप-वर्धन; पेशवा-कालीन-विस्तारWikipedia + Heritage Temples
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:00 से 22:00 तक

काकड/अभिषेक प्रारम्भ05:30
दैनिक
समुदाय प्रातः आरती07:30
दैनिक
महा-पूजा + महा-नैवेद्य11:30-12:30
दैनिक
समुदाय सायं आरती19:30
दैनिक
शेज-आरती (रात्रि समापन)22:30
दैनिक

विशेष नियम: वर्ष-पर्यन्त खुला 365-दिन; कोई प्रवेश-शुल्क नहीं; गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; तहखाना-महोत्कट-मूर्ति देवस्थान-ट्रस्ट आधिकारिक-रूप से खण्डन-करता (परम्परा-प्रबल)

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:00-22:00 (दैनिक)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

वर्ष-पर्यन्त खुला 365-दिन; कोई प्रवेश-शुल्क नहीं।

अभिषेक एवं महापूजा (प्रातः 05:30-)

ट्रस्ट-कार्यालय बुकिंग।

अष्टम-तीर्थ-यात्रा-समापन-संकल्प (मोरगाँव-वापसी)निःशुल्क

अष्टविनायक यात्रा-क्रम का अष्टम (अन्तिम) तीर्थ; पारम्परिक-नियम अनुसार दर्शन-पश्चात् मोरगाँव-वापसी-दर्शन यात्रा-समापन।

त्रिपुरारिवदे-शिव-आराधित-गणेश दर्शननिःशुल्क

अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित-गणेश; सर्वाधिक-शक्तिशाली रूप-दर्शन।

सूर्योदय-किरण-संरेखण दर्शन (भाद्रपद + माघ शुक्ल चतुर्थी)निःशुल्क

भाद्रपद एवं माघ शुक्ल चतुर्थी प्रातः-काल सूर्य-किरणें मुख्य-मूर्ति पर सीधी — खगोलीय-संरेखण।

5 भक्त-निवास (AC + non-AC; 5-बेड्स; ट्रस्ट-संचालित)

AC एवं non-AC कक्ष, 5-बेड्स-कॉन्फिगरेशन; सामुदायिक-हॉल; CCTV; गरम-पानी; पेय-जल।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

भाद्रपद गणेश-चतुर्थी 2026 — 6-दिवसीय भव्य उत्सवभाद्रपद शुक्ल 1-6

सोमवार 14 सितंबर 2026; पुष्प-अलङ्कृत पालकी-शोभायात्रा; पहलवानी-स्पर्धा; दिन-5 पर महाभोग-अर्पण; दिन-6 पर भक्तों द्वारा लोटांगण (दण्डवत-प्रदक्षिणा)। सूर्योदय-किरण-संरेखण-दर्शन। अनन्त चतुर्दशी 25 सितंबर 2026।

माघ उत्सव / माघी गणेश-जयन्ती 2026 — 6-दिवसीय भव्य उत्सवमाघ शुक्ल 1-6

गुरुवार 22 जनवरी 2026 — गणेश-जन्म-तिथि उत्सव; सूर्योदय-किरण-संरेखण-दर्शन।

सूर्योदय-किरण-संरेखण-दर्शन-कालभाद्रपद एवं माघ शुक्ल चतुर्थी प्रातः-काल

खगोलीय-संरेखण — सूर्य-किरणें द्वार से सीधी मुख्य-मूर्ति पर पड़ती हैं।

मासिक सङ्कष्टी + विनायकी चतुर्थीकृष्ण एवं शुक्ल चतुर्थी (प्रत्येक मास)

विशेष महाभिषेक।

विजयदशमी + अक्षय तृतीयाविशेष-तिथि

विशेष पूजा-अर्चना।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

अष्टविनायक यात्रा-समापन-दर्शन (अष्टम तीर्थ)

अष्टम (अन्तिम) तीर्थ; पारम्परिक-नियम अनुसार दर्शन-पश्चात् मोरगाँव-वापसी-दर्शन-यात्रा-समापन-बन्धन-मुक्ति

स्रोत: Maharashtra Tourism + Wikipedia Ashtavinayaka

महान-शत्रु-विजय-संकल्प (त्रिपुरासुर-वध परम्परा)

अष्टविनायक में एकमात्र शिव-आराधित गणेश; शिव-स्वयं ने यहाँ गणेश-आराधना-कर त्रिपुरासुर-वध की शक्ति-प्राप्ति की — महान-शत्रु एवं असम्भव-कार्य-विजय-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: त्रिपुरासुर-कथा (AshtavinayakTemples + GanapatiBappa + TemplePurohit बहु-स्रोत)

अप्रतिरोध्य-शक्ति-संकल्प (सर्वाधिक-शक्तिशाली रूप)

अष्टविनायक में सर्वाधिक-शक्तिशाली/उग्र रूप; गुप्त-तान्त्रिक महोत्कट (10-शुण्ड 20-भुजा) तहखाने में संरक्षित — अप्रतिरोध्य-शक्ति-संकल्प

स्रोत: Wikipedia + TheTempleGuru + Hindu Jagruti बहु-स्रोत

सूर्योदय-किरण-संरेखण-दर्शन-संकल्प (खगोलीय-तीर्थ)

भाद्रपद + माघ शुक्ल चतुर्थी प्रातः-काल सूर्य-किरण-मूर्ति-संरेखण का प्रत्यक्ष-दर्शन — खगोलीय-अनुकूलित स्थापत्य

स्रोत: ExploreOurIndia + AllWorldTemple + Ashtavinayak.in बहु-स्रोत

सङ्कटनाशन-स्तोत्र-पारायण-संकल्प

वही सङ्कटनाशन-स्तोत्र जिसके अभाव में शिव त्रिपुरासुर-वध में सङ्कट-बद्ध हुए — रांजणगाँव में पारायण विशिष्ट-फलदायी; सर्व-सङ्कट-निवारण-तीर्थ

स्रोत: AshtavinayakTemples + GanapatiBappa

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ गं गणपतये नमःबीज मन्त्रगाणपत्य परम्परा
  • ॐ महागणपतये नमःनाम-मन्त्रगाणपत्य परम्पराइस मन्दिर हेतुमहागणपति-विशिष्ट नाम-मन्त्र
  • सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्र (नारद-उवाच)स्तोत्रनारद-पुराणइस मन्दिर हेतुवही स्तोत्र जिसके अभाव में शिव त्रिपुरासुर-वध में सङ्कट-बद्ध हुए; रांजणगाँव-विशिष्ट
  • गणपति अथर्वशीर्षउपनिषद् स्तोत्रअथर्ववेद
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

त्रिपुरारी-कथा-स्थल (पुरातन मणिपुर)100 मी

शिव ने यहाँ गणेश-आराधना-कर त्रिपुरासुर-वध की शक्ति-प्राप्ति की; पुरातन-नाम मणिपुर → रांजणगाँव नामकरण-स्थल

थेऊर चिन्तामणि मन्दिर (अष्टविनायक #5)50 किमी

अष्टविनायक यात्रा-क्रम का पूर्व-तीर्थ; पुणे-केन्द्रित युग्म-यात्रा-सुलभ

मोरगाँव मयूरेश्वर मन्दिर (अष्टविनायक #1 — यात्रा-समापन)100 किमी

अष्टम-तीर्थ-दर्शन-पश्चात् पारम्परिक-यात्रा-समापन-वापसी-दर्शन

लेण्याद्री गिरिजात्मज मन्दिर (अष्टविनायक #6)100 किमी

अष्टविनायक यात्रा-क्रम; गणेश-जन्म-स्थल

ओझर विघ्नेश्वर मन्दिर (अष्टविनायक #7)95 किमी

अष्टविनायक यात्रा-क्रम का पूर्व-तीर्थ; स्वर्ण-शिखर-मन्दिर

रांजणगाँव MIDC औद्योगिक-क्षेत्र5 किमी

~2,285 एकड़ औद्योगिक-केन्द्र; LG, Whirlpool, Fiat, Carraro, Bombay Dyeing, Bekaert, Maccaferri

शिक्रापुर21 किमी

ऐतिहासिक-व्यापार-केन्द्र; तीर्थयात्रा-मार्ग-बिन्दु

अष्टविनायक यात्रा शास्त्रोक्त क्रम — अष्टम (अन्तिम) तीर्थ

अष्टम (अन्तिम) तीर्थ; क्रम: 1. मोरगाँव → 2. सिद्धटेक → 3. पाली → 4. महाड → 5. थेऊर → 6. लेण्याद्री → 7. ओझर → 8. **रांजणगाँव (यह)** → **मोरगाँव-समापन-वापसी (अनिवार्य)**

8 मंदिर · 3 दिन

पुणे-केन्द्रित थेऊर + रांजणगाँव युग्म-यात्रा (1-दिवसीय)

पुणे से सर्वाधिक-सुलभ युग्म — थेऊर (25 किमी) + रांजणगाँव (50 किमी)

2 मंदिर

पुणे-अहमदनगर-शिर्डी संयुक्त-यात्रा

रांजणगाँव + अहमदनगर (70 किमी) + शिर्डी (180 किमी) — पुणे-अहमदनगर राजमार्ग-संयोजन

3 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री महागणपति मन्दिर, MH SH 27 / NH-753F (पुणे-अहमदनगर राजमार्ग), रांजणगाँव, शिरूर तालुका, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र — PIN 412209
हवाई अड्डा
पुणे अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (PNQ, लोहगाँव) — ~45-50 किमी पश्चिम; ~1 घण्टे 15 मिनट ड्राइव
रेलवे
उरुली (उरुली कांचन) रेलवे स्टेशन — ~16 किमी (निकटतम; सीमित-कनेक्टिविटी); पुणे जङ्क्शन — ~50 किमी (प्राथमिक रेलहेड); तालेगाँव दाभाडे — वैकल्पिक; येवत — ~29 किमी
बस-स्टैण्ड
रांजणगाँव बस-स्टैण्ड (MSRTC); पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर सीधी; शिक्रापुर ~21 किमी; पुणे-स्वर्गते बस-स्टैण्ड से MSRTC एवं अष्टविनायक-यात्रा-पैकेज
उत्तम ऋतु
वर्ष-पर्यन्त खुला (365-दिन); गणेश-चतुर्थी 14 सितंबर 2026 + 6-दिवसीय भव्य उत्सव; अनन्त चतुर्दशी 25 सितंबर 2026; माघी जयन्ती 22 जनवरी 2026 + 6-दिवसीय उत्सव; भाद्रपद एवं माघ शुक्ल चतुर्थी प्रातः-काल सूर्योदय-किरण-संरेखण-दर्शन; अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम मौसम
50 किमीPune
50 किमीPune Airport
50 किमीPune Junction
16 किमीUruli Kanchan
21 किमीShikrapur
25 किमीShirur
50 किमीTheur
100 किमीMorgaon
70 किमीAhmednagar
200 किमीMumbai
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