त्रिपुरासुर-कथा (अष्टविनायक-स्थल-पुराण)
ऋषि गृत्समद के छीन्क से जन्मे त्रिपुरासुर ने पिता से गणेश-मन्त्र-शिक्षा-प्राप्त-कर गणेश-आराधना की; गणेश ने उसे शिव-अतिरिक्त सर्व-विजय-वर दिया। असुर ने तीन उड़न्त-नगर (त्रिपुर) निर्मित-कर देव एवं पृथ्वी-त्रास प्रारम्भ किया। देव-प्रार्थना पर शिव-अभियान; नारद ने सूचित किया कि गजानन-शक्ति-प्रदत्त असुर का वध केवल गजानन-कृपा से सम्भव — शिव ने अभियान-पूर्व सङ्कटनाशन-स्तोत्र-पारायण/गणेश-आराधना का अभाव-स्मरण किया। शिव ने यहाँ गणेश-आराधना-कर बीज-मन्त्र प्राप्त किया; एक-बाण से त्रिपुरासुर का वध किया। कृतज्ञ शिव ने इस-स्थान पर मूर्ति-प्रतिष्ठा/अभिषेक की; पुरातन-नाम मणिपुर → शिव-प्रसन्नता-पश्चात् 'रांजण' (प्रसन्न) + 'गाँव' = रांजणगाँव नामकरण।
