देवी भागवत पुराण
स्कन्ध 7, अध्याय 38 — दक्षिण-भारत के तीर्थों में 'कोल्हापुर' को देवी लक्ष्मी का स्थायी निवास-स्थान घोषित
Kolhapur · Maharashtra
श्री महालक्ष्मी (अंबाबाई) मंदिर, करवीर निवासिनी — कोल्हापुर
श्री करवीर निवासिनी अंबाबाई महालक्ष्मी — विष्णु-पत्नी एवं शक्ति-स्वरूप
अन्य नाम: अंबाबाई · करवीर निवासिनी · करवीर महालक्ष्मी · लक्ष्मी भवानी · करवीर पीठ की देवी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री महालक्ष्मी (अंबाबाई) — विष्णु-पत्नी लक्ष्मी एवं शाक्त-परंपरा में पार्वती-स्वरूप; करवीर पीठ की अधिष्ठात्री देवी
श्याम-शिला (काला ग्रैनाइट) निर्मित — 3 फुट (~91 सेमी), ~40 किग्रा; पश्चिमाभिमुख स्थानक-मूर्ति; रत्न-जड़ित मुकुट; चार भुजाएँ — दाहिनी अधोभुजा: मातुलिङ्ग (बिजोरा/मातुलुङ्ग फल); दाहिनी ऊर्ध्व: कौमोदकी गदा (नीचे भूमि-स्पर्शी); बायीं ऊर्ध्व: खेटक (ढाल); बायीं अधो: पानपात्र; मुकुट में पञ्च-मुख शेष-नाग एवं लघु शिव-लिंग; पीठ के पीछे पाषाण-सिंह वाहन
सम्प्रदाय: द्वि-परंपरा — वैष्णव (देवी भागवत 7.38, करवीर-माहात्म्य — विष्णु-पत्नी लक्ष्मी) एवं शाक्त (मुकुट में शिव-लिंग, सिंह-वाहन, 18 शक्ति-पीठ-स्थान); दोनों परंपराएँ शास्त्र-पुष्ट
स्कन्ध 7, अध्याय 38 — दक्षिण-भारत के तीर्थों में 'कोल्हापुर' को देवी लक्ष्मी का स्थायी निवास-स्थान घोषित
महालक्ष्मी अष्टकम् (इन्द्र-कृत स्तोत्र) — 'नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते' — 8 श्लोक
लक्ष्मी सहस्रनाम — 'ॐ करवीर-निवासिन्यै नमः' — देवी को करवीर-वासिनी के रूप में नामांकित
कोल्हापुर-क्षेत्र का स्वतंत्र माहात्म्य ग्रन्थ; पद्म पुराण एवं स्कन्द पुराण दोनों परंपराओं में उद्धृत
आदि शंकराचार्य रचित — 'कोल्हापुरे महालक्ष्मी, माहूर्ये एकवीरिका'
04:00 से 22:30 तक
दिन की प्रथम आरती; मंदिर खुलने के 1 घंटे बाद
सायंकालीन प्रमुख आरती
दिन की अन्तिम आरती; मंदिर बन्द होने से पूर्व
मुख्य महालक्ष्मी दर्शन निःशुल्क; सामान्य पंक्ति।
देवी के चरण-पूजन का संकल्प; आधिकारिक पोर्टल से बुकिंग।
देवी को कुङ्कुम-अर्पण-अर्चना।
पञ्चामृत-स्नान सहित अभिषेक एवं कुङ्कुम-अर्चना।
देवी का पूर्ण महा-अभिषेक एवं वस्त्र-अर्पण।
वर्ष में दो बार — पश्चिमाभिमुख देवी-मूर्ति पर सूर्यास्त की किरणें पश्चिमी झरोखे से सीधे पड़ती हैं। 2026: 31 जनवरी (देवी के चरण), 1 फरवरी (वक्ष), 2 फरवरी (सम्पूर्ण शरीर / मुख)। सूर्यास्त से लगभग 90 मिनट पूर्व पहुँचने की सलाह। यह कोल्हापुर महालक्ष्मी का अद्वितीय वार्षिक उत्सव।
वर्ष का दूसरा किरणोत्सव। 2026: 9 नवंबर (चरण), 10 नवंबर (वक्ष), 11 नवंबर (सम्पूर्ण शरीर / मुख)।
सूर्य-उपासना पर्व; देवी की विशेष पूजा। 2026 — रविवार 25 जनवरी।
ललिता त्रिपुर-सुन्दरी-स्वरूप पूजा; ललिता सहस्रनाम पारायण। 2026 — रविवार 1 फरवरी।
देवी का विशेष अलंकार; स्वर्ण-खरीद का शुभ-दिन। 2026 — रविवार 19 अप्रैल।
16-दिवसीय व्रत; प्रतिदिन देवी-पूजन। 2026 — शनिवार 19 सितंबर से प्रारम्भ।
मंदिर का सर्वोच्च वार्षिक पर्व; 9-रात्रि महोत्सव; प्रतिदिन विशेष अलंकार। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर।
देवी की पालकी त्र्यंबुली देवी (कोल्हापुर के पूर्व में पहाड़ी पर) तक यात्रा; कूष्माण्ड-भेद अनुष्ठान (कोल्हासुर-वध-स्मरण)। 2026 — शुक्रवार 16 अक्टूबर।
देवी की विजय-यात्रा; 1712 ईस्वी इसी दिन मूर्ति पुनः-प्रतिष्ठा का स्मरण। 2026 — मंगलवार 20 अक्टूबर।
देवी-तुलसी विवाह। 2026 — शनिवार 21 नवंबर।
महाराष्ट्र की प्रसिद्ध 'मार्गशीर्ष गुरुवार' व्रत-परंपरा; देवी-पूजन एवं कथा-श्रवण। 2026 — 12, 19, 26 नवंबर एवं 3 दिसंबर।
महालक्ष्मी = धन-वैभव की देवी; करवीर-निवासिनी विष्णु-पत्नी; धन-संकल्प हेतु प्रधान शक्ति-पीठ
स्रोत: देवी भागवत स्कन्ध 7 अध्याय 38 + पद्म पुराण महालक्ष्मी अष्टकम्
वर्ष में 6 दिन (31 जनवरी-2 फरवरी एवं 9-11 नवंबर) पश्चिम-झरोखे से सीधी सूर्य-किरण देवी पर पड़ती है; इस दर्शन का विशेष पुण्य
स्रोत: कोल्हापुर स्थल-परंपरा
महालक्ष्मी (कोल्हापुर) + तुळजापुर भवानी + माहुर रेणुका — तीन पूर्ण-पीठ; सप्तशृंगी अर्ध-पीठ। चारों की संयुक्त यात्रा का विशिष्ट पुण्य
स्रोत: महाराष्ट्र शाक्त-परंपरा
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 'कोल्हापुरे महालक्ष्मी'
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् (आदि शंकराचार्य)
महाराष्ट्र की प्रमुख लक्ष्मी-व्रत-परंपरा; मार्गशीर्ष-मास के समस्त गुरुवारों पर देवी-पूजन से वैभव-कामना-पूर्ति
स्रोत: महाराष्ट्र व्रत-परंपरा
यादव-नरेश तोलुम् द्वारा 1218 ईस्वी निर्मित पश्चिमी द्वार
महालक्ष्मी की सहयोगी देवी; ललिता पञ्चमी पर देवी की पालकी यहाँ आती है; कूष्माण्ड-भेद-अनुष्ठान
केदारलिंग / ज्योतिबा शिव-मंदिर; कोल्हासुर-वध में देवी के सहयोगी; महालक्ष्मी-यात्रा के साथ-संयुक्त
शिवाजी महाराज-कालीन ऐतिहासिक किला
दत्तात्रेय-संप्रदाय का प्रमुख तीर्थ — कृष्णा-पंचगंगा संगम
12वीं शताब्दी का कोपेश्वर-शिव मंदिर
पूर्ण-पीठ — महालक्ष्मी कोल्हापुर; अन्य पूर्ण: तुळजापुर भवानी + माहुर रेणुका; अर्ध-पीठ: सप्तशृंगी वणी
4 मंदिर
'कोल्हापुरे महालक्ष्मी' — स्तोत्रम् में नामांकित; पूर्व: चामुण्डा क्रौञ्च-पट्टण (4); पश्चात्: माहूर एकवीरिका
18 मंदिर
केन्द्रीय; कोल्हासुर-वध-कथा से जुड़े तीन सम्बद्ध तीर्थों की संयुक्त 1-दिवसीय यात्रा
3 मंदिर