शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता — मल्लिकार्जुन-माहात्म्य; कार्तिकेय-कथा एवं श्रीशैलम् पर्वत-वर्णन
Srisailam · Andhra Pradesh
श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग / भ्रमराम्बा शक्तिपीठ — दक्षिण का कैलाश
अन्य नाम: श्रीशैलम् मंदिर · मल्लिका-अर्जुन · दक्षिण-कैलाश · नल्लामल का शिव

इस मन्दिर की विशेषता
श्री मल्लिकार्जुन (शिव) — द्वितीय ज्योतिर्लिंग; एवं श्री भ्रमराम्बा देवी (पार्वती — 18 महा-शक्तिपीठों में अग्रणी)
मल्लिकार्जुन शिवलिंग एवं भ्रमराम्बा देवी विग्रह — एक ही मंदिर परिसर में
सम्प्रदाय: शैव + शाक्त — दुर्लभ संयुक्त ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ-स्थल
कोटिरुद्र संहिता — मल्लिकार्जुन-माहात्म्य; कार्तिकेय-कथा एवं श्रीशैलम् पर्वत-वर्णन
श्रीशैल खण्ड — श्रीशैलम् क्षेत्र का विस्तृत वर्णन; मल्लिका-अर्जुन-स्वरूप कथा
वन पर्व — पाण्डवों के श्रीशैलम् आगमन का संदर्भ; 5 पाण्डव-प्रतिष्ठित लिंग
आदि शंकराचार्य रचित — 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' — द्वितीय पंक्ति
04:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-18:00 (मध्याह्न विश्राम — गर्भगृह बन्द)
दिन की प्रथम आरती; भीड़-रहित दर्शन
सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान; मंदिर 21:00 बजे बन्द (बहु-स्रोत सहमत)
मुख्य मल्लिकार्जुन एवं भ्रमराम्बा दर्शन निःशुल्क।
₹500 प्रति-व्यक्ति VIP विशेष दर्शन।
₹500 प्रति-व्यक्ति विशेष टिकट से ज्योतिर्लिंग को प्रत्यक्ष स्पर्श करके अभिषेक का अवसर। समय: मंगलवार-शुक्रवार 14:00-15:00 एवं 18:30-19:30 (श्रावण-मास एवं सप्ताहान्त में विस्तार)। ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक।
रुद्राभिषेकम्, महान्यास, सहस्रनाम-पूजा आदि की ऑनलाइन बुकिंग।
श्रीशैलम् का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव — 11-दिवसीय ब्रह्मोत्सवम (शिवरात्रि-दिन सहित)। पगलंकरण अनुष्ठान — प्रिथवी वेंकटेश्वरलू परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी 365 दिन एक मीटर वस्त्र-बुनाई कर मंदिर के विमान-कलश एवं मण्डप-वस्त्र बनाते हैं; शिवरात्रि-रात्रि पूर्ण अंधकार में अर्पण। 2026 — 8-18 फरवरी (मुख्य दिन: 15 फरवरी रविवार)।
आन्ध्र-तेलुगु परंपरा का नववर्ष; विशेष पूजा
सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति-सोमवार विशेष रुद्राभिषेक; सप्ताहान्त में स्पर्श-दर्शन विस्तार
मान्यता अनुसार इसी रात्रि देवी भ्रमराम्बा कार्तिकेय से मिलने आती हैं; विशेष शाक्त-पूजा
भ्रमराम्बा देवी की विशेष नवरात्रि-पूजा एवं विजयदशमी अनुष्ठान
आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' — द्वितीय ज्योतिर्लिंग; 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन से सात जन्मों के पाप-नाश एवं मोक्ष
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
मल्लिकार्जुन (शिव) एवं भ्रमराम्बा (शक्ति) का एक-स्थानीय दर्शन — गिने-चुने मंदिरों में संभव; दाम्पत्य-सुख, सन्तान-प्राप्ति एवं विवाह-योग हेतु विशेष माहात्म्य
स्रोत: स्कन्द पुराण श्रीशैल खण्ड
श्रीशैलम् का क्रौंच पर्वत — कार्तिकेय-निवास; पुत्र-कामना एवं संतान-स्वास्थ्य हेतु विशेष माहात्म्य
स्रोत: स्कन्द पुराण + शिव पुराण
भ्रमराम्बा देवी — 18 महा-शक्तिपीठों में अग्रणी; शाक्त-यात्रा का प्रमुख तीर्थ
स्रोत: देवी भागवत पुराण + शाक्त परंपरा
श्रीशैलम् में कृष्णा नदी का घाट जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं; मुख्य मल्लिकार्जुन दर्शन से पूर्व स्नान-परंपरा। रोपवे या पैदल मार्ग से पहुँचा जा सकता है।
श्रद्धालुओं की मल्लिकार्जुन-यात्रा का साक्ष्य रखने वाले गणेश का मंदिर — मान्यता अनुसार मल्लिकार्जुन के समक्ष यहाँ साक्ष्य प्रस्तुत किया जाता है। श्रीशैलम् दर्शन-पूर्व अनिवार्य।
श्रीशैलम् क्षेत्र का सर्वोच्च शिव-मंदिर; मान्यता अनुसार शिखर-दर्शन से पुनर्जन्म-मुक्ति
16वीं शताब्दी की क्षेत्रीय शिव-भक्त संत हेमा-रेड्डी मल्लम्मा का मंदिर; तेलुगु-कन्नड़ शैव-परंपरा का प्रमुख तीर्थ
12वीं शताब्दी की कन्नड़ कवियित्री-संत अक्क महादेवी की तपस्या-स्थली; प्राकृतिक गुफा (10 लाख+ वर्ष पुरानी); शिव-लिंग एवं ध्यान-स्थल
भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व — 3,727 वर्ग किमी (कोर + बफर); 2022 जनगणना अनुसार 75 बाघ; काला हिरन, अजगर, किंग कोबरा, मोर सहित 700+ प्रजातियाँ
द्वितीय ज्योतिर्लिंग — 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के द्वितीय पद में स्तुत)
12 मंदिर
भ्रमराम्बा शक्तिपीठ — 18 महा-शक्तिपीठों में अग्रणी; आदि शंकराचार्य रचित अष्टादश-शक्तिपीठ स्तोत्र में स्तुत
18 मंदिर
केन्द्रीय; 2-दिवसीय पूर्ण यात्रा-योजना
दक्षिण के 4 प्रमुख तीर्थों में शैव-शाक्त धाम