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Srisailam · Andhra Pradesh

श्री भ्रमराम्बा-मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम्

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग / भ्रमराम्बा शक्तिपीठ — दक्षिण का कैलाश

अन्य नाम: श्रीशैलम् मंदिर · मल्लिका-अर्जुन · दक्षिण-कैलाश · नल्लामल का शिव

  • 12 ज्योतिर्लिंग
  • 18 महा-शक्तिपीठ
  • उन गिने-चुने मंदिरों में जहाँ ज्यो…
श्री भ्रमराम्बा-मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम्
दर्शन समय
04:30 – 21:00
स्वरूप
मल्लिकार्जुन शिवलिंग एवं भ्रमराम्बा देवी…
स्थान
Srisailam · Andhra Pradesh
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम
काल
प्राचीन काल

इस मन्दिर की विशेषता

  • 12 ज्योतिर्लिंग (द्वितीय — 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्')
  • 18 महा-शक्तिपीठ (भ्रमराम्बा शक्ति)
  • उन गिने-चुने मंदिरों में जहाँ ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ एक ही स्थल पर
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री मल्लिकार्जुन (शिव) — द्वितीय ज्योतिर्लिंग; एवं श्री भ्रमराम्बा देवी (पार्वती — 18 महा-शक्तिपीठों में अग्रणी)

मल्लिकार्जुन शिवलिंग एवं भ्रमराम्बा देवी विग्रह — एक ही मंदिर परिसर में

सम्प्रदाय: शैव + शाक्त — दुर्लभ संयुक्त ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ-स्थल

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

शिव पुराण

कोटिरुद्र संहिता — मल्लिकार्जुन-माहात्म्य; कार्तिकेय-कथा एवं श्रीशैलम् पर्वत-वर्णन

स्कन्द पुराण

श्रीशैल खण्ड — श्रीशैलम् क्षेत्र का विस्तृत वर्णन; मल्लिका-अर्जुन-स्वरूप कथा

महाभारत

वन पर्व — पाण्डवों के श्रीशैलम् आगमन का संदर्भ; 5 पाण्डव-प्रतिष्ठित लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

आदि शंकराचार्य रचित — 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' — द्वितीय पंक्ति

संत एवं परम्परा

  • कार्तिकेय (स्कन्द) — विवाह-प्रसंग में रुष्ट होकर कैलाश त्याग कर श्रीशैलम् के क्रौंच पर्वत पर निवास; उन्हीं को मनाने हेतु शिव-पार्वती मल्लिका-अर्जुन रूप में यहाँ प्रकट; मान्यता: अमावस्या को शिव एवं पूर्णिमा को पार्वती कार्तिकेय से मिलने यहाँ आते हैं
  • श्री राम — स्थल-परंपरा अनुसार सहस्र-लिंग (1000 लिंग) के प्रतिष्ठाता
  • पाण्डव — वनवास-काल में श्रीशैलम् आगमन एवं 5 पाण्डव-लिंगों की स्थापना
  • आदि शंकराचार्य (8वीं-9वीं शताब्दी) — द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की द्वितीय पंक्ति में 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' द्वारा प्रतिष्ठा; मान्यता-कथानुसार यहाँ शिवानन्द-लहरी एवं भज गोविन्दम् रचना
  • अक्क महादेवी (12वीं शताब्दी) — कन्नड़ कवियित्री-संत; श्रीशैलम् के निकट कृष्णा-तट पर तपस्या (अक्क महादेवी गुफा)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 100लगभग पहली-दूसरी शताब्दी ईस्वी — सातवाहन-काल के शिलालेखों से मंदिर की प्राचीनता पुष्ट; प्रारंभिक उपासना-स्थलWikipedia Mallikarjuna Temple Srisailam
  2. 7007वीं शताब्दी — मल्लिकार्जुन गर्भगृह का निर्माण (वर्तमान मंदिर का प्राचीनतम भाग)Wikipedia + Behind Every Temple
  3. 135014वीं शताब्दी — रेड्डी राजवंश (अनवेमा रेड्डी, अनपोता रेड्डी) के अंतर्गत प्रांगण-विस्तार एवं प्रमुख गोपुर-निर्माणWikipedia Mallikarjuna Temple Srisailam
  4. 140015वीं शताब्दी — विजयनगर सम्राट हरिहर प्रथम (एवं उत्तराधिकारियों) द्वारा मंदिर का व्यापक विस्तार; मुख्य प्राकार-दीवार 183m × 152m × 8.5m ऊँची; द्रविड़ शैली के अनेक मण्डपWikipedia + Sanatan Vasudev Kutumb
  5. 20268-18 फरवरी 2026 — महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सवम (11-दिवसीय वार्षिक प्रमुख उत्सव); अनुमानित 1.5 लाख+ श्रद्धालु महाशिवरात्रि-दिन (15 फरवरी रविवार) पर दर्शनThe Hans India + YKTV
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-18:00 (मध्याह्न विश्राम — गर्भगृह बन्द)

सुप्रभात / प्रातः-दर्शन04:30-06:30
दैनिक

दिन की प्रथम आरती; भीड़-रहित दर्शन

महामंगल आरती एवं अभिषेक06:30-12:30
दैनिक
महा-निवेदन / राजभोग12:30-13:00
दैनिक
संध्या आरती + रुद्राभिषेकम्18:00-21:00
दैनिक

सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान; मंदिर 21:00 बजे बन्द (बहु-स्रोत सहमत)

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सर्व दर्शनम् (निःशुल्क)निःशुल्क
समय
04:30-13:00 एवं 18:00-21:00
उपयुक्त
सभी भक्त

मुख्य मल्लिकार्जुन एवं भ्रमराम्बा दर्शन निःशुल्क।

VIP विशेष दर्शन₹500
उपयुक्त
समय-सीमित भक्त

₹500 प्रति-व्यक्ति VIP विशेष दर्शन।

स्पर्श दर्शन (Sparsha Darshan)₹500
उपयुक्त
श्रद्धालु — ज्योतिर्लिंग का प्रत्यक्ष स्पर्श

₹500 प्रति-व्यक्ति विशेष टिकट से ज्योतिर्लिंग को प्रत्यक्ष स्पर्श करके अभिषेक का अवसर। समय: मंगलवार-शुक्रवार 14:00-15:00 एवं 18:30-19:30 (श्रावण-मास एवं सप्ताहान्त में विस्तार)। ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक।

विशेष पूजा एवं अभिषेकम्
उपयुक्त
श्रद्धालु एवं संकल्प हेतु

रुद्राभिषेकम्, महान्यास, सहस्रनाम-पूजा आदि की ऑनलाइन बुकिंग।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सवम (11-दिवसीय)फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फरवरी)

श्रीशैलम् का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव — 11-दिवसीय ब्रह्मोत्सवम (शिवरात्रि-दिन सहित)। पगलंकरण अनुष्ठान — प्रिथवी वेंकटेश्वरलू परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी 365 दिन एक मीटर वस्त्र-बुनाई कर मंदिर के विमान-कलश एवं मण्डप-वस्त्र बनाते हैं; शिवरात्रि-रात्रि पूर्ण अंधकार में अर्पण। 2026 — 8-18 फरवरी (मुख्य दिन: 15 फरवरी रविवार)।

उगादि (तेलुगु नववर्ष)चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

आन्ध्र-तेलुगु परंपरा का नववर्ष; विशेष पूजा

श्रावण मासश्रावण

सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति-सोमवार विशेष रुद्राभिषेक; सप्ताहान्त में स्पर्श-दर्शन विस्तार

कार्तिक पूर्णिमाकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा

मान्यता अनुसार इसी रात्रि देवी भ्रमराम्बा कार्तिकेय से मिलने आती हैं; विशेष शाक्त-पूजा

विजयदशमी / दशहराआश्विन शुक्ल दशमी

भ्रमराम्बा देवी की विशेष नवरात्रि-पूजा एवं विजयदशमी अनुष्ठान

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का द्वितीय तीर्थ — दर्शन-मात्र से सात जन्मों के पाप-नाश

आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' — द्वितीय ज्योतिर्लिंग; 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन से सात जन्मों के पाप-नाश एवं मोक्ष

स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

एक ही स्थान पर शिव + शक्ति का संयुक्त-दर्शन एवं युगल-कृपा

मल्लिकार्जुन (शिव) एवं भ्रमराम्बा (शक्ति) का एक-स्थानीय दर्शन — गिने-चुने मंदिरों में संभव; दाम्पत्य-सुख, सन्तान-प्राप्ति एवं विवाह-योग हेतु विशेष माहात्म्य

स्रोत: स्कन्द पुराण श्रीशैल खण्ड

कार्तिकेय-दर्शन एवं संतान-कृपा

श्रीशैलम् का क्रौंच पर्वत — कार्तिकेय-निवास; पुत्र-कामना एवं संतान-स्वास्थ्य हेतु विशेष माहात्म्य

स्रोत: स्कन्द पुराण + शिव पुराण

18 महा-शक्तिपीठ यात्रा की पूर्णता

भ्रमराम्बा देवी — 18 महा-शक्तिपीठों में अग्रणी; शाक्त-यात्रा का प्रमुख तीर्थ

स्रोत: देवी भागवत पुराण + शाक्त परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्'स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचित द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — द्वितीय पंक्तिइस मन्दिर हेतु
  • शिवानन्द लहरीस्तोत्रआदि शंकराचार्य; परंपरा अनुसार श्रीशैलम् में रचितइस मन्दिर हेतु100 श्लोकों का शिव-स्तोत्र — मल्लिकार्जुन-स्तुति का प्रमुख स्तोत्र
  • मल्लिकार्जुन अष्टकम्स्तोत्रस्थल-परंपराइस मन्दिर हेतु
  • महामृत्युञ्जय मंत्रमंत्रऋग्वेद 7.59.12रुद्राभिषेकम् का प्रमुख मंत्र
  • ॐ नमः शिवाय — पञ्चाक्षर मंत्रमंत्रयजुर्वेद रुद्राध्याय
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

पाताल गंगा (Patala Ganga)1.5 किमी

श्रीशैलम् में कृष्णा नदी का घाट जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं; मुख्य मल्लिकार्जुन दर्शन से पूर्व स्नान-परंपरा। रोपवे या पैदल मार्ग से पहुँचा जा सकता है।

साक्षी गणपति मंदिर3.5 किमी

श्रद्धालुओं की मल्लिकार्जुन-यात्रा का साक्ष्य रखने वाले गणेश का मंदिर — मान्यता अनुसार मल्लिकार्जुन के समक्ष यहाँ साक्ष्य प्रस्तुत किया जाता है। श्रीशैलम् दर्शन-पूर्व अनिवार्य।

शिखरेश्वर स्वामी मंदिर7 किमी

श्रीशैलम् क्षेत्र का सर्वोच्च शिव-मंदिर; मान्यता अनुसार शिखर-दर्शन से पुनर्जन्म-मुक्ति

हेमा-रेड्डी मल्लम्मा मंदिर4 किमी

16वीं शताब्दी की क्षेत्रीय शिव-भक्त संत हेमा-रेड्डी मल्लम्मा का मंदिर; तेलुगु-कन्नड़ शैव-परंपरा का प्रमुख तीर्थ

अक्क महादेवी गुफा25 किमी

12वीं शताब्दी की कन्नड़ कवियित्री-संत अक्क महादेवी की तपस्या-स्थली; प्राकृतिक गुफा (10 लाख+ वर्ष पुरानी); शिव-लिंग एवं ध्यान-स्थल

नागार्जुनसागर-श्रीशैलम् टाइगर रिज़र्व (NSTR)5 किमी

भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व — 3,727 वर्ग किमी (कोर + बफर); 2022 जनगणना अनुसार 75 बाघ; काला हिरन, अजगर, किंग कोबरा, मोर सहित 700+ प्रजातियाँ

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

द्वितीय ज्योतिर्लिंग — 'श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के द्वितीय पद में स्तुत)

12 मंदिर

18 महा-शक्तिपीठ यात्रा

भ्रमराम्बा शक्तिपीठ — 18 महा-शक्तिपीठों में अग्रणी; आदि शंकराचार्य रचित अष्टादश-शक्तिपीठ स्तोत्र में स्तुत

18 मंदिर

श्रीशैलम् क्षेत्र तीर्थ-समूह (मल्लिकार्जुन + भ्रमराम्बा + पाताल गंगा + साक्षी गणपति + शिखरेश्वर + अक्क महादेवी गुफा)

केन्द्रीय; 2-दिवसीय पूर्ण यात्रा-योजना

आन्ध्र-तेलंगाना मंदिर यात्रा (श्रीशैलम् + तिरुमला तिरुपति + यदगिरिगुट्टा + भद्राचलम)

दक्षिण के 4 प्रमुख तीर्थों में शैव-शाक्त धाम

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री भ्रमराम्बा-मल्लिकार्जुन स्वामी देवस्थानम्, श्रीशैलम् — 518101, नंद्याल जिला, आन्ध्र प्रदेश
हवाई अड्डा
राजीव गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद (HYD) — ~217 किमी; कुर्नूल हवाई अड्डा (KJB) — ~181 किमी
रेलवे
मार्कापुर रोड (MRK) — ~84 किमी (निकटतम); नंद्याल (NDL) — ~160 किमी; कुर्नूल (KRNT) — ~180 किमी
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम; तापमान 18-30°C। मार्च-जून अति-गर्म (35-42°C); जुलाई-सितंबर मानसून (नल्लामल-पहाड़ी पर हरियाली अद्भुत)। महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सवम (फरवरी) पर पीक भीड़।
84 किमीMarkapur Road Railway Station
160 किमीNandyal
180 किमीKurnool
181 किमीKurnool Airport
198 किमीNalgonda
217 किमीHyderabad
264 किमीVijayawada
470 किमीTirupati
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