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Gaya · Bihar

श्री माँ मंगला गौरी शक्तिपीठ मंदिर

श्री माँ मंगला गौरी शक्तिपीठ मंदिर — मंगलागौरी पहाड़ी, गया

मङ्गला गौरी — सर्व-मङ्गला देवी; पालनहार-पीठ की देवी

अन्य नाम: सर्वमङ्गला देवी · मंगला गौरी · मंगला गौरी शक्तिपीठ · पालनहार पीठ · गया-माङ्गल्य गौरिका

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा में Gaya सम्मि…
  • पालनहार-पीठ
  • गया-क्षेत्र का शाक्त केन्द्र
श्री माँ मंगला गौरी शक्तिपीठ मंदिर
दर्शन समय
06:00 – 20:00
स्वरूप
गुफा-शैली गर्भगृह में दो गोल-शिलाएँ
स्थान
Gaya · Bihar
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
स्थल-माहात्म्य: पद्म पुराण, वायु पुर…

इस मन्दिर की विशेषता

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ — आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्रम् में 16वें पीठ रूप में 'गया माङ्गल्यगौरिका' (4थे श्लोक में 'ज्वालायां वैष्णवीदेवी, गया माङ्गल्यगौरिका')
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा में Gaya सम्मिलित नहीं — विशिष्ट-तौर पर 18 अष्टादश परंपरा का पीठ है
  • पालनहार-पीठ — पालन/पोषण-स्वरूपा देवी की मान्यता
  • गया-क्षेत्र का शाक्त केन्द्र (विष्णुपद के साथ शाक्त-वैष्णव संयुक्त-यात्रा)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री माँ मंगला गौरी — सती के स्तन-स्वरूप; पालन (पोषण) की देवी; अखण्ड-ज्योति-सहित गुफा-गर्भगृह में दो स्तन-प्रतीक पिण्डियों के रूप में पूज्य

गुफा-शैली गर्भगृह में दो गोल-शिलाएँ (पिण्डियाँ) — सती के स्तन-स्वरूप; अखण्ड-ज्योति निरन्तर प्रज्वलित; गर्भगृह में एक-साथ केवल ~4 श्रद्धालुओं की दर्शन-व्यवस्था

सम्प्रदाय: शाक्त (हिन्दू-धर्म) — मुख्यतः वैष्णव-तीर्थ गया-क्षेत्र में शाक्त-केन्द्र

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

पद्म पुराण

मङ्गलागौरी-तीर्थ-वर्णन; गया-क्षेत्र की शाक्त-अधिष्ठात्री

वायु पुराण — गया माहात्म्य

गया-क्षेत्र को सर्वोच्च पिण्ड-दान तीर्थ; मङ्गलागौरी विष्णुपद के समानान्तर शाक्त-केन्द्र

अग्नि पुराण

गया-क्षेत्र के शाक्त-तीर्थों में सर्वमङ्गला-शिखर

देवी भागवत पुराण

गया-मङ्गलागौरी का शक्ति-पीठ-सूची में सम्मिलन

मार्कण्डेय पुराण

देवी माहात्म्यम् सहित — गया-मङ्गलागौरी की शाक्त-उपासना

अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य रचित — 4थे श्लोक: 'ज्वालायां वैष्णवीदेवी, गया माङ्गल्यगौरिका' — 16वाँ पीठ

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) — अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 'गया माङ्गल्यगौरिका' (16वाँ पीठ) के रूप में स्तुति
  • माधो गिरि जी महाराज (बाबा दण्डी स्वामी) — 1459 ईस्वी में वर्तमान मंदिर-संरचना के निर्माता
  • देवी अहिल्याबाई होलकर (इन्दौर; 18वीं शताब्दी) — मंदिर का जीर्णोद्धार-कार्य
  • गयासुर असुर-कथा-सम्बन्ध — विष्णु ने गयासुर के वक्ष पर पाद-न्यास किया (विष्णुपद); इसी क्षेत्र में मङ्गलागौरी देवी सती-स्तन-पीठ रूप में प्रकट

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 8008वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 16वें पीठ के रूप में स्तुतिHindupedia + Templesinindiainfo + Wikipedia तालिका
  2. 14591459 ईस्वी (15वीं शताब्दी) — माधो गिरि जी महाराज (बाबा दण्डी स्वामी) द्वारा वर्तमान मंदिर-संरचना का निर्माणWikipedia + Bihar Tourism + Templesinindiainfo + HinduScriptures
  3. 178018वीं शताब्दी — देवी अहिल्याबाई होलकर (इन्दौर) द्वारा जीर्णोद्धारWikipedia + Templesinindiainfo
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 से 20:00 तक

मंगला आरती05:30
दैनिक

मंदिर खुलने से पूर्व; दिन की प्रथम आरती

प्रातः दर्शन06:00-12:00
दैनिक
मध्याह्न आरती12:00
दैनिक
अपराह्न दर्शन12:00-19:30
दैनिक
सन्ध्या आरती19:30
दैनिक

सायं प्रमुख आरती

फोटोग्राफी: गर्भगृह के भीतर फोटोग्राफी निषिद्ध

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-20:00
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

मंगला गौरी देवी का दर्शन निःशुल्क; गुफा-गर्भगृह में एक-साथ ~4 श्रद्धालुओं की क्षमता; पंक्ति-व्यवस्था।

संकल्प पूजा / पाठ
उपयुक्त
व्रत-संकल्प एवं विशिष्ट-पूजा हेतु

स्थानीय पण्डित द्वारा संपन्न; मंदिर-कार्यालय पर सीधे बात करें (आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली अनुपलब्ध)।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

मङ्गला गौरी व्रत — श्रावण मंगलवार (बिहार पूर्णिमान्त परंपरा)श्रावण मास के समस्त मंगलवार

नव-विवाहित स्त्रियाँ 5-वर्षीय व्रत; षोडशोपचार-पूजन; 16-चूड़ी, 7-फल, 5-मिष्ठान्न समर्पण; मंगला गौरी व्रत कथा-पाठ; 16 सुहागिन-स्त्रियों को भोजन। 2026 — 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त, 25 अगस्त।

चैत्र (वासन्तिक) नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

9-दिवसीय देवी-उपासना। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी पर पूर्णता)।

शारदीय नवरात्रिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी

9-रात्रि महोत्सव; प्रतिदिन देवी-अलंकार। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; विजयदशमी — सोमवार 19 अक्टूबर (Drik Panchang)।

पितृ-पक्ष मेला (गया) — मंगला गौरी सम्बद्धभाद्रपद पूर्णिमा - आश्विन अमावस्या (पितृ-पक्ष 15 दिन)

गया का सर्वोच्च वार्षिक तीर्थ-मेला; पिण्ड-दान-तर्पण-यात्री विष्णुपद-मंदिर के पश्चात् मंगला गौरी देवी-दर्शन हेतु आते हैं — शाक्त-वैष्णव संयुक्त-यात्रा। 2026 — शनिवार 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से शनिवार 10 अक्टूबर (सर्व-पितृ अमावस्या / महालय)।

मङ्गला गौरी जयन्तीश्रावण शुक्ल पञ्चमी

देवी-प्रादुर्भाव दिवस; विशेष शोडशोपचार पूजन

अखण्ड-ज्योति दर्शन (वर्ष-पर्यन्त)वर्ष-पर्यन्त

गर्भगृह में निरन्तर प्रज्वलित अखण्ड-ज्योति का दर्शन

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

वैवाहिक सौभाग्य एवं दाम्पत्य-सुख

मंगला गौरी = सर्व-मङ्गला; नव-विवाहिता स्त्रियों के लिए 5-वर्षीय श्रावण-मंगलवार व्रत; अखण्ड-सौभाग्य-प्राप्ति

स्रोत: उत्तर-भारत मंगला गौरी व्रत-परंपरा (पुराण-आधारित)

पुत्र-सन्तति-प्राप्ति एवं आयु-वृद्धि

मंगला गौरी व्रत कथा (धर्मपाल-वणिक एवं 16-वर्षीय-आयु पुत्र-कथा) के आधार पर पुत्र-आयु-वृद्धि एवं सन्तति-कामना

स्रोत: मंगला गौरी व्रत कथा

पितृ-तर्पण-संकल्प (गया पिण्ड-दान)

गया-क्षेत्र में पिण्ड-दान करने के पश्चात् मंगला गौरी देवी-दर्शन — शाक्त-वैष्णव संयुक्त पूर्णता

स्रोत: वायु पुराण गया-माहात्म्य

अष्टादश शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प

आदि शंकराचार्य-रचित स्तोत्रम् में 16वाँ पीठ — 'गया माङ्गल्यगौरिका'

स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

पालन-पोषण-संकल्प

देवी 'पालनहार' स्वरूपा — सती के स्तन-पीठ रूप में पोषण-शक्ति की देवी; परिवार-कल्याण हेतु संकल्प

स्रोत: स्थल-परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचितइस मन्दिर हेतु4थे श्लोक का द्वितीयार्ध — 'गया माङ्गल्यगौरिका' — मंगला गौरी का शास्त्रीय प्रमाण (16वाँ अष्टादश पीठ)
  • श्री मङ्गला गौरी स्तोत्रम्स्तोत्रदेवी-उपासना परंपराइस मन्दिर हेतु'ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके' — श्रावण-मंगलवार व्रत-पाठ का प्रमुख स्तोत्र
  • श्री मङ्गला गौरी अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)नामावलीदेवी-उपासना परंपराइस मन्दिर हेतु'ॐ गौर्यै नमः', 'ॐ गणेशजनन्यै नमः', 'ॐ पार्वत्यै नमः' सहित 108 नाम
  • मङ्गला गौरी व्रत कथाव्रत-कथाउत्तर-भारत व्रत-परंपराइस मन्दिर हेतुधर्मपाल वणिक एवं 16-वर्षीय-आयु पुत्र की कथा; श्रावण-मंगलवार पर पाठ-पश्चात् 16 सुहागिन-स्त्रियों को भोजन एवं षोडशोपचार-दान
  • ललिता सहस्रनामस्तोत्रब्रह्माण्ड पुराण ललितोपाख्यानइस मन्दिर हेतुमंगला गौरी = त्रिपुर-सुन्दरी / ललिता-स्वरूप के रूप में पूज्य; सौभाग्य-भास्कर (भास्कर-राय) टीका शास्त्रीय आधार
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री विष्णुपद मंदिर1 किमी

विष्णु का पाद-चिह्न (गयासुर के वक्ष पर); 1787 ईस्वी अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्माण; ~30 मीटर पिरामिड-शिखर; गया का प्रमुख वैष्णव-तीर्थ

अक्षयवट (अमर वट-वृक्ष)1.1 किमी

पिण्ड-दान-यात्रा का अन्तिम-कर्म स्थल; इस वट के नीचे श्राद्ध-समापन

फल्गु नदी1 किमी

गया-क्षेत्र की पवित्र नदी; पिण्ड-तर्पण का केन्द्रीय जल-स्थल

ब्रह्मयोनि पहाड़ी (ब्रह्मजुनि / गयासिया)2 किमी

1,000 सीढ़ी चढ़ाई; गौतम बुद्ध ने यहाँ 'आदित्तपरियाय-सुत्त' (अग्नि-धर्म-देशना) प्रवचन दिया

रामशिला पहाड़ी4 किमी

गया की 3 पहाड़ियों में सम्मिलित; पिण्ड-दान-तीर्थ

प्रेतशिला पहाड़ी7 किमी

विशिष्ट प्रेत-शान्ति-तर्पण-स्थल; पितृ-पक्ष में महत्वपूर्ण

बोधगया महाबोधि मंदिर (UNESCO)12 किमी

बुद्ध की बोधि-प्राप्ति-स्थल; UNESCO विश्व-धरोहर; अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध-तीर्थ-केन्द्र

नालन्दा एवं राजगीर80 किमी

बौद्ध-सर्किट के प्रमुख गन्तव्य — नालन्दा महाविहार, राजगीर सात-पहाड़ियाँ

अष्टादश महा-शक्ति-पीठ यात्रा (आदि शंकराचार्य)

16वाँ पीठ — 'गया माङ्गल्यगौरिका'; पूर्व: ज्वालामुखी वैष्णवी (15); पश्चात्: वाराणसी विशालाक्षी (17)

18 मंदिर

गया पितृ-पक्ष पिण्ड-दान सर्किट

शाक्त-पूर्णता-तीर्थ — विष्णुपद → फल्गु तर्पण → अक्षयवट → प्रेतशिला → रामशिला → मंगला गौरी देवी-दर्शन (पिण्ड-दान-यात्रा का शाक्त-समापन)

6 मंदिर · 15 दिन

हिन्दू-बौद्ध संयुक्त गया-सर्किट (अन्तर्राष्ट्रीय यात्रियों हेतु)

महाबोधि (बोधगया) → विष्णुपद → मंगला गौरी — एक-दिवसीय हिन्दू-बौद्ध सर्किट; GAY अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रवेश

3 मंदिर · 1 दिन

बिहार बौद्ध-सर्किट विस्तृत

गया (विष्णुपद + मंगला गौरी) + बोधगया + राजगीर + नालन्दा — 3-दिवसीय सर्किट

5 मंदिर · 3 दिन

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री माँ मंगला गौरी शक्तिपीठ मंदिर, मंगला गौरी मंदिर रोड, मंगलागौरी पहाड़ी, गया — 823001, बिहार
हवाई अड्डा
गया अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (GAY) — ~8-9 किमी; अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध-सर्किट उड़ानें (बैंकॉक, पारो भूटान, यंगून, फ्नोम पेन्ह)
रेलवे
गया जंक्शन (GAYA) — ~4-5 किमी (गौतम बुद्ध मार्ग द्वारा)
बस-स्टैण्ड
गया बस स्टैंड — ~5-7 किमी; ऑटो, ई-रिक्शा एवं टैक्सी जंक्शन से उपलब्ध
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; श्रावण-मंगलवार (अगस्त 2026) मंगला गौरी व्रत हेतु पीक; पितृ-पक्ष मेला (26 सितंबर - 10 अक्टूबर 2026) सर्वाधिक भीड़; गर्मी (अप्रैल-जून) में दिन का तापमान 42°C+
1 किमीVishnupad Temple
5 किमीGaya Junction Railway
9 किमीGaya International Airport
12 किमीBodh Gaya
2 किमीBrahmayoni Hill
1 किमीPhalgu River
7 किमीPretshila Hill
80 किमीRajgir
90 किमीNalanda
100 किमीPatna
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