पद्म पुराण
मङ्गलागौरी-तीर्थ-वर्णन; गया-क्षेत्र की शाक्त-अधिष्ठात्री
Gaya · Bihar
श्री माँ मंगला गौरी शक्तिपीठ मंदिर — मंगलागौरी पहाड़ी, गया
मङ्गला गौरी — सर्व-मङ्गला देवी; पालनहार-पीठ की देवी
अन्य नाम: सर्वमङ्गला देवी · मंगला गौरी · मंगला गौरी शक्तिपीठ · पालनहार पीठ · गया-माङ्गल्य गौरिका

इस मन्दिर की विशेषता
श्री माँ मंगला गौरी — सती के स्तन-स्वरूप; पालन (पोषण) की देवी; अखण्ड-ज्योति-सहित गुफा-गर्भगृह में दो स्तन-प्रतीक पिण्डियों के रूप में पूज्य
गुफा-शैली गर्भगृह में दो गोल-शिलाएँ (पिण्डियाँ) — सती के स्तन-स्वरूप; अखण्ड-ज्योति निरन्तर प्रज्वलित; गर्भगृह में एक-साथ केवल ~4 श्रद्धालुओं की दर्शन-व्यवस्था
सम्प्रदाय: शाक्त (हिन्दू-धर्म) — मुख्यतः वैष्णव-तीर्थ गया-क्षेत्र में शाक्त-केन्द्र
मङ्गलागौरी-तीर्थ-वर्णन; गया-क्षेत्र की शाक्त-अधिष्ठात्री
गया-क्षेत्र को सर्वोच्च पिण्ड-दान तीर्थ; मङ्गलागौरी विष्णुपद के समानान्तर शाक्त-केन्द्र
गया-क्षेत्र के शाक्त-तीर्थों में सर्वमङ्गला-शिखर
गया-मङ्गलागौरी का शक्ति-पीठ-सूची में सम्मिलन
देवी माहात्म्यम् सहित — गया-मङ्गलागौरी की शाक्त-उपासना
आदि शंकराचार्य रचित — 4थे श्लोक: 'ज्वालायां वैष्णवीदेवी, गया माङ्गल्यगौरिका' — 16वाँ पीठ
06:00 से 20:00 तक
मंदिर खुलने से पूर्व; दिन की प्रथम आरती
सायं प्रमुख आरती
फोटोग्राफी: गर्भगृह के भीतर फोटोग्राफी निषिद्ध
मंगला गौरी देवी का दर्शन निःशुल्क; गुफा-गर्भगृह में एक-साथ ~4 श्रद्धालुओं की क्षमता; पंक्ति-व्यवस्था।
स्थानीय पण्डित द्वारा संपन्न; मंदिर-कार्यालय पर सीधे बात करें (आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली अनुपलब्ध)।
नव-विवाहित स्त्रियाँ 5-वर्षीय व्रत; षोडशोपचार-पूजन; 16-चूड़ी, 7-फल, 5-मिष्ठान्न समर्पण; मंगला गौरी व्रत कथा-पाठ; 16 सुहागिन-स्त्रियों को भोजन। 2026 — 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त, 25 अगस्त।
9-दिवसीय देवी-उपासना। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च (राम-नवमी पर पूर्णता)।
9-रात्रि महोत्सव; प्रतिदिन देवी-अलंकार। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; विजयदशमी — सोमवार 19 अक्टूबर (Drik Panchang)।
गया का सर्वोच्च वार्षिक तीर्थ-मेला; पिण्ड-दान-तर्पण-यात्री विष्णुपद-मंदिर के पश्चात् मंगला गौरी देवी-दर्शन हेतु आते हैं — शाक्त-वैष्णव संयुक्त-यात्रा। 2026 — शनिवार 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से शनिवार 10 अक्टूबर (सर्व-पितृ अमावस्या / महालय)।
देवी-प्रादुर्भाव दिवस; विशेष शोडशोपचार पूजन
गर्भगृह में निरन्तर प्रज्वलित अखण्ड-ज्योति का दर्शन
मंगला गौरी = सर्व-मङ्गला; नव-विवाहिता स्त्रियों के लिए 5-वर्षीय श्रावण-मंगलवार व्रत; अखण्ड-सौभाग्य-प्राप्ति
स्रोत: उत्तर-भारत मंगला गौरी व्रत-परंपरा (पुराण-आधारित)
मंगला गौरी व्रत कथा (धर्मपाल-वणिक एवं 16-वर्षीय-आयु पुत्र-कथा) के आधार पर पुत्र-आयु-वृद्धि एवं सन्तति-कामना
स्रोत: मंगला गौरी व्रत कथा
गया-क्षेत्र में पिण्ड-दान करने के पश्चात् मंगला गौरी देवी-दर्शन — शाक्त-वैष्णव संयुक्त पूर्णता
स्रोत: वायु पुराण गया-माहात्म्य
आदि शंकराचार्य-रचित स्तोत्रम् में 16वाँ पीठ — 'गया माङ्गल्यगौरिका'
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
देवी 'पालनहार' स्वरूपा — सती के स्तन-पीठ रूप में पोषण-शक्ति की देवी; परिवार-कल्याण हेतु संकल्प
स्रोत: स्थल-परंपरा
विष्णु का पाद-चिह्न (गयासुर के वक्ष पर); 1787 ईस्वी अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्माण; ~30 मीटर पिरामिड-शिखर; गया का प्रमुख वैष्णव-तीर्थ
पिण्ड-दान-यात्रा का अन्तिम-कर्म स्थल; इस वट के नीचे श्राद्ध-समापन
गया-क्षेत्र की पवित्र नदी; पिण्ड-तर्पण का केन्द्रीय जल-स्थल
1,000 सीढ़ी चढ़ाई; गौतम बुद्ध ने यहाँ 'आदित्तपरियाय-सुत्त' (अग्नि-धर्म-देशना) प्रवचन दिया
गया की 3 पहाड़ियों में सम्मिलित; पिण्ड-दान-तीर्थ
विशिष्ट प्रेत-शान्ति-तर्पण-स्थल; पितृ-पक्ष में महत्वपूर्ण
बुद्ध की बोधि-प्राप्ति-स्थल; UNESCO विश्व-धरोहर; अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध-तीर्थ-केन्द्र
बौद्ध-सर्किट के प्रमुख गन्तव्य — नालन्दा महाविहार, राजगीर सात-पहाड़ियाँ
16वाँ पीठ — 'गया माङ्गल्यगौरिका'; पूर्व: ज्वालामुखी वैष्णवी (15); पश्चात्: वाराणसी विशालाक्षी (17)
18 मंदिर
शाक्त-पूर्णता-तीर्थ — विष्णुपद → फल्गु तर्पण → अक्षयवट → प्रेतशिला → रामशिला → मंगला गौरी देवी-दर्शन (पिण्ड-दान-यात्रा का शाक्त-समापन)
6 मंदिर · 15 दिन
महाबोधि (बोधगया) → विष्णुपद → मंगला गौरी — एक-दिवसीय हिन्दू-बौद्ध सर्किट; GAY अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रवेश
3 मंदिर · 1 दिन
गया (विष्णुपद + मंगला गौरी) + बोधगया + राजगीर + नालन्दा — 3-दिवसीय सर्किट
5 मंदिर · 3 दिन