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Katra · Jammu and Kashmir

श्री माता वैष्णो देवी मंदिर

श्री माता वैष्णो देवी मंदिर (भवन)

वैष्णवी देवी / त्रिकुटा / शेरांवाली माता

अन्य नाम: माता रानी · त्रिकुटा माता · शेरांवाली · वैष्णवी · जय माता दी

  • प्रमुख देवी क्षेत्र
श्री माता वैष्णो देवी मंदिर
दर्शन समय
05:00 (मौसम एवं भीड़ के अनुसार) – 00:00 (मध्यरात्रि — आरती के बीच विश्राम)
स्वरूप
गर्भजून
स्थान
Katra · Jammu and Kashmir
उत्तम ऋतु
मार्च-अक्टूबर सर्वोत्तम
काल
त्रेतायुग की मान्यता

इस मन्दिर की विशेषता

  • प्रमुख देवी क्षेत्र (51 शक्ति-पीठ में नहीं, परन्तु शक्ति-उपासना का सर्वोच्च तीर्थ)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री माता वैष्णो देवी (आदि शक्ति का अंशावतार)

गर्भजून (Womb Cave) में तीन प्राकृतिक शिला-पिंडियाँ — दायीं ओर महाकाली, मध्य में महालक्ष्मी, बायीं ओर महासरस्वती — एक साथ देवी की त्रिशक्ति का प्रतीक। पारंपरिक मूल गुफा अत्यंत संकीर्ण है; भक्तों को रेंगकर निकलना पड़ता है — यह आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक मानी जाती है।

सम्प्रदाय: शाक्त (देवी उपासना)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

महाभारत

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को 'जम्बू पर्वत' पर मातृ देवी की प्रार्थना का परामर्श दिया (वर्तमान जम्मू से सम्बद्ध) — ऐतिहासिकतम संदर्भ

देवी माहात्म्य (मार्कण्डेय पुराण)

महादेवी के 108 नामों में 'वैष्णवी' का उल्लेख

वराह पुराण, मत्स्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण

वैष्णवी देवी का सर्व-प्रथम स्वरूप-वर्णन

देवी भागवत पुराण

शाक्त परंपरा का मूल ग्रन्थ — माता आदि शक्ति/चण्डी/दुर्गा के स्वरूप का विस्तार

स्थल-परंपरा एवं तंत्र-ग्रन्थ

भैरव-वैष्णवी कथा एवं त्रिकुटा पर्वत पर माता के तपोवास का स्थानीय परंपरागत वर्णन

संत एवं परम्परा

  • पंडित श्रीधर भारद्वाज — एक गरीब ब्राह्मण भक्त जिन्हें त्रेतायुग में माता ने एक दिव्य कन्या के रूप में दर्शन दिये एवं ग्रामीणों के लिये भोज (कन्या-पूजन) के आयोजन का निर्देश दिया। यह कथा कन्या-पूजन परंपरा का मूल आधार मानी जाती है।
  • भैरों नाथ — एक तांत्रिक जिसने माता का पीछा किया; अंततः त्रिकुटा पर्वत पर महाकाली ने उसका वध किया। मरते समय भैरों ने पश्चाताप के स्वरूप में वर माँगा कि माता का दर्शन उसके मंदिर के दर्शन बिना अधूरा माना जायेगा — आज भी यह परंपरा।
  • ऋषि गिरिराज — मार्कण्डेय पुराण-संबद्ध परंपरा अनुसार माता ने इन्हें दर्शन देकर मंदिर के अनुष्ठान विधि-विधान बताये

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. -1त्रेतायुग — त्रिनिता देवियों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) ने अपनी शक्ति मिलाकर वैष्णवी देवी का निर्माण किया; भगवान विष्णु से वर माँगकर कलियुग तक तपस्या में रहींस्थल-परंपरा + पुराण-संदर्भ
  2. -1कलियुग प्रारम्भ — पंडित श्रीधर को दर्शन; भैरों नाथ का पीछा; गर्भजून में 9 मास तपस्या; अंततः त्रिकुटा पर्वत की पवित्र गुफा में तीन पिंडियों के रूप में स्थापितस्थल-परंपरा
  3. 1846महाराजा गुलाब सिंह (डोगरा वंश) के जम्मू-कश्मीर राज्य में मंदिर शामिल हुआ; मंदिर की देखरेख स्थानीय बारीदारों (वंशानुगत पुजारियों) के हाथ में रहीऐतिहासिक परंपरा
  4. 198630 अगस्त 1986 — तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने मंदिर का नियंत्रण बारीदारों से लेकर सरकारी ट्रस्ट हस्तांतरण की प्रक्रिया आरम्भ की ('भौतिक एवं नैतिक भ्रष्टाचार' को समाप्त करने हेतु)विकिपीडिया
  5. 1988जम्मू-कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन अधिनियम 1988 — राज्य विधानमण्डल द्वारा पारित, 30 अगस्त 1986 से पूर्व-प्रभाव से लागू; SMVDSB का गठनविकिपीडिया
  6. 20122012 — सर्वकालिक उच्चतम वार्षिक तीर्थयात्री संख्या: 1.04 करोड़विकिपीडिया + DD News
  7. 2018मई 2018 — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तारकोट मार्ग का उद्घाटन किया — 7 किमी टाइल्ड पाथ-वे, बाणगंगा के निकट से प्रारम्भ होकर अध्कुवारी के पास पुरानी ट्रेक से जुड़ता है। पोनी/पालकी निषिद्ध; RO जल बूथ प्रत्येक 400-500 मी; स्वच्छ शौचालय; अधिक सौम्य ढाल — परिवारों एवं वरिष्ठ नागरिकों हेतु उत्तम विकल्प।Kumbh.co.in + Easeindiatrip
  8. 20221 जनवरी 2022 — नववर्ष के अवसर पर भवन के गेट नं॰ 3 के निकट प्रातः 2:30-2:45 बजे भगदड़; 12 श्रद्धालुओं की मृत्यु, 16 घायल। प्रारम्भिक कारण: एक छोटे विवाद के बाद भीड़-संकट। उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा द्वारा आदेशित 3-सदस्यीय उच्च-स्तरीय जाँच समिति: प्रधान सचिव (गृह) श्री शालीन कबरा (अध्यक्ष), जम्मू संभागीय आयुक्त श्री राजीव लंगर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री मुकेश सिंह। PM राहत कोष से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख, घायलों को ₹50,000 अनुग्रह राशि। समिति के क्रियान्वित सुझाव: 700+ CCTV कैमरों का नेटवर्क, RFID-आधारित यात्रा कार्ड, बीट-सिस्टम, आरती की अवधि में कटौती, आपदा-प्रबंधन कार्यबल एवं अग्नि-सुरक्षा सुदृढ़ीकरण।विकिपीडिया + India TV + The Week + Onmanorama + Greater Kashmir
  9. 202311 अक्टूबर 2023 — राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने ₹15.5 करोड़ की लागत से निर्मित 250-मीटर लम्बा, 2.5-मीटर चौड़ा स्काईवॉक (Yatri Queue Management System) उद्घाटित किया। साथ ही ₹15 करोड़ का पुनः निर्मित पार्वती भवन — 1,500 लॉकर, दैनिक 10,000-15,000 भक्तों की क्षमता। LG श्री मनोज सिन्हा की प्रस्तावित परियोजना।Curly Tales + The Kashmir Images + Daily Excelsior + ANI
  10. 2024जून 2024 — Jammu से Katra (एवं तत्पश्चात् Sanjichhat) तक नियमित हेलीकॉप्टर सेवा — पवन हंस + Himalayan Heli + Global Vectra ऑपरेटर्स; पैकेज ₹35,000-₹60,000विकिपीडिया SMVDSB
  11. 20227 मई 2022 — IAS श्री अंशुल गर्ग (AGMUT 2013 बैच) ने SMVDSB के CEO का पदभार ग्रहण किया (पूर्ववर्ती श्री रमेश कुमार के स्थान पर)। 2017-18 में अतिरिक्त CEO थे।The Print + Daily Excelsior + Indian Bureaucracy
  12. 20242024 — कुल 94.83 लाख तीर्थयात्री (पिछले एक दशक में दूसरी सर्वोच्च संख्या); लगातार तीसरा वर्ष 90+ लाख। CEO श्री अंशुल गर्ग की पुष्टि।DD News + India TV + Business Standard
  13. 2025जुलाई 2025 — श्री अंशुल गर्ग की LBSNAA मसूरी प्रशिक्षण के लिए डेपुटेशन; DC जम्मू श्री सचिन वैश्य को CEO का अतिरिक्त प्रभार।JK News Today
  14. 20252025 — सुरक्षा-संबंधी घटनाओं एवं प्राकृतिक आपदाओं (बादल फटना/भूस्खलन) के कारण फुटफॉल में गिरावट; 28 दिसम्बर 2025 तक केवल 68.85 लाखKashmir Observer + Kashmir Vision
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:00 (मौसम एवं भीड़ के अनुसार) से 00:00 (मध्यरात्रि — आरती के बीच विश्राम) तक · मध्याह्न विश्राम आरती के समय गर्भजून बन्द — दिन में दो आरती-कालीन विराम (प्रात: एवं सायं)

प्रातःकालीन अटका आरती06:20-08:00 (वर्ष-भर समान; अवधि 1.5-2 घंटे)
दैनिकशुल्क ₹2000बुकिंग आवश्यक

मुख्य गर्भजून आरती; दुर्गा भवन रिसेप्शन में रिपोर्टिंग 05:50 (आरती से 30 मिनट पूर्व); केवल 100 टिकट प्रति सत्र

सायंकालीन अटका आरती (ग्रीष्म)19:20-20:30 (अप्रैल-सितंबर)
दैनिकशुल्क ₹2000बुकिंग आवश्यक

रिपोर्टिंग 18:50; 100 टिकट प्रति सत्र

सायंकालीन अटका आरती (शीत)18:20-20:00 (अक्टूबर-मार्च)
दैनिकशुल्क ₹2000बुकिंग आवश्यक

रिपोर्टिंग 17:50; 100 टिकट प्रति सत्र

वस्त्र-संहिता: साधारण-शालीन, सर्दियों में गर्म वस्त्र अनिवार्य (Sanjichhat-Bhawan पर तापमान शून्य तक); चमड़े की वस्तुएँ निषिद्ध

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य पैदल यात्रा दर्शन (निःशुल्क)निःशुल्क
उपयुक्त
सभी भक्त — मूल पारंपरिक पद्धति

कटरा से 13-14 किमी पैदल यात्रा — बाणगंगा → चरण पादुका → अध्कुवारी (गर्भजून) → हिमकोटी → सञ्जिछत → भवन; 5-7 घंटे का ट्रेक। यात्रा पर्ची (Yatra Parchi) अनिवार्य — ऑनलाइन या Katra काउंटर पर निःशुल्क।

अध्कुवारी ↔ भवन — बैटरी कार₹450
समय
07:30-22:00 (नियमित अंतराल पर)
उपयुक्त
वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, चिकित्सा-समस्या वाले भक्त

अध्कुवारी → भवन: ₹450 (GST सहित); भवन → अध्कुवारी (वापसी): ₹300। ऑनलाइन बुकिंग SMVDSB साइट से; मासिक स्लॉट 1 तारीख प्रातः 10 बजे खुलते हैं।

पैदल यात्रा — पालकी / घोड़ा / पिठ्ठू सेवा
उपयुक्त
जो पैदल यात्रा करना चाहते हैं परन्तु सहायता आवश्यक

केवल आधिकारिक SMVDSB काउंटर पर ऑफ़लाइन बुकिंग — Katra में। दरें (2026): पालकी (एक तरफा) ₹2,100-₹2,500; घोड़ा/टट्टू ₹700-₹900; पिठ्ठू (पोर्टर) ₹700-₹1,000

हेलीकॉप्टर सेवा (Katra ↔ Sanjichhat)₹2320
उपयुक्त
समय एवं शारीरिक सीमा वाले भक्त

Katra हेलीपैड (Udhampur Road, बस स्टैंड से 2 किमी) से Sanjichhat तक 8-मिनट उड़ान; Sanjichhat से Bhawan 2.5 किमी पैदल/बैटरी कार। हर 20 मिनट; प्रातः 8 बजे से सायं 5 बजे (मौसम सापेक्ष)। Round-trip ₹4,640।

हेलीकॉप्टर सेवा (Jammu ↔ Katra) — पवन हंस₹8880
उपयुक्त
Jammu से सीधे Katra पहुँचने हेतु

Jammu Airport/शहर से Katra तक — एक तरफा ₹8,880; round-trip ₹16,500

भवन ↔ भैरों मंदिर रोपवे
उपयुक्त
भैरों नाथ दर्शन हेतु — परंपरानुसार अनिवार्य

Bi-cable Jig-back प्रणाली; 2 बंद कैबिन प्रति 40-45 व्यक्ति; 800 भक्त/घंटा क्षमता; 3-5 मिनट में 2.5 किमी की कठिन चढ़ाई पूरी

05
अनुष्ठान

विशेष पूजा एवं सेवा

  • अटका आरती VIP पास (सीमित)

    गर्भजून के सम्मुख विशेष स्थान — सीमित संख्या में पास

  • विशेष पूजा (अनुष्ठान-विशेष)

    SMVDSB काउंटर के माध्यम से बुकिंग

06
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

चैत्र नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (मार्च-अप्रैल)

9-दिवसीय पर्व — पुरानी गुफा (Original Cave) इन दिनों में दर्शन के लिये खुलती है; देवी के नौ रूपों का दैनिक पूजन; पंडित श्रीधर परंपरा का स्मरण कर कन्या-पूजन। दैनिक भक्त-संख्या में कई गुना वृद्धि।

शारदीय नवरात्रिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (सितंबर-अक्टूबर)

दूसरी प्रमुख वार्षिक नवरात्रि — महिषासुर-मर्दिनी रूप की उपासना; पुरानी गुफा खुलती है; अष्टमी एवं नवमी पर सर्वाधिक भीड़

दीपावली

विशेष श्रृंगार एवं दीप-सज्जा; पारंपरिक रूप से भीड़ अधिक

नववर्ष (1 जनवरी)

नववर्ष के पहले दर्शन हेतु अत्यंत भीड़। 2022 की भगदड़ के बाद SMVDSB ने RFID-आधारित यात्रा पर्ची, स्काईवॉक, अलग प्रवेश-निकास, संख्या-सीमा एवं वास्तविक-समय भीड़ निगरानी जैसे सुरक्षा-उपाय लागू किये।

भीड़: पीक भीड़; पूर्व-बुकिंग अनिवार्य; भीड़-नियंत्रण व्यवस्था सख्त

होली

विशेष शृंगार; कटरा-नगर में रंगों का उत्सव

07
आस्था

मनोकामना एवं फल

मनोवांछित कामना-पूर्ति एवं संतान-सुख

मान्यता: सच्चे मन से माता का स्मरण कर 13-14 किमी पैदल यात्रा करने से माता प्रत्यक्ष बुलाती हैं; कोई भी भक्त बिना माता के बुलावे (sade) यहाँ नहीं पहुँचता। ऐतिहासिक रूप से विवाह, संतान, रोग-मुक्ति, धन-समृद्धि की 'मन्नतें' सर्वाधिक

स्रोत: स्थल-परंपरा; देवी भागवत पुराण के देवी-स्वरूप-वर्णन का विस्तार

रक्षा एवं शत्रु-निवारण

महाकाली रूप में देवी की उपासना से शत्रु-नाश एवं रक्षा

स्रोत: देवी-कवचम् + दुर्गा सप्तशती

आध्यात्मिक पुनर्जन्म

गर्भजून (Womb Cave) में रेंगकर प्रवेश करना — माता के गर्भ से पुनः जन्म लेने का प्रतीक; पाप-निवारण

स्रोत: स्थल-परंपरा

08
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्री वैष्णो माता आरती — 'जय वैष्णवी माता'आरतीस्थल-परंपरा; प्रारम्भिक पंक्ति: 'जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता।' — दैनिक प्रातः एवं सायं गर्भजून आरती मेंइस मन्दिर हेतुमंदिर में दैनिक 2 बार पाठ; भक्तों द्वारा घर पर भी
  • दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य)स्तोत्र-ग्रन्थमार्कण्डेय पुराण, अध्याय 81-93 — 700 श्लोकनवरात्रि में पाठ; देवी के 108 नामों में 'वैष्णवी' सम्मिलित
  • दुर्गा-सूक्तम् / देवी-कवचम्स्तोत्रऋग्वेद + मार्कण्डेय पुराणदेवी-कवच के रूप में रक्षा-मंत्र
  • 'जय माता दी' — मातृ-जयघोषजयघोषस्थल-परंपरा — पैदल यात्रा में सतत जयघोषइस मन्दिर हेतु13 किमी यात्रा का प्राण; एक भक्त की पुकार पर सम्पूर्ण समूह 'जय माता दी' दोहराता है
09
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री भैरों नाथ मंदिर (Bhairon Ghati)2.5 किमी

परंपरानुसार वैष्णो देवी दर्शन भैरों मंदिर के दर्शन बिना अधूरा माना जाता है — स्वयं माता द्वारा दिया गया वर। भवन से 2.5 किमी कठिन चढ़ाई या Bhawan-Bhairo रोपवे (3-5 मिनट) द्वारा।

अध्कुवारी (गर्भजून / Womb Cave) मंदिर6 किमी

वह मूल गुफा जिसमें वैष्णवी देवी ने 9 मास तक तपस्या की; भक्त रेंगकर प्रवेश करते हैं — आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक। बाणगंगा से ~6 किमी; पारंपरिक यात्रा का मध्य-बिंदु।

चरण पादुका11 किमी

मान्यता: माता वैष्णवी ने भागते समय यहाँ क्षण-भर रुककर भैरों की दिशा में दृष्टि डाली; उनकी चरण-पादुकाओं की छाप शिला पर अंकित है

बाणगंगा / Banganga12.5 किमी

मान्यता: माता ने हनुमान की प्यास बुझाने हेतु तीर मारकर भूमि से गंगा प्रकट की ('बाण' + 'गंगा')। 'बल' = केश; देवी ने यहाँ अपने केश धोये भी। चेनाब की सहायक नदी। यात्रा से पूर्व स्नान का पारंपरिक नियम।

हिमकोटी विश्राम-स्थल9.5 किमी

पैदल यात्रा का दृश्यात्मक मनोरम बिन्दु; हिमालय-दर्शन; विश्राम सुविधा

सञ्जिछत हेलीपैड (Sanjichhat)2.5 किमी

हेलीकॉप्टर सेवा का ऊपरी अन्तिम स्टेशन; भवन तक 2.5 किमी पैदल/बैटरी कार

अर्धकुंवारी से पुरानी गुफा (Original Cave) — केवल विशेष काल में खुलती है6 किमी

गर्भजून की मूल पुरानी संकीर्ण गुफा — केवल नवरात्रि एवं विशेष पर्वों पर रेंगकर प्रवेश हेतु खुलती है। शेष समय भक्त नई गुफा (1977 में खोली गयी अधिक चौड़ी गुफा) से दर्शन करते हैं।

वैष्णो देवी यात्रा (बाणगंगा → भवन → भैरों मंदिर)

मुख्य लक्ष्य — गर्भजून में त्रिशक्ति-पिंडी दर्शन। यात्रा भैरों मंदिर पर ही पूर्ण मानी जाती है।

1 दिन

जम्मू-कश्मीर देवी क्षेत्र-त्रयी (वैष्णो देवी + खीर भवानी + कैंची देवी)

त्रयी की प्रमुख-तम देवी स्थली

उत्तर भारत देवी 4-स्थल यात्रा (वैष्णो देवी + ज्वालामुखी + चिंतपूर्णी + नैना देवी)

सर्वाधिक तीर्थयात्रित स्थली

10
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, कटरा, रियासी जिला, जम्मू-कश्मीर — PIN 182301
हवाई अड्डा
जम्मू हवाई अड्डा (IXJ) — कटरा से 50 किमी; Jammu→Katra Pawan Hans हेलीकॉप्टर एक तरफा ₹8,880, round-trip ₹16,500
रेलवे
श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन (SVDK) — Bhawan ट्रेक के आरम्भ बाणगंगा से ~1.5 किमी
उत्तम ऋतु
मार्च-अक्टूबर सर्वोत्तम; नवम्बर-फरवरी सर्दी एवं हिमपात — गर्म वस्त्र अनिवार्य
हेल्पलाइन
+91 9906019494 (हेल्पडेस्क), टोल-फ़्री: 1800-180-7212
50 किमीJammu
650 किमीDelhi
270 किमीAmritsar
245 किमीSrinagar
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