तिरुविलैयाडल पुराणम् (तमिल)
परंजोति मुनिवर रचित — 64 शिव-लीलाओं का संकलन; मीनाक्षी-सुन्दरेश्वर विवाह कथा का विस्तृत वर्णन
Madurai · Tamil Nadu
मीनाक्षी सुन्दरेश्वर — मत्स्य-नयन देवी एवं सुन्दर-शिव
अन्य नाम: मीनाक्षी अम्मन · मीनाक्षी-सुन्दरेश्वरर · मधुरै-मीनाक्षी · अंगायरकन्नि अम्मन

इस मन्दिर की विशेषता
श्री मीनाक्षी देवी (पार्वती — मत्स्य-नयन वाली देवी, पाण्ड्य राजकुमारी-स्वरूप) एवं श्री सुन्दरेश्वर (शिव — सुन्दर-स्वरूप, मीनाक्षी के पति)
मीनाक्षी देवी का हरे रंग का विग्रह (मरकत-वर्ण); सुन्दरेश्वर का शिवलिंग। यमक-मंदिर — दो प्रमुख गर्भगृह।
सम्प्रदाय: शैव-शाक्त संयुक्त (दक्षिण भारत की द्रविड़ शैव-शाक्त परंपरा का प्रमुख केन्द्र)
परंजोति मुनिवर रचित — 64 शिव-लीलाओं का संकलन; मीनाक्षी-सुन्दरेश्वर विवाह कथा का विस्तृत वर्णन
मधुरै-माहात्म्य; पाण्ड्य राजवंश एवं मीनाक्षी-कथा का संदर्भ
नायन्मार सन्तों के तमिल-शैव स्तोत्र — मधुरै-सुन्दरेश्वर स्तुति
मधुरै के मूल नाम 'हलासय क्षेत्र' का माहात्म्य
05:00 से 22:00 तक · मध्याह्न विश्राम 12:30-16:00 (मध्याह्न विश्राम)
दिन का प्रथम जागरण-अनुष्ठान
सायं प्रमुख आरती
मीनाक्षी-सुन्दरेश्वर के शयन-कक्ष में अद्वितीय रात्रि-अनुष्ठान — सुन्दरेश्वर के विग्रह को पालकी में मीनाक्षी के शयन-कक्ष तक ले जाया जाता है; अवश्य-दर्शनीय
मीनाक्षी एवं सुन्दरेश्वर दोनों गर्भगृहों का निःशुल्क दर्शन।
विशेष टिकट से शीघ्र-दर्शन; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें। ऑनलाइन बुकिंग आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध।
अभिषेकम्, अर्चना, थिरुकल्याणम् पूजा आदि की ऑनलाइन बुकिंग। QR-कोड युक्त ई-टिकट ईमेल/SMS द्वारा प्राप्त।
मधुरै का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव — 12 दिनों का दिव्य विवाह उत्सव। मुख्य आकर्षण: 'मीनाक्षी तिरुकल्याणम्' — मीनाक्षी एवं सुन्दरेश्वर का दिव्य विवाह; भव्य रथ-यात्रा। दर्शन-समय 04:00-24:00 तक विस्तारित। 2026 — 19-30 अप्रैल; तिरुकल्याणम् 28 अप्रैल मंगलवार। 30 अप्रैल-6 मई: कल्लाझगर उत्सव (विष्णु अलगर पेरुमाल का जलाझाडी प्रवेश)।
मीनाक्षी देवी की 9-रात्रि विशेष शाक्त-पूजा; प्रति-रात्रि अलंकार
मीनाक्षी का राज्याभिषेक एवं तिरुमलै नायक का जन्म-दिन उत्सव
मुरुगन (कार्तिकेय) उत्सव; मीनाक्षी मंदिर परिसर के मुरुगन शिखर-दर्शन
सुन्दरेश्वर का विशेष शिव-अभिषेक; रात्रि-जागरण। 2026 — 15 फरवरी रविवार।
मीनाक्षी-सुन्दरेश्वर युगल — आदर्श दाम्पत्य का प्रतीक; अविवाहितों के लिए सुयोग्य वर/वधू-प्राप्ति, विवाहितों के लिए दाम्पत्य-सामंजस्य; तिरुकल्याणम् दर्शन से विशेष फल
स्रोत: तिरुविलैयाडल पुराणम् + स्थल-परंपरा
मीनाक्षी देवी — स्त्री-योद्धा एवं भारत-विजय सम्राज्ञी; नेतृत्व एवं साहस की अधिष्ठात्री; स्त्री-शक्ति का तमिल-परंपरागत प्रतीक
स्रोत: तिरुविलैयाडल पुराणम् + तमिल-संगम साहित्य
मधुरै शिव-तांडव के पञ्च-सभा क्षेत्रों में 'रजत-सभा' स्थल (अन्य 4: चिदम्बरम् कनक-सभा, कुट्रालम् चित्र-सभा, तिरुनेल्वेली ताम्र-सभा, तिरुवालंगाडु रत्न-सभा)
स्रोत: तमिल शैव-परंपरा
तमिल शैव-परंपरा के 108 शिव-दिव्य-क्षेत्रों में मधुरै-सुन्दरेश्वर अग्रणी; नायन्मार-स्तुत क्षेत्र
स्रोत: थेवारम् + तेव-आरम् परंपरा
मंदिर की मुख्य पुष्करिणी — 50m × 37m (165ft × 120ft); मध्य में स्वर्ण-मण्डित कमल-विग्रह; स्तम्भयुक्त परिक्रमा-पथ पर देवता-गाथाओं की मूर्तियाँ। मीनाक्षी-दर्शन से पूर्व पवित्र स्नान-स्थल।
वस्तुतः 985 स्तम्भ; प्रत्येक पर याली (सिंह-हाथी संकर), देवता, अप्सरा की विस्तृत मूर्तिकला; स्तम्भों को थपथपाने पर संगीतमय स्वर — रहस्य अनसुलझा। अब मंदिर-संग्रहालय भी।
1636 में तिरुमलै नायक द्वारा निर्मित द्रविड़-इस्लामिक संमिश्र शैली का राजमहल; भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित। शाम 6:45 बजे प्रकाश-ध्वनि-शो।
तिरुमलै नायक द्वारा निर्मित नवीन-मण्डप; अब वस्त्र एवं हस्त-शिल्प बाज़ार; स्थानीय व्यंजन। मंदिर-दर्शन के पश्चात् अनिवार्य।
श्री कल्लाझगर पेरुमाल (विष्णु — मीनाक्षी के भाई के रूप) का प्राचीन मंदिर। चित्तिरै-उत्सव में अलगर के मधुरै-आगमन (वैगै नदी पार) का प्रमुख समारोह।
6 अरुपडैवीडु (मुरुगन-कार्तिकेय के 6 निवास-स्थलों) में प्रथम; मधुरै दर्शन के साथ अनिवार्य
महात्मा गांधी का स्मारक एवं संग्रहालय; मधुरै-दर्शन का गैर-धार्मिक अनिवार्य भाग
दक्षिण के 4 प्रमुख शिव-धामों में अग्रणी; पञ्च-सभा क्षेत्रों के मध्य रजत-सभा-स्थल
4 मंदिर
मधुरै-सुन्दरेश्वर 108 शिव-दिव्य-क्षेत्रों में अग्रणी; नायन्मार थिरुज्ञानसम्बन्दर एवं अप्पर थेवारम्-स्तुत
108 मंदिर
केन्द्रीय; 2-दिवसीय पूर्ण मधुरै यात्रा-योजना
तिरुपरंकुन्द्रम् (मधुरै) अरुपडैवीडु का प्रथम-स्थल; मीनाक्षी दर्शन के साथ संयुक्त
6 मंदिर
रामेश्वरम् (174 किमी) से संयुक्त यात्रा-पथ