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Kollur · Karnataka

श्री मूकाम्बिका देवी मन्दिर

श्री मूकाम्बिका देवी मन्दिर — कोल्लूर, ज़िला उडुपी, कर्नाटक

श्री मूकाम्बिका (= मूक-असुर-संहारिणी देवी); हरिहर-समन्वय स्वयम्भू-ज्योतिर्लिङ्ग पर आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित श्री-चक्र + पञ्च-लोह देवी-मूर्ति का त्रिप्रतिष्ठा-स्वरूप; सुवर्ण-रेखा-विभक्त लिङ्ग (वाम-भाग त्रिदेवी काली-लक्ष्मी-सरस्वती + दक्ष-भाग त्रिमूर्ति शिव-विष्णु-ब्रह्मा); परशुराम-क्षेत्र की सप्त-मुक्ति-स्थलों में सम्मिलित

अन्य नाम: कोल्लूर मूकाम्बिका · मूकाम्बिका देवी · आदि-पराशक्ति मूकाम्बिका

  • परशुराम-क्षेत्र की सप्त-मुक्ति-स्थ…
  • आदि शङ्कराचार्य के प्रमुख देवी-प्र…
  • श्री-विद्या
  • सुवर्ण-रेखा-विभक्त स्वयम्भू-लिङ्ग…
श्री मूकाम्बिका देवी मन्दिर
दर्शन समय
05:00 – 21:00 (कषाय मङ्गलारती-समाप्ति)
स्वरूप
स्वयम्भू-लिङ्ग सुवर्ण-रेखा-विभक्त त्रि-प…
स्थान
Kollur · Karnataka
उत्तम ऋतु
नवरात्रि
काल
अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • परशुराम-क्षेत्र की सप्त-मुक्ति-स्थलों में सम्मिलित (कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर)
  • आदि शङ्कराचार्य के प्रमुख देवी-प्रतिष्ठा-तीर्थों में सम्मिलित (शृङ्गेरी शारदा एवं काञ्ची काम-कोटि-पीठ के सङ्ग)
  • श्री-विद्या / श्री-चक्र-उपासना का दक्षिण-भारत का प्रमुख-केन्द्र; शिव-शक्ति-त्रिप्रतिष्ठा (लिङ्ग + श्री-चक्र + देवी-मूर्ति) अद्वितीय-काल्पनिक-शास्त्रीय-स्वरूप जो अन्य प्रमुख देवी-तीर्थों (काञ्ची-कामाक्षी, मदुरै-मीनाक्षी) से भिन्न
  • सुवर्ण-रेखा-विभक्त स्वयम्भू-लिङ्ग = अद्वितीय-शास्त्रीय-स्वरूप (वाम-भाग त्रिदेवी + दक्ष-भाग त्रिमूर्ति); विश्व का प्रमुख हरि-हर + त्रिदेवी-त्रिमूर्ति-समन्वय-तीर्थ
  • वर्ष-पर्यन्त दैनिक चण्डिका-होम (~7 पुजारी 700-दुर्गा-सप्तशती-श्लोक-700 पायसम्-अग्नि-अर्पण)
  • विद्यारम्भम् / अक्षराभ्यासम् भारत के प्रमुख-तीर्थों में सम्मिलित — विशेष-रूप मलयाली-श्रद्धालुओं-हेतु; विजय-दशमी-शिखर-दिन
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री मूकाम्बिका देवी — चतुर्भुजा पद्मासन-स्थित; ऊर्ध्व-हस्तों में शङ्ख + चक्र; अधो-हस्तों में अभय + वरद (अभीष्ट) मुद्रा; आदि-पराशक्ति का त्रिदेवी-स्वरूप (काली + लक्ष्मी + सरस्वती); पञ्च-लोह-निर्मित देवी-मूर्ति श्री-चक्र-पीठ पर स्वयम्भू-लिङ्ग के पीछे आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित; मुख्य-गर्भगृह-मूर्ति = स्वयम्भू-लिङ्ग सुवर्ण-रेखा-विभक्त

स्वयम्भू-लिङ्ग सुवर्ण-रेखा-विभक्त त्रि-प्रतिष्ठा: (1) स्वयम्भू-लिङ्ग (शिव-शक्ति-समन्वय; वाम-भाग त्रिदेवी काली-लक्ष्मी-सरस्वती + दक्ष-भाग त्रिमूर्ति शिव-विष्णु-ब्रह्मा); (2) श्री-चक्र-पीठ आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित; (3) पञ्च-लोह देवी-मूर्ति श्री-चक्र पर; उप-देवता: शङ्करा-सिंहासन (शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थान, गर्भगृह-पश्चिम); सरस्वती-मण्डप (विद्यारम्भम्-स्थल); प्राङ्गण-गणपति, सुब्रह्मण्य, वीरभद्र, चन्द्रमौलीश्वर, पञ्च-मुख-गणपति, आञ्जनेय, नागराज

सम्प्रदाय: शैव-शाक्त-समन्वय (हरिहर + त्रिदेवी एकीकरण); श्री-विद्या / श्री-चक्र उपासना-परम्परा (आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित); परशुराम-क्षेत्र; आध्यात्मिक-मार्गदर्शन शृङ्गेरी शारदा पीठम् से (उत्तराधिकारी-पुजारी जगद्गुरु-आशीर्वाद-हेतु शृङ्गेरी-यात्रा करते हैं); प्रशासनिक-संचालन कर्नाटक मुज़राई (राज्य-सरकार-धार्मिक एवं चैरिटेबल एण्डाउमेण्ट्स विभाग, कर्नाटक HR&CE अधिनियम 2011-अधीन)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

मूक-असुर-संहार कथा

कोल-महर्षि कोल्लूर-क्षेत्र-तपस्या-काल भगवान शिव-वर-प्राप्ति-हेतु तपस्या-रत असुर (विभिन्न-स्रोतों में मूक/कम्ह/कमासुर) ऋषि-व्यवधान-कर्ता बना। वर-प्राप्ति-पूर्व आदि-पराशक्ति ने असुर को मूक (वाक्-शून्य) कर दिया जिससे वह वर-याचना नहीं कर सका; तत्पश्चात् देवी ने असुर का संहार किया — इसी-कारण देवी 'मूकाम्बिका' (मूक-असुर-संहारिणी) नाम-धारी हुईं; क्षेत्र 'कोल्लूर' (कोल-ऋषि-नगर = कोल + ऊर) नाम-धारी हुआ।

आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठा कथा (मध्वीय शङ्कर-विजयम् पारम्परिक-कथन)

8वीं-शताब्दी आदि शङ्कराचार्य ने दिग्विजय-यात्रा-काल कोल्लूर-कोडचाद्रि-शिखर पर तपस्या की; देवी-दर्शन-पश्चात् विश्वकर्मा से पञ्च-लोह-देवी-मूर्ति-निर्माण-कराकर स्वयम्भू-लिङ्ग-पीछे श्री-चक्र-पीठ पर मूर्ति-प्रतिष्ठा की। गर्भगृह-पश्चिम 'शङ्करा-सिंहासन' तपस्या-स्थान आज भी पूज्य; कोडचाद्रि-शिखर 'सर्वज्ञ-पीठ' पाषाण-संरचना + चित्र-मूल-गुफा शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थल। पारम्परिक-कथा: देवी ने शङ्कराचार्य-केरल-गमन-काल पीछे-चलने-वचन-कारण पीछे-नहीं-मुड़ने-शर्त रखी; शङ्कराचार्य ने कोल्लूर-स्थान पर पीछे-मुड़ कर देखा तो देवी वहीं ठहर गईं।

सुवर्ण-रेखा-विभक्त स्वयम्भू-लिङ्ग का शास्त्रीय-स्वरूप

गर्भगृह-केन्द्र स्वयम्भू-लिङ्ग एक स्वर्ण-रेखा से दो भागों में विभक्त: वाम-भाग = त्रिदेवी (काली + लक्ष्मी + सरस्वती); दक्ष-भाग = त्रिमूर्ति (शिव + विष्णु + ब्रह्मा) — विश्व का प्रमुख हरि-हर + त्रिदेवी-त्रिमूर्ति-समन्वय-शास्त्रीय-स्वरूप।

सौपर्णिका-नदी कथा

गरुड़ (= सुपर्ण) ने सौपर्णिका-नदी-तट पर तपस्या की; अतः नदी 'सौपर्णिका' नाम-धारी हुई। पश्चिम-घाट-वन-मार्ग पर 64 औषधीय-वनस्पतियों के सङ्ग-सङ्ग प्रवाहित-कारण सौपर्णिका-स्नान पारम्परिक-रूप रोग-निवारक मान्य; देवी-दर्शन-पूर्व सौपर्णिका-स्नान अनिवार्य।

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल वर्गीकरण

भगवान परशुराम-क्षेत्र की सप्त-मुक्ति-स्थल (कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर) — मूकाम्बिका सप्त-स्थलों में देवी-स्थान।

संत एवं परम्परा

  • कोल-महर्षि — क्षेत्र-तपस्वी; क्षेत्र-नाम-दाता (कोल्लूर = कोल + ऊर)
  • आदि शङ्कराचार्य — श्री-चक्र + पञ्च-लोह देवी-मूर्ति-प्रतिष्ठा 8वीं-शताब्दी; गर्भगृह-पश्चिम 'शङ्करा-सिंहासन' + कोडचाद्रि-शिखर 'सर्वज्ञ-पीठ' + चित्र-मूल-गुफा-तपस्या-स्थल
  • गरुड़ (= सुपर्ण) — सौपर्णिका-नदी-तट-तपस्वी; नदी-नाम-दाता
  • मूल-मूकाम्बिका — कोडचाद्रि-शिखर-स्थित प्राचीन-शाला; पारम्परिक-कथा-अनुसार शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठा-पूर्व देवी का मूल-स्थान
  • विश्वकर्मा — आदि शङ्कराचार्य-निर्देशन-अधीन पञ्च-लोह देवी-मूर्ति-निर्माता
  • शृङ्गेरी शारदा पीठम् — आध्यात्मिक-मार्गदर्शन-स्रोत; उत्तराधिकारी-पुजारी जगद्गुरु-आशीर्वाद-हेतु शृङ्गेरी-यात्रा करते हैं (परम्परा; औपचारिक-प्रशासनिक-शाखा नहीं)
  • कर्नाटक मुज़राई (HR&CE विभाग, राज्य-सरकार) — आधुनिक-प्रशासन कर्नाटक HR&CE अधिनियम 2011-अधीन; मन्दिर-कोड TM000062; प्रबन्ध-समिति + अध्यक्ष + राज्य-नियुक्त कार्यकारी-अधिकारी (EO)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. अति-प्राचीन-स्थापना (कोल-महर्षि-तपस्या-काल); स्वयम्भू-लिङ्ग पूर्व-शङ्कर-कालWikipedia + Sringeri Math + Kollur Mookambika Official बहु-स्रोत
  2. 8वीं-शताब्दी ईस्वी (पारम्परिक-तिथि) — आदि शङ्कराचार्य-दिग्विजय-यात्रा कोल्लूर-आगमन; कोडचाद्रि-तपस्या; पञ्च-लोह देवी-मूर्ति + श्री-चक्र-पीठ-प्रतिष्ठा स्वयम्भू-लिङ्ग-पीछेMadhaviya Shankara Vijayam पारम्परिक-कथन + Sringeri Math + 3+ बहु-स्रोत
  3. 2002अप्रैल 2002 — अष्टबन्ध ब्रह्म-कलशोत्सव (12-वर्षीय महान-शुद्धि-कलश-उत्सव)Kollur Mookambika Official
  4. 2011कर्नाटक हिन्दू धार्मिक संस्थान एवं चैरिटेबल एण्डाउमेण्ट्स अधिनियम 2011-अधीन कर्नाटक मुज़राई-प्रशासनKarnataka ITMS itms.kar.nic.in
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:00 से 21:00 (कषाय मङ्गलारती-समाप्ति) तक

मन्दिर-उद्घाटन + निर्माल्य-दर्शन05:00
दैनिक
अभिषेकम् (लिङ्ग)05:15
दैनिक
गण-होम (1 नारियल)05:30
दैनिक
प्रात:-पूजा-प्रारम्भ06:30
दैनिक
दन्त-धावन मङ्गलारती07:15
दैनिक
पञ्चामृत अभिषेकम्07:30
दैनिक
नैवेद्य07:45
दैनिक
प्रात:-मङ्गलारती + बलि-उत्सवम्08:00
दैनिक
मध्याह्न-पूजा11:30
दैनिक
महा-मङ्गलारती + मध्याह्न बलि-उत्सव12:30
दैनिक
मन्दिर-दोपहर-विश्राम13:30 बन्द; 15:00 पुनः-दर्शन
दैनिक
प्रदोष-पूजा + पञ्चामृत अभिषेकम्18:30
दैनिक
सायं-नैवेद्य19:00
दैनिक
सायं-मङ्गलारती19:15
दैनिक
कषाय मङ्गलारती (मन्दिर-समापन)21:00
दैनिक
चण्डिका-होम (700-दुर्गा-सप्तशती-श्लोक-700 पायसम्-अग्नि-अर्पण)दैनिक-यज्ञ-शाला
दैनिक; ~7 पुजारी

विशेष नियम: मध्याह्न-विश्राम 13:30-15:00 (कोई सेवा-नहीं 15:00-17:00 — केवल दर्शन); विद्यारम्भम्/अक्षराभ्यासम् 06:45-13:00 केवल; गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; सौपर्णिका-स्नान देवी-दर्शन-पूर्व अनुशंसित; पुरुष-धोती/शर्ट + स्त्री-साड़ी/सलवार-सूट-वेश-नियम

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:00-13:30 + 15:00-21:00

स्वयम्भू-लिङ्ग + श्री-चक्र-पीठ-देवी-मूर्ति-दर्शन।

विद्यारम्भम् / अक्षराभ्यासम् (बच्चे-प्रथम-अक्षर-संस्कार)
समय
06:45-13:00
उपयुक्त
2-5 वर्ष-आयु बच्चे

सरस्वती-मण्डप; चावल-थाली पर 'ॐ हरि श्री गणपतये नमः' तर्जनी-अंगुली-लेखन; स्वर्ण-वलय/मुद्रिका जिह्वा-स्पर्श अक्षरों-सहित। विजय-दशमी-शिखर-दिन।

अभिषेकम् + अर्चना सेवा

व्यक्तिगत/परिवार-नाम-गोत्र-सङ्ग; ऑनलाइन kollurmookambikatemple.org-बुकिंग उपलब्ध।

चण्डिका-होम (व्यक्तिगत-संकल्प)

दैनिक-यज्ञ-शाला में 700-दुर्गा-सप्तशती-श्लोक-700 पायसम्-अग्नि-अर्पण; ~7 पुजारी; व्यक्तिगत-नाम-गोत्र-सङ्ग।

सौपर्णिका-स्नान + देवी-दर्शन-संकल्पनिःशुल्क

सौपर्णिका-नदी (मन्दिर-दक्षिण-सीमा) 64-औषधीय-वनस्पति-सङ्ग-प्रवाहित (पारम्परिक-मान्यता); स्नान-पश्चात् देवी-दर्शन।

कोडचाद्रि-शिखर (सर्वज्ञ-पीठ + मूल-मूकाम्बिका + चित्र-मूल-गुफा) ट्रेकनिःशुल्क

21 किमी ट्रेक मन्दिर-से कोडचाद्रि-शिखर 1,343 मीटर; आदि शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थल; मूल-मूकाम्बिका-शाला + लोह-स्तम्भ (~40 फीट) + सर्वज्ञ-पीठ पाषाण-संरचना + चित्र-मूल-गुफा।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

नवरात्रि (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी)आश्विन (सितंबर-अक्टूबर)

9 रात्रि + 10 दिवस; शत-रुद्राभिषेक; नव-दुर्गा-अलङ्कार 9 दिन; पुष्प-रथ-शोभायात्रा महानवमी-दिन; विद्यारम्भम् विजय-दशमी-शिखर-दिन (2026 विजय-दशमी = 20 अक्टूबर 2026 — पञ्चाङ्ग-गणित)

वार्षिक रथोत्सव (माह-रथोत्सव; 9-10 दिवसीय)फाल्गुन (मार्च-अप्रैल)

8वें-दिन ब्रह्म-रथ आरोहणम् ~11:40 AM; तत्पश्चात् सौपर्णिका-नदी पर तेप्पोत्सव (नाव-उत्सव) + अवभृथ-स्नानम्; 9-10 दिवसीय वार्षिक-शिखर-उत्सव

चण्डिका-होम / यज्ञदैनिक

~7 पुजारी 700-दुर्गा-सप्तशती-श्लोक + 700-पायसम्-अग्नि-अर्पण; मन्दिर-यज्ञ-शाला दैनिक

शिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

विशेष अभिषेक + अर्चना + बीडी-उत्सव; (2026 शिवरात्रि = 15 फरवरी 2026 — पञ्चाङ्ग-गणित)

धनुर्मासधनुर-मास (मध्य-दिसंबर-मध्य-जनवरी)

मास-पर्यन्त विशेष-पूजा-अर्पण

उगादी (कर्नाटक नववर्ष)चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

कर्नाटक नववर्ष (2026 उगादी = 19 मार्च 2026 — पञ्चाङ्ग-गणित)

अष्टबन्ध ब्रह्म-कलशोत्सव12-वर्षीय-चक्र-अनुसार

12-वर्षीय महान-शुद्धि-कलश-उत्सव; अन्तिम-प्रतिष्ठा अप्रैल 2002; आगामी-तिथि आधिकारिक-घोषणा-लम्बित

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

विद्यारम्भम् / अक्षराभ्यासम् (बच्चे-प्रथम-अक्षर-संस्कार)

भारत के प्रमुख विद्यारम्भम्-तीर्थों में सम्मिलित; विशेष-रूप मलयाली-श्रद्धालुओं-हेतु प्रसिद्ध; विजय-दशमी-शिखर-दिन। बच्चे-प्रथम-अक्षर-शिक्षा + बुद्धि-संस्कार-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Kollur Mookambika Official + Indian Hindu Names + Eurokids + Wikipedia बहु-स्रोत

श्री-विद्या / श्री-चक्र-उपासना-संकल्प

आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित श्री-चक्र-पीठ-केन्द्रित श्री-विद्या-उपासना-तीर्थ; दक्षिण-भारत का प्रमुख-श्री-विद्या-केन्द्र

स्रोत: Sringeri Math + Wikipedia + Templepurohit बहु-स्रोत

दैनिक चण्डिका-होम (व्यक्तिगत-शक्ति-संकल्प)

वर्ष-पर्यन्त दैनिक चण्डिका-होम — 700-दुर्गा-सप्तशती-श्लोक + 700-पायसम्-अग्नि-अर्पण; व्यक्तिगत-नाम-गोत्र-सङ्ग संकल्प-योग्य; आदि-पराशक्ति-कृपा-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Kollur Mookambika Official + Mookambika.co बहु-स्रोत

स्वयम्भू-लिङ्ग + श्री-चक्र + देवी-मूर्ति त्रि-प्रतिष्ठा-दर्शन (हरि-हर + त्रिदेवी-त्रिमूर्ति-समन्वय)

विश्व का प्रमुख हरि-हर + त्रिदेवी-त्रिमूर्ति-समन्वय-दर्शन-तीर्थ; सुवर्ण-रेखा-विभक्त स्वयम्भू-लिङ्ग (वाम-त्रिदेवी + दक्ष-त्रिमूर्ति) = अद्वितीय-शास्त्रीय-स्वरूप; पूर्ण-समन्वय-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Wikipedia + Sringeri Math + Mookambika Official बहु-स्रोत

आदि शङ्कराचार्य-तप-स्थल-दर्शन-संकल्प (कोडचाद्रि-शिखर)

गर्भगृह-पश्चिम 'शङ्करा-सिंहासन' + कोडचाद्रि-शिखर 'सर्वज्ञ-पीठ' + चित्र-मूल-गुफा-दर्शन; आदि शङ्कराचार्य के प्रमुख देवी-तीर्थों में सम्मिलित

स्रोत: Madhaviya Shankara Vijayam पारम्परिक-कथन + Sringeri Math बहु-स्रोत

सौपर्णिका-स्नान-संकल्प (64-औषधीय-वनस्पति-प्रवाहित-मान्यता)

गरुड़-तपस्या-नदी; पश्चिम-घाट-वन-मार्ग पर 64-औषधीय-वनस्पतियों-सङ्ग-प्रवाहित पारम्परिक-मान्यता; स्नान-पश्चात् देवी-दर्शन-परम्परा

स्रोत: Wikipedia Souparnika + Kollur Mookambika Official + पारम्परिक-मान्यता

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा-संकल्प

कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर — परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा; मूकाम्बिका सप्त-स्थलों में देवी-स्थान

स्रोत: Templenet + Karnataka Temple Tourism + Hindu-Blog बहु-स्रोत

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्री मूकाम्बिका स्तोत्रम् (आदि शङ्कराचार्य-कृत पारम्परिक-कथन)स्तोत्रआदि शङ्कराचार्य-कोल्लूर-यात्रा-काल-कृत पारम्परिक-कथनइस मन्दिर हेतु
  • श्री-विद्या + श्री-चक्र-नवावरण-पूजाश्री-विद्या उपासनाश्री-विद्या परम्पराइस मन्दिर हेतुआदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित श्री-चक्र-पीठ-केन्द्रित श्री-विद्या-उपासना
  • दुर्गा सप्तशती (श्री देवी माहात्म्यम्)सप्तशती-स्तोत्रमार्कण्डेय पुराणइस मन्दिर हेतुदैनिक चण्डिका-होम में 700-श्लोक-700 पायसम्-अग्नि-अर्पण
  • ललिता सहस्रनामसहस्रनाम-स्तोत्रब्रह्माण्ड पुराणश्री-विद्या-उपासना-परम्परा-अधीन
  • मूकाम्बिका अष्टोत्तर शतनामावलीनामावलीमूकाम्बिका-परम्पराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

शङ्करा-सिंहासन (आदि शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थान)30 मी

आदि शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थान; देवी-दर्शन-पश्चात् पूज्य

सरस्वती-मण्डप (विद्यारम्भम्-स्थल)20 मी

विद्यारम्भम्/अक्षराभ्यासम् 06:45-13:00 दैनिक; विजय-दशमी-शिखर-दिन

उप-शाला (गणपति, सुब्रह्मण्य, वीरभद्र, चन्द्रमौलीश्वर, पञ्च-मुख-गणपति, आञ्जनेय, नागराज)50 मी

उप-देवता; देवी-दर्शन-पूर्व/पश्चात् पूज्य

सौपर्णिका-नदी (मन्दिर-दक्षिण-सीमा)200 मी

गरुड़-तपस्या-नदी; 64-औषधीय-वनस्पति-प्रवाहित पारम्परिक-मान्यता; देवी-दर्शन-पूर्व स्नान-अनुशंसित; तेप्पोत्सव (नाव-उत्सव)-स्थल

कोडचाद्रि-शिखर (सर्वज्ञ-पीठ + मूल-मूकाम्बिका + चित्र-मूल-गुफा)21 किमी

1,343 मीटर शिखर; आदि शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थल; मूल-मूकाम्बिका-शाला + लोह-स्तम्भ ~40 फीट + सर्वज्ञ-पीठ पाषाण-संरचना + चित्र-मूल-गुफा; ट्रेक-शिखर-दर्शन-संकल्प

उडुपी श्री कृष्ण मठ (परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल)80 किमी

परशुराम-क्षेत्र-सप्त-मुक्ति-स्थलों में सम्मिलित; मध्वाचार्य-स्थापित कृष्ण मठ

मुरुदेश्वर श्री शिव मन्दिर60 किमी

विश्व-प्रसिद्ध 123 फीट शिव-मूर्ति + समुद्र-तट-मन्दिर

कुक्के सुब्रह्मण्य (परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल)170 किमी

परशुराम-क्षेत्र-सप्त-मुक्ति-स्थलों में सम्मिलित; नाग/षण्मुख-तीर्थ

कोटेश्वर + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर (परशुराम-क्षेत्र-शेष-स्थल)80 किमी

परशुराम-क्षेत्र-सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा-शेष-स्थल

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल तीर्थयात्रा

सप्त-स्थलों में देवी-स्थान — कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर

7 मंदिर

आदि शङ्कराचार्य-तीर्थयात्रा (शृङ्गेरी शारदा + कोल्लूर मूकाम्बिका + काञ्ची काम-कोटि-पीठ)

आदि शङ्कराचार्य के प्रमुख देवी-प्रतिष्ठा-तीर्थों में सम्मिलित

3 मंदिर

श्री-विद्या / श्री-चक्र-उपासना-तीर्थ क्लस्टर (कोल्लूर मूकाम्बिका + काञ्ची कामाक्षी + मदुरै मीनाक्षी)

दक्षिण-भारत के प्रमुख-श्री-विद्या-केन्द्रों में सम्मिलित — श्री-चक्र-पीठ-केन्द्रित-उपासना

3 मंदिर

कोडचाद्रि-ट्रेक-तीर्थयात्रा (मन्दिर + मूल-मूकाम्बिका + सर्वज्ञ-पीठ + चित्र-मूल-गुफा)

मूल-स्थान-कोडचाद्रि-शिखर-तीर्थयात्रा-तीर्थ; आदि शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थल

4 मंदिर

108 दुर्गालय / 108 शिवालय केरल-तीर्थ-परम्परा

कोल्लूर मूकाम्बिका केरल-परम्परा के 108-दुर्गालयों में सम्मिलित (केरल-मलयाली-श्रद्धालुओं-हेतु प्रमुख-तीर्थ)

108 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री मूकाम्बिका देवी मन्दिर, कोल्लूर, ब्यन्दूर तालुक, ज़िला उडुपी, कर्नाटक — PIN 576220
हवाई अड्डा
मङ्गलूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IXE, बजपे)
रेलवे
ब्यन्दूर मूकाम्बिका रोड स्टेशन (BYNR) — मूकाम्बिका-नामकरण रेलवे; कुन्दापुर ~40 किमी, उडुपी ~80 किमी वैकल्पिक
बस-स्टैण्ड
कोल्लूर बस-स्टैण्ड (मन्दिर-समीप); कर्नाटक RTC नियमित-बस-सेवा
उत्तम ऋतु
नवरात्रि (आश्विन, सितंबर-अक्टूबर); विजय-दशमी विद्यारम्भम्-शिखर-दिन (20 अक्टूबर 2026 पञ्चाङ्ग-गणित); वार्षिक रथोत्सव (फाल्गुन मार्च-अप्रैल); शिवरात्रि (15 फरवरी 2026 पञ्चाङ्ग-गणित); धनुर्मास (मध्य-दिसंबर-मध्य-जनवरी); उगादी (19 मार्च 2026 पञ्चाङ्ग-गणित); शीत-मासों (नवंबर-फरवरी) में पश्चिम-घाट-यात्रा-आरामदायक; पावस ऋतु (जून-सितंबर) में भारी-वर्षा
प्रबन्धन
कर्नाटक मुज़राई (हिन्दू धार्मिक एवं चैरिटेबल एण्डाउमेण्ट्स विभाग, कर्नाटक राज्य-सरकार, HR&CE अधिनियम 2011-अधीन); मन्दिर-कोड TM000062; प्रबन्ध-समिति + अध्यक्ष + राज्य-नियुक्त कार्यकारी-अधिकारी (EO; eosmtkollur@gmail.com); आध्यात्मिक-मार्गदर्शन शृङ्गेरी शारदा पीठम् से (परम्परा; औपचारिक-प्रशासनिक-शाखा नहीं)
28 किमीByndoor Mookambika Road Railwa…
40 किमीKundapura Railway
60 किमीMurudeshwar
80 किमीUdupi
135 किमीMangalore
428 किमीBangalore
280 किमीHubli
श्री मूकाम्बिका देवी मन्दिर — दर्शन, आरती, इतिहास एवं यात्रा | Pauranik | Pauranik