श्री मूकाम्बिका देवी — चतुर्भुजा पद्मासन-स्थित; ऊर्ध्व-हस्तों में शङ्ख + चक्र; अधो-हस्तों में अभय + वरद (अभीष्ट) मुद्रा; आदि-पराशक्ति का त्रिदेवी-स्वरूप (काली + लक्ष्मी + सरस्वती); पञ्च-लोह-निर्मित देवी-मूर्ति श्री-चक्र-पीठ पर स्वयम्भू-लिङ्ग के पीछे आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित; मुख्य-गर्भगृह-मूर्ति = स्वयम्भू-लिङ्ग सुवर्ण-रेखा-विभक्त
स्वयम्भू-लिङ्ग सुवर्ण-रेखा-विभक्त त्रि-प्रतिष्ठा: (1) स्वयम्भू-लिङ्ग (शिव-शक्ति-समन्वय; वाम-भाग त्रिदेवी काली-लक्ष्मी-सरस्वती + दक्ष-भाग त्रिमूर्ति शिव-विष्णु-ब्रह्मा); (2) श्री-चक्र-पीठ आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित; (3) पञ्च-लोह देवी-मूर्ति श्री-चक्र पर; उप-देवता: शङ्करा-सिंहासन (शङ्कराचार्य-तपस्या-स्थान, गर्भगृह-पश्चिम); सरस्वती-मण्डप (विद्यारम्भम्-स्थल); प्राङ्गण-गणपति, सुब्रह्मण्य, वीरभद्र, चन्द्रमौलीश्वर, पञ्च-मुख-गणपति, आञ्जनेय, नागराज
सम्प्रदाय: शैव-शाक्त-समन्वय (हरिहर + त्रिदेवी एकीकरण); श्री-विद्या / श्री-चक्र उपासना-परम्परा (आदि शङ्कराचार्य-प्रतिष्ठित); परशुराम-क्षेत्र; आध्यात्मिक-मार्गदर्शन शृङ्गेरी शारदा पीठम् से (उत्तराधिकारी-पुजारी जगद्गुरु-आशीर्वाद-हेतु शृङ्गेरी-यात्रा करते हैं); प्रशासनिक-संचालन कर्नाटक मुज़राई (राज्य-सरकार-धार्मिक एवं चैरिटेबल एण्डाउमेण्ट्स विभाग, कर्नाटक HR&CE अधिनियम 2011-अधीन)